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Wednesday, March 31, 2010

एक अप्रैल से लागू होगा अनिवार्य शिक्षा कानून

मध्यप्रदेश सहित पूरे देश में एक अप्रैल से लागू होने जा रहे ‘बच्चों की नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम’ की शासन स्तर पर व्यापक तैयारियां की गई हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनीस ने आज अपने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से एक्ट के क्रियान्वयन के संबंध में चर्चा की।

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Tuesday, March 16, 2010

मप्र को केन्द्रीय सड़क निधि से सड़कों के लिये 782.68 करोड़ रुपये मिले

480 करोड़ रुपये के कार्यों के निर्माण का रास्ता साफ
प्रदेश सरकार की वचनबद्धता के अनुसार प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण सड़कों का निर्माण निर्धारित समय सीमा में कराने के लिये लोक निर्माण मंत्री श्री नागेन्द्र सिंह की पहल पर इस वर्ष 2009-10 में केन्द्रीय सड़क निधि (सी.आर.एफ.) से 1084.19 कि.मी. लम्बी मुख्य जिला मार्गों की 51 सड़कों, एक फ्लाई ओवर, तीन पुलों के निर्माण एवं पुलियों के चौड़ीकरण के लिये 782 करोड़ 68 लाख रूपये की राशि स्वीकृत की गई है।

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Friday, February 26, 2010

केन्द्रीय बजट से महंगाई बढ़ेगी

 वित्त मंत्री श्री राघवजी की प्रतिक्रिया
वित्त मंत्री श्री राघवजी ने आज संसद में प्रस्तुत केन्द्रीय बजट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहा कि इसने देश की जनता को काफी निराश किया है क्योंकि महंगाई पर काबू पाने के लिये इसमें कोई ठोस उपाय नहीं किया गया है। इसके विपरीत क्रूड आइल पर ड्युटी बढ़ाकर डीजल और पेट्रोल को महंगा कर दिया है। इसके दूरगामी परिणाम होंगे और कृषि सहित अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ेगी।

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Thursday, February 25, 2010

गर्मी के दिनों में पेय जल मुहैया कराने के पुख्ता इंतजाम हो

  विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति वितरण में कोताही बर्दाश्त नहीं : मुख्य सचिव
मुख्य सचिव श्री अवनि वैश्य आज मंत्रालय में परख कार्यक्रम के दौरान वीडियो कॉन्फेसिंग के जरिये संभागायुक्त एवं जिला कलेक्टरों से मुखातिब हुए। मुख्य सचिव ने इस दौरान निर्देश दिये कि कमजोर वर्गों को मुहैया कराई जाने वाली सामाजिक सुरक्षा पेंशन और वृद्धावस्था पेंशन का वितरण समय पर होना चाहिए।

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Tuesday, February 23, 2010

प्रदेश के 14 जिलों में कपास प्रौद्योगिकी मिशन

केन्द्र की भागीदारी 75 प्रतिशत और राज्य की भागीदारी 25 प्रतिशत
मध्यप्रदेश के 14 कपास उत्पादक जिलों में केन्द्र और राज्य शासन के सहयोग से कपास प्रौद्योगिकी मिशन का कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम में केन्द्र की भागीदारी 75 प्रतिशत और राज्य की भागीदारी 25 प्रतिशत है।कार्यक्रम का उद्देश्य कपास उत्पादक कृषकों को उत्तम गुणवत्ता वाले कपास के अधिकतम उत्पादन के लिये प्रेरित करना है। योजना के अंतर्गत प्रमाणित बीज वितरण, विस्तार कार्यकर्ता प्रशिक्षण, कृषक प्रशिक्षण, रसायनों से बीज उपचार, हस्तचलित एवं शक्तिचलित स्प्रेयर, डीलिंटिंग प्लांट की स्थापना, बायो एजेंट लेब की स्थापना एवं स्प्रिंकलर सेट तथा टपक सिंचाई को प्रोत्साहित किया जाना है।

इस कार्यक्रम के अंतर्गत वर्ष 2007-08 में लगभग सवा चार करोड़ रुपये की राशि, वर्ष 2008-09 में पौने पांच करोड़ रुपये की राशि व्यय की गई। इस वर्ष इस कार्यक्रम में लगभग साढ़े 5 करोड़ रुपये की राशि व्यय की जा रही है।

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Monday, February 22, 2010

केन्द्र सरकार मप्र को पर्याप्त कोयला दे -मुख्यमंत्री

अंतर्राष्ट्रीय कलार महासम्मेलन का आयोजन
मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा है कि केन्द्र सरकार द्वारा मध्यप्रदेश को निर्धारित कोयला आवंटन किया जाना चाहिये। उन्होंने प्रदेश में उत्पादित कोयले की प्रदेश में ही आपूर्ति किये जाने की मांग भी केन्द्रीय कोयला राज्य मंत्री से की। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज यहां लाल परेड ग्राउण्ड में केन्द्रीय कोयला राज्य मंत्री श्री श्रीप्रकाश जायसवाल की उपस्थिति में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कलार महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रदेश में विद्युत उत्पादन के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि आवश्यक मात्रा में कोयला न मिलने से ताप विद्युतगृहों की उत्पादन क्षमता प्रभावित हो रही है। वर्तमान में प्रदेश को मात्र 11-12 लाख टन कोयला दिया जा रहा है, जबकि आवश्यकता 17 लाख टन की है। प्रदेश में बड़ी मात्रा में कोयला उत्पादन के बावजूद केन्द्र सरकार से पर्याप्त आवंटन न होने से मध्यप्रदेशवासी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री जायसवाल के भोपाल आगमन का लाभ लेकर कलार महासम्मेलन में उनके समक्ष मध्यप्रदेश का पक्ष रखा और प्रदेश को कोयला आवंटन बढ़ाने की मांग की।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इस अवसर पर कलार समाज के आयोजन की प्रशंसा करते हुए कहा कि कलार समाज परिश्रमी और सेवाभावी समाज है। उन्होंने युवक-युवती परिचय सम्मेलन एवं समाज की प्रतिभाओं के सम्मान समारोह के लिए आयोजकों को बधाई दी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इस अवसर पर विशिष्ट सेवा सम्मान से श्री बनवारी लाल चौकसे, श्रीमती कल्पना राय, श्री मुकुल गुप्ता, श्री रामशरण चौकसे, श्री राजेश शर्मा, श्री आदित्य विक्रम पेठिया और श्रीमती गीता पेठिया को सम्मानित किया। पेठिया दम्पति की ओर से श्री पी.के. राय ने सम्मान ग्रहण किया।

केन्द्रीय मंत्री श्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने कहा कि आज प्रत्येक समाज को वक्त की नब्ज पहचानना चाहिए। कलार समाज पिछड़े वर्ग में शामिल है और समाज बन्धुओं को पिछड़े वर्गों को दिए जा रहे आरक्षण एवं अन्य सुविधाओं का पूरा लाभ लेने के साथ ही उत्तरोत्तर प्रगति के प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संभव हो तो आर्थिक-सामाजिक उन्नति हासिल करने के पश्चात् आरक्षण की इच्छा का परित्याग भी कर देना चाहिए। श्री जायसवाल ने सम्मेलन में उपस्थित अभिभावकों से अपेक्षा की कि वह युग की चुनौती स्वीकार कर बच्चों को अति-योग्य बनायें और बच्चों की रुचि के अनुरूप उनके कैरियर पर ध्यान दें। केन्द्रीय राज्य मंत्री ने श्रीमती उपमा राय, श्रीमती समीक्षा गुप्ता, श्री अखिलेश आर्य, श्री बसंतलाल शाह, श्री दिलीप जायसवाल, श्री प्रदीप जायसवाल एवं श्री अनुपम राय को 'समाज विभूति' स्मृति चिन्ह प्रदान किये।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री सुरेश पचौरी ने कहा कि कलार समाज को कुरीतियां समाप्त करने के संकल्प पर कार्य करते हुए समाज कल्याण के कार्यों में सक्रिय होना चाहिए। श्री पचौरी ने इस अवसर पर जानकारी दी कि कलार समाज के श्री हीरालाल ने डिप्टी कमिश्नर के रूप में उल्लेखनीय सेवाएं दीं और एक समय आठ जिलों के गजेटियर तैयार करने का महत्वपूर्ण कार्य किया। समाज की ऐसी विभूतियों के कार्यों का स्मरण भी किया जाना चाहिए।

