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Sunday, March 28, 2010

मध्यप्रदेश में कृषि अब लाभ का व्यवसाय-मुख्यमंत्री श्री चौहान

 मध्यप्रदेश में किसानों के कल्याण के प्रयास सराहनीय- सुषमा स्वराज
मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार की किसान हितैषी नीतियों से कृषि कार्य को लाभ का व्यवसाय बनाने में सफलता मिल रही है। बेहतर सिंचाई सुविधाओं, कम ब्याज पर ऋण, पर्याप्त विद्युत आपूर्ति, कृषि फसलों की हानि पर बढ़ी हुई राहत राशि की व्यवस्था से खेती-किसानी फायदे का कार्य बन रहा है।

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Saturday, March 27, 2010

कृषि यंत्रों के उपयोग से कृषि उत्पादन बढ़ाया जा सकता है

 किसानों को सब्सिडी पर दिये जाने वाले कृषि यंत्रों का प्रदर्शन
मध्यप्रदेश में कृषि विस्तार कार्यक्रमों का विस्तार करने के उद्देश्य से किसान कल्याण विभाग द्वारा आत्मा परियोजना का संचालन किया जा रहा है। केन्द्र सरकार की मदद से संचालित होने वाली इस योजना के तहत भोपाल के रवीन्द्र भवन परिसर में आज से तीन दिवसीय कृषि विज्ञान मेला प्रारंभ हुआ। यह कृषि मेला 28 मार्च तक चलेगा।

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Monday, March 15, 2010

प्रदेश में एक लाख से अधिक किसानों को मिली क्रेडिट कार्ड सुविधा

 जनवरी 2010 तक एक लाख 19 हजार 76 किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड जारी
प्रदेश में किसान कृषि कार्य के लिये आसानी से बैंको से समय-समय पर ऋण ले सके इसके लिये जिला सहकारी केन्द्रीय बैंको एवं प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों द्वारा किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड जारी किये गये हैं।

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प्रदेश में आज से खरीदा जायेगा समर्थन मूल्य पर गेहूँ

  किसानों को 24 घंटे में भुगतान का आदेश जारी
प्रदेश में आज 15 मार्च से समर्थन मूल्य पर गेहूँ की खरीद का काम शुरू हो जायेगा। इस बार किसानों को इस गेहूँ का भाव 1100 रुपये प्रति क्विंटल दिया जायेगा और इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा घोषित 100 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बोनस समेत उन्हें कुल 1200 रुपये मिलेंगे। खाद्य आपूर्ति राज्यमंत्री श्री पारसचंद्र जैन ने इस समूची प्रक्रिया की ताजा समीक्षा की और मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप किसानों को उनकी उपज का 24 घंटे में भुगतान करने संबंधी आदेश भी जारी करवा दिये।

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Friday, March 12, 2010

समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी 15 मार्च से

  व्यापारी और बिचौलिये लाभ न उठाये, 24 घंटे में हो भुगतान
मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी का लाभ मध्यप्रदेश के वास्तविक किसानों को ही मिलना सुनिश्चित करने के निर्देश जिला कलेक्टरों को दिये हैं। श्री चौहान ने कहा कि बिचौलिये और व्यापारी इस व्यवस्था का लाभ नहीं उठाये इसकी समुचित निगरानी की जाये। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज मंत्रालय से वीडियों कांफ्रेन्सिंग के माध्यम से गेहूँ उपार्जन व्यवस्था पर जिला कलेक्टरों से मुखातिब थे।

