Monday, May 17, 2010
जिला कार्यक्रम प्रबंधकों की वार्षिक वेतन वृद्धि वापस
मानदेय में की गई 20 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि को तत्काल प्रभाव से स्थगित
स्वास्थ्य योजनाओं एवं कार्यक्रमों की जानकारी सही और सत्यापित न भेजने पर प्रदेश के सभी 50 जिलों के जिला कार्यक्रम प्रबधंकों के मानदेय में की गई वार्षिक वृद्धि वापस लेने के आदेश जारी किये गये हैं।
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स्वास्थ्यकर्मी निर्धारित गणवेश पहने यह सुनिश्चित किया जाये
मुख्य चिकित्सा अधिकारियों और अस्पताल अधीक्षकों को भेजे गये निर्देश
प्रदेश के शासकीय अस्पतालों में पदस्थ स्वास्थ्यकर्मियों के लिये निर्धारित गणवेश अनिवार्य रूप से पहनने के निर्देश दिये गये हैं। चिकित्सकों से भी ड्यूटी के दौरान एप्रेन पहनने को कहा गया है। लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा, आयुष मंत्री श्री अनूप मिश्रा के आदेश पर इस आशय के निर्देश सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा अस्पताल अधीक्षकों को दिये गये हैं।
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Tuesday, April 20, 2010
ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों के लिए बाण्ड नियम हुए सख्त
पी.जी. में एडमीशन के पूर्व तीन वर्ष का बाण्ड भराया जायेगा
ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उनसे चिकित्सा शिक्षा के दौरान भरवाए गए बाण्ड का सख्ती से पालन कराया जाए। लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण चिकित्सा शिक्षा, आयुष मंत्री श्री अनूप मिश्रा ने यह निर्देश सचिव लोक स्वास्थ्य श्री एस.आर. मोहंती, आयुक्त स्वास्थ्य श्री मनोहर अगनानी, उप सचिव चिकित्सा शिक्षा श्री सुहेल अली, संचालक चिकित्सा शिक्षा श्री व्ही.के सैनी एवं संचालक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ ए.के. मित्तल के साथ हुई बैठक में दी।
लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री श्री अनूप मिश्रा ने बैठक में कहा कि चिकित्सकों की उपलब्धता विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि इससे चिकित्सा शिक्षा के लिए बॉड भरने वाले छात्रों को नियमानुसार एक साल ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी सेवा देनी होगी। उन्होंने बैठक में इसके लिए निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन करने की हिदायत दी। बैठक में यह तय किया गया कि जिन एम.बी.बी.एस. डॉक्टरों की पदस्थापना की गई थी, उनमें से जिन चिकित्सकों ने ज्वाईन नही किया किन्तु उन चिकित्सकों का पी.जी. में सिलेक्शन हो गया है, उनसे पी.जी. में एडमीशन के पूर्व तीन वर्ष का बाण्ड भराया जायेगा। एक वर्ष एम.बी.बी.एस का एवं दो वर्ष पी.जी. का इस प्रकार कुल तीन वर्ष का बाण्ड भराया जायेगा। इसी तरह भविष्य के लिये पी.जी. काउन्सिलिंग के पूर्व संचालक चिकित्सा शिक्षा को ऐसे बाण्डेड चिकित्सकों की सूची संचालनालय स्वास्थ्य सेवायें द्वारा उपलब्ध कराई जायेगी जिन्होंने बाण्ड अवधि में नियुक्ति के बाद कर्तव्य पर उपस्थित नही हुये हैं एवं बाण्ड अवधि को पूर्ण नही किया है। साथ ही संचालक चिकित्सा शिक्षा के द्वारा भी काउन्सिलिंग के पूर्व संचालनालय स्वास्थ्य सेवायें से ऐसी सूची की मांग की जायेगी।
बैठक में यह तय किया गया कि अगले वर्ष से प्री पी.जी. के आवेदन में भी यह प्रावधान किया जायेगा कि बाण्डेड चिकित्सक स्वास्थ्य संचालनालय से इस आशय का प्रमाण पत्र लेकर आवेदन में लगाये कि उन्होंने बाण्ड अवधि के लिए आवश्यक सेवा पूर्ण करने के लिए नियुक्ति स्थल पर उपस्थित हो कर निरंतर सेवा में है। जिन एम.बी.बी.एस. डाक्टर्स ने बाण्ड पूरा नहीं किया है और पी.जी. में भी उनका सिलेक्शन नही हुआ है उनको इस आशय का नोटिस दिया जायेगा कि क्यों न उनका रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया जाये। इसके लिये ऐसी चिकित्सकों की सूची संचालनालय स्वास्थ्य सेवायें द्वारा रजिस्ट्रार मेडिकल कौंसिल को उपलब्ध कराई जायेगी जिसके आधार पर कौंसिल संबंधित चिकित्सकों को नोटिस जारी करेगी।
लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री श्री अनूप मिश्रा ने बैठक में कहा कि चिकित्सकों की उपलब्धता विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि इससे चिकित्सा शिक्षा के लिए बॉड भरने वाले छात्रों को नियमानुसार एक साल ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी सेवा देनी होगी। उन्होंने बैठक में इसके लिए निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन करने की हिदायत दी। बैठक में यह तय किया गया कि जिन एम.बी.बी.एस. डॉक्टरों की पदस्थापना की गई थी, उनमें से जिन चिकित्सकों ने ज्वाईन नही किया किन्तु उन चिकित्सकों का पी.जी. में सिलेक्शन हो गया है, उनसे पी.जी. में एडमीशन के पूर्व तीन वर्ष का बाण्ड भराया जायेगा। एक वर्ष एम.बी.बी.एस का एवं दो वर्ष पी.जी. का इस प्रकार कुल तीन वर्ष का बाण्ड भराया जायेगा। इसी तरह भविष्य के लिये पी.जी. काउन्सिलिंग के पूर्व संचालक चिकित्सा शिक्षा को ऐसे बाण्डेड चिकित्सकों की सूची संचालनालय स्वास्थ्य सेवायें द्वारा उपलब्ध कराई जायेगी जिन्होंने बाण्ड अवधि में नियुक्ति के बाद कर्तव्य पर उपस्थित नही हुये हैं एवं बाण्ड अवधि को पूर्ण नही किया है। साथ ही संचालक चिकित्सा शिक्षा के द्वारा भी काउन्सिलिंग के पूर्व संचालनालय स्वास्थ्य सेवायें से ऐसी सूची की मांग की जायेगी।