उद्योग मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि युवक-युवती परिचय सम्मेलन में प्रतिभागियों को परस्पर मन की सुंदरता देखकर आवश्यक निर्णय लेना चाहिए। सम्मेलन में जल संसाधन मंत्री जयंत मलैया, विधायक श्री दिलीप जायसवाल, श्री प्रदीप जायसवाल, ग्वालियर की महापौर श्रीमती समीक्षा गुप्ता, श्री अरविन्द मालवीय, श्री राजाराम सूर्यवंशी भी उपस्थित थे। प्रारंभ में आयोजक संस्था हैहय क्षत्रिय कल्चुरी समाज के संरक्षक श्री दिलीप सूर्यवंशी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए आयोजन के महत्व की जानकारी दी। कार्यक्रम में केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री जायसवाल, मुख्यमंत्री श्री चौहान एवं अन्य मंत्रियों ने परिचय सम्मेलन के पश्चात विवाह-बंधन में बंधे युवक-युवतियों को बधाई दी। इसके पहले अतिथियों का स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री श्री चौहान एवं केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री जायसवाल ने भगवान सहस्त्रबाहु राजराजेश्वर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर सम्मेलन का शुभारंभ किया।

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Friday, January 29, 2010

केन्द्र और राज्य सरकार मिलकर बढ़ायें ऊर्जा उत्पादन

खण्डवा में सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट  अनुबंध पर हस्ताक्षर
मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा है कि केन्द्र सरकार से मध्यप्रदेश की ऊर्जा परियोजनाओं के लिए पर्यावरण संबंधी क्लीयरेन्स प्राप्त करने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है। आज यह आवश्यक है कि राजनेता निंदा-आलोचना का मार्ग छोड़कर आम जनता के लिए कार्य करें और केन्द्र एवं राज्य सरकार ऊर्जा सहित अन्य क्षेत्रों में मिलकर विकास को गति दें।
मुख्यमंत्री श्री चौहान आज यहां होटल अशोक लेक व्यू में बीएचईएल एवं मध्यप्रदेश पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड के संयुक्त उद्यम के अनुबंध के अवसर पर संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर खण्डवा में कोयला आधारित पावर प्लांट लगाने के लिए मध्यप्रदेश पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (एमपीपीजीसीएल) एवं भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड के संयुक्त उद्यम के लिए संयुक्त अनुबंध पर हस्ताक्षर किये गये। इस संयुक्त उद्यम कंपनी - दादा धूनीवाले खंडवा पॉवर लिमिटेड में बीएचईएल एवं एमपीपीजीसीएल की बराबर की हिस्सेदारी होगी। बाद में कंपनी के विकास के लिये वित्तीय संस्थानों, बैंकों आदि को साझेदार बनाया जाएगा। इस परियोजना की कुल संभावित लागत 10 हजार करोड़ रूपये है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश तेजी से विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि आने वाले समय की आवश्यकता को ध्यान में रखकर विद्युत उत्पादन इकाईयों की शुरूआत हो। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि निरन्तर विद्युत खपत बढ़ने से विद्युत उत्पादन बढ़ाने और बिजली की बचत के अलावा कोई विकल्प नहीं है। केन्द्र सरकार द्वारा पर्यावरण संबंधी अनुमति समय पर प्राप्त होना चाहिए। आज पर्याप्त बिजली आपूर्ति के लिए एक एकात्मक एवं संतुलित नीति की आवश्यकता है जिसमें पर्यावरण की रक्षा भी सुनिश्चित हो जाए और विद्युत उत्पादन इकाईयों को सुचारू रूप से संचालित किया जा सके। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने खंडवा के पास आठ सौ मेगावाट की दो इकाईयों के पावर प्लांट की प्रथम इकाई साढ़े तीन वर्ष में प्रारंभ किये जाने के संकल्प के लिए केन्द्रीय और भारी उद्योग राज्य मंत्री श्री यादव को बधाई दी। श्री चौहान ने आशा व्यक्त की कि बीएचईएल द्वारा परियोजना के कार्यों को समय पर पूरा किया जायेगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि परियोजनाओं के लिए राज्य सरकार द्वारा भूमि आवंटन सहित अन्य सभी कार्य बिना विलम्ब के किए जायेंगे।

केन्द्रीय भारी उद्योग राज्य मंत्री श्री अरुण यादव ने कहा कि लगभग दो माह पूर्व खण्डवा में सुपर क्रिटिकल पैरामीटर पर थर्मल पावर प्लांट के लिए संयुक्त उद्यम बनाने पर करारनामा हुआ था। बहुत कम समय में यह कार्यवाही पूर्ण की गई। आने वाले चार वर्ष में खण्डवा क्षेत्र पावर हब के रूप में पहचान बना लेगा। मध्यप्रदेश में ऊर्जा उत्पादन की संभावनाओं को साकार करने के लिए वे पूरा सहयोग देंगे। श्री यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की विद्युत उत्पादन इकाईयों की स्थापना के लिए केन्द्र में लंबित पर्यावरणीय अनुमतियों के लिए वे केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री से चर्चा करेंगे।

ऊर्जा राज्य मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रदेश की ऊर्जा परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आ रहे अवरोध समाप्त हो रहे हैं और विद्युत उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों को गति मिल रही है। कार्यक्रम में परिवहन मंत्री श्री जगदीश देवड़ा, मुख्यसचिव श्री राकेश साहनी, ऊर्जा सचिव श्री एस.पी.एस. परिहार उपस्थित थे। बीएचईएल अध्यक्ष एवं प्रबन्ध संचालक श्री बी. प्रसाद राव ने स्वागत भाषण दिया। बीएचईएल के निदेशक (वित्त) श्री सी.एस. वर्मा ने आभार माना।

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Monday, January 25, 2010

दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिये बनेगा फाडर कार्पोरेशन

पशुपालन मंत्री श्री अजय विश्नोई का केन्द्र से आग्रह
केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शरद पवार द्वारा नई दिल्ली में आयोजित पशुपालन मंत्रियों की बैठक में पशुपालन मंत्री श्री अजय विश्नोई ने पशुओं के वंश सुधार के साथ-साथ पशुओं की खुराक पर ध्यान केन्द्रित करने पर जोर दिया। गाय-भैंस की वंशावली दूध उत्पादन में 30 प्रतिशत मदद करती है।
जानवर किसी भी वंश का हो बिना बेहतर खुराक के अधिक दूध नहीं दे सकता। बेहतर चारे के उत्पादन के लिये बीज की उपलब्धता के साथ देश में कहीं सूखा तो कहीं बाढ़ चारे का संकट उत्पन्न करता है। श्री विश्नोई ने कहा कि इन हालातों से निपटने के लिये केन्द्र सरकार को फाडर कार्पोरेशन आफ इंडिया की स्थापना करना चाहिये।
सूखे, चारे को यूरिया के माध्यम से उसमें प्रोटीन मात्रा में सुधार जैसे प्रयोग किसानांें को सिखाने होंगे। हरे चारे के उत्पादन को बेहतर प्रोत्साहन देना होगा। हरे चारे को सर्पोट प्राईस पर खरीदने की योजना आवश्यक है। फूड ब्लाक की उपलब्धता, गुणवत्ता और कीमतों पर अंकुश रखने के लिए केन्द्र सरकार कानून बनाये और अनुदान उपलब्ध कराने की व्यवस्था करे।

