Tuesday, March 16, 2010
प्रदेश में ऊर्जा संरक्षण के लिये अधिसूचना जारी
ऊर्जा संरक्षण अधिनियम 2001 के अंतर्गत जारी
राज्य सरकार ने प्रदेश में ऊर्जा के दक्षतापूर्ण उपयोग और उसके संरक्षण के लिये अधिसूचना जारी की है। ऊर्जा संरक्षण अधिनियम 2001 के अंतर्गत जारी इस अधिसूचना के फलस्वरूप अब प्रदेश में ऊर्जा का दक्षतापूर्ण उपयोग और उसका संरक्षण करना अनिवार्य होगा।
Read Full Text......
Labels: EnergyDeptt, MP, Power
Monday, March 8, 2010
मुख्यमंत्री द्वारा सन् 2013 तक 24 घंटे बिजली आपूर्ती क्षमता विकास के निर्देश
मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा प्रदेश में बिजली की स्थिति की समीक्षा
मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने सन् 2013 तक आबादी क्षेत्रों में 24 घंटे और खेती के लिये न्यूनतम 8 घंटे बिजली उपलब्ध करवाने की क्षमता के विकास के निर्देश दिये हैं। श्री चौहान आज मंत्रालय में प्रदेश में बिजली की स्थिति की समीक्षा कर रहे थे। श्री चौहान ने परीक्षाओं के दौरान शहरों और गांवों में पर्याप्त बिजली आपूर्ति पर भी जोर दिया।
Read Full Text......
Monday, February 22, 2010
प्रदेश में इस वर्ष 1512 सर्किट किलोमीटर पारेषण लाईनों का निर्माण
2964 एम.व्ही.ए. क्षमता के अति उच्च दाब उपकेन्द्रों का कार्य भी पूर्ण होगा
प्रदेश में पारेषण प्रणाली के सुदृढ़ीकरण एवं उन्नयन के लिये कारगर कदम उठाये गये हैं। वर्तमान में उप-पारेषण एवं वितरण के क्षेत्र में प्रणाली के सुदृढ़ीकरण, एनर्जी ऑडिट, शत-प्रतिशत मीटरीकरण एवं विद्युत चोरी रोकने के कार्यों को भी प्राथमिकता दी गई है।
इस वर्ष 2009-10 के दौरान 1512 सर्किट किलोमीटर पारेषण लाईनों के निर्माण तथा 2964 एम.व्ही.ए. क्षमता के अति उच्च दाब उप केन्द्रों का निर्माण कार्य पूर्ण किया जायेगा। इसमें से गत माह दिसम्बर तक 589 सर्किट किलोमीटर पारेषण लाईनों एवं 2426 एम.व्ही.ए. क्षमता के अति उच्च दाब उप केन्द्रों के निर्माण कार्य पूर्ण हो चुके हैं। वर्ष 2009-10 में 1376 करोड़ रुपये राशि के उप-पारेषण एवं वितरण के कार्य किये जायेंगे।वर्ष 2009-10 में 1376 करोड़ रुपये के उप-पारेषण एवं वितरण के होंगे कार्य
इस वर्ष 1512 सर्किट किलोमीटर पारेषण लाईनों का निर्माण
2964 एम.व्ही.ए. क्षमता के अति उच्च दाब उप केन्द्रों का कार्य पूर्ण
102 उप केन्द्रों की क्षमता में वृद्धि
6630 नये वितरण ट्रांसफार्मर का कार्य पूर्ण
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2008-09 के दौरान 1296 सर्किट किलोमीटर पारेषण लाईनों के निर्माण एवं 3063 एम.व्ही.ए. क्षमता के अति उच्च दाब उप केन्द्रों के निर्माण का कार्य पूर्ण किया गया है। इसके अलावा उप पारेषण एवं वितरण प्रणाली के सुदृढ़ीकरण के लिये किये गये गंभीर प्रयासों से वर्ष 2008-09 में कुल 208 नम्बर 33/11 के.व्ही. के नये विद्युत उप केन्द्रों का निर्माण, 381 उप केन्द्रों की क्षमता वृद्धि तथा 205 अतिरिक्त ट्रांसफार्मरों की स्थापना की गई तथा 7055 नये वितरण ट्रांसफार्मर लगाये गये।
इसी प्रकार गत माह दिसम्बर तक 1071 किलोमीटर 33 के.व्ही. लाईन, 2821 किलोमीटर, 11 के.व्ही. लाईन, 1261 किलोमीटर निम्न दाब लाईनों के कार्य किये गये हैं। इसके अलावा 134 नये 33/11 के.व्ही. के उप केन्द्र तथा अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाये गये हैं। साथ ही 102 उप केन्द्रों की क्षमता वृद्धि की गई तथा 6630 नये वितरण ट्रांसफार्मर का कार्य भी पूर्ण किया जा चुका है।Read Full Text......
Labels: MP, mpeb, NEWS-Alerts, Power
Friday, February 19, 2010
वर्ष 2013 तक 5186 मेगावाट विद्युत क्षमता वृद्धि का लक्ष्य
क्षमता वृद्धि के लिये 42 कम्पनियों से 55 हजार मेगावाट के एमओयू भी हुये
प्रदेश में बिजली की बढ़ती हुई मांग को देखते हुये विद्युत उत्पादन तथा स्थापित क्षमता बढ़ाने के कारगर प्रयास किये जा रहे हैं। राज्य सरकार प्रदेश को बिजली उत्पादन की दिशा में आत्मनिर्भर बनाने के लिये त्वरित गति से कार्य कर रही है।सरकार ने वर्ष 2013 तक करीब 5186 मेगावाट विद्युत क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। साथ ही निजी कम्पनियों के माध्यम से भी प्रदेश की विद्युत क्षमता वृद्धि के लिये 42 कम्पनियों से लगभग 55 हजार मेगावाट की ताप विद्युत परियोजनाएं लगाये जाने के लिये समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित भी किये गये हैं।
राज्य सरकार ने वर्ष 2013 तक करीब 5186 मेगावाट विद्युत क्षमता वृद्धि करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसमें मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कम्पनी द्वारा 1200 मेगावाट की श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना एवं सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारणी में 500 मेगावाट की विस्तार इकाईयों का कार्य शुरू कर दिया गया है। साथ ही 1600 मेगावाट क्षमता की ताप विद्युत परियोजना की स्थापना खण्डवा जिले में करने के लिये मेसर्स बी.एच.ई.एल. के साथ अनुबंध हो चुका है।
राज्य सरकार ने वर्ष 2013 तक करीब 5186 मेगावाट विद्युत क्षमता वृद्धि करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसमें मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कम्पनी द्वारा 1200 मेगावाट की श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना एवं सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारणी में 500 मेगावाट की विस्तार इकाईयों का कार्य शुरू कर दिया गया है। साथ ही 1600 मेगावाट क्षमता की ताप विद्युत परियोजना की स्थापना खण्डवा जिले में करने के लिये मेसर्स बी.एच.ई.एल. के साथ अनुबंध हो चुका है।
नेशनल थर्मल पावर कार्पोरेशन द्वारा 2640 मेगावाट गाडरवारा, जिला नरसिंहपुर में स्थापित करने के लिये गत 9 नवम्बर को समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया गया। साथ ही रिलायंस कम्पनी द्वारा सिंगरौली जिले में 4 हजार मेगावाट क्षमता की सासन अल्ट्रा मेगा परियोजना की स्थापना की जा रही है। इस परियोजना से प्रदेश को करीब 1600 मेगावाट विद्युत मिलेगी।
Read Full Text......
Labels: agriculture, MP, mpeb, Power
Friday, January 29, 2010
केन्द्र और राज्य सरकार मिलकर बढ़ायें ऊर्जा उत्पादन
खण्डवा में सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट अनुबंध पर हस्ताक्षर
मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा है कि केन्द्र सरकार से मध्यप्रदेश की ऊर्जा परियोजनाओं के लिए पर्यावरण संबंधी क्लीयरेन्स प्राप्त करने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है। आज यह आवश्यक है कि राजनेता निंदा-आलोचना का मार्ग छोड़कर आम जनता के लिए कार्य करें और केन्द्र एवं राज्य सरकार ऊर्जा सहित अन्य क्षेत्रों में मिलकर विकास को गति दें।
मुख्यमंत्री श्री चौहान आज यहां होटल अशोक लेक व्यू में बीएचईएल एवं मध्यप्रदेश पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड के संयुक्त उद्यम के अनुबंध के अवसर पर संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर खण्डवा में कोयला आधारित पावर प्लांट लगाने के लिए मध्यप्रदेश पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (एमपीपीजीसीएल) एवं भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड के संयुक्त उद्यम के लिए संयुक्त अनुबंध पर हस्ताक्षर किये गये। इस संयुक्त उद्यम कंपनी - दादा धूनीवाले खंडवा पॉवर लिमिटेड में बीएचईएल एवं एमपीपीजीसीएल की बराबर की हिस्सेदारी होगी। बाद में कंपनी के विकास के लिये वित्तीय संस्थानों, बैंकों आदि को साझेदार बनाया जाएगा। इस परियोजना की कुल संभावित लागत 10 हजार करोड़ रूपये है।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश तेजी से विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि आने वाले समय की आवश्यकता को ध्यान में रखकर विद्युत उत्पादन इकाईयों की शुरूआत हो। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि निरन्तर विद्युत खपत बढ़ने से विद्युत उत्पादन बढ़ाने और बिजली की बचत के अलावा कोई विकल्प नहीं है। केन्द्र सरकार द्वारा पर्यावरण संबंधी अनुमति समय पर प्राप्त होना चाहिए। आज पर्याप्त बिजली आपूर्ति के लिए एक एकात्मक एवं संतुलित नीति की आवश्यकता है जिसमें पर्यावरण की रक्षा भी सुनिश्चित हो जाए और विद्युत उत्पादन इकाईयों को सुचारू रूप से संचालित किया जा सके। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने खंडवा के पास आठ सौ मेगावाट की दो इकाईयों के पावर प्लांट की प्रथम इकाई साढ़े तीन वर्ष में प्रारंभ किये जाने के संकल्प के लिए केन्द्रीय और भारी उद्योग राज्य मंत्री श्री यादव को बधाई दी। श्री चौहान ने आशा व्यक्त की कि बीएचईएल द्वारा परियोजना के कार्यों को समय पर पूरा किया जायेगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि परियोजनाओं के लिए राज्य सरकार द्वारा भूमि आवंटन सहित अन्य सभी कार्य बिना विलम्ब के किए जायेंगे।
केन्द्रीय भारी उद्योग राज्य मंत्री श्री अरुण यादव ने कहा कि लगभग दो माह पूर्व खण्डवा में सुपर क्रिटिकल पैरामीटर पर थर्मल पावर प्लांट के लिए संयुक्त उद्यम बनाने पर करारनामा हुआ था। बहुत कम समय में यह कार्यवाही पूर्ण की गई। आने वाले चार वर्ष में खण्डवा क्षेत्र पावर हब के रूप में पहचान बना लेगा। मध्यप्रदेश में ऊर्जा उत्पादन की संभावनाओं को साकार करने के लिए वे पूरा सहयोग देंगे। श्री यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की विद्युत उत्पादन इकाईयों की स्थापना के लिए केन्द्र में लंबित पर्यावरणीय अनुमतियों के लिए वे केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री से चर्चा करेंगे।
ऊर्जा राज्य मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रदेश की ऊर्जा परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आ रहे अवरोध समाप्त हो रहे हैं और विद्युत उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों को गति मिल रही है। कार्यक्रम में परिवहन मंत्री श्री जगदीश देवड़ा, मुख्यसचिव श्री राकेश साहनी, ऊर्जा सचिव श्री एस.पी.एस. परिहार उपस्थित थे। बीएचईएल अध्यक्ष एवं प्रबन्ध संचालक श्री बी. प्रसाद राव ने स्वागत भाषण दिया। बीएचईएल के निदेशक (वित्त) श्री सी.एस. वर्मा ने आभार माना।
Read Full Text......
