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Tuesday, April 20, 2010

ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों के लिए बाण्ड नियम हुए सख्त

पी.जी. में एडमीशन के पूर्व तीन वर्ष का बाण्ड भराया जायेगा
ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उनसे चिकित्सा शिक्षा के दौरान भरवाए गए बाण्ड का सख्ती से पालन कराया जाए। लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण चिकित्सा शिक्षा, आयुष मंत्री श्री अनूप मिश्रा ने यह निर्देश सचिव लोक स्वास्थ्य श्री एस.आर. मोहंती, आयुक्त स्वास्थ्य श्री मनोहर अगनानी, उप सचिव चिकित्सा शिक्षा श्री सुहेल अली, संचालक चिकित्सा शिक्षा श्री व्ही.के सैनी एवं संचालक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ ए.के. मित्तल के साथ हुई बैठक में दी।

लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री श्री अनूप मिश्रा ने बैठक में कहा कि चिकित्सकों की उपलब्धता विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि इससे चिकित्सा शिक्षा के लिए बॉड भरने वाले छात्रों को नियमानुसार एक साल ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी सेवा देनी होगी। उन्होंने बैठक में इसके लिए निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन करने की हिदायत दी। बैठक में यह तय किया गया कि जिन एम.बी.बी.एस. डॉक्टरों की पदस्थापना की गई थी, उनमें से जिन चिकित्सकों ने ज्वाईन नही किया किन्तु उन चिकित्सकों का पी.जी. में सिलेक्शन हो गया है, उनसे पी.जी. में एडमीशन के पूर्व तीन वर्ष का बाण्ड भराया जायेगा। एक वर्ष एम.बी.बी.एस का एवं दो वर्ष पी.जी. का इस प्रकार कुल तीन वर्ष का बाण्ड भराया जायेगा। इसी तरह भविष्य के लिये पी.जी. काउन्सिलिंग के पूर्व संचालक चिकित्सा शिक्षा को ऐसे बाण्डेड चिकित्सकों की सूची संचालनालय स्वास्थ्य सेवायें द्वारा उपलब्ध कराई जायेगी जिन्होंने बाण्ड अवधि में नियुक्ति के बाद कर्तव्य पर उपस्थित नही हुये हैं एवं बाण्ड अवधि को पूर्ण नही किया है। साथ ही संचालक चिकित्सा शिक्षा के द्वारा भी काउन्सिलिंग के पूर्व संचालनालय स्वास्थ्य सेवायें से ऐसी सूची की मांग की जायेगी।

बैठक में यह तय किया गया कि अगले वर्ष से प्री पी.जी. के आवेदन में भी यह प्रावधान किया जायेगा कि बाण्डेड चिकित्सक स्वास्थ्य संचालनालय से इस आशय का प्रमाण पत्र लेकर आवेदन में लगाये कि उन्होंने बाण्ड अवधि के लिए आवश्यक सेवा पूर्ण करने के लिए नियुक्ति स्थल पर उपस्थित हो कर निरंतर सेवा में है। जिन एम.बी.बी.एस. डाक्टर्स ने बाण्ड पूरा नहीं किया है और पी.जी. में भी उनका सिलेक्शन नही हुआ है उनको इस आशय का नोटिस दिया जायेगा कि क्यों न उनका रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया जाये। इसके लिये ऐसी चिकित्सकों की सूची संचालनालय स्वास्थ्य सेवायें द्वारा रजिस्ट्रार मेडिकल कौंसिल को उपलब्ध कराई जायेगी जिसके आधार पर कौंसिल संबंधित चिकित्सकों को नोटिस जारी करेगी। 
भविष्य में लोक सेवा आयोग को जो नियुक्ति हेतु मांग पत्र भेजा जायेगा उसमें भी यह शर्त रखी जायेगी कि जो बाण्डेड चिकित्सक बाण्ड का कार्यकाल पूर्ण कर चुके हैं, वे ही चिकित्सक आवेदन देने के लिये पात्र होंगे। जिन बाण्डेड चिकित्सकों ने बाण्ड का कार्यकाल पूर्ण नहीं किया है उन्हें आर.सी.एच.एन.आर.एच.एम. के अंतर्गत भी पदस्थापना नहीं दी जायेगी।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जिन बाण्डेड पी.जी. डाक्टर्स ने बाण्ड पूरा नहीं किया है, उनकी सूची बनाकर संचालनालय स्वास्थ्य सेवायें द्वारा रजिस्ट्रार मेडिकल कौंसिल को दी जायेगी जिसके आधार पर वह उनके रजिस्ट्रेशन केन्सिल करने की कार्यवाही करेंगे। 
जो चिकित्सक अखिल भारतीय प्री पी.जी. में सिलेक्ट हो जाते हैं उनसे यह अण्डरटेंकिग ली जाकर कि वह पी.जी. पूर्ण करने के पश्चात बाण्ड की अवधि की शासकीय सेवा कर देंगे इस शर्त पर उन्हें पी.जी. करने की अनुमति दी जायेगी। पी.जी. पूर्ण करने वाले बाण्डेड चिकित्सकों की जानकारी परीक्षा के पूर्व समस्त अधिष्ठाता चिकित्सा महाविद्यालय स्वास्थ्य आयुक्त को भेजेंगे। इस जानकारी के साथ ही परीक्षा की संभावित तिथि की जानकारी भी दी जायेगी ताकि स्वास्थ्य आयुक्त इनकी पदस्थापना पर पूर्व से ही विचार कर सकें। प्रत्येक पी.जी. परीक्षा के बाद सूची भेजने की जिम्मेदारी संबंधित डीन मेडिकल कालेज की होगी। यदि कोई चिकित्सक सूची नहीं भेजने के कारण बाण्ड से विमुक्त हो हाता है ऐसे में जिम्मेदारी संबंधित डीन मेडिकल कालेज की होगी।

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Monday, March 8, 2010

मुख्यमंत्री द्वारा सन् 2013 तक 24 घंटे बिजली आपूर्ती क्षमता विकास के निर्देश

मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा प्रदेश में बिजली की स्थिति की समीक्षा
मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने सन् 2013 तक आबादी क्षेत्रों में 24 घंटे और खेती के लिये न्यूनतम 8 घंटे बिजली उपलब्ध करवाने की क्षमता के विकास के निर्देश दिये हैं। श्री चौहान आज मंत्रालय में प्रदेश में बिजली की स्थिति की समीक्षा कर रहे थे। श्री चौहान ने परीक्षाओं के दौरान शहरों और गांवों में पर्याप्त बिजली आपूर्ति पर भी जोर दिया।

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Wednesday, February 24, 2010

विमुक्त, घुमक्कड़ एवं अर्धघुमक्कड़ जाति वर्ग के हजारों को छात्रावास सुविधा

  अभिकरण की शासी निकाय की बैठक में लिये गये निर्णय
प्रदेश में वर्ष 2011 में होने वाली जनगणना में राज्य में रहने वाले विमुक्त, घुमक्कड़ एवं अर्धघुमक्कड़ जाति वर्ग के व्यक्तियों की पूर्ण जानकारी के साथ जनगणना हो सके इस उद्देश्य से जनगणना कार्यालय को निर्धारित प्रपत्र में जानकारी एकत्र किये जाने के लिये अभिकरण की ओर से अनुरोध पत्र भेजे जाने का निर्णय लिया गया। यह निर्णय अनुसूचित जाति विभाग के अंतर्गत संचालित विमुक्त, घुमक्कड़ एवं अर्धघुमक्कड़ जाति विकास अभिकरण की सोमवार को शासी निकाय की बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता अभिकरण के अध्यक्ष श्री नारायण सिंह बंजारा ने की।
प्रदेश में विमुक्त, घुमक्कड़ एवं अर्धघुमक्कड़ के अन्तर्गत 51 जाति को शामिल किया गया है