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Friday, February 26, 2010

किसानों को मिलेंगे 7.56 लाख से अधिक बिजली कनेक्शन

विद्युत वितरण कम्पनियों को 225 करोड़ रुपये से ज्यादा राजस्व की प्राप्ति
प्रदेश में वर्तमान वित्तीय वर्ष 2009-10 में गत माह जनवरी तक कृषकों को सिंचाई पम्प और थ्रेशर के लिये सात लाख 56 हजार 531 अस्थाई कनेक्शन प्रदान किये गये। मध्यप्रदेश राज्य विद्युत मण्डल की पूर्व, मध्य और पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी लिमिटेड को अस्थाई कनेक्शनों के माध्यम से 225 करोड़ आठ लाख 15 हजार रुपये राशि का राजस्व प्राप्त हुआ है।उल्लेखनीय है कि पिछले वित्तीय वर्ष के जनवरी माह में कृषकों को सात लाख 41 हजार 768 अस्थाई कनेक्शन प्रदान किये गये थे। इस प्रकार वर्तमान वित्तीय वर्ष में पिछले वर्ष की तुलना में 14 हजार 763 अस्थाई कनेक्शन प्रदान किये गये। इससे विद्युत वितरण कम्पनियों को 82 करोड़ नौ लाख 26 हजार रुपये की राजस्व राशि अधिक प्राप्त हुई।

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Wednesday, February 24, 2010

मप्र में किसानों को ग्रीष्मकालीन फसल लेने की सलाह

जायद फसलों के तैयार होने की अवधि 50 से 60 दिन
मध्यप्रदेश में रबी की फसल स्थिति काफी अच्छी है। इसकी वजह प्रदेश में अक्टूबर, नवम्बर एवं दिसम्बर में सही अंतराल से हुई बारिश का होना रहा है। प्रदेश में रबी सीजन में इस वर्ष लगभग 95 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की बोनी की गयी थी। प्रदेश में रबी के सामान्य क्षेत्रफल से लगभग 11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की अतिरिक्त बोनी की गयी।
प्रदेश में प्रमुख रूप से रबी सीजन में गेहूँ की बोनी 42.62 लाख हेक्टेयर में तथा चने की बोनी 32.33 लाख हेक्टेयर में की गयी थी। अच्छे मौसम को देखते हुये प्रदेश में गेहूँ एवं चने का रिकार्ड उत्पादन होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
रबी सीजन में खेतों में कटाई के बाद ग्रीष्मकालीन फसल लेने की सलाह
जल संरचनाओं में पानी की अच्छी उपलब्धता के कारण जायद फसलें लिया जाना लाभकारी होगा
ग्रीष्मकालीन फसलों की अवधि 50 से 60 दिन की

किसान कल्याण विभाग ने रबी फसलों की अच्छी स्थिति के बाद प्रदेश में किसानों के लिये ग्रीष्म काल में जायद फसलों के उत्पादन की अच्छी संभावना बताई है। कृषि अधिकारियों ने कहा है कि प्रदेश के कृषक खाली खेतों में अथवा रबी की शीघ्र बोई गयी फसल काटने के बाद मूँग, उड़द, सब्जियों तथा चारे की फसलों की बोनीकर अतिरिक्त लाभ ले सकते हैं। जायद फसलों के तैयार होने की अवधि 50 से 60 दिन की होती है। कृषि अधिकारियों का कहना है कि भूमि संरक्षण और मिट्टी की उर्वरता की दृष्टि से भी इन फसलों का बोया जाना उपयोगी होगा। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री एम.के. राय ने पिछले दिनों मंत्रालय में आयोजित कृषि अधिकारियों की बैठक में रबी फसलों की स्थिति एवं संभावित रबी उत्पादन की समीक्षा की थी। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री राय ने कृषि अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे प्रदेश में किसानों को जायद फसल बोने के लिये अधिक से अधिक प्रोत्साहित करें। संचालक किसान कल्याण डॉ. डी.एन. शर्मा ने बताया कि खाली खेतों में मूँग की खेती के लिये फरवरी के दूसरे सप्ताह से मार्च के तीसरे सप्ताह का समय सबसे उपयुक्त रहता है। प्रदेश में इस वर्ष अच्छी बारिश के कारण जल संरचनाओं में पानी की उपलब्धता अच्छी है। इसका फायदा कृषक गर्मी के मौसम की अल्पकालीक फसलें उड़द, सूरजमुखी, मक्का, चने की फसलें, लोबिया, ग्वार आदि की कम लागत पर सफल खेती कर सकते हैं। सब्जियों में वर्गी फसलें गिल्की, लोकी, खीरा, खरबूज, तरबूज आदि बोया जाना भी किसानों के लिये लाभकारी सिद्ध होगा।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जायद की फसल के रूप में दलहन फसलें बोया जाना कृषि भूमि की उर्वरता वृद्धि के लिये काफी फायदेमंद हैं। जायद फसलें वायुजनित मिट्टी के क्षण को कम करती हैं और प्राकृतिक नत्रजन बढ़ाती हैं। कृषि विशेषज्ञों ने कहा है कि हरदा, होशंगाबाद एवं नर्मदा नदी से जुड़े जिलों के ग्रामीण क्षेत्रो में ग्रीष्मकालीन खेती काफी लाभकारी होगी। किसान कल्याण विभाग ने मैदानी अधिकारियों को ग्रीष्मकालीन फसल लिये जाने के संबंध में किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन दिये जाने के निर्देश दिये हैं।