श्री अजय विश्नोई ने दूध उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली गाय और गौवंश के वध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने तथा इसे संविधान में मूलभूत अधिकार के रूप में शामिल करने पर भी जोर दिया। गौवंश को ज्यादा उपयोगी और लाभदायक बनाने, गौ मूत्र से इलाज और फसलों की रक्षा के लिये कीटनाशक बनाने के प्रयासोंं को प्रोत्साहन देने की योजनायें भी केन्द्र शासन को बनाना चाहिये।
गोबर के उपयोग से गैस और खाद के लिये इन्टीग्रेेटेड योजनाओं को बल दिया जाना चाहिये। राष्ट्रीय गौ एवं भैंस वंशीय प्रजनन परियोजना के दायरे को बढ़ाकर उसमें बछिया के माँ बनने तक पालन की योजना को शामिल करने का सुझाव देते हुये इस परियोजना को 2012 से आगे बढ़ाने पर श्री विश्नोई ने बल दिया।

कृषि विद्यालयों के साथ-साथ पशु विज्ञान विश्वविद्यालयों को भी अधिक सहायता दिलाने की मांग रखते हुये श्री अजय विश्नोई ने बतलाया कि विगत 22 साल में देश के जी.डी.पी. में पशुधन का योगदान मामूली गिरावट के साथ तकरीबन एक सा बना हुआ है। वह 4.83 प्रतिशत से 4.40 प्रतिशत आया है।
परन्तु कृषि का जी.डी.पी. में योगदान पिछले 22 साल में 34.72 प्रतिशत से घटकर 16.62 प्रतिशत हो गया है। आंकड़े बताते हैं पशुधन और दूध उत्पादन पर ध्यान देकर हम देश की जी.डी.पी. में सकारात्मक योगदान दे सकते हैं। मध्यप्रदेश के जी.डी.पी. में पशुधन का योगदान 8.06 प्रतिशत है। इसे और प्रोत्साहन दिये जाने की आवश्यकता है।

श्री अजय विश्नोई ने गाय, भैंस और मुगिर्यों की लुप्त होती जा रही प्रजातियों की रक्षा करने पर जोर देते हुये बताया कि भोपाल की 162 एकड़ भूमि पर देश का पहला एनीमल बायोडायबसिर्टी पार्क बनने जा रहा है, जहां गाय, भैंस और मुगिर्यों की सभी प्रजातियों को उसकी मूल भूमि के वातावरण में रखा जायेगा और इस पार्क को टूरिज्म से जोड़ा जायेगा।
बकरी को गरीब की गाय और किसान का ए.टी.एम. बताते हुये श्री विश्नोई ने बतलाया कि देश के कुल दुग्ध उत्पादन में बकरी के दूध का योगदान 3.72 प्रतिशत है। मध्यप्रदेश में यह 7.4 प्रतिशत है, इसलिये देश में बकरीपालन को भी प्रोत्साहन दिया जाना चाहिये।

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Sunday, January 24, 2010

पीठासीन अधिकारियों का पाँच दिवसीय सम्मेलन दो फरवरी से

देश की विधानसभाओं से लगभग 500 प्रतिनिधि आएंगे
मध्यप्रदेश विधानसभा मे पीठासीन अधिकारियो का सम्मेलन 2 से 6 फरवरी तक आयोजित किया जायेगा। सम्मेलन के आयोजन के लिए गटित साधिकार समिति की बैठक मे इस दौरान होने वाले कार्यक्रमो को अंतिम रूप दिया गया। 
बैठक की अध्यक्षता समिति के सभापति विधानसभा अध्यक्ष श्री ईश्वरदास रोहाणी ने की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष श्रीमती जमुना देवी, विधानसभा उपाध्याक्ष श्री हरवंशसिंह वित्त मंत्री श्री राघवजी, जनसंपर्क मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा, विधानसभा के प्रमुख सचिव डॉ.ए.के. पयासी, मुख्य सचिव श्री राकेश साहनी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
विधानसभा के कक्ष मे आयोजित बैटक मे सम्मेलन की व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा की गई। विधानसभा अध्यक्ष ने सम्मेलन की तैयारियों को वृहद स्वरूप प्रदान कर र्स्वश्रेष्ठ आयोजन किये जाने के निर्देश दिये उन्होने कहा कि यह प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण आयोजन होगा। मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा कि व्यवस्थाओं मे किसी भी प्रकार की कमी ना हो तथा अतिथियो का विशेप ध्यान रखा जाये।
इस सम्मेलन मे देश की विधानसभाओं के करीब 5 सौ प्रतिनिधि सम्मिलित होंगे। प्रत्येक विधानसभा से दस प्रतिनिधि इस आयोजन मे शामिल होंगे जिनमे मुख्यत विधनसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव स्तर के अधिकारी होगे। लोकसभा व्दारा इस आयोजन को पूर्व मे ही स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। सम्मेलन मे विषयों का निर्धारण लोकसभा सचिवालय करेगा।
सम्मेलन मे शमिल होने वाले अतिथियों की आवासीय, परिवहन, भोजन व्यवस्था के संबंध साधिकार समिति की बैठक मे चर्चा की गयी। इसके अनुसार अतिथियो को नूर उस सबाह, अशोक लेकव्यू, जहॉनुमा पैलेस, पलाश रेसिडेंसी, होटल रेसिडेंसी, आमेर पैलेस निसर्ग, आर्क मैनोर, सुरेन्द्र विलास सहित अन्य स्थानो पर व्यवस्थायें की जायेंगी।
विधानसभा भवन मे आयोजित होने वाले कार्यक्रम स्थलों के चयन को भी बैटक मे अंतिम रूप दिया गया। इस अवसर पर लोकसभा सचिवालय एवं राज्य शासन के सहयोग से प्रदर्शनी का आयोजन किया जायेगा। सम्मेलन के दौरान मीडिया सेन्टर लोक सभा, राज्य सभा सेल्स काउंटर, एयर इंडिया के काउंटर आदि विधान सभा सचिवालय में ही विस्थापित किए जायेंगे। बैठक के अंत में आभार प्रदर्शन विधान सभा उपाध्यक्ष श्री हरवंश सिंह ने किया।

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Saturday, January 23, 2010

मप्र के मुख्यमंत्री श्री चौहान की प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह, से मुलाकात

प्रदेश की लंबित परियोजनाओं से अवगत कराया

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज यहां प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह से उनके निवास पर मिलकर प्रदेश की लंबित परियोजनाओं से अवगत कराया। ऊर्जा के क्षेत्र में श्री चौहान ने लंबित परियोजनाओं को बाहरी संस्थानों द्वारा आर्थिक मदद के प्रस्तावों पर शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया।
उन्होंने बताया कि पिछले पांच साल में मध्यप्रदेश में ऊर्जा का उत्पादन और पारेषण लगभग दुगुना हो गया है और आगामी पांच सालों में 5000 मेगावाट का अधिक उत्पादन किया जायेगा।

ऊर्जा वितरण के लिये नये संयंत्र लगाने के लिये ऊर्जा मंत्रालय द्वारा विश्व बैंक के माध्यम से 1686 करोड़ रूपये की प्रस्तावित योजना वित्त मंत्रालय में लंबित है। श्री चौहान ने प्रधानमंत्री को इसको शीघ्र स्वीकृत करवाने का आग्रह किया। प्रदेश में कोयले की कमी का जिक्र करते हुए श्री चौहान ने प्रधानमंत्री को बताया कि प्रदेश में प्रति माह लगभग 67 लाख मीट्रिक टन कोयले का खनन किया जा रहा है।
कोयले पर आधारित ऊर्जा संयंत्रों के लिये मध्यप्रदेश को 17 लाख मीट्रिक टन कोयले की प्रति माह आवश्यकता होती है। जबकि प्रदेश को केन्द्र सरकार द्वारा सिर्फ 11 लाख मीट्रिक टन कोयला दिया जा रहा है। केन्द्र सरकार का कहना है कि शेष कोयला राज्य को आयात करना चाहिए। श्री चौहान ने कहा कि यह व्यवहारिक नहीं है क्योंकि मध्यप्रदेश की भौगोलिक स्थिति के अनुसार यहां बंदरगाह नहीं हैं।
जिससे कि कोयले को आयात करने में सुविधा हो। श्री चौहान ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि राज्य सरकार को प्रदेश के बिरसिंहपुर क्षेत्र से कोयले का आवंटन किया जा सकता है। प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने इस पर सहमति व्यक्त करते हुये शीघ्र उचित कार्यवाही करने का आश्वासन दिया।