बैठक में यह तय किया गया कि अगले वर्ष से प्री पी.जी. के आवेदन में भी यह प्रावधान किया जायेगा कि बाण्डेड चिकित्सक स्वास्थ्य संचालनालय से इस आशय का प्रमाण पत्र लेकर आवेदन में लगाये कि उन्होंने बाण्ड अवधि के लिए आवश्यक सेवा पूर्ण करने के लिए नियुक्ति स्थल पर उपस्थित हो कर निरंतर सेवा में है। जिन एम.बी.बी.एस. डाक्टर्स ने बाण्ड पूरा नहीं किया है और पी.जी. में भी उनका सिलेक्शन नही हुआ है उनको इस आशय का नोटिस दिया जायेगा कि क्यों न उनका रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया जाये। इसके लिये ऐसी चिकित्सकों की सूची संचालनालय स्वास्थ्य सेवायें द्वारा रजिस्ट्रार मेडिकल कौंसिल को उपलब्ध कराई जायेगी जिसके आधार पर कौंसिल संबंधित चिकित्सकों को नोटिस जारी करेगी।
भविष्य में लोक सेवा आयोग को जो नियुक्ति हेतु मांग पत्र भेजा जायेगा उसमें भी यह शर्त रखी जायेगी कि जो बाण्डेड चिकित्सक बाण्ड का कार्यकाल पूर्ण कर चुके हैं, वे ही चिकित्सक आवेदन देने के लिये पात्र होंगे। जिन बाण्डेड चिकित्सकों ने बाण्ड का कार्यकाल पूर्ण नहीं किया है उन्हें आर.सी.एच.एन.आर.एच.एम. के अंतर्गत भी पदस्थापना नहीं दी जायेगी।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जिन बाण्डेड पी.जी. डाक्टर्स ने बाण्ड पूरा नहीं किया है, उनकी सूची बनाकर संचालनालय स्वास्थ्य सेवायें द्वारा रजिस्ट्रार मेडिकल कौंसिल को दी जायेगी जिसके आधार पर वह उनके रजिस्ट्रेशन केन्सिल करने की कार्यवाही करेंगे।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जिन बाण्डेड पी.जी. डाक्टर्स ने बाण्ड पूरा नहीं किया है, उनकी सूची बनाकर संचालनालय स्वास्थ्य सेवायें द्वारा रजिस्ट्रार मेडिकल कौंसिल को दी जायेगी जिसके आधार पर वह उनके रजिस्ट्रेशन केन्सिल करने की कार्यवाही करेंगे।
जो चिकित्सक अखिल भारतीय प्री पी.जी. में सिलेक्ट हो जाते हैं उनसे यह अण्डरटेंकिग ली जाकर कि वह पी.जी. पूर्ण करने के पश्चात बाण्ड की अवधि की शासकीय सेवा कर देंगे इस शर्त पर उन्हें पी.जी. करने की अनुमति दी जायेगी। पी.जी. पूर्ण करने वाले बाण्डेड चिकित्सकों की जानकारी परीक्षा के पूर्व समस्त अधिष्ठाता चिकित्सा महाविद्यालय स्वास्थ्य आयुक्त को भेजेंगे। इस जानकारी के साथ ही परीक्षा की संभावित तिथि की जानकारी भी दी जायेगी ताकि स्वास्थ्य आयुक्त इनकी पदस्थापना पर पूर्व से ही विचार कर सकें। प्रत्येक पी.जी. परीक्षा के बाद सूची भेजने की जिम्मेदारी संबंधित डीन मेडिकल कालेज की होगी। यदि कोई चिकित्सक सूची नहीं भेजने के कारण बाण्ड से विमुक्त हो हाता है ऐसे में जिम्मेदारी संबंधित डीन मेडिकल कालेज की होगी।
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Monday, April 19, 2010
सभी जिला अस्पतालों में होगा सिंगल विंडो सिस्टम
ट्रामा यूनिट में पदस्थ चिकित्सकों का अलग संवर्ग होगा
प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में सिंगल विंडो सिस्टम होगा ताकि मरीज को इलाज के लिए भटकना न पड़े। इसी तरह प्रत्येक जिला अस्पताल को छोटे-छोटे एवं आपातकालीन कार्यों के लिए पच्चीस हजार रूपये तक स्वीकृत करने का अधिकार होगा। यह निर्देश लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री श्री अनूप मिश्रा की अध्यक्षता में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं पर विचार के लिए निरंतर चल रही बैठकों की कड़ी में दिए गए।
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Tuesday, April 13, 2010
मप्र को मिला उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिये पुरस्कार
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन नई दिल्ली में उप राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत
मध्यप्रदेश को आज राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के उद्देश्य को मैदानी स्तर पर बेहतर प्रभावी और परिणामोउन्मुखी तरीके से क्रियान्वित करने पर भारत सरकार द्वारा पुरस्कृत किया गया है। देश के उप राष्ट्रपति डॉ. हामिद अंसारी द्वारा नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के पांच वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित समारोह में यह पुरस्कार मध्यप्रदेश को दिया।
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Monday, April 12, 2010
बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था के लिये मप्र को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला
पुरस्कार भारत की राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल प्रदान करेंगी
स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर उपलब्धि के लिये भारत सरकार ने मध्यप्रदेश को पुरस्कृत किया है। यह पुरस्कार राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रदेश में शिशु और मातृ मृत्यु दर में कमी लाने तथा इनके बेहतर स्वास्थ्य के लिये अपनाई गई नवाचार योजनाओं के लिये दूसरा पुरस्कार दिया है। 12 अप्रैल को विज्ञान भवन में यह पुरस्कार भारत की राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल प्रदान करेंगी।
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Wednesday, April 7, 2010
जन-स्वास्थ्य संस्थान स्थापित होगा
विधायक होंगे रोगी कल्याण समिति के सदस्य
अस्पतालों में बेहतर प्रशासन और सेवाएं देने के लिए चिकित्सकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके लिए शीघ्र ही प्रदेश में जन स्वास्थ्य संस्थान स्थापित होगा। ग्वालियर में स्वास्थ्य सेवाओं को सुगम और सुचारु बनाने के लिए दो दिन चली राज्य स्तरीय चिंतन बैठक के बाद लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, आयुष मंत्री श्री अनूप मिश्रा ने यह जानकारी दी।