इन वर्गों के 6 हजार 500 विद्यार्थियों को छात्रावास सुविधा

स्वरोजगार योजना के अन्तर्गत 2.25 करोड़ रूपये के आवंटन दिये जाने को मंजूरी



बैठक के प्रारंभ में 25 जुलाई 2009 की कार्यवाही विवरण का अनुमोदन किया गया। अभिकरण के अध्यक्ष श्री बंजारा ने कहा कि राज्य में विमुक्त, घुमक्कड़ एवं अर्धघुमक्कड़ जातियों के लोगों में शैक्षणिक एवं सामाजिक स्थिति में सुधार के उद्देश्य से योजनाएं संचालित की जा रही हैं। बैठक में स्वरोजगार एवं प्रशिक्षण योजना अंतर्गत 17 जिलों को लगभग सवा दो करोड़ रूपये के आवंटन दिये जाने को मंजूरी दी गयी। बैठक में यह भी तय किया गया कि प्रदेश के जिलों में स्थित जिला संयोजक कार्यालय में इन वर्गों के लिये संचालित योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिये डिस्प्ले बोर्ड लगाने एवं जनजागृति का अभियान चलाया जाये।

बैठक में बताया गया कि विमुक्त, घुमक्कड़ एवं अर्धघुमक्कड़ के अंतर्गत 51 जातियों को रखा गया है। इनमें शैक्षणिक सुधार के लिये प्रदेश के विभिन्न जिलों में 122 बालक एवं कन्या छात्रावास खोले गये हैं। इन छात्रावासों में लगभग 6 हजार 500 छात्र-छात्राएं अध्ययन कर रहे हैं। प्रदेश में पिछले दो वर्षों में इन वर्गों के विद्यार्थियों की सुविधा के लिये 71 नवीन छात्रावास भवनों का भी निर्माण किया गया है।

बैठक में अभिकरण की गतिविधियों के सुचारू संचालन के लिये राज्य शासन को पांच अन्य अशासकीय सदस्यों को नामांकित किये जाने का भी अनुरोध किया गया। बैठक में अनुसूचित जाति कल्याण आयुक्त श्रीमती सलीना सिंह, आदिम जाति कल्याण विभाग के सचिव श्री व्ही.के बाथम एवं संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद थे।

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Thursday, February 18, 2010

राजस्व मंडल के अध्यक्ष एवं सदस्यों के लिए निरीक्षण के नये निर्देश

 निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू
राज्य शासन ने राजस्व मंडल के अध्यक्ष एवं सदस्यों द्वारा किए जाने वाले निरीक्षण के लिए नये निर्देश जारी किए है। नवीन निर्देशों के अनुसार राजस्व मंडल के अध्यक्ष एवं सदस्य अब केवल कमिश्नर, कलेक्टर, अनुविभागीय अधिकारी के साथ ही तहसील न्यायालयों का ही निरीक्षण करेंगे। उक्त अधिकारियों द्वारा ये निरीक्षण राजस्व विभाग द्वारा निर्धारित रोस्टर के अनुरूप किया जायेगा। राज्य शासन द्वारा इस संबंध में निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि राज्य शासन द्वारा पूर्व में अध्यक्ष तथा सदस्य राजस्व मंडल को शासन के सभी विभागों के जिला, तहसील तथा ब्लॉक कार्यालयों का निरीक्षण करने के अधिकार दिए गए थे। शासन द्वारा पूर्व परिपत्र को निरस्त करते हुए अध्यक्ष तथा सदस्य, राजस्व मंडल को पूर्व में दिए गए अधिकारों को समाप्त कर दिया गया है।

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा सभी विभागों, अध्यक्ष राजस्व मंडल, सभी कमिश्नरों, विभागाध्यक्षों एवं कलेक्टरों को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

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Wednesday, February 10, 2010

प्रदेश में शीघ्र ही जैविक खेती नीति लागू की जायेगी

 इंदौर में तीन दिवसीय जैविक किसान मेला प्रारंभ
कृषि विकास मंत्री डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने कहा है कि मध्यप्रदेश में शीघ्र ही जैविक कृषि नीति की घोषणा की जायेगी। प्रदेश में जैविक खेती से प्राकृतिक संतुलन बनाये रखने के साथ ही ग्लोबल वार्मिंग के खतरों से भी निपटने में मदद मिलेगी।
कृषि विकास मंत्री डॉ. कुसमरिया रविवार को इंदौर में तीन दिवसीय जैविक कृषि सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। कृषि महाविद्यालय परिसर में आयोजित समारोह में देशभर के करीब पांच हजार से अधिक जैविक खेती विशेषज्ञ तथा किसान भाग ले रहे हैं।

कृषि विकास मंत्री डॉ. कुसमरिया ने जैव-विविधता को नष्ट करने वाली शक्तियों से एकजुट होकर निपटने की बात कही। कार्यक्रम को आर्गेनिक फार्मिंग एसोसिएशन आफ इण्डिया के संस्थापक निदेशक डॉ. क्लाउड अल्वरेंस, मध्यप्रदेश विज्ञान प्रौद्योगिकी के निर्देशक डॉ. पी.के. वर्मा, कृषि विशेषज्ञ डॉ. कुट्टी मेनन एवं डॉ. भारतेन्दु प्रकाशन ने भी संबोधित किया। सम्मेलन का आयोजन उत्तर भारत सजीव कृषि समाज, कृषि विभाग एवं के.जे. एजुकेशन सोसायटी भोपाल द्वारा किया जा रहा है।

आयोजन का खास आकर्षण जैविक हाट है। जैविक हाट में पूर्णत: जैविक खेती के जरिये उत्पादित फल, सब्जिया, मसाले रखे गये हैं। बुरहानपुर का केला, खण्डवा का प्याज, छतरपुर का सरसों तेल, बांदा का दलिया, राजस्थान का जीरा, अमरूद, लहसुन एवं धनिया आदि जैविक हाट में उपलब्ध हैं।

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Monday, February 8, 2010

देयकों से दो प्रतिशत सेवा शुल्क काटने के निर्देश

स्वास्थ्य विभाग ने सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा सिविल सर्जन को भेजे गये निर्देश में लघु उद्योग निगम से अनुबंधित दवा एवं अन्य उपकरण प्रदायकर्ता इकाईयों से क्रय की जाने वाली सामग्री के देयकों में दो प्रतिशत सेवा शुल्क काटने के निर्देश जारी किये हैं।नई दवा नीति लागू होने तक स्वास्थ्य विभाग ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा सिविल सर्जनों को लघु उद्योग निगम से अनुबंधित प्रदायकर्ता इकाईयों से सीधी खरीदी करने के अधिकार दिये हैं। सीधे क्रय होने के कारण इन इकाईयों से सेवा शुल्क की दो प्रतिशत की राशि की कटौती नहीं हो पा रही थी। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग ने सभी क्रयकर्ता अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे क्रय करने वाली सामग्री के प्रस्तुत देयकों से दो प्रतिशत की राशि काटकर ही देयकों का भुगतान करें और इस कार्यवाही से मुख्यालय स्थित औषधि प्रकोष्ठ को अवगत करायें।