नक्सलवाद के बारे में श्री चौहान ने प्रधानमंत्री को बताया कि नक्सलवाद से प्रदेश के सीधी, उमरिया और शहडोल जिले भी ग्रसित हैं। बालाघाट जिले में नक्सलवादियों से निपटने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा तैनात बटालियन को वापस बुलाये जाने पर आपत्ति जताते हुये श्री चौहान ने बटालियन को वहीं तैनात रहने देने का आग्रह किया।

श्री चौहान ने प्रधानमंत्री से बुंदेलखंड विकास के लिये घोषित पैकेज को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि उक्त पैकेज कम से कम 24000 करोड़ रूपये का होना चाहिए। जिसमें से 18000 करोड़ मध्यप्रदेश के हिस्से में बुदेलखंड क्षेत्र के विकास के लिये मिलना चाहिये। श्री चौहान ने इसी भांति महाकौशल और विन्ध्य क्षेत्र के विकास के लिये भी केन्द्र सरकार को विशेष पैकेज की घोषणा करने की मांग की।

इससे पहले मुख्यमंत्री श्री चौहान ने खेल मंत्री डा. एम.एस. गिल से उनके निवास पर मुलाकात कर महिला हॉकी फेडरेशन के लिए एक करोड़ रूपये की सहायता देने की जानकारी दी।। उन्होंने खेलों में राजनीतिकरण पर चिन्ता व्यक्त की और कहा कि खेल संघ के लिये खेलों में महारथ प्राप्त विशेषज्ञों की ही सेवाएं लेनी चाहिए ताकि खेलों को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनाया जा सके।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हॉकी के खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने के लिये प्रदेश में एस्ट्रोटर्फ के नये स्टेडियम बनाने जा रही है जिससे नये खिलाड़ी तैयार होंगे। राज्य सरकार ने खेलों के लिये 60 करोड़ के बजट का आवंटन किया है। पहले मात्र चार करोड़ का खेल बजट होता था। उन्होंने बताया कि देश की जूनियर महिला हॉकी टीम में मध्यप्रदेश से 4 खिलाड़ी हैं।

श्री चौहान ने वित्त मंत्री डा. प्रणब मुखर्जी से उनके कार्यालय में मुलाकात कर प्रदेश में गैस पर आधारित पावर प्लांट लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश से होकर गैस पाइप लाइन जाती है इसलिए यहां पावर प्लांट और खाद कारखाना लगाना उचित होगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जहां पी.पी.पी की तर्ज पर राज्य में सड़कें बनायी गयी हैं। डा. मुखर्जी से सड़कों के लिए विश्व बैंक से भी मदद दिलाने का आग्रह किया।

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Friday, January 22, 2010

दिल्ली-मुम्बई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिये प्राधिकरण गठित होगा

 मुख्यमंत्री श्री चौहान की अध्यक्षता में बैठक
दिल्ली-मुम्बई इंडस्ट्रियल कारिडोर के अंतर्गत प्रदेश में परियोजना के विकास और कार्यान्वयन के लिये राज्य शासन द्वारा शीघ्र प्राधिकरण की स्थापना की जायेगी। यह निर्णय मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में राज्य शासन के समक्ष कारिडोर के संबंध में प्रस्तुत प्रस्तुतीकरण के दौरान लिया गया।
यह कारिडोर दिल्ली और मुम्बई के बीच 1,483 किलोमीटर लंबा डेडीकेटेड रेल फ्रेट कारिडोर होगा। इसके तहत मध्यप्रदेश सहित कुल 6 राज्यों में डीएफसी के दोनों ओर लगभग 150 किलोमीटर की पट्टी में उच्च प्रभाव विकास क्षेत्र प्रस्तावित किया गया है। कारिडोर में देश का लगभग 14 प्रतिशत जनसंख्या शामिल है।
इसमें राज्य सरकारों की सलाह से 24 एकीकृत क्षेत्र चिन्हित किये गये हैं। इनमें 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 11 निवेश क्षेत्र और 13 औद्योगिक क्षेत्र होंगे। एक वैश्विक विनिर्माण व व्यापार केन्द्र के रूप में विकसित होने वाला यह कारिडोर जापान की सहायता से बनाया जा रहा है। इस पर करीब 150 मिलियन अमेरिकन डॉलर व्यय होंगे। व्यय का आधा हिस्सा भारत सरकार व आधा हिस्सा जापान द्वारा वहन किया जायेगा।

बैठक में नगरीय प्रशासन और विकास मंत्री श्री बाबूलाल गौर, वित्त मंत्री श्री राघवजी भाई, लोक निर्माण मंत्री श्री नागेन्द्र सिंह, ऊर्जा राज्य मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल, मुख्य सचिव श्री राकेश साहनी, प्रमुख सचिव वाणिज्य एवं उद्योग श्री सत्यप्रकाश, ट्राइफेक के प्रबंध संचालक श्री प्रवीण गर्ग, प्रमुख सचिव राजस्व श्री एम.एम. उपाध्याय, मुख्यमंत्री के सचिव श्री एस.के. मिश्र और अवर सचिव श्री विवेक अग्रवाल उपस्थित थे।

बैठक में जानकारी दी गयी कि कारिडोर के अंतर्गत प्रदेश में क्रियान्वित की जाने वाली परियोजनाओं के लिये मुख्य सचिव की अध्यक्षता में साधिकार समिति गठित की जा चुकी है। इसके अलावा स्टीयरिंग कमेटी के गठन के अलावा परियोजना सलाहकार की भी नियुक्ति की जा चुकी है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बैठक में कारिडोर की मध्यप्रदेश संबंधी परियोजनाओं के लिये निजी भूमि के अधिग्रहण के बारे में कार्ययोजना शीघ्र प्रस्तुत करने को कहा। उन्होंने कहा कि इस कार्ययोजना को बनाते समय अन्य राज्यों की नीतियों का अध्ययन करने के साथ ही मध्यप्रदेश की परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाये। उन्होंने कहा कि कार्ययोजना में निजी भूमि मालिकों और प्रदेश के हितों को ध्यान में रखना जरूरी है।

बैठक में दिल्ली-मुम्बई इंडस्ट्रियल कारिडोर डेव्हलपमेंट कार्पोरेशन के प्रबंध संचालक और मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमिताभ कान्त ने कारिडोर खासतौर से मध्यप्रदेश में कारिडोर की प्रस्तावित परियोजनाओं पर केन्द्रित प्रस्तुतीकरण दिया।

मध्यप्रदेश में कारिडोर

दिल्ली-मुम्बई इंडस्ट्रियल कारिडोर में प्रदेश के 10 जिले शामिल है। प्रदेश की कुल आबादी का 24 फीसदी और कुल क्षेत्रफल का 20 फीसदी हिस्सा कारिडोर में विहित होगा। इन्दौर, धार, शाजापुर, उज्जैन, देवास, रतलाम, नीमच, झाबुआ, मंदसौर और राजगढ़ जिले इस कारिडोर में शामिल है।
कारिडोर के जरिये पीथमपुर-धार-महू निवेश क्षेत्र और रतलाम-नागदा निवेश क्षेत्र, शाजापुर-देवास और नीमच-नयागांव औद्योगिक क्षेत्र को एकीकृत रूप में चिन्हित किया गया है। पीथमपुर-धार-महू निवेश क्षेत्र को 370 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में एक आधुनिकतम रूप में विकसित किया जायेगा।
इसके लिये क्षेत्र को वैश्विक विनिर्माण हब के तौर पर डिजाइन किया गया है जहां उद्योग विकसित होंगे और आर्थिक विकास तेज होगा। क्षेत्र में अर्ली बर्ड परियोजनाओं के अंतर्गत इन्दौर एयरपोर्ट से पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र तक 20.3 किलोमीटर लंबा और 13.85 वर्ग किलो मीटर क्षेत्रफल का इकॉनामिक कारिडोर और उज्जैन मे 4.19 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में नॉलेज सिटी बनायी जायेगी। इस नॉलेज सिटी में शैक्षणिक एवं चिकित्सा सुविधाओं के साथ-साथ विश्व-स्तरीय आवासीय, वाणिज्यिक तथा अधोसंरचना उपलब्ध होगी।