मुख्यमंत्री श्री चौहान आज यहां होटल अशोक लेक व्यू में बीएचईएल एवं मध्यप्रदेश पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड के संयुक्त उद्यम के अनुबंध के अवसर पर संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर खण्डवा में कोयला आधारित पावर प्लांट लगाने के लिए मध्यप्रदेश पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (एमपीपीजीसीएल) एवं भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड के संयुक्त उद्यम के लिए संयुक्त अनुबंध पर हस्ताक्षर किये गये। इस संयुक्त उद्यम कंपनी - दादा धूनीवाले खंडवा पॉवर लिमिटेड में बीएचईएल एवं एमपीपीजीसीएल की बराबर की हिस्सेदारी होगी। बाद में कंपनी के विकास के लिये वित्तीय संस्थानों, बैंकों आदि को साझेदार बनाया जाएगा। इस परियोजना की कुल संभावित लागत 10 हजार करोड़ रूपये है।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश तेजी से विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि आने वाले समय की आवश्यकता को ध्यान में रखकर विद्युत उत्पादन इकाईयों की शुरूआत हो। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि निरन्तर विद्युत खपत बढ़ने से विद्युत उत्पादन बढ़ाने और बिजली की बचत के अलावा कोई विकल्प नहीं है। केन्द्र सरकार द्वारा पर्यावरण संबंधी अनुमति समय पर प्राप्त होना चाहिए। आज पर्याप्त बिजली आपूर्ति के लिए एक एकात्मक एवं संतुलित नीति की आवश्यकता है जिसमें पर्यावरण की रक्षा भी सुनिश्चित हो जाए और विद्युत उत्पादन इकाईयों को सुचारू रूप से संचालित किया जा सके। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने खंडवा के पास आठ सौ मेगावाट की दो इकाईयों के पावर प्लांट की प्रथम इकाई साढ़े तीन वर्ष में प्रारंभ किये जाने के संकल्प के लिए केन्द्रीय और भारी उद्योग राज्य मंत्री श्री यादव को बधाई दी। श्री चौहान ने आशा व्यक्त की कि बीएचईएल द्वारा परियोजना के कार्यों को समय पर पूरा किया जायेगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि परियोजनाओं के लिए राज्य सरकार द्वारा भूमि आवंटन सहित अन्य सभी कार्य बिना विलम्ब के किए जायेंगे।
केन्द्रीय भारी उद्योग राज्य मंत्री श्री अरुण यादव ने कहा कि लगभग दो माह पूर्व खण्डवा में सुपर क्रिटिकल पैरामीटर पर थर्मल पावर प्लांट के लिए संयुक्त उद्यम बनाने पर करारनामा हुआ था। बहुत कम समय में यह कार्यवाही पूर्ण की गई। आने वाले चार वर्ष में खण्डवा क्षेत्र पावर हब के रूप में पहचान बना लेगा। मध्यप्रदेश में ऊर्जा उत्पादन की संभावनाओं को साकार करने के लिए वे पूरा सहयोग देंगे। श्री यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की विद्युत उत्पादन इकाईयों की स्थापना के लिए केन्द्र में लंबित पर्यावरणीय अनुमतियों के लिए वे केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री से चर्चा करेंगे।
ऊर्जा राज्य मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रदेश की ऊर्जा परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आ रहे अवरोध समाप्त हो रहे हैं और विद्युत उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों को गति मिल रही है। कार्यक्रम में परिवहन मंत्री श्री जगदीश देवड़ा, मुख्यसचिव श्री राकेश साहनी, ऊर्जा सचिव श्री एस.पी.एस. परिहार उपस्थित थे। बीएचईएल अध्यक्ष एवं प्रबन्ध संचालक श्री बी. प्रसाद राव ने स्वागत भाषण दिया। बीएचईएल के निदेशक (वित्त) श्री सी.एस. वर्मा ने आभार माना।
Labels: CenterState, CM, MP, Power
Saturday, December 19, 2009
विद्युत की माँग कम होकर 6000 मेगावॉट हुई
विद्युत की उपलब्धता 30 दिसम्बर तक 6400 मेगावॉट रहेगी
प्रदेश में हुई वर्षा के चलते विद्युत की मांग में कमी आई है। आज विद्युत की मांग करीब 6000 मेगावॉट रही है। रबी मौसम में इसके पूर्व कृषि पम्पों के भार की वजह से विद्युत की मांग करीब 6800 मेगावॉट अधिकतम बनी हुई थी।
विद्युत की मांग में आई कमी को ध्यान में रखते हुए जल विद्युत गृहों में आई खराबी को ठीक किया जा रहा है। साथ ही बिगड़े तथा जले ट्रांसफार्मरों को तेजी से दुरूस्त किया जा रहा है। इससे अधिक मांग के समय विद्युत की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
नेटवर्क के प्रभावी उपयोग होने से रबी मौसम में अंतिम छोर तक पर्याप्त वोल्टेज के साथ गुणवत्तापूर्ण विद्युत का प्रदाय किया गया है। गत वर्ष 7500 मेगावॉट के स्थान पर इस वर्ष 6800 मेगावॉट की मांग रही है। इस वर्ष विद्युत प्रदाय में लघु अवधि की विद्युत क्रय करने की आवश्यकता भी नहीं आई है। इसे देखते हुए माह अक्टूबर से 15 दिसम्बर तक लगभग 300 करोड़ रूपये राशि की बचत आँकी गई है। संभागीय एवं जिला मुख्यालयों में भी रात्रि में कोई कटौती नहीं की गई है।
विद्युत नेटवर्क का प्रभावी एंव व्यवस्थित उपयोग हो रहा है। गत वर्ष दिसम्बर माह के मुकाबले इस वर्ष माह दिसम्बर में संभागीय मुख्यालयों को 22 घंटें, जिला मुख्यालयों को 20 घंटें, तहसील मुख्यालयों को 15 घंटें तथा ग्रामीण क्षेत्रों को 10 घंटें विद्युत प्रदाय किया जाना प्रस्तावित है।
विद्युत की अधिकतम उपलब्धता आगामी 30 दिसम्बर तक 6400 मेगावॉट रहेगी। ताप विद्युत गृहों के उचित रखरखाव के चलते आने वाले 15 दिनों में लगभग 2200 मेगावॉट अधिकतम उपलब्धता रहेगी। प्रयास किये जा रहे हैं कि पीएलएफ भी लगभग 75 प्रतिशत बना रहा।
Read Full Text......
नेटवर्क के प्रभावी उपयोग होने से रबी मौसम में अंतिम छोर तक पर्याप्त वोल्टेज के साथ गुणवत्तापूर्ण विद्युत का प्रदाय किया गया है। गत वर्ष 7500 मेगावॉट के स्थान पर इस वर्ष 6800 मेगावॉट की मांग रही है। इस वर्ष विद्युत प्रदाय में लघु अवधि की विद्युत क्रय करने की आवश्यकता भी नहीं आई है। इसे देखते हुए माह अक्टूबर से 15 दिसम्बर तक लगभग 300 करोड़ रूपये राशि की बचत आँकी गई है। संभागीय एवं जिला मुख्यालयों में भी रात्रि में कोई कटौती नहीं की गई है।
विद्युत नेटवर्क का प्रभावी एंव व्यवस्थित उपयोग हो रहा है। गत वर्ष दिसम्बर माह के मुकाबले इस वर्ष माह दिसम्बर में संभागीय मुख्यालयों को 22 घंटें, जिला मुख्यालयों को 20 घंटें, तहसील मुख्यालयों को 15 घंटें तथा ग्रामीण क्षेत्रों को 10 घंटें विद्युत प्रदाय किया जाना प्रस्तावित है।
विद्युत की अधिकतम उपलब्धता आगामी 30 दिसम्बर तक 6400 मेगावॉट रहेगी। ताप विद्युत गृहों के उचित रखरखाव के चलते आने वाले 15 दिनों में लगभग 2200 मेगावॉट अधिकतम उपलब्धता रहेगी। प्रयास किये जा रहे हैं कि पीएलएफ भी लगभग 75 प्रतिशत बना रहा।
Wednesday, December 9, 2009
मतदान और मतगणना के दिन बिजली कटौती नहीं
नगरीय निकाय चुनाव-2009)
मध्यप्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव-2009 के मद्देनजर मतदान और मतगणना के दिन बिजली कटौती नहीं होगी। इस संबंध राज्य शासन द्वारा निर्देश जारी किये गये हैं। तद्नुसार 11 एवं 14 दिसम्बर, 2009 को मतदान के दिन तथा 15 और 17 दिसम्बर, 2009 को मतगणना के दिन जिला और संभागीय मुख्यालयों पर बिजली कटौती नहीं होगी।
साथ ही संबंधित तहसील और ग्रामीण फीडरों पर भी मतदान और मतगणना के दिन बिजली कटौती नहीं की जायेगी। मतगणना स्थान वाले फीडरों पर 24 घण्टे विद्युत प्रदाय रहेगा। सचिव ऊर्जा श्री एस.पी.एस. परिहार ने यह जानकारी देते हुये बताया कि विद्युत प्रदाय के लिये वितरण कम्पनियों को आवश्यक दिशा निर्देश जारी कर दिये गये हैं।
आकस्मिकता अथवा ग्रिड से ओवर ड्राल की स्थिति में ऐसे तहसील फीडरों से आवश्यकतानुसार हेण्डट्रीप किया जायेगा जहां चुनाव नहीं हैं। इसके लिये स्टेट लोड शेडिंग सेन्टर द्वारा निर्देश जारी किये जायेंगे। विद्युत वितरण कम्पनियों को निर्देश दिये गये हैं कि वे अग्रिम रूप से ऐसे फीडरों की पहचान कर लें ताकि समय पर कार्यवाही की जा सके।
Read Full Text......