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Saturday, January 23, 2010

समर्थन मूल्य पर गेहूँ की खरीदी 15 मार्च से शुरू होगी

मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा तैयारियों की समीक्षा
मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने समर्थन मूल्य पर आगामी 15 मार्च से गेहूं की खरीदी के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिये हैं।मुख्यमंत्री श्री चौहान आज यहां मंत्रालय में खरीदी की तैयारियों की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया, खाद्य, नागरिक आपूर्ति राज्य मंत्री श्री पारस जैन, प्रमुख सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति श्री अशोक दास, मुख्यमंत्री के सचिव श्री एस.के. मिश्र, प्रमुख सचिव श्री इंद्रनील दाणी, भण्डार गृह निगम के प्रबंध संचालक श्री अनिल श्रीवास्तव, पंजीयक सहकारी संस्थाएं श्री अरुण भट्ट एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

इस वर्ष भारत सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य 1100 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया है। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा इस पर 100 रुपये प्रति क्विंटल बोनस अतिरिक्त दिया जाएगा।

बैठक में बताया गया कि राज्य में इस वर्ष संभावित गेहूं के अधिक उत्पादन के आंकलन के अनुसार समर्थन मूल्य पर 35 लाख टन गेहूं की खरीदी के लिए व्यवस्थाएं की जा रही हैं। इस समय पश्चिम बंगाल में जूट मिलों में हड़ताल के कारण प्लास्टिक बेग की भी व्यवस्था की जा रही है। किसानों को समय पर भुगतान के लिए आवश्यक धनराशि की व्यवस्था कर ली गई है। किसानों से ही खरीदी हो यह सुनिश्चित करने के लिए पटवारी से बी-1 प्रमाण, खसरा अथवा ऋण पुस्तिका किसी एक को किसान होने का प्रमाण माना जाएगा। आवश्यक होने पर जिला प्रशासन तथा पुलिस का भी सहयोग लिया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पिछले वर्ष के अनुभव के आधार पर किसानों को तत्काल भुगतान तथा परिवहन आदि के लिए व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी कुछ मण्डियों में खरीदी का निरीक्षण करेंगे।

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Friday, January 22, 2010

प्रदेश के प्रत्येक ब्लॉक से शुरूआत की जायेगी जैविक खेती की

प्रदेश में शीघ्र ही जैविक नीति की घोषणा
किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री डा. रामकृष्ण कुसमरिया ने कहा है कि प्रदेश में शीघ्र ही जैविक नीति की घोषणा की जाने वाली है। इसके बाद प्रदेश के प्रत्येक जिले के प्रत्येक विकासखण्ड से जैविक खेती की शुरूआत की जायेगी। 
प्रारंभिक तौर पर किसानों की कुल कृषि भूमि के एक चौथाई भाग पर जैविक खेती कराई जायेगी। बाद में धीरे-धीरे इसका विस्तार किया जायेगा। कृषि विकास मंत्री डा. कुसमरिया पिछले दिनों भोपाल में साप्ताहिक कृषक दूत द्वारा प्रकाशित कृषक दूत डायरी 2010 का विमोचन करने के बाद आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

कृषि मंत्री डा. कुसमरिया ने प्रकाशित डायरी की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि डायरी में दशाई गई किसान कल्याण की योजना का विवरण किसानों के हित के लिये काफी महत्वपूर्ण रहेगा। उन्होंने प्रकाशकों से कहा कि डायरी का अधिक से अधिक प्रसार किसानों के बीच किया जाये। 
इस डायरी में किसान कल्याण की योजनाओं के विवरण के साथ-साथ उद्यानिकी से संबंधित ज्ञानवर्धक जानकारियों को भी शामिल किया गया है। इस मौके पर कृषक दूत के प्रधान संपादक सर्वश्री अमरेन्द्र मिश्रा एवं सलाहकार संपादक उमाशंकर तिवारी ने किसान डायरी के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

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Monday, January 18, 2010

आर्थिक अपराधियों के विरूद्ध कार्रवाई जारी रहेगी

ब्यूरो को सशक्त बनाने के लिये 104 अतिरिक्त पद स्वीकृत
मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने प्रदेश की समृद्धि और विकास में भ्रष्टाचार को अवरोध बताते हुए भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि आर्थिक अपराधी चाहे वे कितने भी प्रभावी क्यों न हो, के विरूद्ध कार्रवाई जारी रहेगी। श्री चौहान आज यहां अरेरा हिल्स पर मध्यप्रदेश आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो के संचालनालय भवन के शिलान्यास समारोह को सम्बोधित कर रहे थे।मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सरकारी पैसे के दुरूपयोग की लगातार पनपती जा रही प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिये ब्यूरो को और अधिक सक्रिय होने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार का रोग गहरा है तो उसका निदान भी उतनी ही सक्रियता और विशेषज्ञता से करना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक अपराधों संबंधी शिकायतों के पर्याप्त पर्यवेक्षण के बाद अपराधियों के विरूद्ध कार्रवाई की जाये। यह ध्यान रखा जाये कि ईमानदार लोगों के विरूद्ध झूठी शिकायतें प्राप्त होने पर वे प्रताड़ित न हो। उन्होंने कहा कि ब्यूरो प्राप्त शिकायतों पर कार्रवाई करने तक सीमित न रहे। ब्यूरो को अपने आसूचना तंत्र को सुदृढ़ कर बिना शिकायत प्राप्त हुए भी आर्थिक अपराधों की रोकथाम करना चाहिये।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आर्थिक अपराधियों के साथ ही प्रदेश में सभी तरह के माफियाओं का खात्मा करने के लिये राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। श्री चौहान ने पुलिस प्रशासन से बाहुबलियों के खिलाफ भी अभियान चलाने को कहा। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में यह कार्य किया जाये।

मुख्यमंत्री ने ब्यूरो को अधिक सक्षम और कार्यकुशल बनाने के उद्देश्य से 104 अतिरिक्त पदों के निर्माण की स्वीकृति की भी जानकारी दी। श्री चौहान ने बताया कि ब्यूरो की प्रणाली को वर्तमान परिवेश में और अधिक प्रभावी बनाने के लिये पृथक-पृथक इकानामी इंटेलीजेन्स, टेक्निकल, इन्वेस्टीगेशन और एन्टी करप्शन यूनिट के निर्माण के लिये ये पद स्वीकृत किये गये हैं। उन्होंने कहा कि ब्यूरो में पदस्थ अमले को विशेष भत्ता देने का भी प्रावधान किया जा रहा है। श्री चौहान ने कहा कि वन स्टेप प्रमोशन की व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है। श्री चौहान ने ब्यूरो के महानिरीक्षक द्वय श्री अजय शर्मा और श्री एस.डब्ल्यू. नकवी के कार्य की सराहना भी की।