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Saturday, March 27, 2010
जनप्रतिनिधि स्वास्थ्य योजनाओं से आमजन को अवगत कराय
विधानसभा सदस्यों के लिये उन्मुखीकरण कार्यशाला
मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने आज यहां विधानसभा स्थित मानसरोवर सभा कक्ष में स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित उन्मुखीकरण कार्यशाला में कहा कि कन्या भ्रूण हत्या के गंभीर अपराध को रोकने के लिये प्रत्येक नागरिक विशेषकर जनप्रतिनिधियों को अपने कर्त्तव्य का निर्वहन करना चाहिये।
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Friday, March 26, 2010
सेहत संजीवनी वीडियो रथ को प्रदेश यात्रा पर रवाना
स्वास्थ्य योजनाओं को सुदूर अचंलों तक पहुँचाने की पहल
स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं को प्रदेश के सुदूर अंचलों तक पहुँचाने के लिये मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज 16 सेहत संजीवनी वीडियो रथ रवाना किये। विधानसभा में बिटिया कैम्पेन एवं पुनरीक्षित क्षय नियंत्रण कार्यक्रम पर विधायकों के लिये आयोजित उन्मुखी कार्यक्रम के बाद श्री सिंह ने इन रथों को विधानसभा परिसर से प्रदेश यात्रा के लिये रवाना किया।
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Thursday, March 25, 2010
राज्य सरकार करेगी आरुषि के उपचार की पूरी व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने ली आरुषि के स्वास्थ्य की जानकारी
मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा है कि इन्क्यूबेटर में जली बालिका आरुषि के उपचार की पूरी व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा की जायेगी। श्री चौहान ने कहा कि प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा को बालिका के उपचार की व्यवस्थाओं के लिये अधिकृत किया गया है।
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Monday, February 22, 2010
डाक्टर व्यवहार पर अधिक ध्यान दें
गृह मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता सीएमई के 27वें वार्षिक सम्मेलन में
गृह मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता ने कहा है कि कार्यस्थल पर डाक्टरों को सुरक्षा सुनिश्चित किया जाना बहुत जरूरी है और इसके लिये ठोस प्रयास भी किये गये हैं। लेकिन साथ ही डाक्टरों को भी अपने व्यवहार की ओर ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्हें मरीज के परिजनों की भावनात्मक स्थिति को समझते हुये उनके साथ समुचित संवाद करना चाहिये जिससे कि उत्तेजना की स्थिति उत्पन्न न हो।श्री गुप्ता आज यहां गांधी चिकित्सा महाविद्यालय में एसोसिएशन ऑफ सर्जन ऑफ इण्डिया के 27वें वार्षिक सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। इसका आयोजन एसोसिएशन के मध्यप्रदेश चेप्टर और सेन्टर जोन सीएमई ने किया। सम्मेलन की थीम है‘‘इम्प्रुविंग द आउटकम’’ इसमें देश और विदेश के 300 से अधिक सर्जन और विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।
श्री गुप्ता ने कहा कि सतत सुधार ही किसी भी व्यवसाय में सफलता का मूल मंत्र है। डाक्टरों को अपना ज्ञान सतत बढ़ाते रहना चाहिये और उन्हें चिकित्सा क्षेत्र में विकसित हो रही नई तकनीकों और पद्धतियों का निरंतर अध्ययन करना चाहिये। यह उनके ही नहीं पूरे समाज के भी हित में है, क्योंकि इससे लोगों के जीवन का संबंध है। उन्होंने हा कि ऐसे प्रयास किये जाने चाहिये कि छोटे स्थानों पर कार्यरत डाक्टर भी ऐसे सम्मेलनों में भागीदारी कर सके। इसके लिये सम्मेलनों में उनकी रूचि को बढ़ाये जाने के उपाय किये जाने चाहिये। उन्होंने इस सम्मेलन का भोपाल में आयोजन करने के लिये आयोजकों को बधाई दी और कहा कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की सोच के अनुसार डाक्टरों की समस्याओं के समाधान में डाक्टरों के सुझाव प्राप्त किये जायेंगे। उन्होंने इस अवसर पर एसोसिएशन द्वारा स्थापित पुरस्कार भी प्रदान किये।
संचालक चिकित्सा शिक्षा डा. वी.के. सैनी ने कहा कि चिकित्सा व्यवसाय में सफलता का मूल मंत्र यही रहा है कि चिकित्सक सतत अध्ययन और प्रशिक्षण प्राप्त करते रहे हैं। इसी कारण आज चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव हो सकें हैं। आधुनिक उपकरणों में सर्जरी के काम को आमूल रूप से बदल दिया है और इसमें अकल्पनीय सकारात्मक सुधार आये हैं।
एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. एम.के. पाण्डे ने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि डाक्टर अपने पेशे से जुड़ी नैतिकता से दूर जा रहे हैं और वे मरीजों के परिजनों से समुचित संवाद नहीं करते। उन्होंने कर्मठता, सही सोच और नया सीखने का मंत्र विद्यार्थियों को दिया। मध्यप्रदेश चेप्टर के अध्यक्ष डा. उदय जिजोरीकर ने कहा कि चिकित्सा संबंधी शासकीय नीतियों के निर्माण में एसोसिएशन को शामिल किया जाना चाहिये। उन्होंने जिला स्तर पर सर्जरी कर रहे डाक्टरों की ऐसे सम्मेलनों में भागीदारी पर बल दिया। सम्मेलन की अध्यक्ष डा. एम.सी. सोनगरा ने बताया कि कान्फ्रेंस में 25 से अधिक अतिथियों के व्याख्यान होंगे और शोध पत्र पढ़े जायेंगे। इसमें 300 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। गांधी चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डा. योगेश वर्मा ने कहा कि इस सम्मेलन से सर्जरी के क्षेत्र में निश्चित ही नये आयाम खुलेंगे। उन्होंने प्राचीन काल से अब तक भारत में शल्य चिकित्सा के विकास पर प्रकाश डाला। डाक्टर अरविन्द राय ने स्वागत भाषण दिया और डाक्टरों को कार्यस्थल पर सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया। सचिव डा. धर्मेन्द्र मेहता ने एसोसिएशन का वार्षिक प्रतिवेदन पढ़ा।