आकस्मिकता अथवा ग्रिड से ओवर ड्राल की स्थिति में ऐसे तहसील फीडरों से आवश्यकतानुसार हेण्डट्रीप किया जायेगा जहां चुनाव नहीं हैं। इसके लिये स्टेट लोड शेडिंग सेन्टर द्वारा निर्देश जारी किये जायेंगे। विद्युत वितरण कम्पनियों को निर्देश दिये गये हैं कि वे अग्रिम रूप से ऐसे फीडरों की पहचान कर लें ताकि समय पर कार्यवाही की जा सके।
Friday, November 27, 2009
बैतूल जिले में स्थापित होगी ताप विद्युत परियोजना
परियोजना की लागत करीब 9 हजार करोड़ रुपये
बैतूल जिले में दो हजार मेगावाट क्षमता की कोयला आधारित ताप विद्युत परियोजना स्थापित होगी। इस परियोजना के लिये हाल ही में करारनामे पर हस्ताक्षर हुए। इस परियोजना की लागत करीब 9 हजार करोड़ रुपये है।
यह ताप विद्युत परियोजना मेसर्स वेलस्पन ऊर्जा मध्यप्रदेश लिमिटेड मुम्बई द्वारा स्थापित की जायेगी। ऊर्जा सचिव श्री एस.पी.एस. परिहार तथा मैनेजिंग डायरेक्टर मेसर्स वेलस्पन ऊर्जा मध्यप्रदेश लिमिटेड मुम्बई श्री विनीत मित्तल ने करारनामे पर हस्ताक्षर किये। इस मौके पर अपर सचिव ऊर्जा श्री आर.के. कटारे सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में अब तक 42 कम्पनियों से 55545 मेगावाट क्षमता की ताप विद्युत परियोजनाओं के लिये करारनामे पर हस्ताक्षर किये जा चुके हैं।
Read Full Text......
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में अब तक 42 कम्पनियों से 55545 मेगावाट क्षमता की ताप विद्युत परियोजनाओं के लिये करारनामे पर हस्ताक्षर किये जा चुके हैं।
Labels: Power
Thursday, November 26, 2009
ग्रामीण क्षेत्रों में फीडर विभक्तिकरण योजना
माह मार्च तक 273 फीडरों का सेपरेशन
राज्य शासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के घरेलू उपभोक्ताओं को शहरी क्षेत्रों के समान विद्युत प्रदाय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से फीडर विभक्तिकरण योजना लागू की गई है। प्रथम चरण में इस कार्य को तहसील फीडरों में किया जाना प्रस्तावित किया गया है।
माह मार्च तक 273 फीडरों का सेपरेशन किया जा चुका है। तीनों विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा आगामी पाँच वर्षों के लिये 8900 करोड़ रूपये राशि के व्यय किया जाना प्रस्तावित किया गया है।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानियों के स्तर में कमी लाने के लिये फीडर विभक्तिकरण योजना को अतिउच्च वोल्टेज प्रणाली के साथ लागू किया गया है। इस योजना के तहत जिन ग्रामीण क्षेत्रों में फीडर विभक्तिकरण कार्य किया गया है, वहां विद्युत प्रदाय में सुधार के साथ-साथ वोल्टेज के स्तर में भी सुधार हुआ है तथा तकनीकी हानियों में भी कमी आई है।
प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा 273 फीडरों का विभक्तिकरण कार्य पूर्ण किया गया है। इसमें से म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड जबलपुर द्वारा 187 फीडरों, मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड भोपाल द्वारा 29 तथा मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड इंदौर द्वारा 57 फीडर विभक्तिकरण का कार्य पूर्ण किया गया है।
राज्य शासन द्वारा गत वर्ष 2008-09 में प्रदेश की तीन विद्युत वितरण कंपनियों को 100 करोड़ रूपये की राशि मुहैया करायी गई थी। फीडर विभक्तिकरण के लिय विश्व बैंक तथा एशियन डेव्हलपमेंट बैंक से ऋण प्राप्त करने के भी प्रयास किये जा रहे हैं। फीडर विभक्तिकरण कार्यों के लिये वर्ष 2009-10 के बजट में 8 करोड़ रूपये का प्रावधान भी किया गया है।
फीडर विभक्तिकरण कार्य के लिये तीनों विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा आगामी पांच वर्षों के लिये 8900 करोड़ रूपये की अनुमानित राशि की मांग की गई है। इसमें से मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र वितरण कंपनी लिमिटेड जबलपुर ने 3500 करोड़ रूपये, मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड भोपाल ने 3000 करोड़ रूपये तथा मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड इंदौर द्वारा 2400 करोड़ रूपये की राशि अनुमानित की गई है।
Read Full Text......
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानियों के स्तर में कमी लाने के लिये फीडर विभक्तिकरण योजना को अतिउच्च वोल्टेज प्रणाली के साथ लागू किया गया है। इस योजना के तहत जिन ग्रामीण क्षेत्रों में फीडर विभक्तिकरण कार्य किया गया है, वहां विद्युत प्रदाय में सुधार के साथ-साथ वोल्टेज के स्तर में भी सुधार हुआ है तथा तकनीकी हानियों में भी कमी आई है।
प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा 273 फीडरों का विभक्तिकरण कार्य पूर्ण किया गया है। इसमें से म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड जबलपुर द्वारा 187 फीडरों, मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड भोपाल द्वारा 29 तथा मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड इंदौर द्वारा 57 फीडर विभक्तिकरण का कार्य पूर्ण किया गया है।
राज्य शासन द्वारा गत वर्ष 2008-09 में प्रदेश की तीन विद्युत वितरण कंपनियों को 100 करोड़ रूपये की राशि मुहैया करायी गई थी। फीडर विभक्तिकरण के लिय विश्व बैंक तथा एशियन डेव्हलपमेंट बैंक से ऋण प्राप्त करने के भी प्रयास किये जा रहे हैं। फीडर विभक्तिकरण कार्यों के लिये वर्ष 2009-10 के बजट में 8 करोड़ रूपये का प्रावधान भी किया गया है।
फीडर विभक्तिकरण कार्य के लिये तीनों विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा आगामी पांच वर्षों के लिये 8900 करोड़ रूपये की अनुमानित राशि की मांग की गई है। इसमें से मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र वितरण कंपनी लिमिटेड जबलपुर ने 3500 करोड़ रूपये, मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड भोपाल ने 3000 करोड़ रूपये तथा मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड इंदौर द्वारा 2400 करोड़ रूपये की राशि अनुमानित की गई है।
Labels: Power
Friday, November 20, 2009
फ्रेंचाइजी, बिजली उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधाएं देने एजेंसी बनें
गुणवत्तापूर्ण विद्युत प्रदाय के साथ ही राजस्व वृद्धि भी हो
ऊर्जा तथा खनिज साधन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि विद्युत के क्षेत्र में कार्यरत फ्रेंचाइजी, वसूली की एजेंसी न बनकर उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधाएं तथा सेवाएं देने वाली संस्था बनें। उन्होंने आदर्श रूप में कार्य करने वाली फ्रेंचाइजी एजेंसी के प्रचार-प्रसार के साथ प्रोत्साहित करने को भी कहा।
उन्होंने उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ ही राजस्व वृद्धि पर भी जोर दिया। श्री शुक्ल आज यहां विभागीय परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में समिति के सदस्य एवं विधायकद्वय सर्वश्री शिवमंगल सिंह तोमर तथा शांतिलाल धबाई, सचिव ऊर्जा श्री एस.पी.एस. परिहार, अध्यक्ष एवं प्रबंध संचालक म.प्र. मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड भोपाल श्री संजय शुक्ला, अध्यक्ष एवं प्रबंध संचालक म.प्र पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड इंदौर श्री राघवेन्द्र कुमार सिंह सहित अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद थे।
श्री शुक्ल ने कहा कि फ्रेंचाइजी एजेंसी आदर्श रूप में काम करेंगी तो निश्चित रूप से उपभोक्ताओं को अच्छी सेवाओं के साथ ही सुविधाएं भी मिलेंगी। उन्होंने अच्छा कार्य करने वाली फ्रेंचाइजी को प्रोत्साहित करने को भी कहा। उन्होंने फ्रेंचाइजी माडल पूरे प्रदेश में लागू किये जाने की भी मंशा जाहिर की।
श्री शुक्ल ने कहा कि फ्रेंचाइजी एजेंसी आदर्श रूप में काम करेंगी तो निश्चित रूप से उपभोक्ताओं को अच्छी सेवाओं के साथ ही सुविधाएं भी मिलेंगी। उन्होंने अच्छा कार्य करने वाली फ्रेंचाइजी को प्रोत्साहित करने को भी कहा। उन्होंने फ्रेंचाइजी माडल पूरे प्रदेश में लागू किये जाने की भी मंशा जाहिर की।
श्री शुक्ल ने कहा कि रबी मौसम में किसानों को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की जाना चाहिए। साथ ही उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण विद्युत का प्रदाय भी हो। उन्होंने राजस्व वृद्धि पर भी जोर देते हुये कहा कि इससे विद्युत के विकास कार्यों में मदद मिलेगी।
बैठक में श्री शुक्ल ने पुनरीक्षित त्वरित विद्युत विकास एवं सुधार कार्यक्रम (आर-एपीडीआरपी) योजना की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने फीडर बायफरकेशन कार्य की समीक्षा करते हुये कहा कि इसमें तेजी लाई जाना चाहिए। उन्होंने पारेषण और वितरण पर कड़ी निगाह रखने, खराब ट्रांसफार्मरों को शीघ्र बदलने और बिजली चोरी को सख्ती से रोकने के निर्दश भी दिये। उन्होंने इसके लिये विभागीय अमले को पूरी तत्परता से काम करने को भी कहा। उन्होंने इस अवसर पर अधिकारियों से समिति के सदस्यों द्वारा रखे गये सुझावों पर कार्यवाही करने के निर्देश दिये।
बैठक में समिति के सदस्य श्री शिवमंगल सिंह तोमर तथा श्री शांतिलाल धबाई ने महत्वपूर्ण सुझाव रखें। उन्होंने कृषक राहत योजना, किसानों को अधिक से अधिक विद्युत का प्रदाय समूह बनाकर करने, राजस्व बढ़ाने, विद्युत चोरी रोकने, विद्युत कनेक्शन देने, जले तथा बिगड़े ट्रांसफार्मर शीघ्र सुधारने, विद्यमान सब स्टेशनों की क्षमता बढ़ाने आदि के सुझाव रखे।
सचिव श्री एस.पी.एस. परिहार ने बैठक में विभागीय गतिविधियों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कृषक राहत योजना की जानकारी देते हुये बताया कि इसके तहत माह मार्च तक की स्थिति में किसानों द्वारा करीब 197 करोड़ रूपये की राशि जमा करायी गयी है। योजना अनुसार इतनी ही राशि शासन द्वारा विद्युत वितरण कंपनियों को प्रतिपूर्ति के रूप में दी गयी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में किसानों को 6 से 10 घंटे तक बिजली आपूर्ति तीन फेस पर दी जा रही है।
सी.एम.डी. श्री संजय शुक्ला ने बैठक में मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के संबंध में किये जा रहे विस्तार तथा प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब विद्युत प्रदाय की स्थिति में काफी सुधार आया है। किसानों को तीन फेस पर 10 घंटे बिजली प्रदाय की जा रही है। नियंत्रण कक्ष भी काम कर रहा है, कहीं से भी शिकायत आने पर उसका निराकरण किया जा रहा है। उन्होंने विभिन्न जिलों में फीडर विभक्तिकरण कार्य की जानकारी भी दी।
सी.एम.डी. पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी श्री राघवेन्द्र कुमार सिंह ने अपनी कम्पनी से संबंधित कार्यों की प्रगति से अवगत कराते हुये बताया कि एक योजना बनाकर कनेक्शनों का नियमितीकरण किया जा रहा है। इस योजना को दिसम्बर माह तक पूरा कर लिया जायेगा। उन्होंने अपनी कम्पनी अंतर्गत ग्राम पंचायत वाले फ्रेंचाइजी माडल के बारे में भी बताया। साथ ही उन्होंने कम्पनी द्वारा किये जा रहे विकास कार्यों से भी अवगत कराया।
बैठक में अपर सचिव ऊर्जा श्री आर.के. कटारे, मुख्य अभियंता म.प्र. पूर्व वितरण क्षेत्र कम्पनी जबलपुर श्री ए.आर.अग्रवाल, मुख्य अभियंता (सिविल) पी.एन.डी म.प्र. पावर जनरेटिंग कम्पनी जबलपुर श्री गोपेश्वर वर्मा सहित अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद थे।
Read Full Text......