गृह मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता ने भ्रष्टाचारमुक्त प्रशासन को समय की जरूरत बताया है। उन्होंने कहा कि अपराधियों के विरूद्ध कार्रवाई की मुख्यमंत्री श्री चौहान की दृढ़ इच्छाशक्ति के अच्छे परिणाम आ रहे हैं और आयेंगे। सामान्य प्रशासन राज्य मंत्री श्री के.एल. अग्रवाल ने कहा कि भ्रष्टाचार उन्मूलन के लिये श्री चौहान की प्रतिबद्धता से जांच एजेंसियों को बल मिला है। उन्होंने बताया कि ब्यूरो के संचालनालय भवन के निर्माण के लिये राज्य शासन ने 5 करोड़ 50 लाख रूपये और 4 करोड़ 50 लाख रूपये भवन के आधुनिकतम और तकनीकी अन्वेषण सुविधाओं से लैस करने के लिये स्वीकृत किये हैं। सांसद श्री कैलाश जोशी ने आशा व्यक्त की कि नये भवन और उसमें प्रदत्त सुविधाओं के बाद ब्यूरो अधिक सक्षमता से कार्य करेगा। उन्होंने पिछले तीन वर्षों में ब्यूरो द्वारा आर्थिक अपराधियों के विरूद्ध की गई कार्रवाई की सराहना की।

ब्यूरो के महानिदेशक श्री एस.एस. लाल ने ब्यूरो की गतिविधियों की जानकारी दी। प्रारंभ में मुख्यमंत्री श्री चौहान और अन्य अतिथियों ने विधि-विधान से भवन की शिलान्यास पट्टिका का अनावरण और भूमि पूजन किया। समारोह में विधायक श्री ध्रुवनारायण सिंह, मुख्य सचिव श्री राकेश साहनी, पुलिस महानिदेशक श्री एस.के. राउत, प्रमुख सचिव सामान्य प्रशासन श्री सुदेश कुमार भी मंचासीन थे। अंत में आभार प्रदर्शन ब्यूरो के महानिरीक्षक श्री अजय शर्मा ने किया।

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Friday, January 15, 2010

होमगार्ड तैनाती पर गाइड लाइन तय करने समिति गठित होगी

पुलिसिंग के लिए भूतपूर्व सैनिकों की बटालियन बनाने पर विचार
गृह मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता ने आज मंत्रालय में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ होमगार्ड संगठन तथा सैनिक कल्याण बोर्ड की गतिविधियों की समीक्षा की। बैठक में गृह राज्य मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह और गृह सचिव श्री विश्वमोहन उपाध्याय भी उपस्थित थे।होमगार्ड की समीक्षा के दौरान गृह मंत्री ने निर्देश दिए कि होमगार्ड की विभिन्न जगहों पर तैनाती के लिए राज्य स्तर पर गाइड लाइन बनाने के संबंध में राज्य स्तरीय समिति का गठन किया जाय। इसके अध्यक्ष गृह मंत्री रहेंगे।
उन्होंने महानिदेशक होमगार्ड श्री एच.के.सरीन को निर्देश दिए कि वे जिलों में अपने जिला सैनानियों द्वारा इस बात की समीक्षा कराएं कि होमगार्डस की तैनाती कहां और किस तरह की है। इससे होमगार्डस को इधर-उधर लगाने की प्रवृत्ति पर अकुंश लगेगा। जिला सैनानी इस संबंध में निरीक्षण भी करें। जहां भी उनकी तैनाती हो वह अधिकृत रूप से स्पष्ट हो।

गृह मंत्री ने होमगार्डस के रिक्त पदों तथा उन्हें भरने के लिए की जा रही कार्रवाई की समीक्षा की और निर्देश दिए कि इसमें गति लाई जाय। सैनिक कल्याण बोर्ड की गतिविधियों की समीक्षा करते हुए गृह मंत्री ने सैनिक कल्याण बोर्ड के निदेशक ब्रिगेडियर प्रमोद कुमार से कहा कि वे 45 साल से कम उम्र के भूतपूर्व सैनिकों की संविदा के आधार पर बटालियन बनाने का प्रस्ताव बनाएं। यह बटालियन पुलिसिंग का कार्य करेगी। ब्रिगेडियर प्रमोद कुमार ने बताया कि प्रदेश में लगभग 40 हजार भूतपूर्व सैनिक हैं।

गृह मंत्री ने कहा कि जिला सैनिक अधिकारी के पद के लिए विज्ञापन देकर प्रदेश से ही भूतपूर्व सैनिकों को चयनित करने की प्रक्रिया अपनाई जाय क्योंकि अभी केन्द्र से चयनित भूतपूर्व सैनिकों की सूची आती है और उन्हीं में से इस पद पर नियुक्ति करनी होती है। अक्सर चयनित होने के बाद भी भूतपूर्व सैनिक इस पर काम करने में रूचि नहीं लेते। वर्तमान में 8 जिलों में यह पद रिक्त हैं। 
गृह मंत्री ने हर जिले में भूतपूर्व सैनिकों की रैली आयोजित करने तथा कलेक्टर आफिस में सैनिक कल्याण संबंधी बैठकें नियमित रूप से आयोजित कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भूतपूर्व सैनिकों को रोजगार दिलाने के संबंध में वर्तमान में गठित समिति में राज्य के अधिकारियों को शामिल किया जाय। उन्होंने कहा कि इस संबंध में सैनिक बोर्ड द्वारा स्थापित निगम के गठन पर विचार किया जायगा। 
 
बैठक में जिन लोगों के बच्चे फौज में जाते हैं उन्हें दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। श्री गुप्ता ने कहा कि झंडा दिवस पर धनराशि संग्रह के कार्य में स्वयं सेवी संगठनों तथा प्रतिष्ठित लोगों को भी जोड़ा जाय साथ कि बिल्डर्स और उद्योग घरानों को भी डोनेट करने के लिए प्रेरित किया जाय। इस फंड में दी जाने वाली राशि कर मुक्त होती है।

बैठक में बताया कि प्रदेश में वर्ष 2009-10 में तीन कारगिल शहीदों के आश्रितों तथा चार विकलांग सैनिकों को 48 लाख रुपये का अनुदान कारगिल सहायता कोष से दिया गया। साथ ही भूतपूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए विभिन्न गतिविधियां चलाई जा रही है जिनमें उनके बच्चों को छात्रवृत्ति, आर्थिक सहायता, गन लायसेंस जारी करने और लायसेंस छूट आदि शामिल है।

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Friday, January 8, 2010

जल संसाधन विभाग के अभियंता निर्माण कार्यों का अनिवार्य रूप से निरीक्षण करें

 जल संसाधन मंत्री श्री जयंत मलैया के निर्देश
जल संसाधन मंत्री श्री जयंत मलैया ने गुरुवार को एक बैठक में जल संसाधन विभाग की योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। श्री मलैया ने निर्देश दिए कि विभाग के मुख्य अभियंता से लेकर सहायक यंत्री स्तर तक के सभी अभियंता अपने क्षेत्र में चल रही सिंचाई परियोजनाओं के निमार्ण कार्यों को अनिवार्य रूप से देखने जाएं। उन्होंने कहा कि सभी अभियंता साइट पर जाकर इन्सपेक्शन नोट लिखें।