साथ ही पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के निकट 1.75 वर्ग किलोमीटर में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब बनाने के अलावा क्षेत्र के लिये जल आपूर्ति सुधार परियोजना क्रियान्वित की जायेगी। संपूर्ण क्षेत्र में इंडस्ट्रियल जोनों के साथ-साथ सामान्य और आवास संबंधी बुनियादी सुविधाओं का संतुलित विकास प्रस्तावित है।

इकानॉमिक कारिडोर के अंतर्गत पीथमपुर और इन्दौर के बीच लिंक के साथ ही मौजूदा सड़क के दोनों तरफ 300 मीटर तक औद्योगिक विकास प्रस्तावित है। इस कॉरिडोर में बी.आर.टी. टर्मिनल, आई.टी. उद्योग, वाणिज्यिक, पर्यटन, जनसुविधाएं, संस्थागत, आवासीय, अनुसंधान और विकास, उद्योग, एक्सपो एंड कन्वेंशन, मौजूदा विकास और हरित क्षेत्र को फोकस किया गया है।

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Saturday, January 16, 2010

ट्रेनों में साइड अपर बर्थ नीचे किए जाय

 गृह मंत्री  ने रेल मंत्री  से किया आग्रह
गृह मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता ने रेल मंत्री सुश्री ममता बॅनर्जी से आग्रह किया है कि सिलीपर तथा एसी तृतीय श्रेणी के कोचों में साइड अपर वर्थ को नीचा किया जाय। श्री गुप्ता ने अपने पत्र में लिखा है कि श्री लालू प्रसाद यादव जब रेल मंत्री थे तब उन्होंने उन कोचों में साइड लोवर तथा साइड अपर की बर्थो के बीच एक बर्थ और लगाई थी।
नागरिकों के विरोध के कारण इसे निकाल दिया गया। लेकिन मिडिल बर्थ को लगाने के लिए जो साइड अपर बर्थ ऊपर कर दिया गया था उसे अभी तक नीचा नहीं किया गया है। इससे यात्रियों को पर्याप्त जगह नहीं मिल पाने के कारण बहुत असुविधा होती है। गृह मंत्री ने सुश्री बॅनर्जी से शीघ्र पहल करने का अनुरोध किया है।

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Friday, January 15, 2010

खुले बाज़ार में गेहूँ, चावल की बिक्री

केन्द्र सरकार के सहयोग से चलाई जा रही है  विक्रय योजना
प्रदेश में केन्द्र सरकार के सहयोग से चलाई जा रही खुले बाज़ार में विक्रय योजना के तहत जनवरी से मार्च तक तीन महीने के लिए गेहूँ और चावल उपलब्ध कराया गया है। इस सिलसिले में राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ और राज्य नागरिक आपूर्ति निगम से वितरण के लिए गेहूँ और चावल की आवश्यकता की जानकारी चाही गई है।
पिछले चार महीनों से सस्ती दरों पर गेहूँ और चावल की बिक्री जिलों में खुले बाज़ार में विक्रय की योजना के तहत की जा रही है। केन्द्र से इस सिलसिले में राज्य सरकार द्वारा रियायती दरों पर यह खाद्यान्न खरीदकर शहरी आम लोगों को सस्ती दरों पर उपलब्ध कराया जा रहा है। 
इस मकसद से जनवरी से मार्च माह तक के लिए 53 हजार 885 मै. टन गेहूँ और 351 मै. टन चावल केन्द्र उपलब्ध कराया गया है। इस खाद्यान्न की बिक्री राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ और राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के जरिए कराई जा रही है। इसलिए इन दोनों एजेंसियों से इस वांछित खाद्यान्न मात्रा की जानकारी बुलाई गई है।

पिछले उठाव की तारीख बढ़ी

खुले बाज़ार में बिक्री की इस योजना के तहत अक्टूबर से दिसम्बर तक के लिए उपलब्ध आवंटन की शेष मात्रा भी उठाने के लिए नागरिक आपूर्ति निगम और जिला कलेक्टरों से कहा गया है। इसकी तयशुदा तिथि बढ़ाकर अब 31 जनवरी, 2010 तक कर दी गई है। इस सिलसिले में उठाव सुनिश्चित कर नियमानुसार खाद्यान्न लोगों को बेचे जाने के लिए कहा गया है।

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Wednesday, January 13, 2010

राज्य सरकार देगी गेहूँ के समर्थन मूल्य पर 100 रूपए प्रति क्विंटल बोनस

आज सीएम तय करेंगे रणनीति, प्रभावी अमल की कवायद
राज्य सरकार ने इस साल गेहूँ की समर्थन मूल्य पर होने जा रही खरीदी के लिए 100 रूपए प्रति क्विंटल बोनस देने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान इस सिलसिले में आज 13 जनवरी को अपरान्ह यहां उपार्जन की समूची प्रकिया और इसे प्रभावी बनाने की रणनीति को अंतिम रूप देंगे। राज्य मंत्रालय में होने वाली इस कार्रवाई के मौके पर खाद्य आपूर्ति राज्यमंत्री श्री पारसचंद्र जैन भी मौजूद रहेंगे।पिछले सीजन तक गेहूँ के समर्थन मूल्य पर बोनस की राशि 50 रूपए प्रति क्विंटल थी। इसे मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बढ़ा कर इस साल 100 रूपए कर दिया है। प्रदेश के किसानों को इसका समूचित लाभ देने के मकसद से मुख्यमंत्री नई रणनीति पर काम चाहते हैं। सीजन शुरू होने के पर्याप्त समय पूर्व इस काम को अंजाम दिया जा रहा है ताकि सारे जरूरी इंतजाम पहले से सुनिश्चित हो जाएं। इस मकसद से पिछले साल अपनाई गई नीति के परिणामों की समीक्षा गुणदोष और जमीनी सच्चाई के आधार पर की जाएगी।
समर्थन मूल्य पर गेहूँ खरीदी को लेकर प्रदेश में पिछले साल पहली बार स्थानीय कृषकों को अधिकतम लाभ सुनिश्चित करने का बीड़ा उठाया गया था। इस मकसद से इन कृषकों की मुकम्मल पहचान के कई उपायों को अमल में लाया गया। इसी तरह बिचौलियों को समर्थन मूल्य की प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर करने की नीति पर भी पिछले साल ही काम किया गया। 
इसके अच्छे नतीजे आए थे जबकि किसानों को सीधे तौर पर अपनी उपज बेचने के मौके के साथ ही उसकी वाजिब कीमत भी मिली। मुख्यमंत्री इस साल गेहूँ उपार्जन की मात्रा में और इजाफा भी चाहते हैं ताकि अधिकतम किसान इस योजना के दायरे में शामिल हो जाए। इन सभी बिन्दुओं पर गौर कर जरूरी इंतजाम और तैयारियों का खाका खीचा जाएगा।

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Saturday, January 9, 2010

विश्व बैंक रिव्यू मिशन ने परियोजना की समीक्षा में मध्यप्रदेश को उत्कृष्ट राज्य माना

विश्व बैंक रिव्यू मिशन की बैठक : दस राज्य शामिल

मध्यप्रदेश उत्कृष्ट राज्य
विश्व बैंक रिव्यू मिशन ने परियोजना की क्रियान्वयन के समीक्षा में मध्यप्रदेश को उत्कृष्ट राज्य माना है। विश्व बैंक पोषित केन्द्र सरकार की योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश की 28 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में उन्नयन करने के लिए चुना गया है।

इसके लिए लगभग 73 करोड़ रूपये की राशि स्वीकृत की गई है। दो वर्ष से इस परियोजना पर काम चल रहा है। विश्व बैंक द्वारा समीक्षा में पाया है कि मध्यप्रदेश में परियोजना के क्रियान्वयन का कार्य उत्कृष्टता के साथ हो रहा है।