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श्री गुप्ता ने कहा कि सतत सुधार ही किसी भी व्यवसाय में सफलता का मूल मंत्र है। डाक्टरों को अपना ज्ञान सतत बढ़ाते रहना चाहिये और उन्हें चिकित्सा क्षेत्र में विकसित हो रही नई तकनीकों और पद्धतियों का निरंतर अध्ययन करना चाहिये। यह उनके ही नहीं पूरे समाज के भी हित में है, क्योंकि इससे लोगों के जीवन का संबंध है। उन्होंने हा कि ऐसे प्रयास किये जाने चाहिये कि छोटे स्थानों पर कार्यरत डाक्टर भी ऐसे सम्मेलनों में भागीदारी कर सके। इसके लिये सम्मेलनों में उनकी रूचि को बढ़ाये जाने के उपाय किये जाने चाहिये। उन्होंने इस सम्मेलन का भोपाल में आयोजन करने के लिये आयोजकों को बधाई दी और कहा कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की सोच के अनुसार डाक्टरों की समस्याओं के समाधान में डाक्टरों के सुझाव प्राप्त किये जायेंगे। उन्होंने इस अवसर पर एसोसिएशन द्वारा स्थापित पुरस्कार भी प्रदान किये।
संचालक चिकित्सा शिक्षा डा. वी.के. सैनी ने कहा कि चिकित्सा व्यवसाय में सफलता का मूल मंत्र यही रहा है कि चिकित्सक सतत अध्ययन और प्रशिक्षण प्राप्त करते रहे हैं। इसी कारण आज चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव हो सकें हैं। आधुनिक उपकरणों में सर्जरी के काम को आमूल रूप से बदल दिया है और इसमें अकल्पनीय सकारात्मक सुधार आये हैं।
एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. एम.के. पाण्डे ने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि डाक्टर अपने पेशे से जुड़ी नैतिकता से दूर जा रहे हैं और वे मरीजों के परिजनों से समुचित संवाद नहीं करते। उन्होंने कर्मठता, सही सोच और नया सीखने का मंत्र विद्यार्थियों को दिया। मध्यप्रदेश चेप्टर के अध्यक्ष डा. उदय जिजोरीकर ने कहा कि चिकित्सा संबंधी शासकीय नीतियों के निर्माण में एसोसिएशन को शामिल किया जाना चाहिये। उन्होंने जिला स्तर पर सर्जरी कर रहे डाक्टरों की ऐसे सम्मेलनों में भागीदारी पर बल दिया। सम्मेलन की अध्यक्ष डा. एम.सी. सोनगरा ने बताया कि कान्फ्रेंस में 25 से अधिक अतिथियों के व्याख्यान होंगे और शोध पत्र पढ़े जायेंगे। इसमें 300 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। गांधी चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डा. योगेश वर्मा ने कहा कि इस सम्मेलन से सर्जरी के क्षेत्र में निश्चित ही नये आयाम खुलेंगे। उन्होंने प्राचीन काल से अब तक भारत में शल्य चिकित्सा के विकास पर प्रकाश डाला। डाक्टर अरविन्द राय ने स्वागत भाषण दिया और डाक्टरों को कार्यस्थल पर सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया। सचिव डा. धर्मेन्द्र मेहता ने एसोसिएशन का वार्षिक प्रतिवेदन पढ़ा।
Sunday, February 21, 2010
स्वास्थ्य संचालक डॉ. योगीराज शर्मा निलम्बित
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के संचालक
राज्य शासन ने लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के संचालक डॉ. योगीराज शर्मा को निलम्बित कर दिया है। शासन ने इस संबंध में आज आदेश जारी कर दिये हैं।निलम्बन अवधि में डॉ. योगीराज शर्मा का मुख्यालय कार्यालय आयुक्त, स्वास्थ्य सेवाएं, मध्यप्रदेश, भोपाल रहेगा। निलम्बन के दौरान डॉ. शर्मा को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।
उल्लेखनीय है कि डॉ. योगीराज शर्मा के विरुद्ध विभागीय जांच प्रचलित है। विभाग के वरिष्ठतम संचालक के पद पर इनकी पदस्थापना किये जाने से विभागीय जांच प्रभावित होना संभावित है। इसे दृष्टिगत रखते हुए शासन ने डॉ. योगीराज शर्मा को निलम्बित किया है।
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उल्लेखनीय है कि डॉ. योगीराज शर्मा के विरुद्ध विभागीय जांच प्रचलित है। विभाग के वरिष्ठतम संचालक के पद पर इनकी पदस्थापना किये जाने से विभागीय जांच प्रभावित होना संभावित है। इसे दृष्टिगत रखते हुए शासन ने डॉ. योगीराज शर्मा को निलम्बित किया है।
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Monday, January 4, 2010
नई दवा नीति नए वर्ष में लागू होगी
स्वास्थ्य विभाग एवं तमिलनाडु मेडीकल सप्लाई कार्पोरेशन के बीच करारनामा
मध्यप्रदेश के शासकीय, मेडीकल एवं गैस राहत अस्पतालों में इस वर्ष दवाईयों का वितरण और उपलब्धता सुनिश्चित हो जाएगी। ऐसा नई दवा नीति के लागू होने पर होगा। इस संबंध में मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य विभाग और तमिलनाडु के मेडीकल सप्लाई कार्पोरेशन के बीच एक करारनामे पर हस्ताक्षर हुए। यह जानकारी लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, जैव विविधता एवं प्रौद्योगिकी तथा जनशिकायत निवारण मंत्री श्री अनूप मिश्रा ने दी।स्वास्थ्य मंत्री श्री अनूप मिश्रा ने बताया कि नई दवा नीति नए साल के अगले दो-तीन माह में लागू हो जाएगी। वर्तमान में इसके लागू होने तक लघु उद्योग निगम ने अनुबंधित दवा प्रदायकर्त्ता इकाईयों से जो दरे निर्धारित की हैं उन दरों पर दवाइयों के क्रय के लिये राज्य शासन ने स्वास्थ्य विभाग को अधिकृत किया है।
श्री मिश्रा ने बताया कि अगले दो साल तक नई दवा नीति के तहत दवाइयों, चिकित्सकीय उपकरणों तथा अन्य सामग्री की उपलब्धता तथा वितरण के लिए गत माह तमिलनाडु मेडीकल सप्लाई कार्पोरेशन से करारनामा किया गया।