श्री मलैया ने कहा कि वे स्वयं इस बात की जानकारी लेंगे कि अभियंता अपनी साइट पर अनिवार्य रूप से भ्रमण करते हैं अथवा नहीं। श्री मलैया ने कहा कि निर्माणाधीन सिंचाई योजनाओं को निर्धारित समय अवधि में पूर्ण किया जाए। कार्यों की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाए। उन्होंने मुख्य अभियन्ताओं से कहा कि उनके अधीनस्थ जो अधिकारी कार्यों में रुचि नहीं ले रहे हैं, उनकी जानकारी शासन को दें और अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर कड़ी कार्रवाई भी करें।
उन्होंने कहा कि जो अधिकारी अच्छा कार्य करेंगे उन्हें पूर्ण सहयोग प्रदान किया जाएगा और जो अधिकारी अच्छा कार्य नहीं करेंगे उनके विरूद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। श्री मलैया ने कहा कि शासन ने विभागीय योजनाओं के वार्षिक लक्ष्य तय कर दिए हैं, धनराशि की कोई कमी नहीं है। अतः उन्हें अपेक्षित परिणाम देना चाहिए।
श्री मलैया ने राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना के अंर्तगत फील्ड चैनल बनाने के तथा ट्रिपल आर योजना के अंर्तगत कार्य करने के प्रस्ताव 15 जनवरी तक शासन को भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रत्येक योजना की समीक्षा की। श्री मलैया ने विश्व बैंक की सहायता से संचालित परियोजना वॉटर सेक्टर रिस्ट्रक्चरिंग प्रोजेक्ट की प्रगति की भी समीक्षा की और परियोजना की गति बढ़ाने के निर्देश दिए।
श्री मलैया ने कहा के प्रदेश शासन ने सिंचाई के क्षेत्र के विस्तार को सर्वाधिक महत्व दिया है ताकि हमारे प्रदेश का किसान खुशहाल हो सके। बैठक में प्रमुख सचिव जल संसाधन श्री अरविंद जोशी, प्रमुख अभियंता श्री प्रजापति, परियोजना संचालक श्री पी.के. तिवारी, सभी कछारों के मुख्य अभियंता एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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Thursday, January 7, 2010

पुलिस कर्मियों को भाड़ा क्रय आधार पर आवास उपलब्ध कराने की योजना

  गृहमंत्री श्री गुप्ता द्वारा पुलिस आवास निगम की समीक्षा
गृहमंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता ने पुलिस आवास निगम के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि पुलिस कर्मियों को भाड़ा क्रय आधार पर आवास उपलब्ध कराने के लिये एक योजना शीघ्र बनाई जाये। राज्य सरकार भी इस कार्य के लिये हर संभव मदद करेगी। 
उन्होंने पुलिस कर्मियों के आवासों के संधारण तथा उनमें व्याप्त समस्याओं को दूर करने पर विशेष ध्यान देने का भी निर्देश दिया है। श्री गुप्ता ने केन्द्र शासन के पास लंबित धनराशि को भी शीघ्र प्राप्त करने के निर्देश दिये।
श्री गुप्ता ने आज मंत्रालय में पुलिस आवास निगम की गतिविधियों की समीक्षा की। बैठक में गृह राज्य मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाहा, प्रमुख सचिव गृह श्री राजन काटोच, निगम के अध्यक्ष अपर पुलिस महानिदेशक श्री नंदन दुबे और प्रबंध संचालक श्री एम.पी.द्विवेदी ने भाग लिया।
गृह मंत्री ने प्रमुख सचिव को निर्देश दिये कि विभिन्न निर्माण कार्यों के लिये दी जाने वाली प्रशासकीय स्वीकृति के लिये समय सीमा निर्धारित कर यह सुनिश्चित किया जाये कि इसमें किसी प्रकार की अनावश्यक देरी न हो। उन्होंने कहा कि जिन पुलिस थानों के भवन निर्माण का कार्य पूरा हो जाता है उन्हें एक माह के भीतर अपने अधिकार में लेने के लिये पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया जाये। 
इससे निविदा में रखी गई शर्त के मुताबिक निर्माणकर्ता एजेंसी द्वारा दो वर्ष तक संधारण करने के प्रावधान का भी पूरा लाभ लिया जा सकेगा। भविष्य में भवन निर्माण के लिये बनाये जाने वाले प्राक्कलन में पूर्व निर्माण को हटाने की लागत भी शामिल की जाये ताकि इस कार्य में दूसरी एजेंसियों पर निर्भरता समाप्त हो।
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2008-09 में निगम द्वारा लक्ष्य पूरा करते हुये 65 करोड़ रूपये के निर्माण कार्य पूरे किये और वर्ष 2009-10 में 68 करोड़ रूपये के कार्य करने का लक्ष्य है। भोपाल में नवीन पुलिस मुख्यालय भवन बन रहा है। भोपाल में मॉडल थाना भवन टी.टी. नगर में तथा पुलिस आधुनिकीकरण योजना के तहत प्रशिक्षण संस्थान और फैकल्टी होस्टल का ग्राम भौंरी में निर्माण प्रस्तावित है। 
निगम के अध्यक्ष श्री नंदन दुबे और प्रबंध संचालक श्री एम.पी. द्विवेदी ने प्रदेश के विभिन्न जिलों तथा राजधानी में चल रहे और प्रस्तावित कार्यों के विषय में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पुलिस अधीक्षक कार्यालय, सिंगरौली और अलीराजपुर बनाये जा रहे है। वार्षिक योजना 2009-10 की 19 करोड़ 47 लाख रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति शासन से प्राप्त हो गई है।

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Wednesday, January 6, 2010

शराब की दुकानों से प्रभावित न हो नागरिकों का सामान्य जीवन : मुख्यमंत्री

समीक्षा आबकारी विभाग
मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा है कि आगामी वर्ष से देशी-विदेशी मदिरा दुकानों के आवंटन से आम जनता को असुविधा न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाये। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज मंत्रालय में आबकारी विभाग की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में वाणिज्यिक कर एवं वित्त मंत्री श्री राघवजी उपस्थित थे।मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि राज्य सरकार आम नागरिकों के लिये कठिनाईयां बढ़ाने की कीमत पर आबकारी आय प्राप्त नहीं करना चाहती। देशी मदिरा के अहातों के संचालन से लोगों के जीवन पर दुष्प्रभाव नहीं पड़ना चाहिये। इसका विशेष ध्यान रखा जाये। 
आवश्यक हो तो इसके लिये नियमों में परिवर्तन किया जाये। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने दुकानों के आवंटन के लिये निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में वर्ष 2009-10 में दिसम्बर माह तक 2089.35 करोड़ रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। गत वर्ष विदेशी मदिरा की नयी 159 दुकानों में से 135 करोड़ रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ। 
विभाग में नवगठित जिलों अलीराजपुर और सिंगरौली में नये जिला आबकारी कार्यालयों के लिये आवश्यक पदों की पूर्ति की कार्यवाही की जा रही है। प्रदेश में अगस्त 2009 से सिनेमा पर देय मनोरंजन शुल्क की प्रचलित दरों को 50 एवं 40 प्रतिशत से कम करके 20 प्रतिशत कर दिया गया है। प्रदेश में वर्तमान में 242 सिनेमा घर संचालित हैं। 
इंदौर एवं ग्वालियर में 14 नये मल्टीप्लैक्स सिनेमा बने हैं। प्रदेश में आगामी वर्षों में डी.टी.एच. से वार्षिक 5 करोड़ रूपये से अधिक मनोरंजन शुल्क प्राप्त होने की संभावना है। बैठक में जानकारी दी गई कि आबकारी विभाग में कैडर मैनेजमेंट के तहत जिला आबकारी अधिकारी, उपनिरीक्षक एवं आरक्षकों के रिक्त पदों की पूर्ति के लिये कार्रवाई की जा रही है। 
विभाग ने कार्यालयों के कम्प्यूटराईजेशन पर लगभग 27 करोड़ रूपये की राशि व्यय की है। आबकारी आयुक्त एवं अन्य अधिकारियों द्वारा देशी-विदेशी मदिरा भंडागारों, दुकानों एवं बीयर निर्माणी इकाईयों के समय-समय पर निरीक्षण भी किये गये हैं। 
बैठक में मुख्य सचिव श्री राकेश साहनी, प्रमुख सचिव वाणिज्यिक कर श्री ए.पी. श्रीवास्तव, आबकारी आयुक्त श्री अरूण पांडेय, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, सचिव श्री अनुराग जैन और अपर सचिव श्री विवेक अग्रवाल उपस्थित थे।