विश्व बैंक पोषित व्यावसायिक शिक्षा सुधार परियोजना के ज्वाइंट रिव्यू मिशन की महत्वपूर्ण बैठक आज भोपाल में शुरू हुई। यह बैठक दो दिन तक चलेंगी। बैठक का शुभारंभ मध्यप्रदेश के तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव श्री जयदीप गोविन्द ने किया। बैठक में भारत सरकार के रोजगार एवं प्रशिक्षण विभाग के महानिदेशक श्री शारदा प्रसाद, विश्व बैंक के टीम लीडर श्री नलिन जैना और मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़, गुजरात, राजस्थान, बिहार, उत्तराखण्ड, लक्ष्यदीप तथा जम्मू एवं कश्मीर के प्रतिनिधि भाग ले रहे है।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव श्री जयदीप गोविन्द ने कहा कि भारत सरकार के योजना आयोग ने 2022 तक देश में 50 करोड़ प्रशिक्षित मानव संसाधन की आवश्यकता का आंकलन किया है। इसे पूरा करना एक चुनौती पूर्ण कार्य है।
विश्व बाजार में कौशल युक्त मानव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए जरूरी है कि हम विश्वस्तरीय मानक के अनुरूप प्रशिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित करें। यह प्रसन्नता की बात है कि विश्व बैंक ने इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सहयोग करते हुये व्यावसायिक शिक्षा के सुधार की यह परियोजना शुरू की है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में 14 से 25 वर्ष के युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए मिशन स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है। विश्व बैंक की परियोजना में मध्यप्रदेश का परफारमेंस अच्छा रहा है।
भारत सरकार की रोजगार एवं प्रशिक्षण विभाग के महानिदेशक श्री शारदा प्रसाद ने अपने सम्बोधन में विश्व बैंक परियोजना के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए विभिन्न राज्यों द्वारा विगत दो वर्षो में हासिल उपलब्धियों और कमियों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि परियोजना की सफलता इस पर निर्भर करती है कि वास्तव में कितने युवाओं को इसका सीधा लाभ मिला। प्लेसमेंट के आधार पर ही योजना की सफलता आंकी जायेंगी।
विश्व बैंक टीम लीडर श्री नलिन जैना से कहा कि यह परियोजना इस मायने में महत्वपूर्ण है कि विभिन्न राज्य उनके यहां उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप प्रशिक्षण पाठ्यक्रम परिवर्तित कर सकते है। इस परियोजना में रिसर्च को विशेष महत्व दिया गया है। उन्होंने बताया कि दो वर्ष की गतिविधियों पर विश्व बैंक द्वारा रिपोर्ट तैयार की गई है इसके आधार पर सभी राज्य अपनी उपलब्धियों और कमियों का अवलोकन कर एक दूसरे से सीखते हुये परियोजना के अंतिम लक्ष्यों को हासिल कर सकते है।
6 और 7 जनवरी को आयोजित विभिन्न सत्रों में राज्यों में परियोजना के क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा की जायेंगी। 17 दिसम्बर 2007 से प्रारंभ यह विश्व बैंक परियोजना 5 वर्ष में पूर्ण होगी। इसकी लागत 1521 करोड़ है। इसके अंतर्गत देश के 400 आई.टी.आई. में सुधार कर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जायेंगा।

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Thursday, January 7, 2010

प्रवासी भारतीयों के राष्ट्रीय सम्मेलन में मप्र के लिये अलग से स्टेट सेशन का आयोजन

मुख्यमंत्री और उद्योग मंत्री शामिल होंगे प्रवासी भारतीय दिवस 2010 में
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और उद्योग मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय प्रवासी भारतीय दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन में शामिल होंगे। केन्द्र सरकार द्वारा इसका आयोजन सात जनवरी से नौ जनवरी तक नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में किया जा रहा है। प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह आठ जनवरी को सुबह 9.30 बजे सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे।गौरतलब है कि आठ जनवरी पूरे देश में प्रवासी भारतीय दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस मौके पर नई दिल्ली में होने वाले राष्ट्रीय स्तर के मुख्य समारोह में विश्वभर के भारतवंशी शामिल होते हैं। सम्मेलन में विदेशों में रहने वाले भारतवंशियों के हितों के संरक्षण के साथ उनकी समस्याओं पर विचार-विमर्श होता है। इस वर्ष इस समारोह में मध्यप्रदेश सहित देश के आठ राज्यों के मुख्यमंत्री भी शिरकत करेंगे। इस बार सम्मेलन में राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ स्टेट सेशन भी आयोजित किया गया है। इस सेशन में प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) का राज्य सरकारों के साथ सम्पर्क और संवाद हो सकेगा। इस सेशन को मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान संबोधित करेंगे।
मध्यप्रदेश सरकार ने इस सम्मेलन के अंतर्गत राज्यों के लिये अलग से स्टेट सेशन का आयोजन करने की सहमति प्रदान की है। राज्य सरकार द्वारा आयोजित इस स्टेट सेशन में मध्यप्रदेश मूल के एनआरआई और मध्यप्रदेश में निवेश के लिये इच्छुक एनआरआई को आमंत्रित किया गया है। 
यह आयोजन नौ जनवरी को दोपहर 12 बजे से 1.30 बजे के बीच विज्ञान भवन के हॉल नम्बर 4 में सम्पन्न होगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और उद्योग मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय मध्यप्रदेश से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए और मध्यप्रदेश में रूचि रखने वाले प्रवासी भारतीयों के समूह को संबोधित करेंगे। 
स्टेट सेशन में प्रवासी भारतीयों को मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं से परिचित कराया जायेगा। इसके साथ ही उन्हें विशेष रूप से उद्योग, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, सूचना प्रौद्योगिकी, बायोटेक्नोलॉजी और पर्यटन के क्षेत्र में शासन की नीतियों, निवेश के लिये उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं और रियायतों से अवगत कराया जायेगा।
राज्य सरकार द्वारा भोपाल में 12 जनवरी को मध्यप्रदेश प्रवासी भारतीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। यह सम्मेलन प्रवासी भारतीयों पर ही केन्द्रित होगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान नई दिल्ली में प्रवासी भारतीयों को भोपाल में आयोजित इस सम्मेलन में शिरकत करने के लिये आमंत्रित करेंगे।

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Monday, January 4, 2010

सुनामी प्रभावितों के लिये मप्र सरकार द्वारा निर्मित आवासों का लोकार्पण शीघ्र

मध्यप्रदेश सरकार द्वारा सुनामी प्रभावित नागरिकों के लिये आंध्रप्रदेश में तैयार किये गये 340 आवास गृहों का लोकार्पण शीघ्र होगा। इस समारोह में मुख्यमंत्री श्री चौहान भी शामिल होंगे। यह जानकारी मुख्यमंत्री श्री चौहान की अध्यक्षता में आज हुई आवास एवं पर्यावरण विभाग की समीक्षा बैठक में दी गई।

बैठक में बताया गया कि भोपाल के शिवाजी नगर एवं तुलसी नगर में मध्यप्रदेश गृह निर्माण मंडल द्वारा बहुमंजिले आवास गृह तैयार किये जायेंगे। इस संबंध में परियोजना तैयार कर ली गई है। बैठक में बताया गया कि मंडल द्वारा जबलपुर और उज्जैन में भी ई.डब्ल्यू.एस. एवं एल.आई.जी. आवास गृहों के निर्माण की योजना प्रस्तावित है। समीक्षा बैठक में आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री जयंत मलैया उपस्थित थे।
बैठक में भोपाल में बनने वाले शौर्य स्मारक के शिलान्यास के लिये शीघ्र ही सैन्य अधिकारियों से सम्पर्क कर विशिष्ट अतिथियों को आमंत्रित करने पर भी चर्चा हुई।बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में गृह निर्माण मंडल, विकास प्राधिकरणों और विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण द्वारा निर्मित दुकानों और व्यावसायिक प्रकोष्ठों में नए प्रावधानों के अनुसार महिला व्यवसायियों को आवंटन में प्राथमिकता दी जायेगी। अब महिला वर्ग के लिये 10 प्रतिशत दुकानें आरक्षित रहेंगी।
समीक्षा बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश के महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल पचमढ़ी में फायर ब्रिगेड की व्यवस्था शीघ्र की जायेगी। इससे संबंधित राशि मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम द्वारा वहन की जायेगी। इसके अलावा मुख्यमंत्री श्री चौहान को आइडियाज फॉर सी.एम. वेबसाईट पर भेजे गये सुझावों के आधार पर पॉलीथिन कचरे के थर्मल प्लांट में उपयोग और प्रदूषण की रोकथाम के संबंध में आवास-पर्यावरण विभाग शीघ्र ही आवश्यक कदम उठायेगा।
बैठक में बताया गया कि प्रदेश के तीन नगरों रतलाम, नीमच और मंदसौर में हम्मालों एवं तुलावटियों के लिये नई आवास योजना का क्रियान्वयन शीघ्र किया जायेगा। इस संबंध में मध्यप्रदेश गृह निर्माण मंडल और मंडी बोर्ड द्वारा कार्यवाही की जा रही है। प्रथम चरण में पांच हैक्टेयर शासकीय भूमि उपलब्ध कराने के लिये आवास-पर्यावरण विभाग ने संबंधित कलेक्टर्स से आग्रह किया है।
बैठक में मुख्य सचिव श्री राकेश साहनी, विभागीय प्रमुख सचिव श्री आलोक श्रीवास्तव और आयुक्त गृह निर्माण मंडल श्री वसीम अख्तर मौजूद थे।