बैठक में श्री शुक्ल ने पुनरीक्षित त्वरित विद्युत विकास एवं सुधार कार्यक्रम (आर-एपीडीआरपी) योजना की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने फीडर बायफरकेशन कार्य की समीक्षा करते हुये कहा कि इसमें तेजी लाई जाना चाहिए। उन्होंने पारेषण और वितरण पर कड़ी निगाह रखने, खराब ट्रांसफार्मरों को शीघ्र बदलने और बिजली चोरी को सख्ती से रोकने के निर्दश भी दिये। उन्होंने इसके लिये विभागीय अमले को पूरी तत्परता से काम करने को भी कहा। उन्होंने इस अवसर पर अधिकारियों से समिति के सदस्यों द्वारा रखे गये सुझावों पर कार्यवाही करने के निर्देश दिये।
बैठक में समिति के सदस्य श्री शिवमंगल सिंह तोमर तथा श्री शांतिलाल धबाई ने महत्वपूर्ण सुझाव रखें। उन्होंने कृषक राहत योजना, किसानों को अधिक से अधिक विद्युत का प्रदाय समूह बनाकर करने, राजस्व बढ़ाने, विद्युत चोरी रोकने, विद्युत कनेक्शन देने, जले तथा बिगड़े ट्रांसफार्मर शीघ्र सुधारने, विद्यमान सब स्टेशनों की क्षमता बढ़ाने आदि के सुझाव रखे।
सचिव श्री एस.पी.एस. परिहार ने बैठक में विभागीय गतिविधियों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कृषक राहत योजना की जानकारी देते हुये बताया कि इसके तहत माह मार्च तक की स्थिति में किसानों द्वारा करीब 197 करोड़ रूपये की राशि जमा करायी गयी है। योजना अनुसार इतनी ही राशि शासन द्वारा विद्युत वितरण कंपनियों को प्रतिपूर्ति के रूप में दी गयी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में किसानों को 6 से 10 घंटे तक बिजली आपूर्ति तीन फेस पर दी जा रही है।
सी.एम.डी. श्री संजय शुक्ला ने बैठक में मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के संबंध में किये जा रहे विस्तार तथा प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब विद्युत प्रदाय की स्थिति में काफी सुधार आया है। किसानों को तीन फेस पर 10 घंटे बिजली प्रदाय की जा रही है। नियंत्रण कक्ष भी काम कर रहा है, कहीं से भी शिकायत आने पर उसका निराकरण किया जा रहा है। उन्होंने विभिन्न जिलों में फीडर विभक्तिकरण कार्य की जानकारी भी दी।
सी.एम.डी. पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी श्री राघवेन्द्र कुमार सिंह ने अपनी कम्पनी से संबंधित कार्यों की प्रगति से अवगत कराते हुये बताया कि एक योजना बनाकर कनेक्शनों का नियमितीकरण किया जा रहा है। इस योजना को दिसम्बर माह तक पूरा कर लिया जायेगा। उन्होंने अपनी कम्पनी अंतर्गत ग्राम पंचायत वाले फ्रेंचाइजी माडल के बारे में भी बताया। साथ ही उन्होंने कम्पनी द्वारा किये जा रहे विकास कार्यों से भी अवगत कराया।
बैठक में अपर सचिव ऊर्जा श्री आर.के. कटारे, मुख्य अभियंता म.प्र. पूर्व वितरण क्षेत्र कम्पनी जबलपुर श्री ए.आर.अग्रवाल, मुख्य अभियंता (सिविल) पी.एन.डी म.प्र. पावर जनरेटिंग कम्पनी जबलपुर श्री गोपेश्वर वर्मा सहित अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद थे।
Labels: Power, RajendraShukla
Wednesday, November 18, 2009
म.प्र. विकास के मामले में राजनीति का पक्षधर नहीं : मुख्यमंत्री
देश की ऊर्जा जरूरतों की पूर्ति में भेल की महत्वपूर्ण भूमिका
मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा है कि मध्यप्रदेश विकास के मामले में राजनीति का पक्षधर नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनावों के बाद राजनैतिक विचारधाराओं को परे रखकर विकास के काम करने से ही देश और प्रदेश आगे बढ़ सकेगा।
श्री चौहान ने कहा कि अब समय मिल-जुलकर काम करने और नया इतिहास रचने का है। मुख्यमंत्री आज दोपहर भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड की भोपाल इकाई के परिसर में अल्ट्रा वोल्टेज ट्रांसफार्मर इकाई के लोकार्पण समरोह को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने समारोह में देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू को सच्चे अर्थों में आधुनिक भारत का निर्माता बताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। श्री चौहान ने कहा कि पं. नेहरू ने भेल की भोपाल इकाई को राष्ट्र के नाम लोकर्पित किया था। उन्होंने कहा कि भेल की भोपाल इकाई पर भोपाल और मध्यप्रदेश को गर्व है। श्री चौहान ने कहा कि भोपाल की बड़ी झील और भेल की भोपाल इकाई का देश में कोई जवाब नहीं है।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम और भेल के संयुक्त उपक्रम को भेल भोपाल की अतिरिक्त जमीन पर स्थापित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस निर्माण इकाई के लिये राज्य शासन और भी जमीन देने के लिये तैयार है। श्री चौहान ने चचई और वीरसिंहपुर संयंत्र के निर्माण में भेल द्वारा की जा रही देरी की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि सन् 2007 में बनकर तैयार हो जाने वाले इन संयंत्रों का काम अभी भी पूरा नहीं हुआ है।
श्री चौहान ने कहा कि भेल भोपाल में मध्यप्रदेश ही नहीं पूरा हिन्दुस्तान बसता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश का अकेला ऐसा प्रदेश है जो क्षेत्रीयता में विश्वास नहीं करता। श्री चौहान ने कहा कि 'हम सब भारत के लाल, भेदभाव का कहां सवाल'। श्री चौहान ने कहा कि अगर उनके शरीर के एक लाख टुकड़े भी कर दिये जाये तो हर टुकड़ा भारत माता की जय का ही उद्घोष करेगा।श्री चौहान ने भेल की उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने का वाहक है भेल उद्यम।
समारोह के मुख्य अतिथि केन्द्रीय भारी उद्योग और लोक उद्यम मंत्री श्री विलासराव देशमुख ने अल्ट्रा हाई वोल्टेज ट्रांसफार्मर इकाई के शुभारंभ को ऊर्जा के क्षेत्र में मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि बिजली के बगैर वर्तमान में देश की प्रगति संभव नहीं है। देश की ऊर्जा जरूरतों की पूर्ति में भेल की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को भेल को सभी संभव सहयोग देकर ऊर्जा की स्थिति को बेहतर करने के लिये आगे आना चाहिये।
श्री देशमुख ने देश और अनेक प्रदेशों की ऊर्जा परियोजनाओं को पूरा करने में भेल से हुए विलंब को स्वीकारते हुए समय पर परियोजनाओं की पूर्णता पर जोर दिया। श्री देशमुख ने कहा कि भेल की भोपाल इकाई के पास उपलब्ध लगभग ढाई हजार एकड़ जमीन का भेल की आगामी विस्तार योजनाओं के लिये प्राथमिकता से उपयोग किया जायेगा।
श्री देशमुख ने भेल भोपाल के कर्मचारियों की समस्याओं को भी चर्चा और परीक्षण के बाद हल किये जाने की बात कही। उन्होंने भेल भोपाल की उपलब्धियों का श्रेय कर्मचारियों-अधिकारियों को दिया।
मुख्यमंत्री की प्रशंसा
केन्द्रीय भारी उद्योग मंत्री ने मुख्यमंत्री श्री चौहान की सबको साथ लेकर चलने की भावना की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि श्री चौहान की यह भावना ही प्रदेश के विकास का पथ प्रशस्त करने की वाहक बन रही है। श्री देशमुख ने कहा कि भारी उद्योग मंत्रालय की परियोजनाओं के अंतर्गत मध्यप्रदेश के साथ पूरा न्याय होगा। श्री देशमुख ने मुख्यमंत्री श्री चौहान की चुनावों के बाद सिर्फ विकास की राजनीति की भावना से भी सहमति व्यक्त की।