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Monday, January 4, 2010

नई दवा नीति नए वर्ष में लागू होगी

स्वास्थ्य विभाग एवं तमिलनाडु मेडीकल सप्लाई कार्पोरेशन के बीच करारनामा
मध्यप्रदेश के शासकीय, मेडीकल एवं गैस राहत अस्पतालों में इस वर्ष दवाईयों का वितरण और उपलब्धता सुनिश्चित हो जाएगी। ऐसा नई दवा नीति के लागू होने पर होगा। इस संबंध में मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य विभाग और तमिलनाडु के मेडीकल सप्लाई कार्पोरेशन के बीच एक करारनामे पर हस्ताक्षर हुए। यह जानकारी लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, जैव विविधता एवं प्रौद्योगिकी तथा जनशिकायत निवारण मंत्री श्री अनूप मिश्रा ने दी।स्वास्थ्य मंत्री श्री अनूप मिश्रा ने बताया कि नई दवा नीति नए साल के अगले दो-तीन माह में लागू हो जाएगी। वर्तमान में इसके लागू होने तक लघु उद्योग निगम ने अनुबंधित दवा प्रदायकर्त्ता इकाईयों से जो दरे निर्धारित की हैं उन दरों पर दवाइयों के क्रय के लिये राज्य शासन ने स्वास्थ्य विभाग को अधिकृत किया है। 
श्री मिश्रा ने बताया कि अगले दो साल तक नई दवा नीति के तहत दवाइयों, चिकित्सकीय उपकरणों तथा अन्य सामग्री की उपलब्धता तथा वितरण के लिए गत माह तमिलनाडु मेडीकल सप्लाई कार्पोरेशन से करारनामा किया गया। 
इस करारनामे के मुताबिक तमिलनाडु का यह उपक्रम स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सा शिक्षा विभाग एवं गैस राहत विभाग के अस्पतालों में लगने वाली दवाइयों, उपकरणों, सूचर्स एवं अन्य सामग्री की क्रय दर निर्धारित करेगा। इस संबंध में विभागों के अस्पतालों के संबंधित चिकित्सा अधिकारियों ने दवाइयों, उपकरणों तथा अन्य सामग्रियों के संबंध में अपनी जरूरते तय कर ली हैं। इसकी सूची तमिलनाडु के उपक्रम को भेज दी गई है।
तमिलनाडु मेडीकल कार्पोरेशन के प्रबंध संचालक श्री संदीप सक्सेना ने 30 दिसम्बर को भोपाल आकर चिकित्सा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर करारनामे के क्रियान्वयन को अंतिम रूप दिया। तमिलनाडु द्वारा एक निविदा दस्तावेज तैयार किया है। इसका अनुमोदन स्वास्थ्य विभाग की निविदा निर्णायक समिति करेगी। उसके एक हफ्ते अर्थात जनवरी प्रथम सप्ताह में दवाइयों, उपकरणों तथा अन्य सामग्रियों की निविदाएं जारी हो जाएंगी।
निविदा भरने वाली इकाईयों से जनवरी के दूसरे सप्ताह में 'प्री विड' कांफ्रेंस रखी जाएगी जिसमें उनकी जिज्ञासाओं के उत्तर दिए जाएंगे। इस पूरी प्रक्रिया के पूरी होने के पंद्रह दिन बाद संभवत: मार्च के प्रथम सप्ताह में दरों का निर्धारण हो जाएगा। ये दरें एवं अनुबंधकर्त्ता इकाइयों की सूची चिकित्सा शिक्षा, गैस राहत एवं जिला शासकीय अस्पतालों को सौंप दी जाएगी। इसके आधार पर वे अपनी आवश्यकता के मुताबिक सीधे संबंधित विक्रयकर्त्ता इकाई को दवाइयों एवं उपकरणों के क्रय आदेश दे सकेंगे।

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Sunday, January 3, 2010

राज्य की औषधीय एवं सुगंधित पौध विकास की रणनीति मंजूर

 पांच वर्षों में 76.09 करोड़ रूपये का होगा व्यय
राज्य शासन ने औषधीय एवं सुगंधित पौधों के विकास के लिये रणनीति वर्ष 2009-10 से 2013-14 अनुमोदित की है। पिछली रणनीति के अनुभवों के आधार पर नयी रणनीति में प्रदेश के सभी 11 कृषि जलवायु क्षेत्रों में न्यूनतम एक-एक औषधीय कच्चा माल उत्पादन क्षेत्र तथा प्रमाणीकृत प्रसंस्करण केन्द्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।

न प्रयासों से निजी क्षेत्र में औषधीय कृषि क्षेत्रफल 25 हजार हेक्टेयर से बढ़कर वर्ष 2014 तक 60 हजार हेक्टेयर होगा। प्रदेश के औषधीय एवं सुगंधित पौधों का उत्पादन एक लाख क्विंटल तक हो जाना संभावित है। इस रणनीति पर आगामी पांच वर्षों में 76.09 करोड़ रूपये का व्यय किया जाना संभावित है।
रणनीति के अनुश्रवण एवं समीक्षा के लिये मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक राज्य स्तरीय समन्वय समिति तथा प्रधान मुख्य वनसंरक्षक की अध्यक्षता में एक राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति का प्रावधान किया गया है।
उल्लेखनीय है कि औषधीय एवं सुगंधित पौधों के विकास की यह दूसरी रणनीति है। प्रथम रणनीति वर्ष 2004-05 से 2008-09 के लिये स्वीकृत की गयी थी। वन मंत्री श्री सरताज सिंह की विशेष रूचि एवं प्रयासों से राज्य शासन द्वारा इस पांच वर्षीय रणनीति की स्वीकृति जारी की गयी है। अध्यक्ष, लघु वनोपज संघ श्री विश्वास सारंग द्वारा राज्य की औषधीय एवं सुगंधित पौधा विकास की रणनीति का राज्य शासन द्वारा मंजूर किये जाने पर आभार व्यक्त किया।
वर्तमान रणनीति में निजी क्षेत्र में औषधीय को कृषि को बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया है। अगले पांच वर्षों में जैविक औषधीय कृषि के लिये 8 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में संविदा कृषि करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिये राष्ट्रीय औषधीय पौधा बोर्ड, भारत शासन से अनुदान सहायता प्राप्त की जाएगी।
इसी प्रकार छोटे एवं सीमांत कृषकों को बहुस्तरीय रोपण द्वारा औषधीय कृषि अपनाने के लिये सहायता दिये जाने का लक्ष्य भी रखा गया है। वर्तमान रणनीति का एक विशेष बिन्दु यह भी है कि प्रदेश के समस्त कृषि क्षेत्र का सर्वे किया जाएगा साथ ही औषधीय एवं सुगंधित पौधों की कृषि एवं उत्पादन का आंकलन भी किया जाएगा।
इसी प्रकार औषधीय कृषि को बढ़ावा तभी मिल सकता है जबकि प्रसंस्करण एवं विपणन की पर्याप्त व्यवस्था हो। इसी को दृष्टिगत रखते हुये नयी रणनीति में प्रसंस्करण केन्द्रों की श्रृंखला का विस्तार एवं विपणन व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के लिये विभिन्न गतिविधियां संचालित करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस रणनीति के एक अहम गतिविधि यह भी होगी कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति की स्वास्थ्य सेवा में भूमिका को महत्व दिया जाएगा एवं पारंपरिक औषधीय ज्ञान का अभिलेखन एवं वेदों के पंजीयन का कार्य भी शुरू किया जाएगा। हर्बल गार्डन एवं होम हर्बल गार्डन की श्रृंखला के विस्तार के साथ-साथ शिक्षा, प्रशिक्षण एवं चेतना जागृति तथा प्रचार-प्रसार की अनेक गतिविधियां संपादित की जाएगी।