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Tuesday, December 29, 2009

काश्मीर को स्वायत्तता की मांग अनुचित

मुख्यमंत्री श्री चौहान का जम्मू में अभिनंदन
मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा है कि काश्मीर घाटी में विस्थापित काश्मीरी पंडितों के लिये पृथक राज्य के रूप में केंद्र शासित प्रदेश 'पनुन काश्मीर की मांग से वे सहमत हैं। काश्मीरी विस्थापितों को मध्यप्रदेश वासियों का नैतिक समर्थन मिलेगा। 
मुख्यमंत्री श्री चौहान रविवार को जम्मू में पनुन काश्मीर संस्था की ओर से पृथक होमलैंड की मांग के समर्थन में आयोजित वार्षिक संकल्प दिवस कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री चौहान का अभिनंदन किया गया। मध्यप्रदेश विधानसभा में 24 जुलाई 2009 को काश्मीर के विस्थापित पंडितों के पक्ष में सुविधायुक्त विस्थापन स्थल के लिये अशासकीय संकल्प पारित किया गया था।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति श्री सगीर के प्रतिवेदन में काश्मीर को स्वायत्तता देने की अनुशंसा अनुचित है। श्री श्यामाप्रसाद मुखर्जी स्वतंत्र भारत के पहले शहीद थे। काश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और रहेगा। काश्मीर के विस्थापित पंडित अपने घर से बेघर हो गये हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि पनुन काश्मीर के अभियान को उनका पूरा समर्थन है। 
आवश्यक हुआ तो इस मुद्दे पर वे रक्त की अंतिम बूंद देकर भी अखंड भारत के लिये संघर्ष करेंगे। पनुन काश्मीर द्वारा आयोजित कार्यक्रम में गृह मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता और सांसद श्री प्रभात झा भी शामिल हुए। कार्यक्रम में जानकारी दी गई कि लगभग सात लाख काश्मीरी हिन्दू समुदाय के हित में कार्य करते हुए पूरे देश से समर्थन जुटाया जा रहा है। 
पनुन काश्मीर निर्वासित समुदाय की वापसी चाहता है। पनुन काश्मीर के संयोजक डॉ.अग्नि शेखर ने कहा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान द्वारा दिये गये समर्थन से विस्थापितों का मनोबल बड़ा है। वे देश के अन्य नेताओं से भी पनुन काश्मीर के निर्माण के लिये सहयोग की आशा करते हैं।

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Sunday, December 27, 2009

खाद्यान्न और जलवायु सुरक्षा सम्मेलन के निष्कर्ष प्रदेश में लागू होंगे

स्वयंसेवी संगठनों और समाज को राज्य के मार्गदर्शन के लिये आगे आयें
मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा है कि खाद्यान्न और जलवायु सुरक्षा सम्मेलन के निष्कर्षों को यथासंभव मध्यप्रदेश में लागू करने के प्रयास होंगे। श्री चौहान आज सुबह स्थानीय गांधी भवन में एकता परिषद द्वारा आयोजित खाद्यान्न और जलवायु सुरक्षा पर केन्द्रित दो दिवसीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु और खाद्यान्न सुरक्षा सहित प्रकृति के संतुलित दोहन के साथ विकास के संबंध में स्वयंसेवी संगठनों और समाज को राज्य के मार्गदर्शन के लिये आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि विकास की दौड़ में प्रकृति के अंधाधुंध दोहन से बनी वर्तमान स्थिति चिंतनीय है। श्री चौहान ने कहा कि स्वावलंबी गाँव की अनुपस्थिति से ही बेरोजगारी और पलायन की समस्या उत्पन्न हुई है।
श्री चौहान ने कहा कि देश में बार-बार चुनावों से राजनैतिक दलों को विकास और अन्य दूसरी बातों को सोचने का समय ही नहीं है। उन्होंने कहा कि देश में सभी विधायी सदनों, नगरीय निकायों और पंचायत संस्थाओं के चुनाव पांच वर्ष में एक बार होने चाहिये। 
श्री चौहान ने प्रधानमंत्री और मुंख्यमंत्री के प्रत्यक्ष निर्वाचन और चुनाव खर्च की स्टेट फंडिंग को भी जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि चुनावों की स्टेट फंडिंग से चंदे का धंधा भी बंद होगा और चंदा देने वालों की अनुचित मांगों की पूर्ति पर रोक लगकर प्राकृतिक साधनों का उनके हित में अंधाधुंध दोहन भी रूकेगा।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि भारत में सदैव से न केवल मानव बल्कि प्राणीमात्र के कल्याण की परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि वे प्रदेश में वनाधिकार कानून के क्रियान्वयन का प्रत्यक्ष जायजा देने के लये प्रदेश के भ्रमण पर भी विचार कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पिछले तीन वर्ष से शुरू जलाभिषेक अभियान निरंतर जारी रहेगा। उन्होंने अभियान को और अधिक परिणामकारी बनाने के लिये उपस्थित लोगों से मार्गदर्शन देने को कहा।
जल बिरादरी के श्री राजेन्द्र सिंह ने कहा कि जलवायु और खाद्यान्न सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण काम महज कानून बनाने से संभव नहीं है। उन्होंने इसके लिये राज्य और समाज के साझा प्रयासों की जरूरत बतायी। श्री सिंह ने प्रदेश के जलाभिषेक अभियान को अच्छी पहल बताते हुए कहा कि अभियान को परिणामकारी बनाने के लिये वे सहयोग देने को तैयार है।
भारत विकास संगम के श्री गोविंदाचार्य ने कहा कि विकास की वर्तमान मानव केन्द्रित अवधारणा को प्रकृति र्केन्द्रित बनाया जाना चाहिये। उन्होंने विकास के पैमाने को बदलने को युगीन आवश्यकता बताते हुए कहा कि मानव के साथ ही जमीन, जल, जंगल और जानवर के अधिकारों को पुन: परिभाषित कर उन्हें अनुलंघनीय बनाकर ही हम संतुलित विकास की राह पर बढ़ा सकते हैं।
क्लायमेट चेंज एक्शन नेटवर्क की सुश्री अदिति कपूर ने कोपेनहेगन में हाल ही में संपन्न जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के निर्णयों और उनके भारत पर प्रभावों पर प्रकाश डाला। राज्यसभा सदस्य श्री अनिल दवे ने भी सम्मेलन को संबोधित किया।
एकता परिषद के अध्यक्ष श्री पी.व्ही. राजगोपाल ने सम्मेलन के उद्देश्यों और विषय की पृष्ठभूमि की जानकारी दी। उन्होंने मध्यप्रदेश में सम्मेलन के आयोजन को जलवायु और पर्यावरण संबंधी समस्याओं के निराकरण के लिये सभी से संवाद की राज्य शासन की सुखद पहल का परिणाम बताया।
इसके पहले मुख्यमंत्री श्री चौहान और अन्य अतिथियों ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण और दीप जलाकर सम्मेलन का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने परिषद के श्री रमेश शर्मा द्वारा लिखित पुस्तक 'खाद्यान्न एवं जलवायु सुरक्षा-प्रश्न और प्रतिप्रश्न' का भी लोकार्पण किया। कार्यक्रम का संचालन परिषद के राष्ट्रीय संयोजक श्री रनसिंह परमार ने किया।