केद्रीय भारी उद्योग राज्य मंत्री श्री अरूण यादव ने कहा कि वे केंद्रीय योजनाओं विशेषकर भारी उद्योग विभाग की योजनाओं का समुचित लाभ प्रदेश को दिलाने के लिये प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में बिजली की कमी को दूर करने के लिये केंद्र और राज्य सरकार द्वारा नये संयंत्रों की स्थापना की जा रही है।
श्री यादव ने अल्ट्रा हाई वोल्टेज ट्रांसफार्मर इकाई के लोकार्पण को ऊर्जा के क्षेत्र में देश की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि अब तक यह क्षमता सिर्फ चीन के पास थी। श्री यादव ने कहा कि चीन में वर्तमान में 80 हजार मेगावाट वार्षिक विद्युत उत्पादन की क्षमता है।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने समारोह में देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू को सच्चे अर्थों में आधुनिक भारत का निर्माता बताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। श्री चौहान ने कहा कि पं. नेहरू ने भेल की भोपाल इकाई को राष्ट्र के नाम लोकर्पित किया था। उन्होंने कहा कि भेल की भोपाल इकाई पर भोपाल और मध्यप्रदेश को गर्व है। श्री चौहान ने कहा कि भोपाल की बड़ी झील और भेल की भोपाल इकाई का देश में कोई जवाब नहीं है।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम और भेल के संयुक्त उपक्रम को भेल भोपाल की अतिरिक्त जमीन पर स्थापित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस निर्माण इकाई के लिये राज्य शासन और भी जमीन देने के लिये तैयार है। श्री चौहान ने चचई और वीरसिंहपुर संयंत्र के निर्माण में भेल द्वारा की जा रही देरी की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि सन् 2007 में बनकर तैयार हो जाने वाले इन संयंत्रों का काम अभी भी पूरा नहीं हुआ है।
श्री चौहान ने कहा कि भेल भोपाल में मध्यप्रदेश ही नहीं पूरा हिन्दुस्तान बसता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश का अकेला ऐसा प्रदेश है जो क्षेत्रीयता में विश्वास नहीं करता। श्री चौहान ने कहा कि 'हम सब भारत के लाल, भेदभाव का कहां सवाल'। श्री चौहान ने कहा कि अगर उनके शरीर के एक लाख टुकड़े भी कर दिये जाये तो हर टुकड़ा भारत माता की जय का ही उद्घोष करेगा।श्री चौहान ने भेल की उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने का वाहक है भेल उद्यम।
समारोह के मुख्य अतिथि केन्द्रीय भारी उद्योग और लोक उद्यम मंत्री श्री विलासराव देशमुख ने अल्ट्रा हाई वोल्टेज ट्रांसफार्मर इकाई के शुभारंभ को ऊर्जा के क्षेत्र में मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि बिजली के बगैर वर्तमान में देश की प्रगति संभव नहीं है। देश की ऊर्जा जरूरतों की पूर्ति में भेल की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को भेल को सभी संभव सहयोग देकर ऊर्जा की स्थिति को बेहतर करने के लिये आगे आना चाहिये।
श्री देशमुख ने देश और अनेक प्रदेशों की ऊर्जा परियोजनाओं को पूरा करने में भेल से हुए विलंब को स्वीकारते हुए समय पर परियोजनाओं की पूर्णता पर जोर दिया। श्री देशमुख ने कहा कि भेल की भोपाल इकाई के पास उपलब्ध लगभग ढाई हजार एकड़ जमीन का भेल की आगामी विस्तार योजनाओं के लिये प्राथमिकता से उपयोग किया जायेगा।
श्री देशमुख ने भेल भोपाल के कर्मचारियों की समस्याओं को भी चर्चा और परीक्षण के बाद हल किये जाने की बात कही। उन्होंने भेल भोपाल की उपलब्धियों का श्रेय कर्मचारियों-अधिकारियों को दिया।
मुख्यमंत्री की प्रशंसा
केन्द्रीय भारी उद्योग मंत्री ने मुख्यमंत्री श्री चौहान की सबको साथ लेकर चलने की भावना की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि श्री चौहान की यह भावना ही प्रदेश के विकास का पथ प्रशस्त करने की वाहक बन रही है। श्री देशमुख ने कहा कि भारी उद्योग मंत्रालय की परियोजनाओं के अंतर्गत मध्यप्रदेश के साथ पूरा न्याय होगा। श्री देशमुख ने मुख्यमंत्री श्री चौहान की चुनावों के बाद सिर्फ विकास की राजनीति की भावना से भी सहमति व्यक्त की।
भोपाल देश की सबसे खूबसूरत प्रांतीय राजधानी
श्री विलासराव देशमुख ने भोपाल को देश के किसी भी प्रदेश की राजधानी से खूबसूरत बताया। इसके पूर्व मुख्यमंत्री श्री चौहान भी अपने संबोधन में भोपाल की इस विशेषता का उल्लेख कर चुके थे।केद्रीय भारी उद्योग राज्य मंत्री श्री अरूण यादव ने कहा कि वे केंद्रीय योजनाओं विशेषकर भारी उद्योग विभाग की योजनाओं का समुचित लाभ प्रदेश को दिलाने के लिये प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में बिजली की कमी को दूर करने के लिये केंद्र और राज्य सरकार द्वारा नये संयंत्रों की स्थापना की जा रही है।
श्री यादव ने अल्ट्रा हाई वोल्टेज ट्रांसफार्मर इकाई के लोकार्पण को ऊर्जा के क्षेत्र में देश की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि अब तक यह क्षमता सिर्फ चीन के पास थी। श्री यादव ने कहा कि चीन में वर्तमान में 80 हजार मेगावाट वार्षिक विद्युत उत्पादन की क्षमता है।
श्री यादव ने उम्मीद जाहिर की कि देश में एक लाख मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता के केंद्र सरकार के लक्ष्य की पूर्ति में भेल अपनी भूमिका बखूबी अदा करेगा। श्री यादव ने बताया कि अल्ट्रा हाई वोल्टेज ट्रांसफार्मर की आज लोकार्पित इकाई से देश में ट्रांसफार्मर निर्माण की क्षमता 18 हजार मेगावाट से बढ़कर 30 हजार मेगावाट हो सकेगी।
समारोह को केन्द्रीय भारी उद्योग और लोक उद्यम सचिव डॉ. सत्यनारायण दास और भेल के अध्यक्ष सह प्रबन्ध निदेशक श्री पी.बी. राव ने भी संबोधित किया। इसके पहले श्री देशमुख ने अल्ट्रा हाई वोल्टेज ट्रांसफार्मर इकाई का फीता काटकर उद्घाटन करने के बाद मुख्यमंत्री श्री चौहान और केन्द्रीय राज्यमंत्री श्री यादव के साथ इकाई का अवलोकन भी किया।
समारोह को केन्द्रीय भारी उद्योग और लोक उद्यम सचिव डॉ. सत्यनारायण दास और भेल के अध्यक्ष सह प्रबन्ध निदेशक श्री पी.बी. राव ने भी संबोधित किया। इसके पहले श्री देशमुख ने अल्ट्रा हाई वोल्टेज ट्रांसफार्मर इकाई का फीता काटकर उद्घाटन करने के बाद मुख्यमंत्री श्री चौहान और केन्द्रीय राज्यमंत्री श्री यादव के साथ इकाई का अवलोकन भी किया।
भेल के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक श्री पी.बी. राव ने श्री देशमुख, श्री चौहान, श्री यादव औऱ मंचासीन अन्य अतिथियों क्रमश: नगरीय प्रशासन मंत्री श्री बाबूलाल गौर, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री लखन मीणा, पूर्व विधायक श्री पी.सी. शर्मा, पूर्व महापौर द्वय श्रीमती विभा पटेल और श्री दीपचन्द यादव और श्री रविकांत सक्सेना को पुष्पगुच्छ और शाल-श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया।
समारोह में भेल के निदेशक मंडल के सदस्य, भोपाल इकाई के कार्यपालन निदेशक श्री दुबे और बड़ी संख्या में भेलकर्मी उपस्थित थे। आभार प्रदर्शन भेल के मानव संसाधन निदेशक श्री अनिल सचदेवा ने किया।
Read Full Text......
