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Wednesday, March 31, 2010

एक अप्रैल से लागू होगा अनिवार्य शिक्षा कानून

मध्यप्रदेश सहित पूरे देश में एक अप्रैल से लागू होने जा रहे ‘बच्चों की नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम’ की शासन स्तर पर व्यापक तैयारियां की गई हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनीस ने आज अपने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से एक्ट के क्रियान्वयन के संबंध में चर्चा की।
स्कूल शिक्षा मंत्री स्वयं संभागीय संयुक्त संचालकों और डीईओ व डीपीसी से अब तक हुई तैयारियों की जानकारी प्राप्त कर उन्हें आवश्यक निर्देश दे रही हैं। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान भी इसी माह विधानसभा में आयोजित बैठक और कार्यशाला में अनिवार्य शिक्षा संबंधी कानून की तैयारियों की समीक्षा कर चुके हैं।


क्या है एक्ट में

6 से 14 वर्ष के बच्चों हेतु नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा

प्रवेश, उपस्थिति एवं प्रारंभिक शिक्षा की अनिवार्य पूर्णता सुनिश्चित करना

अनामांकित एवं शाला से बाहर बच्चों के लिए विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था

किसी भी बच्चे को कक्षा 8 तक फेल करने पर प्रतिबंध

बच्चों को शारीरिक दण्ड देने एवं मानसिक रूप से प्रताड़ित करना पूर्णत: प्रतिबंधित

बच्चों के लिए उनके निर्धारित पड़ोस में शिक्षा की सुविधा 3 वर्ष में उपलब्ध कराने की बाध्यता

नियम, मापदण्ड के अनुरूप 3 वर्ष में प्रत्येक शाला में अधोसंरचना की व्यवस्था

शिक्षक-छात्र अनुपात अनुरूप शिक्षकों की व्यवस्था 6 माह में

अच्छी गुणवत्ता की प्रारंभिक शिक्षा

शिक्षकों का गैर शिक्षकीय कार्य में लगाना प्रतिबंधित। (दशकीय जनगणना, चुनाव एवं आपदा राहत को छोड़कर)

शाला विकास योजना निर्माण, प्रबंधन, मॉनीटरिंग का कार्य स्थानीय निकाय के सहयोग से शाला प्रबंधन समिति द्वारा

निजी स्कूलों में केपिटेशन फीस एवं प्रवेश के लिए स्क्रीनिंग प्रतिबंधित,

गैर अनुदान प्राप्त शालाओं के लिए अपने पड़ोस के न्यूनतम 25 प्रतिशत बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा प्रदाय करना अनिवार्य

प्रति छात्र व्यय अथवा गैर अनुदान प्राप्त शाला की वास्तविक फीस जो भी कम हो के आधार पर राज्य द्वारा फीस की प्रतिपूर्ति

बिना मान्यता के किसी भी स्कूल का संचालन नहीं

प्रत्येक शाला हेतु न्यूनतम कार्य दिवस एवं शिक्षण के घंटे निर्धारित
मध्यप्रदेश में लागू होने वाले नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन की जानकारी देते हुए श्रीमती अर्चना चिटनीस ने बताया कि इसे सफलतापूर्वक लागू कराने में समाज और जन-प्रतिनिधियों का सहयोग लिया जा रहा है। इसके लिए जिला स्तर से राज्य स्तर तक अनेक कार्यशालाएं आयोजित की गई हैं।
राज्य के शिक्षा संबंधी विद्यमान कानून की समीक्षा एवं उसमें संशोधन की कार्रवाई भी की गई है। अधिनियम के प्रावधानों को क्रियान्वित करने हेतु नियम बनाए गये हैं। नियमों को जिलों की ओर भेजा जा रहा है। उन्होंने बताया कि मुख्य सचिव द्वारा संभागीय आयुक्तों, कलेक्टरों आदि के साथ वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से चर्चा की गई है। जिला एवं विकासखण्ड स्तरीय अधिकारियों का उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया है।

श्रीमती अर्चना चिटनीस के अनुसार जिलों में कंट्रोल रूम स्थापित करने के साथ ही गत सप्ताह विधानसभा में विधायकों की कार्यशाला भी आयोजित की जा चुकी है। नव-निर्वाचित जन-प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण माड्यूल में शिक्षा का अधिकार अधिनियम को सम्मिलित किया गया है।

उन्होंने बताया कि अनिवार्य शिक्षा संबंधी कानून को सफल बनाने हेतु एज्युकेशन पोर्टल पर भी व्यवस्थाएं की गई हैं। पोर्टल के माध्यम से शाला से बाहर के बच्चों की ट्रेकिंग, बच्चों के उपलब्धि स्तर की ट्रेकिंग, निर्धारित शाला में अध्यापन नहीं करा रहे शिक्षकों की पहचान, अशासकीय स्कूलों को मान्यता प्रदान करने हेतु आवेदन, निरीक्षण एवं मान्यता देने की ऑनलाईन प्रक्रिया, प्रति छात्र व्यय के आंकलन की कार्रवाई, शिक्षकों की शिकायतों एवं समाधान की व्यवस्था, विषयमान शिक्षकों की अकादमिक एवं व्यावसायिक योग्यता का डाटा बेस, सेवानिवृत्ति के पुख्ता रिकार्ड हेतु ई-सर्विस बुक विकसित करना आदि शामिल है।

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