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Wednesday, November 18, 2009

म.प्र. विकास के मामले में राजनीति का पक्षधर नहीं : मुख्यमंत्री

देश की ऊर्जा जरूरतों की पूर्ति में भेल की महत्वपूर्ण भूमिका

मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा है कि मध्यप्रदेश विकास के मामले में राजनीति का पक्षधर नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनावों के बाद राजनैतिक विचारधाराओं को परे रखकर विकास के काम करने से ही देश और प्रदेश आगे बढ़ सकेगा।
श्री चौहान ने कहा कि अब समय मिल-जुलकर काम करने और नया इतिहास रचने का है। मुख्यमंत्री आज दोपहर भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड की भोपाल इकाई के परिसर में अल्ट्रा वोल्टेज ट्रांसफार्मर इकाई के लोकार्पण समरोह को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने समारोह में देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू को सच्चे अर्थों में आधुनिक भारत का निर्माता बताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। श्री चौहान ने कहा कि पं. नेहरू ने भेल की भोपाल इकाई को राष्ट्र के नाम लोकर्पित किया था। उन्होंने कहा कि भेल की भोपाल इकाई पर भोपाल और मध्यप्रदेश को गर्व है। श्री चौहान ने कहा कि भोपाल की बड़ी झील और भेल की भोपाल इकाई का देश में कोई जवाब नहीं है।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम और भेल के संयुक्त उपक्रम को भेल भोपाल की अतिरिक्त जमीन पर स्थापित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस निर्माण इकाई के लिये राज्य शासन और भी जमीन देने के लिये तैयार है। श्री चौहान ने चचई और वीरसिंहपुर संयंत्र के निर्माण में भेल द्वारा की जा रही देरी की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि सन् 2007 में बनकर तैयार हो जाने वाले इन संयंत्रों का काम अभी भी पूरा नहीं हुआ है।
श्री चौहान ने कहा कि भेल भोपाल में मध्यप्रदेश ही नहीं पूरा हिन्दुस्तान बसता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश का अकेला ऐसा प्रदेश है जो क्षेत्रीयता में विश्वास नहीं करता। श्री चौहान ने कहा कि 'हम सब भारत के लाल, भेदभाव का कहां सवाल'। श्री चौहान ने कहा कि अगर उनके शरीर के एक लाख टुकड़े भी कर दिये जाये तो हर टुकड़ा भारत माता की जय का ही उद्घोष करेगा।श्री चौहान ने भेल की उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने का वाहक है भेल उद्यम।
समारोह के मुख्य अतिथि केन्द्रीय भारी उद्योग और लोक उद्यम मंत्री श्री विलासराव देशमुख ने अल्ट्रा हाई वोल्टेज ट्रांसफार्मर इकाई के शुभारंभ को ऊर्जा के क्षेत्र में मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि बिजली के बगैर वर्तमान में देश की प्रगति संभव नहीं है। देश की ऊर्जा जरूरतों की पूर्ति में भेल की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को भेल को सभी संभव सहयोग देकर ऊर्जा की स्थिति को बेहतर करने के लिये आगे आना चाहिये।
श्री देशमुख ने देश और अनेक प्रदेशों की ऊर्जा परियोजनाओं को पूरा करने में भेल से हुए विलंब को स्वीकारते हुए समय पर परियोजनाओं की पूर्णता पर जोर दिया। श्री देशमुख ने कहा कि भेल की भोपाल इकाई के पास उपलब्ध लगभग ढाई हजार एकड़ जमीन का भेल की आगामी विस्तार योजनाओं के लिये प्राथमिकता से उपयोग किया जायेगा।
श्री देशमुख ने भेल भोपाल के कर्मचारियों की समस्याओं को भी चर्चा और परीक्षण के बाद हल किये जाने की बात कही। उन्होंने भेल भोपाल की उपलब्धियों का श्रेय कर्मचारियों-अधिकारियों को दिया।
मुख्यमंत्री की प्रशंसा
केन्द्रीय भारी उद्योग मंत्री ने मुख्यमंत्री श्री चौहान की सबको साथ लेकर चलने की भावना की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि श्री चौहान की यह भावना ही प्रदेश के विकास का पथ प्रशस्त करने की वाहक बन रही है। श्री देशमुख ने कहा कि भारी उद्योग मंत्रालय की परियोजनाओं के अंतर्गत मध्यप्रदेश के साथ पूरा न्याय होगा। श्री देशमुख ने मुख्यमंत्री श्री चौहान की चुनावों के बाद सिर्फ विकास की राजनीति की भावना से भी सहमति व्यक्त की।
भोपाल देश की सबसे खूबसूरत प्रांतीय राजधानी
श्री विलासराव देशमुख ने भोपाल को देश के किसी भी प्रदेश की राजधानी से खूबसूरत बताया। इसके पूर्व मुख्यमंत्री श्री चौहान भी अपने संबोधन में भोपाल की इस विशेषता का उल्लेख कर चुके थे।
केद्रीय भारी उद्योग राज्य मंत्री श्री अरूण यादव ने कहा कि वे केंद्रीय योजनाओं विशेषकर भारी उद्योग विभाग की योजनाओं का समुचित लाभ प्रदेश को दिलाने के लिये प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में बिजली की कमी को दूर करने के लिये केंद्र और राज्य सरकार द्वारा नये संयंत्रों की स्थापना की जा रही है।
श्री यादव ने अल्ट्रा हाई वोल्टेज ट्रांसफार्मर इकाई के लोकार्पण को ऊर्जा के क्षेत्र में देश की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि अब तक यह क्षमता सिर्फ चीन के पास थी। श्री यादव ने कहा कि चीन में वर्तमान में 80 हजार मेगावाट वार्षिक विद्युत उत्पादन की क्षमता है।
श्री यादव ने उम्मीद जाहिर की कि देश में एक लाख मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता के केंद्र सरकार के लक्ष्य की पूर्ति में भेल अपनी भूमिका बखूबी अदा करेगा। श्री यादव ने बताया कि अल्ट्रा हाई वोल्टेज ट्रांसफार्मर की आज लोकार्पित इकाई से देश में ट्रांसफार्मर निर्माण की क्षमता 18 हजार मेगावाट से बढ़कर 30 हजार मेगावाट हो सकेगी।
समारोह को केन्द्रीय भारी उद्योग और लोक उद्यम सचिव डॉ. सत्यनारायण दास और भेल के अध्यक्ष सह प्रबन्ध निदेशक श्री पी.बी. राव ने भी संबोधित किया। इसके पहले श्री देशमुख ने अल्ट्रा हाई वोल्टेज ट्रांसफार्मर इकाई का फीता काटकर उद्घाटन करने के बाद मुख्यमंत्री श्री चौहान और केन्द्रीय राज्यमंत्री श्री यादव के साथ इकाई का अवलोकन भी किया।
भेल के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक श्री पी.बी. राव ने श्री देशमुख, श्री चौहान, श्री यादव औऱ मंचासीन अन्य अतिथियों क्रमश: नगरीय प्रशासन मंत्री श्री बाबूलाल गौर, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री लखन मीणा, पूर्व विधायक श्री पी.सी. शर्मा, पूर्व महापौर द्वय श्रीमती विभा पटेल और श्री दीपचन्द यादव और श्री रविकांत सक्सेना को पुष्पगुच्छ और शाल-श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया।
समारोह में भेल के निदेशक मंडल के सदस्य, भोपाल इकाई के कार्यपालन निदेशक श्री दुबे और बड़ी संख्या में भेलकर्मी उपस्थित थे। आभार प्रदर्शन भेल के मानव संसाधन निदेशक श्री अनिल सचदेवा ने किया।

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