इस करारनामे के मुताबिक तमिलनाडु का यह उपक्रम स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सा शिक्षा विभाग एवं गैस राहत विभाग के अस्पतालों में लगने वाली दवाइयों, उपकरणों, सूचर्स एवं अन्य सामग्री की क्रय दर निर्धारित करेगा। इस संबंध में विभागों के अस्पतालों के संबंधित चिकित्सा अधिकारियों ने दवाइयों, उपकरणों तथा अन्य सामग्रियों के संबंध में अपनी जरूरते तय कर ली हैं। इसकी सूची तमिलनाडु के उपक्रम को भेज दी गई है।
तमिलनाडु मेडीकल कार्पोरेशन के प्रबंध संचालक श्री संदीप सक्सेना ने 30 दिसम्बर को भोपाल आकर चिकित्सा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर करारनामे के क्रियान्वयन को अंतिम रूप दिया। तमिलनाडु द्वारा एक निविदा दस्तावेज तैयार किया है। इसका अनुमोदन स्वास्थ्य विभाग की निविदा निर्णायक समिति करेगी। उसके एक हफ्ते अर्थात जनवरी प्रथम सप्ताह में दवाइयों, उपकरणों तथा अन्य सामग्रियों की निविदाएं जारी हो जाएंगी।
तमिलनाडु मेडीकल कार्पोरेशन के प्रबंध संचालक श्री संदीप सक्सेना ने 30 दिसम्बर को भोपाल आकर चिकित्सा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर करारनामे के क्रियान्वयन को अंतिम रूप दिया। तमिलनाडु द्वारा एक निविदा दस्तावेज तैयार किया है। इसका अनुमोदन स्वास्थ्य विभाग की निविदा निर्णायक समिति करेगी। उसके एक हफ्ते अर्थात जनवरी प्रथम सप्ताह में दवाइयों, उपकरणों तथा अन्य सामग्रियों की निविदाएं जारी हो जाएंगी।
निविदा भरने वाली इकाईयों से जनवरी के दूसरे सप्ताह में 'प्री विड' कांफ्रेंस रखी जाएगी जिसमें उनकी जिज्ञासाओं के उत्तर दिए जाएंगे। इस पूरी प्रक्रिया के पूरी होने के पंद्रह दिन बाद संभवत: मार्च के प्रथम सप्ताह में दरों का निर्धारण हो जाएगा। ये दरें एवं अनुबंधकर्त्ता इकाइयों की सूची चिकित्सा शिक्षा, गैस राहत एवं जिला शासकीय अस्पतालों को सौंप दी जाएगी। इसके आधार पर वे अपनी आवश्यकता के मुताबिक सीधे संबंधित विक्रयकर्त्ता इकाई को दवाइयों एवं उपकरणों के क्रय आदेश दे सकेंगे।
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Sunday, January 3, 2010
स्वाईन-फ्लू नियंत्रण के लिये गंभीर रहे स्वास्थ्य महकमा
प्रदेश में स्वाईन-फ्लू के कुल 23 रोगी उपचार के लिये भर्ती
मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने प्रदेश में स्वाईन-फ्लू रोग के समुचित नियंत्रण के लिये स्वास्थ्य विभाग के अमले को लगातार सजग रहने के निर्देश दिये हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज शाम मंत्रालय में प्रदेश में स्वाईन-फ्लू नियंत्रण की व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहे थे।मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि वर्तमान में यह रोग नियंत्रण में है लेकिन अतिरिक्त सतर्कता आवश्यक है। सार्वजनिक स्वच्छता पर पूरा ध्यान रखते हुए पर्याप्त जांच उपकरणों एवं दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाये।
बैठक में स्वास्थ्य आयुक्त श्री एस.आर. मोहंती ने जानकारी दी कि वर्तमान में प्रदेश में स्वाईन-फ्लू के कुल 23 रोगी उपचार के लिये भर्ती हैं। इनमें जबलपुर में 3, भोपाल में 6 और इंदौर में 14 रोगी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं।
बैठक में स्वास्थ्य आयुक्त श्री एस.आर. मोहंती ने जानकारी दी कि वर्तमान में प्रदेश में स्वाईन-फ्लू के कुल 23 रोगी उपचार के लिये भर्ती हैं। इनमें जबलपुर में 3, भोपाल में 6 और इंदौर में 14 रोगी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं।
इन रोगियों को आईसोलेशन वार्ड में दाखिल कर आवश्यक औषधियां दी जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा रेल्वे स्टेशन, बस स्टैंड, एयरपोर्ट आदि पर आवश्यक व्यवस्थाओं के अलावा 400 चिकित्सकों को रोग के उपचार का प्रशिक्षण दिया गया है।
इंदौर में एम.वाय. अस्पताल सहित पांच अस्पतालों में स्वाईन-फ्लू के इलाज की पूर्ण व्यवस्था है। बैठक में प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा एवं आयुष श्रीमती विजया श्रीवास्तव और स्वास्थ्य संचालक डॉ. अशोक शर्मा उपस्थित थे।
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Friday, December 25, 2009
स्वाईन फ्लू के नियंत्रण की जिम्मेदारी संभागीय आयुक्तों एवं जिला कलेक्टरों की
संभागीय आयुक्तों एवं जिलाध्यक्षों को भेजे गये परिपत्र
स्वाईन फ्लू की प्रभावी रोकथाम के लिये अब संभागीय कमिश्नर और कलेक्टर को भी जिम्मेदारी दी गई है। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री अनूप मिश्रा के निर्देश पर राज्य शासन ने आज सभी संभागीय आयुक्तों और जिला कलेक्टरों को एक परिपत्र भेजकर इस संबंध में सूचित किया।
संभागीय आयुक्तों एवं जिलाध्यक्षों को भेजे गये परिपत्र में कहा गया है कि स्वाईन फ्लू के रोकथाम, जाँच, निदान व उपचार की गतिविधियों की निरंतर समीक्षा व मॉनीटरिंग करें एवं स्वाईन फ्लू के नियंत्रण में सहयोग दें।परिपत्र में बताया गया है कि सभी मेडिकल अस्पतालों, जिला अस्पतालों को स्वाईन फ्लू के इलाज के लिये चिन्हित किया गया है। स्वाईन फ्लू रोग के नियंत्रण के लिये जो व्यवस्थाएं की गई हैं उसी निरंतर समीक्षा कर उसमें कमियों को दूर करने के साथ ही राज्य स्तर पर जो सहयोग की आवश्यकता हो उसकी जानकारी सर्वोच्च प्राथमिकता पर दें।
स्वाईन फ्लू को लेकर आज नियमित होने वाली स्वास्थ्य विभाग की वीडियो क्रान्फ्रेंसिग में सभी जिला कलेक्टरों को शासन उपरोक्त मंशा से अवगत कराते हुये स्वाईन फ्लू को लेकर किये जाने वाले बचाव नियंत्रण की भी जानकारी दी गई। स्वास्थ्य सचिव श्री एस.आर. मोहंती ने वीडियो क्रान्फ्रेंसिग में कहा कि लोगों में स्वाईन फ्लू से बचाव और सावधान रहने की जागरूकता पैदा करें ताकि इस रोग को जड़ से ही समाप्त किया जा सके।