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किसान कल्याण मंत्री कॉल सेन्टर में सुनेंगे किसानों की समस्याएँ

कॉल सेन्टर का टोल फ्री नम्बर 1800-233-44-33 
किसान कल्याण मंत्री डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया 24 फरवरी को दोपहर 3 बजे से 4 बजे तक भोपाल के गंगोत्री भवन में स्थित किसान काल सेन्टर उपस्थित रहकर किसानों की समस्याओं को सुनेंगे और उनका निराकरण करेंगे।किसान कॉल सेन्टर किसान कल्याण विभाग की मदद से इण्डियन सोसायटी ऑफ एग्री बिजनेस प्रोफेशनल्स (आईसेफ) के द्वारा संचालित हो रहा है। इस कॉल सेन्टर का टोल फ्री नम्बर 1800-233-44-33 है। किसान कॉल सेन्टर में अब तक प्रदेश के ढाई लाख से अधिक किसानों की समस्याओं का निराकरण किया जा चुका है। यह कॉल सेन्टर सप्ताह में सातों दिन प्रात: 7 बजे से शाम 7 बजे तक संचालित हो रहा है। इस कॉल सेन्टर में कृषि विशेषज्ञों द्वारा कृषि से संबंधित समस्याओं के साथ-साथ पशुपालन, मछलीपालन, डेयरी विषय से संबंधित समस्याओं का भी निराकरण भी किया जा रहा है।

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Tuesday, February 23, 2010

प्रदेश के 14 जिलों में कपास प्रौद्योगिकी मिशन

केन्द्र की भागीदारी 75 प्रतिशत और राज्य की भागीदारी 25 प्रतिशत
मध्यप्रदेश के 14 कपास उत्पादक जिलों में केन्द्र और राज्य शासन के सहयोग से कपास प्रौद्योगिकी मिशन का कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम में केन्द्र की भागीदारी 75 प्रतिशत और राज्य की भागीदारी 25 प्रतिशत है।कार्यक्रम का उद्देश्य कपास उत्पादक कृषकों को उत्तम गुणवत्ता वाले कपास के अधिकतम उत्पादन के लिये प्रेरित करना है। योजना के अंतर्गत प्रमाणित बीज वितरण, विस्तार कार्यकर्ता प्रशिक्षण, कृषक प्रशिक्षण, रसायनों से बीज उपचार, हस्तचलित एवं शक्तिचलित स्प्रेयर, डीलिंटिंग प्लांट की स्थापना, बायो एजेंट लेब की स्थापना एवं स्प्रिंकलर सेट तथा टपक सिंचाई को प्रोत्साहित किया जाना है।

इस कार्यक्रम के अंतर्गत वर्ष 2007-08 में लगभग सवा चार करोड़ रुपये की राशि, वर्ष 2008-09 में पौने पांच करोड़ रुपये की राशि व्यय की गई। इस वर्ष इस कार्यक्रम में लगभग साढ़े 5 करोड़ रुपये की राशि व्यय की जा रही है।

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Monday, February 22, 2010

प्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूँ की खरीद का काम व्यवस्थित रणनीति के मुताबिक

 कृषि साख समितियां सब एजेंट बनेंगी
समर्थन मूल्य पर गेहूँ की खरीद का काम प्रदेश में एक सुविचारित और व्यवस्थित रणनीति के बतौर हाथ में लिया गया है। लक्ष्य को प्राप्त करने के साथ ही इस प्रक्रिया को साफ-सुथरा रखने की ठानी गई है। 