समारोह में भेल के निदेशक मंडल के सदस्य, भोपाल इकाई के कार्यपालन निदेशक श्री दुबे और बड़ी संख्या में भेलकर्मी उपस्थित थे। आभार प्रदर्शन भेल के मानव संसाधन निदेशक श्री अनिल सचदेवा ने किया।
Labels: CenterState, CM, Power
बिजली बेचेगा मध्यप्रदेश - मुख्यमंत्री श्री चौहान
उद्योगों में रोजगार-प्राथमिकता स्थानीय लोगों का जायज हक
प्रदेश में विद्युत उत्पादन में निरंतर वृद्धि करने के प्रयासों के तहत आज मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी तथा बी.एच.ई.एल. द्वारा 1600 मेगावाट विद्युत संयंत्र की परियोजना के क्रियान्वयन के लिये संयुक्त उपक्रम के गठन का करारनामा किया गया।
केन्द्रीय भारी उद्योग मंत्री श्री विलासराव देशमुख, भारी उद्योग राज्य मंत्री श्री अरूण यादव एवं मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान की उपस्थिति में करारनामे पर मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के सी.एम.डी. श्री आर.बी. अग्रवाल और बी.एच.ई.एल. के सी.एम.डी. श्री बी.पी. राव ने हस्ताक्षर किये।
मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा कि देश के अधिकांश राज्य विद्युत संकट का सामना कर रहे हैं। आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश अन्य राज्यों को बिजली बेचने की स्थिति में होगा। श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में पिछले पांच वर्ष में विशेष उपलब्धि हासिल की गई है।
मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा कि देश के अधिकांश राज्य विद्युत संकट का सामना कर रहे हैं। आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश अन्य राज्यों को बिजली बेचने की स्थिति में होगा। श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में पिछले पांच वर्ष में विशेष उपलब्धि हासिल की गई है।
राज्य का बिजली उत्पादन बढ़कर दुगुना हो गया है। श्री चौहान ने कहा कि खंडवा में सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट की स्थापना इस क्षेत्र में विकास के नये द्वार खोलेगी। खंडवा अब पावर हब बन जायेगा। प्रदेश में निरंतर नई विद्युत उत्पादन इकाईयां शुरू हो रही हैं। हाल ही में नरसिंहपुर जिले में 2640 मेगावाट क्षमता की ताप विद्युत परियोजनाओं के लिये एन.टी.पी.सी. के साथ करारनामा हुआ है।
सतपुड़ा ताप विद्युत गृह और सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना के क्रियान्वयन से विद्युत की मांग पूरी करने में आसानी होगी। प्रदेश के अन्य स्थानों पर भी ताप विद्युत परियोजनाओं के लिये संभावनाएं ढूंढ़ी जा रही हैं। श्री चौहान ने कहा कि एन.एच.डी.सी. द्वारा 1200 मेगावाट क्षमता के पावर प्लांट के प्रयास हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने अपेक्षा की कि बाण सागर में प्लांट स्थापना के लिये भी बी.एच.ई.एल. द्वारा पहल की जाये। श्री चौहान ने केन्द्रीय मंत्री श्री देशमुख के प्रदेश आगमन को शुभ बताते हुए भोपाल आने पर प्रदेश की जनता की ओर से उनका स्वागत किया।
केन्द्रीय भारी उद्योग मंत्री श्री विलासराव देशमुख ने कहा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री चौहान के सहयोगी रुख की जितनी प्रशंसा की जाये कम है। उन्होंने खंडवा में स्थापित किये जाने वाले इस पावर प्लांट के लिये विशेष रूचि ली। श्री देशमुख ने कहा कि उद्योगों में स्थानीय व्यक्तियों को रोजगार में प्राथमिकता अथवा निश्चित प्रतिशत तक आरक्षण की बात तर्कसंगत है। एक समय विभिन्न प्रांतों में यह आरक्षण 80 प्रतिशत तक रहा है।
केन्द्रीय भारी उद्योग मंत्री श्री विलासराव देशमुख ने कहा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री चौहान के सहयोगी रुख की जितनी प्रशंसा की जाये कम है। उन्होंने खंडवा में स्थापित किये जाने वाले इस पावर प्लांट के लिये विशेष रूचि ली। श्री देशमुख ने कहा कि उद्योगों में स्थानीय व्यक्तियों को रोजगार में प्राथमिकता अथवा निश्चित प्रतिशत तक आरक्षण की बात तर्कसंगत है। एक समय विभिन्न प्रांतों में यह आरक्षण 80 प्रतिशत तक रहा है।
श्री चौहान द्वारा उद्योगों में स्थानीय व्यक्तियों के लिये 50 प्रतिशत आरक्षण की वकालत जायज है। श्री देशमुख ने कहा कि जिस क्षेत्र के लोग विकास में मददगार हों वे उद्योगों में नौकरी की अपेक्षा करते हैं तो यह उनका अधिकार है और स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने की बात न्यायसंगत है।
श्री देशमुख ने आश्वस्त किया कि बी.एच.ई.एल. द्वारा खंडवा में पावर प्लांट स्थापना का कार्य बिना विलम्ब के निर्धारित अवधि में ही पूरा किया जायेगा। श्री देशमुख ने इस प्लांट के उद्घाटन के समय भी उपस्थित होने की अपेक्षा करते हुए भरोसा दिलाया कि राज्य मंत्री श्री अरूण यादव इस प्लांट के शीघ्र शुरू होने के लिये पूरी ऊर्जा लगायेंगे।
श्री देशमुख ने कहा कि भारत सरकार द्वारा मध्यप्रदेश में बी.एच.ई.एल. एवं अन्य उपक्रमों के सहयोग से विद्युत उत्पादन बढ़ाने की पहल की जायेगी। श्री देशमुख ने मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा खंडवा में स्थापित किये जा रहे पावर प्लांट के लिये दिये गये विशेष सहयोग के लिये आभार मानते हुए कहा कि श्री चौहान ने दलीय राजनीति से उपर उठकर यह अनूठी पहल की है।
केन्द्रीय भारी उद्योग राज्य मंत्री श्री अरूण यादव ने कहा कि खंडवा में पावर प्लांट की स्थापना इस क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी। यह पावर प्लांट अगले साढ़े तीन वर्ष में स्थापित हो जाये इसके लिये एक सप्ताह में प्रत्येक कार्य की समयावधि तय कर ली जायेगी।
मध्यप्रदेश के ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में विद्युत उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। प्रदेश में बढ़ रही विद्युत मांग के अनुरूप विद्युत उत्पादन के प्रयासों पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है। घरेलू उपभोक्ताओं के साथ ही किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार विद्युत प्रदाय के लक्ष्य को पूरा किया जायेगा।
मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री सुरेश पचौरी ने कहा कि ऊर्जा उत्पादन में मध्यप्रदेश का आत्मनिर्भर होने की ओर बढ़ना सुखद है। नई विद्युत उत्पादन इकाईयों की स्थापना से बिजली की मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी।
मुख्य सचिव श्री राकेश साहनी ने कहा कि खंडवा में पावर प्लांट का कार्य बी.एच.ई.एल. द्वारा निर्धारित समयावधि में पूरा किया जायेगा, ऐसा उन्हें भरोसा है। श्री साहनी ने बरगी के प्रस्तावित नाभिकीय विद्युत उत्पादन संयंत्र के लिये उपकरणों की आपूर्ति में भी बी.एच.ई.एल. के सहयोग की अपेक्षा की। केन्द्र सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय के सचिव श्री सत्यनारायण दास ने भी कार्यक्रम को सम्बोधित किया।
कार्यक्रम में नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री बाबूलाल गौर, आदिम जाति कल्याण मंत्री श्री विजय शाह, विधायक श्री लोकेन्द्र सिंह तोमर एवं संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
Read Full Text......
केन्द्रीय भारी उद्योग राज्य मंत्री श्री अरूण यादव ने कहा कि खंडवा में पावर प्लांट की स्थापना इस क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी। यह पावर प्लांट अगले साढ़े तीन वर्ष में स्थापित हो जाये इसके लिये एक सप्ताह में प्रत्येक कार्य की समयावधि तय कर ली जायेगी।
मध्यप्रदेश के ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में विद्युत उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। प्रदेश में बढ़ रही विद्युत मांग के अनुरूप विद्युत उत्पादन के प्रयासों पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है। घरेलू उपभोक्ताओं के साथ ही किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार विद्युत प्रदाय के लक्ष्य को पूरा किया जायेगा।
मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री सुरेश पचौरी ने कहा कि ऊर्जा उत्पादन में मध्यप्रदेश का आत्मनिर्भर होने की ओर बढ़ना सुखद है। नई विद्युत उत्पादन इकाईयों की स्थापना से बिजली की मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी।
मुख्य सचिव श्री राकेश साहनी ने कहा कि खंडवा में पावर प्लांट का कार्य बी.एच.ई.एल. द्वारा निर्धारित समयावधि में पूरा किया जायेगा, ऐसा उन्हें भरोसा है। श्री साहनी ने बरगी के प्रस्तावित नाभिकीय विद्युत उत्पादन संयंत्र के लिये उपकरणों की आपूर्ति में भी बी.एच.ई.एल. के सहयोग की अपेक्षा की। केन्द्र सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय के सचिव श्री सत्यनारायण दास ने भी कार्यक्रम को सम्बोधित किया।
कार्यक्रम में नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री बाबूलाल गौर, आदिम जाति कल्याण मंत्री श्री विजय शाह, विधायक श्री लोकेन्द्र सिंह तोमर एवं संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
Labels: CenterState, CM, Power, RajendraShukla
Tuesday, November 17, 2009
भेल और मप्र विद्युत उत्पादन कम्पनी के बीच करार
मुख्यमंत्री श्री चौहान और केन्द्रीय भारी उद्योग मंत्री उपस्थित
मध्यप्रदेश में भारत हेवी इलेक्ट्रिकल और मध्यप्रदेश विद्युत उत्पादन कम्पनी के बीच संयुक्त उपक्रम का गठन कर स्थापित की जाने वाली 2 × 800 मेगावॉट क्षमता की स्थापना के लिये मंगलवार 17 नवम्बर को भोपाल में एक करारनामे पर हस्ताक्षर किये जायेंगे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, केन्द्रीय भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उपक्रम मंत्री श्री विलासराव देशमुख, केन्द्रीय राज्यमंत्री श्री अरुण यादव, प्रदेश के ऊर्जा तथा खनिज साधन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री राजेन्द्र शुक्ल विशेष रूप से मौजूद रहेंगे। यह कार्यक्रम राजधानी के होटल नूर-उस-सबाह में शाम 6 बजे होगा। इस करारनामे पर दोनों संस्थाओं के अध्यक्ष, सह प्रबंध संचालक हस्ताक्षर करेंगे।
इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री राकेश साहनी, भारत सरकार के सचिव भारी उद्योग डॉ. एस.एन. दास, अध्यक्ष-सह-प्रबंध संचालक (भेल) श्री बी. प्रसाद राव, निदेशक (वित्त) भेल श्री सी.एस. वर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहेंगे।
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कम्पनी द्वारा मेसर्स बी.एच.ई.एल. के साथ जिला खण्डवा में 2×800 मेगावॉट की सुपर क्रिटिकल तकनीक पर आधारित परियोजना संयुक्त उपक्रम के तहत लगाने के लिये समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया जा रहा है।
Read Full Text......
इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री राकेश साहनी, भारत सरकार के सचिव भारी उद्योग डॉ. एस.एन. दास, अध्यक्ष-सह-प्रबंध संचालक (भेल) श्री बी. प्रसाद राव, निदेशक (वित्त) भेल श्री सी.एस. वर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहेंगे।
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कम्पनी द्वारा मेसर्स बी.एच.ई.एल. के साथ जिला खण्डवा में 2×800 मेगावॉट की सुपर क्रिटिकल तकनीक पर आधारित परियोजना संयुक्त उपक्रम के तहत लगाने के लिये समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया जा रहा है।
Labels: CenterState, CM, Power, RajendraShukla
Monday, November 16, 2009
मप्र में विद्युत उत्पादन क्षमता बढ़कर दुगनी हुई
ऊर्जा मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल द्वारा केन्द्र से वित्तीय सहायता का अनुरोध
ऊर्जा तथा खनिज साधन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री राजेन्द्र शुक्ल ने बताया कि मध्यप्रदेश में वर्ष 2003 में 2990 मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता के मुकाबले अब दुगनी से अधिक 6140 मेगावाट हो गई है। उन्होंने बताया कि आगामी पांच वर्षों में प्रदेश में 7325 मेगावाट क्षमता वृद्धि का कार्यक्रम बनाया गया है।
11वीं पंचवर्षीय योजना में राज्य में 1700 मेगावाट की तीन नई इकाइयां प्रस्तावित हैं। इनमें 1200 मेगावाट की श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना तथा कुल 500 मेगावाट की दो विस्तार इकाइयां सतपुड़ा ताप विद्युतगृह में स्थापित की जा रही हैं। श्री शुक्ल ने केन्द्र सरकार से राज्य में विद्युत के क्षेत्र में सुधार तथा विस्तार कार्यों के लिये वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।
श्री शुक्ल आज नई दिल्ली में केन्द्रीय मंत्री श्री सुशील कुमार शिंदे की अध्यक्षता में आयोजित ऊर्जा मंत्रियों के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर राज्य के ऊर्जा सचिव श्री एस.पी.एस. परिहार भी मौजूद थे। श्री शुक्ल ने विद्युत क्षेत्र में पूंजीगत कार्यों के लिये राज्य के लिये ऋण आदि की व्यवस्था कार्य हेतु सिंगल विंडो व्यवस्था तथा एक रिसोर्स मोबिलाइजेशन इकाई विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत स्थापित करने का सुझाव भी रखा।
श्री शुक्ल ने केन्द्र सरकार से विद्युत वितरण प्रणाली के सुदृढ़ीकरण, 630 मेगावाट की चार पुरानी इकाइयों के नवीनीकरण, फीडर लाईनों को अलग-अलग करने, ग्रामीण क्षेत्रों में वितरण व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण तथा विद्युत क्षेत्र में पूंजी निवेश के लिये केन्द्र से वित्तीय एवं विश्व बैंक आदि से ऋण लेने में सहयोग करने का अनुरोध किया। उन्होंने राज्य की विद्युत वितरण कम्पनियों को कम ब्याज दर पर ऋण की व्यवस्था करने को भी कहा।
श्री शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश में भी विद्युत की मांग एवं उपलब्धता के अंतर को दूर करने के लिये विद्युत उत्पादन क्षमता वृद्धि के कार्यों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वर्ष 2013-14 तक प्रदेश में कुल 7325 मेगावाट क्षमता वृद्धि का कार्यक्रम है। राज्य में विद्युत उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ विद्युत निकासी के लिये ट्रांसमिशन प्रणाली के विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण के कार्य भी सम्पन्न किये गये हैं।
श्री शुक्ल ने केन्द्र सरकार से विद्युत वितरण प्रणाली के सुदृढ़ीकरण, 630 मेगावाट की चार पुरानी इकाइयों के नवीनीकरण, फीडर लाईनों को अलग-अलग करने, ग्रामीण क्षेत्रों में वितरण व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण तथा विद्युत क्षेत्र में पूंजी निवेश के लिये केन्द्र से वित्तीय एवं विश्व बैंक आदि से ऋण लेने में सहयोग करने का अनुरोध किया। उन्होंने राज्य की विद्युत वितरण कम्पनियों को कम ब्याज दर पर ऋण की व्यवस्था करने को भी कहा।
श्री शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश में भी विद्युत की मांग एवं उपलब्धता के अंतर को दूर करने के लिये विद्युत उत्पादन क्षमता वृद्धि के कार्यों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वर्ष 2013-14 तक प्रदेश में कुल 7325 मेगावाट क्षमता वृद्धि का कार्यक्रम है। राज्य में विद्युत उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ विद्युत निकासी के लिये ट्रांसमिशन प्रणाली के विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण के कार्य भी सम्पन्न किये गये हैं।
श्री शुक्ल ने बताया कि मध्यप्रदेश में इन प्रयासों के फलस्वरूप शीर्ष मांग अवधि में अधिकतम 7019 मेगावाट तक की मांग की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। जबकि वर्ष 2002-03 में शीर्ष मांग अवधि में 4652 मेगावाट मांग की आपूर्ति की गई थी। साथ ही प्रदेश में ट्रांसमिशन हानियों का स्तर भी 8.10 प्रतिशत से घटकर 4.09 प्रतिशत हो गया है।
ऊर्जा राज्यमंत्री ने कहा कि नई स्थापित की जा रही विद्युत उत्पादन परियोजनाओं से विद्युत निकासी के लिये ट्रांसमिशन लाईनों तथा ट्रांसमिशन प्रणाली के सुदृढ़ीकरण आदि कार्यों के लिये आगामी पांच वर्षों में लगभग 5816 करोड़ रुपये पूंजी निवेश की आवश्यकता है। श्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश की सतपुड़ा ताप विद्युतगृह की इकाइयों के नवीनीकरण एवं आधुनीकरण के कार्यों के लिये भी विश्व बैंक से ऋण प्राप्ति के प्रस्ताव पर विद्युत मंत्रालय भारत सरकार से सहयोग अपेक्षित है।
उन्होंने सुझाव दिया कि केन्द्रीय स्तर पर विद्युत मंत्रालय में एक रिसोर्स मोबिलाइजेशन इकाई स्थापित की जाना चाहिये, जो कि राज्यों की पूंजीगत आवश्यकता को देखते हुए धन की व्यवस्था हेतु सलाह दे तथा इसके लिये वित्तीय संस्थानों से सम्पर्क करे।
ऊर्जा राज्यमंत्री ने कहा कि नई स्थापित की जा रही विद्युत उत्पादन परियोजनाओं से विद्युत निकासी के लिये ट्रांसमिशन लाईनों तथा ट्रांसमिशन प्रणाली के सुदृढ़ीकरण आदि कार्यों के लिये आगामी पांच वर्षों में लगभग 5816 करोड़ रुपये पूंजी निवेश की आवश्यकता है। श्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश की सतपुड़ा ताप विद्युतगृह की इकाइयों के नवीनीकरण एवं आधुनीकरण के कार्यों के लिये भी विश्व बैंक से ऋण प्राप्ति के प्रस्ताव पर विद्युत मंत्रालय भारत सरकार से सहयोग अपेक्षित है।
उन्होंने सुझाव दिया कि केन्द्रीय स्तर पर विद्युत मंत्रालय में एक रिसोर्स मोबिलाइजेशन इकाई स्थापित की जाना चाहिये, जो कि राज्यों की पूंजीगत आवश्यकता को देखते हुए धन की व्यवस्था हेतु सलाह दे तथा इसके लिये वित्तीय संस्थानों से सम्पर्क करे।
उन्होंने कहा कि केन्द्रीय स्तर पर इस सिंगल विंडो इकाई द्वारा विद्युत परियोजनाओं के लिये कम ब्याज दरों पर पूंजी की व्यवस्था किया जाना संभव हो सकेगा। श्री शुक्ल ने कहा कि विद्युत क्षेत्र में पूंजीगत कार्यों के लिये राज्य के लिये ऋण आदि की व्यवस्था कार्य हेतु सिंगल विंडो व्यवस्था विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत की जाये।
श्री शुक्ल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत प्रदाय में सुधार के लिये तथा विद्युत हानियों में कमी लाने हेतु व्यापक धन की आवश्यकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि पम्पों तथा घरों आदि के लिये एक ही फीडर होने से घरों तथा अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिये आवश्यक विद्युत प्रदाय किया जाना संभव नहीं हो पा रहा है।
श्री शुक्ल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत प्रदाय में सुधार के लिये तथा विद्युत हानियों में कमी लाने हेतु व्यापक धन की आवश्यकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि पम्पों तथा घरों आदि के लिये एक ही फीडर होने से घरों तथा अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिये आवश्यक विद्युत प्रदाय किया जाना संभव नहीं हो पा रहा है।
प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में शहरों के समान विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये वितरण फीडर विभक्तिकरण की योजनाएं तैयार की जा रही हैं। अगले तीन वर्षों में किये जाने वाले इन कार्यों के लिये प्रदेश की तीनों वितरण कम्पनियों को करीब पांच हजार करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी। श्री शुक्ल ने कहा कि इस महत्वपूर्ण कार्य के लिये पूंजी की आवश्यकता को देखते हुए यह आवश्यक है कि भारत सरकार द्वारा वितरण कम्पनियों को कम ब्याज दरों पर वित्तीय संस्थाओं से ऋण की व्यवस्था कराई जाये।
श्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में विद्युत क्षेत्र सुधार कार्यक्रम प्रारंभ किये जाने के बाद से ही पुनर्गठन के बाद स्थापित वितरण कम्पनियों द्वारा टी एंड सी हानियों में कमी लाने के लिये व्यापक प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने अपेक्षा की कि केन्द्र सरकार द्वारा शहरी क्षेत्रों के लिये आर-एपीडीआरपी के माध्यम से उपलब्ध कराये जा रहे धन के अतिरिक्त ग्रामीण क्षेत्रों में किये जाने वाले अधोसंरचना विकास कार्यों के लिये विशेष ऋण तथा धन की उपलब्धता कराई जायेगी।
श्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में विद्युत क्षेत्र सुधार कार्यक्रम प्रारंभ किये जाने के बाद से ही पुनर्गठन के बाद स्थापित वितरण कम्पनियों द्वारा टी एंड सी हानियों में कमी लाने के लिये व्यापक प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने अपेक्षा की कि केन्द्र सरकार द्वारा शहरी क्षेत्रों के लिये आर-एपीडीआरपी के माध्यम से उपलब्ध कराये जा रहे धन के अतिरिक्त ग्रामीण क्षेत्रों में किये जाने वाले अधोसंरचना विकास कार्यों के लिये विशेष ऋण तथा धन की उपलब्धता कराई जायेगी।
उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते दुष्प्रभाव पर रोक लगाने के उद्देश्य से प्रदेश में अपारम्परिक ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से विद्युत उत्पादन क्षमता वृद्धि के लिये भी राज्य सरकार द्वारा विशेष प्रयास किये जा रहे हैं। इस बावत राज्य शासन द्वारा एक प्रोत्साहन नीति भी जारी की गई है। श्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश की पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी अंतर्गत 50 कृषि पम्पों को ऊर्जा दक्ष पम्पों से परिवर्तित किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप विद्युत खपत में लगभग 30 से 40 प्रतिशत कमी होने के साथ-साथ विद्युत की मांग में भी करीब 40 प्रतिशत की कमी आई है।
श्री शुक्ल ने कहा कि राज्य में ऊर्जा दक्ष पम्पों तथा केपेसिटर आदि के उपयोग पर विद्युत दरों में प्रति यूनिट 45 पैसे तक की छूट भी प्रदान की गई है। ऊर्जा दक्ष पम्पों की लागत सामान्य पम्पों से लगभग डेढ़ गुना होती है, जिस कारण किसान इन पम्पों को खरीदने के लिये उत्सुक नहीं रहते हैं।
श्री शुक्ल ने कहा कि राज्य में ऊर्जा दक्ष पम्पों तथा केपेसिटर आदि के उपयोग पर विद्युत दरों में प्रति यूनिट 45 पैसे तक की छूट भी प्रदान की गई है। ऊर्जा दक्ष पम्पों की लागत सामान्य पम्पों से लगभग डेढ़ गुना होती है, जिस कारण किसान इन पम्पों को खरीदने के लिये उत्सुक नहीं रहते हैं।
श्री शुक्ल ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा जिस तरह डीजल एवं खाद आदि पर सब्सिडी दी जाती है उसी तरह ऊर्जा द्क्ष पम्पों के क्रय के लिये किसानों को सस्ती दरों पर ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा सकती है, जिससे किसानों के हित के साथ-साथ विद्युत की खपत में लगभग 30 से 35 प्रतिशत की कमी होने के कारण वितरण कम्पनियों का हित भी संरक्षित होगा।
श्री राजेन्द्र शुक्ल ने देश के समग्र विकास के लिये सुझाव दिया कि जिन राज्यों में विद्युत क्षेत्र में सुधार की ज्यादा संभावनाएं हैं तथा विद्युत हानियां आदि का स्तर राष्ट्रीय स्तर से अधिक है,
श्री राजेन्द्र शुक्ल ने देश के समग्र विकास के लिये सुझाव दिया कि जिन राज्यों में विद्युत क्षेत्र में सुधार की ज्यादा संभावनाएं हैं तथा विद्युत हानियां आदि का स्तर राष्ट्रीय स्तर से अधिक है,
उन राज्यों में विद्युत क्षेत्र में पूंजी निवेश के लिये केन्द्र सरकार द्वारा विशेष सहायता की जाये ताकि उन राज्यों द्वारा विद्युत की हानियों में कमी लाने के लिये सार्थक प्रयास किये जा सकें। साथ ही उन्होंने अनुरोध किया कि जिन राज्यों में प्रति उपभोक्ता विद्युत खपत राष्ट्रीय स्तर से कम है उन राज्यों को प्रगतिशील राज्यों के समक्ष लाने के लिये विद्युत क्षेत्र हेतु केन्द्र सरकार द्वारा अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराई जाये।
Read Full Text......