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प्रदेश के 49 जिलों में विशेष न्यायालयों की स्थापना

 48 जिलों में विशेष अनुसूचित जाति कल्याण थाने स्थापित
मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 की अंतर्गत दर्ज प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के लिये वर्ष 2009-10 में 6 जिलों अनूपपुर, अलीराजपुर, डिंडोरी, अशोकनगर, बुरहानपुर एवं उमरिया में विशेष न्यायालय खोले गये हैं। इन जिलों में खोले गये विशेष न्यायालयों को मिलाकर प्रदेश में 49 जिलों में विशेष न्यायालय स्थापित हो गये हैं।
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों पर होने वाले अत्याचारों के प्रकरण दर्ज कराने के लिये 48 जिलों में विशेष अनुसूचित जाति कल्याण थाने स्थापित किये गये हैं। इन थानों में पीड़ित व्यक्तियों द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराने पर शीघ्र न्याय दिलाने के उद्देश्य से त्वरित कार्यवाही की जा रही है। आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा इस वर्ष अक्टूबर 09 तक पीड़ित 2 हजार 252 हितग्राहियों को लगभग पौने पांच करोड़ रूपये से अधिक की राशि सहायता राशि के रूप में उपलब्ध करायी गयी है।

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Tuesday, December 29, 2009

अनसुलझे गंभीर आपराधिक मामलों के लिए हर जिले में विशेष सेल

अपराधों का खात्मा विशेष प्रकोष्ठ की रिपोर्ट के बाद ही लगेगा

गृह मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता ने प्रदेश में पिछले माह में घटित ऐसे गंभीर आपराधिक मामलों की पतासाजी के लिए प्रत्येक जिले में एक विशेष सेल गठित करने के आदेश दिये हैं, जो अभी तक सुलझे नहीं है।

पुलिस महानिदेशक को जारी आदेश में गृहमंत्री ने कहा है कि यह सेल ऐसे मामलों की तत्परता से विवेचना करे। अच्छे विवेचक को समुचित रूप से पुरस्कृत भी किया जाएगा। श्री गुप्ता ने कहा कि भविष्य में इस प्रकार के अपराधों का खात्मा विशेष प्रकोष्ठ की रिपोर्ट के बाद ही लगाया जाए।
श्री गुप्ता ने पुलिस महानिदेशक से कहा है कि हत्या, बलात्कार, डकैती, लूट, अपहरण, चोरी आदि के अनेक गंभीर अपराध अनसुलझे रह गये हैं। इससे जनता के बीच पुलिस की छवि नकारात्मक बन रही है। निश्चित ही पुलिस अधिकारियों द्वारा इन मामलों को सुलझाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन पर्याप्त सफलता नहीं मिल रही है।
गृहमंत्री ने पुलिस महानिदेशक को भी समय-समय पर इस विवेचना की समीक्षा कर उसकी स्थिति से उन्हें अवगत कराते रहने को कहा है। उन्होंने कहा कि इसके परिणाम निश्चित रूप से सकारात्मक आएंगे और पुलिस के प्रति जनता का विश्वास भी बढ़ेगा।

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Tuesday, December 22, 2009

आंगनवाड़ी केन्द्र निर्धारित समय पर खोलें

महिला बाल विकास विभाग की राज्य स्तरीय समीक्षा
महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती रंजना बघेल ने सख्त निर्देश दिए है कि सभी आंगनवाड़ी केन्द्रों को निर्धारित समय पर खोलें तथा अनिवार्य रूप से समय सारणी का पालन सुनिश्चित करे। श्रीमती बघेल रविवार को समन्वय भवन में महिला एवं बाल विकास विभाग की राज्य स्तरीय बैठक को संबोधित कर रही थी। बैठक में प्रमुख सचिव श्रीमती टीनू जोशी, मध्यप्रदेश वित्त विकास निगम की प्रबंध निदेशक श्रीमती सुधा चौधरी, संचालक, महिला बाल विकास श्री गुलशन बामरा, अपर संचालक, महिला बाल विकास श्री एच.सी. अग्रवाल तथा जिलों से आए करीब तीन सौ अधिकारी, कर्मचारी उपस्थित थे।
मुख्य बिन्दु
आंगनवाड़ी केन्द्र समय पर खोलें
अन्यथा सख्त कारवाई के लिए तैयार रहें
बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा, पौष्टिक आहार वितरण सुनिश्चति करें
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सुपर वाइजरों की समस्यायें सुने अफसर
कुपोषण कम करने नियमित ग्रामबार समीक्षा करें अधिकारी
मुख्यालय पर न रहने, कोर्ट से स्टे लेकर अवकाश लेने वालों पर सख्त होगा शासन
टेकहोम राशन कार्ड, गृह भेंट के रजिस्टर तैयार करने के निर्देश
आंगनवाड़ी बच्चों को ताजा भोजन प्रदाय सुनिश्चित करे
सांझा-चूल्हा द्वारा 'तीसरा मील' की निरंतर मॉनिटरिंग करें
कुपोषण से निपटने नवाचार अपनाएं
मंत्री द्वारा मंगल दिवसों, जागृति शिविरों, उषाकिरण योजना, पोषण आहार की विस्तृत समीक्षा
जिलों का रेगुलर निरीक्षण कर योजनाओं की समीक्षा करें अधिकारी
हर माह जिला स्तर पर अनिवार्य रूप से योजनाओं की समीक्षा करें
राज्य स्तरीय बैठक में तीन सौ अधिकारियों-कर्मचारियों ने भाग लिया
श्रीमती रंजना बघेल ने आंगवाड़ियों में खेल-खेल में शिक्षा देने, बच्चों को निर्धारित समय पर उपयुक्त एवं पौष्टिक आहार दिये जाये यह सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पोषण पुर्नवास केन्द्र से निकलने के बाद बच्चों को नियमित ग्रोथ मॉनीटरिंग होना चाहिए। 
श्रीमती बघेल ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं सहायकिओं व सुपरवाइजरों को एक सेक्टर में एकत्रित कर उनकी समस्याओं को सुनने व समयबद्ध तरीके से काम को अंजाम देने के निर्देश दिये। उन्होंने कुपोषण की दर कम करने के लिए आंगनवाड़ियों की ग्रामवार समीक्षा करने व इस मामले में पारदर्शिता बरतने के निर्देश दिए ताकि गलत व भ्रामक जानकारी लोगों तक न पहुंचे। श्रीमती बघेल ने उन अधिकारियों व कर्मचारियों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करने के निर्देश दिए है जो अपने मुख्यालयों पर नहीं रहते, जो समय पर अपनी ज्वाइनिंग नहीं देगें एवं कोर्ट से स्टे लेकर अवकाश पर रहते हैं।
महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री श्रीमती रंजना बघेल ने आंगनवाड़ी केन्द्रों पर भोजन व्यवस्था एवं एम.पी.स्टेट एग्रो इंडस्ट्रीज डेव्हलमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड के माध्यम से टेकहोम राशन के रूप में खाद्यान्न वितरण के जिलेवार जानकारी अधिकारियों से ली। उन्होंने आंगनवाड़ी केन्द्रों में टेकहोम राशनकार्ड तथा गृह भेंट कर रजिस्टर तैयार करने के निर्देश दिए।
श्रीमती बघेल ने सांझा चूल्हा व्यवस्था के तहत आंगनवाड़ी केन्द्रों में बच्चों को ताजा पका हुआ भोजन निरंतर मिलने लगे, बच्चों की उपस्थिति में वृद्धि तथा ग्रामीण स्तर पर जन सहयोग की बढोत्तरी हो सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सांझा चूल्हा के समूहों द्वारा तीसरा मील की व्यवस्था की भी निरंतर मानिटिरिंग पर जोर दिया।
महिला बाल विकास राज्यमंत्री श्रीमती रंजना बघेल ने कहा कि जो जिले कुपोषण की स्थिति से निपटने के लिए नवाचार अपना रहे है वे अन्य जिलों को भी इसके लिए प्रेरित करें। उन्होंने मंगल दिवसों, जागृति शिविरों, उषा किरण योजना, पोषण आहार आदि की भी जिलेवार जानकारी अधिकारियों से ली। 
श्रीमती बघेल ने जागृति शिविरों का आयोजन शासकीय भवनों में न आयोजित कर ग्रामों, मजरों-टोलो में करने को कहा। इन शिविरों में उन्होंने समाज सेवियों, दानदाताओं, जन-प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित करने के निर्देश उन्होंने संचालनालय के अधिकारियों को समय-समय पर जिलों का आकस्मिक निरीक्षण करने के निर्देश दिए। साथ ही जिला अधिकारियों से कार्यकर्ताओं, सुपरवाइजरों, परियोजना अधिकारियों को हर माह होने वाली बैठक का दिन भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
प्रारंभ में महिला बाल विकास राज्यमंत्री श्रीमती रंजना बघेल ने दीप प्रज्जवलित कर बैठक का शुभांरभ किया। संचालक श्री गुलशन बामरा ने श्रीमती बघेल एवं प्रमुख सचिव श्रीमती टीनू जोशी को पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया।