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स्वाईन फ्लू को लेकर आज नियमित होने वाली स्वास्थ्य विभाग की वीडियो क्रान्फ्रेंसिग में सभी जिला कलेक्टरों को शासन उपरोक्त मंशा से अवगत कराते हुये स्वाईन फ्लू को लेकर किये जाने वाले बचाव नियंत्रण की भी जानकारी दी गई। स्वास्थ्य सचिव श्री एस.आर. मोहंती ने वीडियो क्रान्फ्रेंसिग में कहा कि लोगों में स्वाईन फ्लू से बचाव और सावधान रहने की जागरूकता पैदा करें ताकि इस रोग को जड़ से ही समाप्त किया जा सके।
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Wednesday, December 2, 2009
लगझमवर्ग (यूरोप) के राजदूत द्वारा ब्लड बैंक की सराहना
रेडक्रास सोसायटी द्वारा संचालित ब्लड बैंक
लगझमवर्ग (यूरोप) के भारत स्थित राजदूत श्री मार्क कॉरटे ने रेडक्रास सोसायटी द्वारा संचालित ब्लड बैंक की व्यवस्थाओं और वहां उपलब्ध सुविधाओं की सराहना की है। श्री कॉरटे आज अपने भोपाल प्रवास के दौरान रेडक्रास के ब्लड बैंक का अवलोकन करने पहुंचे थे।
इस अवसर पर मध्यप्रदेश रेडक्रास सोसायटी राज्य शाखा के चेयरमेन डॉ. विश्वास तिवारी, सचिव श्री एन.के. शर्मा एवं ब्लड बैंक के डायरेक्टर डॉ. व्ही.डब्ल्यू. कवठेकर उपस्थित थे।
लगझमवर्ग के राजदूत श्री मार्क कॉरटे ने कहा कि रक्तदान एक ऐसा सामाजिक कार्य है जिसे हर व्यक्ति को करना चाहिये। यह कार्य लोगों के जीवन से जुड़ा है और कई जिंदगियों को सहारा प्रदान करता है। श्री कॉरटे ने रेडक्रास ब्लड बैंक की विभिन्न व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की और उन्होंने रक्तदान कर रहे लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर रेडक्रास सोसायटी की राज्य शाखा ने भोज इन्फार्मेशन टेक्नालॉजी एण्ड आफिस ऑटोमेशन डीलर्स एसोसिएशन के सहयोग से एड्स दिवस पर रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया था।
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लगझमवर्ग के राजदूत श्री मार्क कॉरटे ने कहा कि रक्तदान एक ऐसा सामाजिक कार्य है जिसे हर व्यक्ति को करना चाहिये। यह कार्य लोगों के जीवन से जुड़ा है और कई जिंदगियों को सहारा प्रदान करता है। श्री कॉरटे ने रेडक्रास ब्लड बैंक की विभिन्न व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की और उन्होंने रक्तदान कर रहे लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर रेडक्रास सोसायटी की राज्य शाखा ने भोज इन्फार्मेशन टेक्नालॉजी एण्ड आफिस ऑटोमेशन डीलर्स एसोसिएशन के सहयोग से एड्स दिवस पर रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया था।
Tuesday, December 1, 2009
एड्स के खिलाफ समाज के जिम्मेदार लोग आगे आयें
प्रदेश में 55 रक्तकोष के माध्यम से एक लाख यूनिट रक्त एकत्रित
एड्स के खतरे से समाज को बचाने एवं सुरक्षित रखने के लिए समाज के जिम्मेदार लोग आगे आएं और एड्स के खिलाफ संयुक्त संघर्ष अभियान छेड़ें। यह अपील लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, जैव विविधता एवं प्रौद्योगिकी तथा जन-शिकायत निवारण मंत्री श्री अनूप मिश्रा ने की। श्री मिश्रा ने कहा कि प्रदेश में एड्स से बचाव एवं जागरूकता लाने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक अभियान छेड़ा है तथा ठोस कदम उठाए हैं।
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री अनूप मिश्रा ने बताया कि प्रदेश में एड्स के बचाव के लिए चलाए जा रहे रक्त सुरक्षा कार्यक्रम के तहत 55 रक्तकोष कार्यरत हैं जिनसे अभी तक एक लाख अठारह हजार 838 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया जिसमें स्वैच्छिक रक्तदान से 99 हजार 525 यूनिट रक्त शामिल है। श्री मिश्रा ने बताया कि एड्स के खतरे के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान भी पूरे प्रदेश में चलाया जा रहा है।जिसमें आकाशवाणी, दूरदर्शन के अलावा गोष्ठी, सेमिनार, चिन्हांकित क्षेत्रों में तथा युवाओं आदि में जागृति लाने तथा उन्हें एड्स से बचाव के लिए जागरूक करने का कार्य किया जा रहा है। एड्स बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए जेल, महिला बाल विकास, पंचायत एवं उच्च शिक्षा विभाग के साथ मिलकर संयुक्त गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
स्वास्थ्य मंत्री श्री मिश्रा ने बताया कि प्रदेश में 58 एस.टी.डी. क्लीनिक के माध्यम से 48 हजार से अधिक रोगियों का उपचार किया गया एवं एड्स कार्यक्रम को स्वास्थ्य कार्यक्रमों का ही एक हिस्सा बनाकर जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों को भी इसकी जिम्मेदारी दी गई है। परिवार नियोजन के साधनों के माध्यम से एड्स रोकने के लिए प्रदेश में एक करोड़ के लगभग बचाव के साधन वितरित किए गए। एकीकृत परामर्श एवं जांच केन्द्रों के माध्यम से 128 आय.सी.टी.सी. केन्द्रों में 67 हजार से अधिक एच.आय.व्ही. की जांच की गई।
स्वास्थ्य मंत्री श्री मिश्रा ने बताया कि प्रदेश में 58 एस.टी.डी. क्लीनिक के माध्यम से 48 हजार से अधिक रोगियों का उपचार किया गया एवं एड्स कार्यक्रम को स्वास्थ्य कार्यक्रमों का ही एक हिस्सा बनाकर जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों को भी इसकी जिम्मेदारी दी गई है। परिवार नियोजन के साधनों के माध्यम से एड्स रोकने के लिए प्रदेश में एक करोड़ के लगभग बचाव के साधन वितरित किए गए। एकीकृत परामर्श एवं जांच केन्द्रों के माध्यम से 128 आय.सी.टी.सी. केन्द्रों में 67 हजार से अधिक एच.आय.व्ही. की जांच की गई।
शिशुओं को एड्स संक्रमण से बचाने के लिए प्रदेश के पांच चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रिवेंशल ऑफ पेरेंट टू चाइल्ड ट्रांसमिशन केन्द्र स्थापित किए गए हैं जिनमें एच.आई.व्ही. पॉजिटिव 59 हजार से अधिक गर्भवती महिलाओं का परीक्षण कर शिशुओं को संक्रमण से बचाने के उपाय किए गए।
