लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री श्री अनूप मिश्रा ने बैठक में कहा कि चिकित्सकों की उपलब्धता विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि इससे चिकित्सा शिक्षा के लिए बॉड भरने वाले छात्रों को नियमानुसार एक साल ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी सेवा देनी होगी। उन्होंने बैठक में इसके लिए निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन करने की हिदायत दी। बैठक में यह तय किया गया कि जिन एम.बी.बी.एस. डॉक्टरों की पदस्थापना की गई थी, उनमें से जिन चिकित्सकों ने ज्वाईन नही किया किन्तु उन चिकित्सकों का पी.जी. में सिलेक्शन हो गया है, उनसे पी.जी. में एडमीशन के पूर्व तीन वर्ष का बाण्ड भराया जायेगा। एक वर्ष एम.बी.बी.एस का एवं दो वर्ष पी.जी. का इस प्रकार कुल तीन वर्ष का बाण्ड भराया जायेगा। इसी तरह भविष्य के लिये पी.जी. काउन्सिलिंग के पूर्व संचालक चिकित्सा शिक्षा को ऐसे बाण्डेड चिकित्सकों की सूची संचालनालय स्वास्थ्य सेवायें द्वारा उपलब्ध कराई जायेगी जिन्होंने बाण्ड अवधि में नियुक्ति के बाद कर्तव्य पर उपस्थित नही हुये हैं एवं बाण्ड अवधि को पूर्ण नही किया है। साथ ही संचालक चिकित्सा शिक्षा के द्वारा भी काउन्सिलिंग के पूर्व संचालनालय स्वास्थ्य सेवायें से ऐसी सूची की मांग की जायेगी।
बैठक में यह तय किया गया कि अगले वर्ष से प्री पी.जी. के आवेदन में भी यह प्रावधान किया जायेगा कि बाण्डेड चिकित्सक स्वास्थ्य संचालनालय से इस आशय का प्रमाण पत्र लेकर आवेदन में लगाये कि उन्होंने बाण्ड अवधि के लिए आवश्यक सेवा पूर्ण करने के लिए नियुक्ति स्थल पर उपस्थित हो कर निरंतर सेवा में है। जिन एम.बी.बी.एस. डाक्टर्स ने बाण्ड पूरा नहीं किया है और पी.जी. में भी उनका सिलेक्शन नही हुआ है उनको इस आशय का नोटिस दिया जायेगा कि क्यों न उनका रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया जाये। इसके लिये ऐसी चिकित्सकों की सूची संचालनालय स्वास्थ्य सेवायें द्वारा रजिस्ट्रार मेडिकल कौंसिल को उपलब्ध कराई जायेगी जिसके आधार पर कौंसिल संबंधित चिकित्सकों को नोटिस जारी करेगी।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जिन बाण्डेड पी.जी. डाक्टर्स ने बाण्ड पूरा नहीं किया है, उनकी सूची बनाकर संचालनालय स्वास्थ्य सेवायें द्वारा रजिस्ट्रार मेडिकल कौंसिल को दी जायेगी जिसके आधार पर वह उनके रजिस्ट्रेशन केन्सिल करने की कार्यवाही करेंगे।