गृह मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता सीएमई के 27वें वार्षिक सम्मेलन में
गृह मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता ने कहा है कि कार्यस्थल पर डाक्टरों को सुरक्षा सुनिश्चित किया जाना बहुत जरूरी है और इसके लिये ठोस प्रयास भी किये गये हैं। लेकिन साथ ही डाक्टरों को भी अपने व्यवहार की ओर ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्हें मरीज के परिजनों की भावनात्मक स्थिति को समझते हुये उनके साथ समुचित संवाद करना चाहिये जिससे कि उत्तेजना की स्थिति उत्पन्न न हो।श्री गुप्ता आज यहां गांधी चिकित्सा महाविद्यालय में एसोसिएशन ऑफ सर्जन ऑफ इण्डिया के 27वें वार्षिक सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। इसका आयोजन एसोसिएशन के मध्यप्रदेश चेप्टर और सेन्टर जोन सीएमई ने किया। सम्मेलन की थीम है‘‘इम्प्रुविंग द आउटकम’’ इसमें देश और विदेश के 300 से अधिक सर्जन और विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।
श्री गुप्ता ने कहा कि सतत सुधार ही किसी भी व्यवसाय में सफलता का मूल मंत्र है। डाक्टरों को अपना ज्ञान सतत बढ़ाते रहना चाहिये और उन्हें चिकित्सा क्षेत्र में विकसित हो रही नई तकनीकों और पद्धतियों का निरंतर अध्ययन करना चाहिये। यह उनके ही नहीं पूरे समाज के भी हित में है, क्योंकि इससे लोगों के जीवन का संबंध है। उन्होंने हा कि ऐसे प्रयास किये जाने चाहिये कि छोटे स्थानों पर कार्यरत डाक्टर भी ऐसे सम्मेलनों में भागीदारी कर सके। इसके लिये सम्मेलनों में उनकी रूचि को बढ़ाये जाने के उपाय किये जाने चाहिये। उन्होंने इस सम्मेलन का भोपाल में आयोजन करने के लिये आयोजकों को बधाई दी और कहा कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की सोच के अनुसार डाक्टरों की समस्याओं के समाधान में डाक्टरों के सुझाव प्राप्त किये जायेंगे। उन्होंने इस अवसर पर एसोसिएशन द्वारा स्थापित पुरस्कार भी प्रदान किये।
संचालक चिकित्सा शिक्षा डा. वी.के. सैनी ने कहा कि चिकित्सा व्यवसाय में सफलता का मूल मंत्र यही रहा है कि चिकित्सक सतत अध्ययन और प्रशिक्षण प्राप्त करते रहे हैं। इसी कारण आज चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव हो सकें हैं। आधुनिक उपकरणों में सर्जरी के काम को आमूल रूप से बदल दिया है और इसमें अकल्पनीय सकारात्मक सुधार आये हैं।
एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. एम.के. पाण्डे ने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि डाक्टर अपने पेशे से जुड़ी नैतिकता से दूर जा रहे हैं और वे मरीजों के परिजनों से समुचित संवाद नहीं करते। उन्होंने कर्मठता, सही सोच और नया सीखने का मंत्र विद्यार्थियों को दिया। मध्यप्रदेश चेप्टर के अध्यक्ष डा. उदय जिजोरीकर ने कहा कि चिकित्सा संबंधी शासकीय नीतियों के निर्माण में एसोसिएशन को शामिल किया जाना चाहिये। उन्होंने जिला स्तर पर सर्जरी कर रहे डाक्टरों की ऐसे सम्मेलनों में भागीदारी पर बल दिया। सम्मेलन की अध्यक्ष डा. एम.सी. सोनगरा ने बताया कि कान्फ्रेंस में 25 से अधिक अतिथियों के व्याख्यान होंगे और शोध पत्र पढ़े जायेंगे। इसमें 300 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। गांधी चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डा. योगेश वर्मा ने कहा कि इस सम्मेलन से सर्जरी के क्षेत्र में निश्चित ही नये आयाम खुलेंगे। उन्होंने प्राचीन काल से अब तक भारत में शल्य चिकित्सा के विकास पर प्रकाश डाला। डाक्टर अरविन्द राय ने स्वागत भाषण दिया और डाक्टरों को कार्यस्थल पर सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया। सचिव डा. धर्मेन्द्र मेहता ने एसोसिएशन का वार्षिक प्रतिवेदन पढ़ा।