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Sunday, December 20, 2009

मप्र को जैविक प्रदेश बनाने के लिये एकजुट प्रयास किये जायेगे- डा. कुसमरिया

जैविक नीति निर्धारण की बैठक सम्पन्न
मध्यप्रदेश की जैविक नीति के निर्धारण के लिये इंदौर जिले के महू विकासखंड के ग्राम बसी पीपरी में शुक्रवार को आयोजित बैठक में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री रामकृष्ण कुसमरिया ने कहा कि प्रदेश की नयी जैविक नीति शीघ्र ही लागू की जायेगी। मध्यप्रदेश को जैविक प्रदेश बनाने के लिये एकजुट प्रयास किये जायेंगे। इस अवसर पर डा. कुसमरिया ने किसानों को मृदा परीक्षण कार्ड भी वितरित किये।कृषि विकास मंत्री डा. कुसमरिया ने कहा कि इस समय पूरे देश में कुल 12 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती की जा रही है। मध्यप्रदेश में इस समय पूरे देश का लगभग एक तिहाई क्षेत्र 4 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती की जा रही है। इस प्रकार मध्यप्रदेश का देश की कुल जैविक खेती में एक तिहाई हिस्सेदारी है। 
उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग रोकने, पर्यावरण संरक्षण और जमीन की उर्वरा शक्ति को बनाये रखने के लिये जैविक खेती अत्यंत आवश्यक है। जैविक खेती को बढ़ावा देना धरती का ऋण चुकाने के बराबर है। हमारा कृषि संबंधी ज्ञान तभी सार्थक होगा जब हम जैविक खेती को अपनायेंगे। रासायनिक खाद एवं दवाओं के जनस्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव को भी जैविक खेती से ही समाप्त किये जा सकता है।
बैठक में उपस्थित कृषि राज्य मंत्री श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि यह समय परम्पराओं एवं जड़ों की तरफ लौटने का है। हम योग, आयुर्वेद एवं वैदिक संस्कृति की तरफ तेजी से लौट रहे हैं। इसी श्रृंखला में हमें पारंपरिक जैविक खेती की ओर भी तेजी से लौटना होगा। 
बैठक के प्रारंभ में किसान कल्याण विभाग के उप सचिव श्री एच.व्ही.एस. भदौरिया ने जैविक नीति के प्रारूप की जानकारी देते हुये बताया कि नीति में किसानों को जैविक खेती की तरफ कैसे ले जाया जाना है तथा उनके उत्पादन वृद्धि, विपणन, बीज, आदान व्यवस्था कैसे की जायेगी। इस अवसर पर कृषि विश्वविद्यालय से आये वरिष्ठ कृषि विशेषज्ञ एवं कृषि वैज्ञानिकों ने अपने सुझाव भी दिये।
बैठक में कृषि संचालक श्री डी.एन.शर्मा और मध्यप्रदेश एग्रो इंडस्ट्रीज के प्रबंध संचालक डॉ. व्ही.एस. निरंजन सहित विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक उपस्थित थे।

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Thursday, November 26, 2009

प्रशासनिक सजगता बढ़ाने जारी हुए निर्देश

सभी संभागायुक्तों और कलेक्टरों को निर्देश जारी
राज्य शासन द्वारा प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरूस्त बनाने के लिए नए कदम उठाए गए हैं। शासन के सभी विभागों, संभागायुक्तों, विभागाध्यक्षों से कहा गया है कि निरीक्षण के उपरान्त अध्यक्ष, राजस्व मण्डल द्वारा भेजे गए प्रतिवेदन का गंभीरतापूर्वक अध्ययन करें और अपने विभाग/कार्यालय में उतरोत्तर सुधार के लिए कार्यवाही सुनिश्चित करें इससे प्रशासनिक सजगता में बढोत्तरी होगी।
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा इस संबंध में समस्त विभागों, अध्यक्ष राजस्व मंडल, सभी संभागायुक्तों और कलेक्टरों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि अध्यक्ष राजस्व मण्डल द्वारा कमिश्नर, कलेक्टर और विभागाध्यक्ष कार्यालयों का निरीक्षण किया जाता है। इसी तरह राजस्व मण्डल के सदस्य सभी विभागों के जिला, तहसील ब्लॉक कार्यालय और राजस्व न्यायालयों का निरीक्षण करते हैं। जारी निर्देशों में कहा गया है कि शासन की गतिविधियां एक दूसरे से जुड़ी हैं।
अत: राजस्व मण्डल के अध्यक्ष तथा सदस्य प्रदेश के विभिन्न विभागों के कार्यालयों की स्थिति देखकर शासन को प्रशासनिक कमियों और शिथिलताओं से अवगत कराते हैं। संबंधित अधिकारियों और कार्यालयों द्वारा इन बिन्दुओं पर अमल किया जाता है तो इससे प्रशासनिक सजगता में निश्चित रूप से वृद्धि होगी।

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