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Tuesday, March 16, 2010

प्रदेश में ऊर्जा संरक्षण के लिये अधिसूचना जारी

 ऊर्जा संरक्षण अधिनियम 2001 के अंतर्गत जारी
राज्य सरकार ने प्रदेश में ऊर्जा के दक्षतापूर्ण उपयोग और उसके संरक्षण के लिये अधिसूचना जारी की है। ऊर्जा संरक्षण अधिनियम 2001 के अंतर्गत जारी इस अधिसूचना के फलस्वरूप अब प्रदेश में ऊर्जा का दक्षतापूर्ण उपयोग और उसका संरक्षण करना अनिवार्य होगा।
अधिसूचना के अनुसार अब प्रदेश में विभिन्न श्रेणियों और वर्गों के भवनों और स्थानों में सौर जल तापीय प्रणाली का उपयोग अनिवार्य होगा। ऐसे भवनों और स्थानों में समस्त वाणिज्यिक एवं औद्योगिक इकाईयां जहां प्रसंस्करण के लिये गर्म जल अपेक्षित है, शामिल हैं। ऐसे भवनों में समस्त निजी एवं शासकीय अस्पताल और नर्सिंग होम, समस्त निजी एवं शासकीय, होटल, मोटल, विश्रामगृह, भोजनालय और केन्टीन भी शामिल रहेंगे। इसके साथ ही समस्त ऐसे वाणिज्यिक भवन एवं संस्थाएं जिनकी पूंजीगत लागत 50 लाख रुपये से अधिक हो और जहां गर्म जल का उपयोग किया जाता हो, उनके द्वारा अपेक्षा अनुसार न्यूनतम 25 प्रतिशत की पूर्ति सौर जल तापीय प्रणाली के माध्यम से, अधिसूचना की तिथि से एक वर्ष के भीतर अनिवार्य रूप से की जायेगी।

समस्त संबंधित शासकीय विभाग सौर जल तापीय प्रणाली के उपयोग को अनिवार्य बनाने के लिये इस अधिसूचना के जारी होने की तिथि से दो माह की समयावधि के भीतर अपने नियम एवं उप विधियों में संशोधन करेंगे। सौर जल तापीय प्रणाली का प्रतिष्ठापन सुनिश्चित करने के लिये मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा।

शासकीय क्षेत्र एवं शासकीय सहायता प्राप्त क्षेत्र में निर्मित समस्त नये भवनों एवं संस्थानों में इन्केंडीसेट बल्बों को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित किया गया है और अब ऐसे भवनों एवं संस्थानों में ऊर्जा दक्ष प्रकाश का उपयोग (सीएफएल, एलईडी आधारित प्रकाश, इलेक्ट्रॉनिक ब्लास्ट, रेग्यूलेटर एवं ट्यूब लाईट्स) अनिवार्य होगा। इसके साथ ही समस्त शासकीय एवं शासकीय सहायता प्राप्त संस्थानों में ऊर्जा दक्ष प्रकाश का उपयोग अनिवार्य होगा और इस अधिसूचना के जारी होने की तिथि से दो माह के भीतर यथोचित बदलाव करना होगा।

समस्त शासकीय एवं शासकीय सहायता प्राप्त संस्थाएं, नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत, ग्राम पंचायत, सहकारी संस्थाएं, गृह निर्माण समितियां, विकासकर्ता, बोर्ड, विकास प्राधिकरण आदि केवल, आई.एस.आई./बी.ई.ई. प्रमाणित पम्प सेट्स/मोटर/वाल्व, पॉवर केपीसीटर्स, स्ट्रीट लाइटिंग आदि का उपयोग अनिवार्य रूप से करेंगे।

शासकीय एवं शासकीय सहायता प्राप्त क्षेत्र में निर्मित होने वाले समस्त नये भवनों में ऊर्जा दक्ष भवन रूपांकन (डिजाइन) की अवधारणा शामिल रहेगी। रूपांकन अनुमोदित करने वाली एजेंसी शासकीय एवं शासकीय सहायता प्राप्त क्षेत्र में भविष्य में निर्मित किये जाने वाले समस्त भवनों में ऊर्जा दक्ष भवन रूपांकन की अवधारणा को शामिल करना सुनिश्चित करेगी।

राज्य सरकार द्वारा मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम को इस अधिसूचना के संस्थापन, क्रियान्वयन, शिक्षा और प्रचार-प्रसार के लिये नोडल एजेंसी बनाया गया है।

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