श्री गुप्ता ने कहा कि सतत सुधार ही किसी भी व्यवसाय में सफलता का मूल मंत्र है। डाक्टरों को अपना ज्ञान सतत बढ़ाते रहना चाहिये और उन्हें चिकित्सा क्षेत्र में विकसित हो रही नई तकनीकों और पद्धतियों का निरंतर अध्ययन करना चाहिये। यह उनके ही नहीं पूरे समाज के भी हित में है, क्योंकि इससे लोगों के जीवन का संबंध है। उन्होंने हा कि ऐसे प्रयास किये जाने चाहिये कि छोटे स्थानों पर कार्यरत डाक्टर भी ऐसे सम्मेलनों में भागीदारी कर सके। इसके लिये सम्मेलनों में उनकी रूचि को बढ़ाये जाने के उपाय किये जाने चाहिये। उन्होंने इस सम्मेलन का भोपाल में आयोजन करने के लिये आयोजकों को बधाई दी और कहा कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की सोच के अनुसार डाक्टरों की समस्याओं के समाधान में डाक्टरों के सुझाव प्राप्त किये जायेंगे। उन्होंने इस अवसर पर एसोसिएशन द्वारा स्थापित पुरस्कार भी प्रदान किये।
संचालक चिकित्सा शिक्षा डा. वी.के. सैनी ने कहा कि चिकित्सा व्यवसाय में सफलता का मूल मंत्र यही रहा है कि चिकित्सक सतत अध्ययन और प्रशिक्षण प्राप्त करते रहे हैं। इसी कारण आज चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव हो सकें हैं। आधुनिक उपकरणों में सर्जरी के काम को आमूल रूप से बदल दिया है और इसमें अकल्पनीय सकारात्मक सुधार आये हैं।
एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. एम.के. पाण्डे ने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि डाक्टर अपने पेशे से जुड़ी नैतिकता से दूर जा रहे हैं और वे मरीजों के परिजनों से समुचित संवाद नहीं करते। उन्होंने कर्मठता, सही सोच और नया सीखने का मंत्र विद्यार्थियों को दिया। मध्यप्रदेश चेप्टर के अध्यक्ष डा. उदय जिजोरीकर ने कहा कि चिकित्सा संबंधी शासकीय नीतियों के निर्माण में एसोसिएशन को शामिल किया जाना चाहिये। उन्होंने जिला स्तर पर सर्जरी कर रहे डाक्टरों की ऐसे सम्मेलनों में भागीदारी पर बल दिया। सम्मेलन की अध्यक्ष डा. एम.सी. सोनगरा ने बताया कि कान्फ्रेंस में 25 से अधिक अतिथियों के व्याख्यान होंगे और शोध पत्र पढ़े जायेंगे। इसमें 300 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। गांधी चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डा. योगेश वर्मा ने कहा कि इस सम्मेलन से सर्जरी के क्षेत्र में निश्चित ही नये आयाम खुलेंगे। उन्होंने प्राचीन काल से अब तक भारत में शल्य चिकित्सा के विकास पर प्रकाश डाला। डाक्टर अरविन्द राय ने स्वागत भाषण दिया और डाक्टरों को कार्यस्थल पर सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया। सचिव डा. धर्मेन्द्र मेहता ने एसोसिएशन का वार्षिक प्रतिवेदन पढ़ा।
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