एड्स मरीजों को नि:शुल्क इलाज एवं दवाएं उपलब्ध कराने के लिए स्थापित ए.आय.टी. केन्द्रों से 3028 एड्स रोगियों को दवा उपलब्ध कराई गई। कम्युनिटी केयर सेंटर प्रदेश में सात स्थापित किए गए हैं जहां एड्स पीड़ित व्यक्तियों को दवाओं के प्रभाव की निगरानी मनोवैज्ञानिक सहायता, पोषण आहार संबंधी मदद की जाती है। उन्हें इसके लिए सेंटर में 5 से 15 दिन तक भर्ती रखा जाता है।
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Thursday, November 26, 2009
लोकायुक्त के शिकंजे में फंसे तीन डॉक्टर
अदालत ने सुनाई 2-2 साल की सजा
आमदनी से ज्यादा दौलत इकट्ठा करना सतना जिला अस्तपाल के एक तत्कालीन डॉक्टर दंपत्ति और एक अन्य डॉक्टर को भारी पड़ा। पहले ये तीनों लोकायुक्त के शिकंजे में फंसे और अब अदालत ने इनमें से दो डॉक्टरों को इस मामले का दोषी पाकर दो-दो साल की सजा सुना दी है।
भ्रष्टाचार करने वाले ये चिकित्सक थे डॉ. सरोज कुमार जैन, डॉ श्रीमती सुधा जैन और डॉ. राजेश जैन।इनमें से डॉक्टर सरोज जैन का देहांत हो चुका है। वर्ष 1996 में लोकायुक्त ने शिकायत पर इस डॉक्टर दंपत्ति और एक अन्य डॉक्टर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण का मामला पंजीबद्ध किया था। इसके तत्काल बाद बाकायदा छापा मार कर इस सिलसिले में पड़ताल की गई।
इसमें आरोपी डॉक्टर दंपत्ति के पास भारी दौलत की जानकारी मिली। उस वक्त डॉ. सरोज कुमार जैन सतना जिला चिकित्सालय में अधीक्षक और उनकी पत्नी डॉ. श्रीमती सुधा जैन सहायक शल्य चिकित्सक पदस्थ थे। इन्होंने भ्रष्टाचार कर ज्ञात आय की तुलना में बहुत अधिक संपत्ति इकट्ठा की थी।
लोकायुक्त की पड़ताल में डॉक्टर दंपत्ति के पास सतना शहर में ओव्हर ब्रिज के सामने तीन मंजिला नर्सिंग होम, प्रभात बिहार कॉलोनी सतना में दो एमआईजी भवन, एक कार और उनके निवास में विलासिता का सामान, सोने-चाँदी के जेवरात, नगदी, शेयर्स और बैंक बैलेंस पाया गया था। बात यहीं तक नहीं थी, पड़ताल में एलआईसी पॉलिसी, आठ भूखण्ड, वाहन, एनएससी, यूटीआई और एसबीआई म्यूचअल फण्ड आदि पर लाखों रुपए खर्च करना पाया गया। कुल संपत्ति उस वक्त ही करोड़ रुपए से अधिक थी।
लोकायुक्त पुलिस ने मामले की पूरी छानबीन कर इसका सतना की विशेष अदालत में बाकायदा चालान पेश किया था। लेकिन अदालत में ट्रायल के दौरान ही आरोपी डॉ. सरोज कुमार जैन का देहांत हो गया था।
सतना की विशेष अदालत ने दो दिन पहले 23 नवंबर को दिए अपने फैसले में डॉ. सरोज कुमार जैन की पत्नी डॉ. श्रीमती सुधा जैन और एक अन्य चिकित्सक डॉ. राजेश कुमार जैन को दोषी पाकर उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1) ई सहपठित धारा 13(2) के तहत 2-2 साल के सश्रम कारावास और 25 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है। इसी तरह इन दोनों डॉक्टरों को पृथक से भारतीय दंड विधान की धारा 420 और 120 के तहत भी 2-2 साल के सश्रम कारवास और 25-25 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है।
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लोकायुक्त की पड़ताल में डॉक्टर दंपत्ति के पास सतना शहर में ओव्हर ब्रिज के सामने तीन मंजिला नर्सिंग होम, प्रभात बिहार कॉलोनी सतना में दो एमआईजी भवन, एक कार और उनके निवास में विलासिता का सामान, सोने-चाँदी के जेवरात, नगदी, शेयर्स और बैंक बैलेंस पाया गया था। बात यहीं तक नहीं थी, पड़ताल में एलआईसी पॉलिसी, आठ भूखण्ड, वाहन, एनएससी, यूटीआई और एसबीआई म्यूचअल फण्ड आदि पर लाखों रुपए खर्च करना पाया गया। कुल संपत्ति उस वक्त ही करोड़ रुपए से अधिक थी।
लोकायुक्त पुलिस ने मामले की पूरी छानबीन कर इसका सतना की विशेष अदालत में बाकायदा चालान पेश किया था। लेकिन अदालत में ट्रायल के दौरान ही आरोपी डॉ. सरोज कुमार जैन का देहांत हो गया था।
सतना की विशेष अदालत ने दो दिन पहले 23 नवंबर को दिए अपने फैसले में डॉ. सरोज कुमार जैन की पत्नी डॉ. श्रीमती सुधा जैन और एक अन्य चिकित्सक डॉ. राजेश कुमार जैन को दोषी पाकर उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1) ई सहपठित धारा 13(2) के तहत 2-2 साल के सश्रम कारावास और 25 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है। इसी तरह इन दोनों डॉक्टरों को पृथक से भारतीय दंड विधान की धारा 420 और 120 के तहत भी 2-2 साल के सश्रम कारवास और 25-25 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है।
Thursday, November 19, 2009
स्वास्थ्य सेवाओं पर डली नकेल
काम में मनाही पड़ेगी भारी, अत्यावश्यक सेवा का बंदोबस्त, होगी कानूनी कार्रवाई
राज्य सरकार ने चिकित्सा और स्वास्थ्य प्रशासन में कसावट लाने के मकसद से इनकी सेवाओं पर नकेल डाल दी है। आज इस सिलसिले में जारी निर्देश में उसने साफ किया है कि इन महकमों के अमले को अब काम में मनाही या कोताही करना भारी पड़ जाएगा।
इस अनुशासन को यथार्थ की कसौटी पर अंजाम देने के लिए दोषी के खिलाफ बाकायदा कानूनी कार्रवाई का बंदोबस्त किया गया है। यह फैसला इन सेवाओं को अत्यावश्यक घोषित किए जाने के चलते किया गया है।
चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाएं सीधे तौर पर लोगों की जिंदगी से जुड़ी हुई हैं।
चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाएं सीधे तौर पर लोगों की जिंदगी से जुड़ी हुई हैं।