Labels: CenterState, Power, RajendraShukla
Saturday, November 14, 2009
ग्रामीण क्षेत्रों में थ्री फेस पर 15 घंटे विद्युत का प्रदाय
मध्यप्रदेश द्वारा केन्द्रीय अंश से कम विद्युत का आहरण
प्रदेश में गत दो दिनों में मावठा बरसने के कारण विद्युत की मांग में बहुत कमी आई है। फ्रीक्वेंसी भी बेहतर हुई है तथा रबी मौसम की फसलों हेतु किसानों के लिये वरदान साबित हुई है। वर्तमान में संभागीय, जिला एवं तहसील मुख्यालयों पर 24 घंटे विद्युत का प्रदाय किया जा रहा है।
साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में थ्री फेस पर 15 घंटे एवं सिंगल फेस पर 5 घंटे विद्युत का प्रदाय किया जा रहा है। पश्चिमी ग्रिड के राज्यों में भी सभी जगह वर्षा होने के कारण प्रणाली की फ्रीक्वेंसी अच्छी चल रही है। मध्यप्रदेश केन्द्रीय क्षेत्र से अपने अंश से कम विद्युत का आहरण कर रहा है।
विद्युत की मांग में आई कमी के मद्देनजर विद्युत मण्डल द्वारा ताप विद्युतगृहों की मरम्मत के कार्य को प्राथमिकता से किया जा रहा है, ताकि विद्युत की मांग बढ़ने पर इन यूनिटों को भरपूर चलाया जा सके।
राज्य के जिन ताप विद्युतगृहों में छोटी-मोटी तकनीकी खराबी है उन्हें देखते हुए इन्हें बंद कर इनकी मरम्मत की जा रही है। इनमें 120 मेगावाट की अमरकंटक तीन नम्बर, सतपुड़ा ताप विद्युतगृह की 62.5 मेगावाट तथा 210 मेगावाट की दो यूनिटों को बंद किया गया है।
राज्य के जिन ताप विद्युतगृहों में छोटी-मोटी तकनीकी खराबी है उन्हें देखते हुए इन्हें बंद कर इनकी मरम्मत की जा रही है। इनमें 120 मेगावाट की अमरकंटक तीन नम्बर, सतपुड़ा ताप विद्युतगृह की 62.5 मेगावाट तथा 210 मेगावाट की दो यूनिटों को बंद किया गया है।
साथ ही संजय गाँधी की 210 मेगावाट की इकाई को भी तकनीकी खराबी दूर करने के लिये बंद किया गया है। मरम्मत के पश्चात विद्युत की मांग बढ़ने पर इन यूनिटों को भरपूर चलाया जा सकेगा।
इसी प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों में जले एवं खराब ट्रांसफार्मरों को सुधारकर तैयार किया जा रहा है। साथ ही 220 के.व्ही., 132 के.व्ही. तथा 33/11 के.व्ही. के उपकेन्द्रों में यदि कोई खराबी है तो उसे भी ठीक किया जा रहा है। वर्तमान में अतिरिक्त समय में राजस्व बढ़ाने तथा विद्यूत चोरी को रोकने के प्रयास भी किये जा रहे हैं। आशा है कि विद्युत की मांग जब बढ़ेगी तब कम से कम अवरोधों से घोषित अवधि में विद्युत प्रदाय किया जायेगा।
Read Full Text......
इसी प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों में जले एवं खराब ट्रांसफार्मरों को सुधारकर तैयार किया जा रहा है। साथ ही 220 के.व्ही., 132 के.व्ही. तथा 33/11 के.व्ही. के उपकेन्द्रों में यदि कोई खराबी है तो उसे भी ठीक किया जा रहा है। वर्तमान में अतिरिक्त समय में राजस्व बढ़ाने तथा विद्यूत चोरी को रोकने के प्रयास भी किये जा रहे हैं। आशा है कि विद्युत की मांग जब बढ़ेगी तब कम से कम अवरोधों से घोषित अवधि में विद्युत प्रदाय किया जायेगा।
Labels: Power
Tuesday, November 10, 2009
मप्र को मिला 2640 मेगावाट का सुपर ताप विद्युत संयंत्र
केन्द्र व राज्य ने किए करारनामें पर हस्ताक्षर
Bhopal:Monday, November 9, 2009:Updated 19:47IST ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री राजेन्द्र शुक्ल और केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री श्री सुशील कुमार शिन्दे की उपस्थिति में नई दिल्ली में 2640 मेगावाट सुपर थर्मल पावर प्लान्ट की स्थापना के लिए एक करारनाने पर हस्ताक्षर किये गये। यह 2640 मेगावाट का सुपर थर्मल पावर प्लान्ट मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले में स्थापित किया जायेगा। इसके लिए मध्यप्रदेश सरकार ने 2500 एकड़ जमीन और 125 क्यूसेक पानी नर्मदा नदी से उपलब्ध कराने की सहमति दी है। करारनामे पर हस्ताक्षर ऊर्जा सचिव श्री एस।पी.एस. परिहार और एनटीपीसी के संचालक तकनीकी श्री आर.के. जैन ने हस्ताक्षर किये।
इस 2640 मेगावाट के थर्मल पावर प्लान्ट के करारनामे पर हस्ताक्षर करने के अवसर पर केन्द्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री श्री भारत सिंह सोलंकी, मध्यप्रदेश के पूर्व सांसद श्री सुरेश पचौरी, सांसद श्री उदय प्रताप सिंह, मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव श्री राकेश साहनी, एनटीपीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध संचालक श्री आर0एस0 शर्मा, केन्द्रीय ऊर्जा सचिव श्री हरिशंकर ब्रह्म, मध्यप्रदेश के पावर ट्रेडिंग कारपोरेशन के प्रबंध संचालक श्री पी.के. वैश्य, प्रदेश के आवासीय आयुक्त श्री बिमल जुल्का और विशेष आयुक्त श्री अनिल कुमार जैन उपस्थित थे।
ऊर्जा राज्य मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने इस अवसर पर श्री शिन्दे का आभार व्यक्त किया जिनके प्रयासों से प्रदेश में यह बिजलीघर स्थापित होगा। इससे प्रदेश को बिजली संकट से निजात मिलेगी। श्री शुक्ल ने इस पावर प्लान्ट से 80 प्रतिशत बिजली मध्यप्रदेश को उपलब्ध कराने का आग्रह किया।
प्रदेश में कोयले की उपलब्धता को देखते हुए राज्य शासन अपने संसाधनों का दोहन कर अधिक से अधिक पावर प्लान्टों की स्थापना करने में निजी क्षेत्र को भी सुविधाएं उपलब्ध करायेगा। विगत वर्षो में प्रदेश में तीन हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन बढ़ाया गया है। बिजली उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ पारेषण और वितरण व्यवस्था को मजबूत कर बिजली की उपलब्धता बढ़ाने का प्रयास किया गया है।
केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री श्री शिन्दे ने इस अवसर पर बताया कि वर्ष 2012 तक देश के सभी नागरिकों को बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित की जायेगी। श्री शिन्दे ने इस थर्मल पावर प्लान्ट के लिए मध्यप्रदेश सरकार द्वारा तत्परता से जमीन और पानी मुहैया कराने के लिए सराहना की।
श्री शिन्दे ने एनटीपीसी के अधिकारियों से कहा कि पावर प्लान्ट के पास आई टी आई खोला जाए जिससे प्रशिक्षित होकर स्थानीय लोगों को ज्यादा रोजगार मिल सकें। श्री शिन्दे ने यह भी कहा कि यह बिजलीघर 12वीं पंचवषीर्य योजना में स्थापित हो जायेगा। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के पूर्व सांसद श्री पचौरी ने भी जमीन और पानी तुरन्त उपलब्ध कराने के लिए मध्यप्रदेश सरकार की सराहना की।
Labels: CenterState, Power, RajendraShukla
Subscribe to:
Posts (Atom)