बीते वक्त में खास कर ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी शिकायतों से दो-चार होना सामान्य बात थी जबकि कोई डॉक्टर, कम्पाउण्डर या अन्य कर्मचारी ड्यूटी पर गैरहाजिर मिले। और तो और ऐसा कर्मचारी कोई भी हीला-हवाला देकर काम में मनाही करें या फिर मरीज से दुर्व्यवहार कर बैठे। इन्हीं दुष्प्रवृत्तियों को रोकने राज्य सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को अत्यावश्यक घोषित करने का अहम फैसला भी किया।
राज्य सरकार का ताजा निर्देश अत्यावश्यक सेवा के फैसले को असल में ज़ामा पहनाने के मकसद पर टिका है। इस संबंध में माना गया है कि अनुशासन की मंशा बगैर कड़ी कार्रवाई के पूरी नहीं हो सकेगी। इसीलिए लापरवाह और गैरजिम्मेदार अमले पर मध्यप्रदेश अत्यावश्यक सेवा संधारण और विच्छिन्नता निवारण अधिनियम 1979 के तहत कार्रवाई का मन बना लिया गया है।
राज्य सरकार का ताजा निर्देश अत्यावश्यक सेवा के फैसले को असल में ज़ामा पहनाने के मकसद पर टिका है। इस संबंध में माना गया है कि अनुशासन की मंशा बगैर कड़ी कार्रवाई के पूरी नहीं हो सकेगी। इसीलिए लापरवाह और गैरजिम्मेदार अमले पर मध्यप्रदेश अत्यावश्यक सेवा संधारण और विच्छिन्नता निवारण अधिनियम 1979 के तहत कार्रवाई का मन बना लिया गया है।
सरकार ने यह साफ किया है कि उसके इस कानूनी कदम के दायरे में प्रदेश के सभी चिकित्सा, दंत चिकित्सा, यूनानी और होम्योपैथी महाविद्यालय तथा उनसे जुड़े अस्पताल भी शामिल होंगे। इसी तरह सारे सरकारी चिकित्सालय, औषधालय, स्वास्थ्य केन्द्र और स्वास्थ्य शिक्षा संस्थानों पर यह फैसला लागू होगा।
मरीजों के लिए यह खुशगवार बात है कि उन्हें इलाज में अब चिकित्सा स्टाफ के किसी नकारात्मक रवैये का सामना नहीं करना पड़ेगा। दूसरी तरफ ऐसी हिमाकत के चलते और सजाओं के साथ ही स्टॉफ की नौकरी पर भी बन सकती है।
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मरीजों के लिए यह खुशगवार बात है कि उन्हें इलाज में अब चिकित्सा स्टाफ के किसी नकारात्मक रवैये का सामना नहीं करना पड़ेगा। दूसरी तरफ ऐसी हिमाकत के चलते और सजाओं के साथ ही स्टॉफ की नौकरी पर भी बन सकती है।
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Tuesday, November 10, 2009
जननी सहयोगी एक्सप्रेस योजना जुड़ेगी 108 एंबूलेंस से
हर जिला अस्पताल में होंगे ट्रामा सेन्टर
Bhopal:Monday, November 9, 2009: जननी सहयोगी एक्सप्रेस योजना को 108 एंबूलेंस से जोड़ा जाएगा, साथ ही हर संभाग के बाद हर जिला अस्पताल में ट्रामा सेंटर खोला जाएगा। अत्याधुनिक एंबुलेंस ई.एम.आर.आई. 108 के 108 दिन पूरे होने के बाद आयोजित एक समारोह में लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, जैव प्रौद्योगिकी, जैव विविधता एवं जन-शिकायत निवारण मंत्री श्री अनूप मिश्रा ने यह जानकारी दी।स्वास्थ्य मंत्री श्री मिश्रा ने कहा कि यह खुशी की बात है कि 108 का हमारा प्रयोग काफी सफल रहा है। हादसों एवं स्वाभाविक बीमारियों से ग्रसित मरीज जिन्हें त्वरित इलाज की आवश्यकता होती है उन्हें इसके जरिए समय पर चिकित्सा मिली यह प्रसन्नता की बात है।
उन्होंने कहा कि हमारा इस सुविधा का पूरे प्रदेश में विस्तार करने की योजना है। श्री मिश्रा ने बताया कि पूरे प्रदेश में इसके लिए 700-800 108 एंबूलेंस की आवश्यकता होगी। अभी हमने प्रदेश के सभी छै मेडिकल कॉलेज में यह सुविधा प्रदान की है इसके लिये सोलह करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं।
उन्नीस एंबुलेंस अभी हमने और चाही हैं। अगले तीन माह में हमें सौ और 108 चाहिए, जो सड़कों पर लोगों को त्वरित इलाज के लिए 24 घंटे उपलब्ध रहें। श्री मिश्रा ने बताया कि अत्याधुनिक एंबुलेंस उपलब्ध कराने के पूर्व हम हर जिला अस्पताल में आवश्यक तैयारियों भी कर रहे हैं ताकि आकस्मिक चिकित्सा वाल मरीज को तत्काल चिकित्सा मिले।
इसके लिए हम हर जिले में कॉल सेंटर खोल रहे हैं। जिसे हम 108 से लिंक करेंगे अभी तक ग्यारह जिलों में कॉल सेंटर खोलने की दिशा में कार्य प्रारंभ हो गया है। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि इसके साथ ही हम आकस्मिक चिकित्सा यूनिट को सशक्त बनाने जा रहे हैं।
सबसे पहले सभी छै मेडिकल कॉलेज फिर संभागीय स्तर पर और इसके बाद हर जिला अस्पताल में आकस्मिक चिकित्सा यूनिट 24 घंटे काम करे और इसमें सभी त्वरित चिकित्सीय व्यवस्था हो यह हमारा लक्ष्य है।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि हम इस पर भी विचार कर रहे हैं कि जननी सहयोगी एक्सप्रेस योजना को 108 से लिंक करें। इसके लिए उन्होंने वी.के. संस्थान से एक पूरा प्लान बनाकर देने को कहा। स्वास्थ्य मंत्री श्री मिश्रा ने एंबूलेंस 108 के 116 दिन पूरे होने पर उसके संचालकों कर्मचारियों को बधाई दी कि उनका काम बेहतर रहा है। आगे भी उनकी सेवाएं उत्कृष्ट हों यह स्वास्थ्य मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया।
प्रारंभ में स्वास्थ्य मंत्री ने 108 के सफलतम 116 दिन पूरे होने पर एक केक काटा। इस अवसर पर जी.वी.के.ई.एम.आर.आई. के प्रमुख श्री सरकार ने बताया कि वर्तमान में पचपन 108 एंबूलेंस चल रही हैं। सोलह जुलाई 2009 से प्रारंभ हुई इन एंबूलेंस को वर्तमान में भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और इंदौर में चलाया जा रहा है।
इसके जरिए 92 लाख आबादी को कवर किया जा रहा है। साढ़े चार सौ से अधिक लोग इस सेवा से जुड़े हैं। श्री सरकार ने बताया कि 108 के लिये आने वाले 92 प्रतिशत फोन को पहली घंटी में उठा लिया जाता है। सोलह हजार मरीजों को इसका लाभ मिला है।
यह एंबूलेंस सूचना मिलने पर 19 मिनिट में शहरी क्षेत्र में तथा 28 मिनिट में ग्रामीण क्षेत्र में मौके पर पहुंच जाती है। अभी तक इसके जरिए 1500 लोगों की जान बचाई जा चुकी है।
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