इस सिलसिले में तय किया गया है कि पिछले साल गड़बड़ियां करने वाली दागी समितियों को इस बार उपार्जन प्रक्रिया से बाहर रखा जाएगा। प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों को खरीदी करने वाली एजेंसियों का सब एजेंट बनाया जा रहा है। इसी तरह जिला स्तर पर उपार्जन के काम की निगरानी के लिए प्रशासकीय समितियां गठित की जा रही हैं।

गेहूँ उपार्जन से जुड़े हर काम की नियमित समीक्षा अभी से शुरू हो गई है। जो व्यावहारिक अड़चनें मैदानी अमला और एजेंसियां ध्यान में ला रहे हैं उनका तत्काल निदान किया जा रहा है ताकि ऐन मौके पर काम प्रभावित न हो और न ही किसी को बहाने का मौका मिले। यह जिम्मा विभाग के प्रमुख सचिव श्री अशोक दास खुद संभाल रहे हैं। कार्यक्षेत्रवार सब अफसरों में काम बांटा जा चुका है।

गेहूँ उपार्जन में खरीदी एजेंसियों के सब एजेंट नियुक्त किए जा रहे हैं। इसके लिए प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों का चयन किया गया है। कहीं पर ऐसी समितियों के नहीं होने की सूरत में राज्य सहकारी विपणन संघ से जुड़ी विपणन सहकारी संस्थाओं को सब एजेंट बनाया जाएगा। इन समितियों के स्वच्छ और सुगठित ढांचे के मद्देनज़र केवल उन समितियों को सब एजेंट के रूप में अधिकृत किया जा रहा है जो मध्यप्रदेश सहकारी समिति अधिनियम 1960 के तहत पंजीकृत हैं। इसके अलावा पिछले साल विभिन्न अनियमितताएं करने वाली और समय पर सूचनाएं नहीं भेजने वाली ऐसी समितियों को इस बार उपार्जन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है।

जिला सतर्कता प्रशासकीय समितियां

समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन की विभिन्न स्तरों पर मानीटरिंग की व्यवस्था की गई है। जिला स्तर पर इस उद्देश्य से प्रशासकीय समिति गठित होगी। इसका खाका भोपाल से तैयार कर जिलों को भेज दिया गया है।

इसके मुताबिक जिला कलेक्टर या उनके प्रतिनिधि की अध्यक्षता में यह प्रशासकीय समिति गठित होगी। इसमें सदस्यों के बतौर उप अथवा सहायक पंजीयक सहकारी संस्थाएं, जिला आपूर्ति नियंत्रक या आपूर्ति अधिकारी, जिला अथवा शाखा प्रबंधक भारतीय खाद्य निगम, प्रबंधक जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक, उप संचालक कृषि, जिला प्रबंधक राज्य नागरिक आपूर्ति निगम, जिला प्रबंधक राज्य सहकारी विपणन संघ, जिला प्रबंधक या शाखा प्रभारी राज्य भण्डार गृह निगम और सचिव कृषि उपज मण्डी शामिल रहेंगे। जिला आपूर्ति नियंत्रक या आपूर्ति अधिकारी इस समिति के संयोजक भी होंगे।

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Sunday, February 21, 2010

कृषि यंत्रों को गाँव-गाँव तक पहुँचाने की आवश्यकता - किसान कल्याण मंत्री

किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने कहा है कि मध्यप्रदेश में कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने के लिये हरसंभव प्रयास किये जायेंगे। कृषि मंत्री डॉ. कुसमरिया ने कहा कि प्रदेश में कृषि उत्पादन प्रति हेक्टेयर बढ़ सके इसके लिये जरूरी है कि किसानों तक उचित दाम पर पूरी गुणवत्ता के कृषि यंत्र समय पर पहुँचे। 
किसान कल्याण मंत्री डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया भोपाल के नबीबाग स्थित केन्द्रीय कृषि इंजीनियरिंग संस्थान में आज 'कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने में कृषि यंत्रीकरण का योगदान' विषय पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने कृषि इंजीनियरिंग संस्थान में आयोजित कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी का शुभारंभ भी किया।
इस मौके पर उप महानिदेशक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद भारत सरकार डॉ. एम.एम. पांडे, मध्यप्रदेश के कृषि उत्पादन आयुक्त श्री एम.के. राय एवं प्रमुख सचिव किसान कल्याण श्री इन्द्रनीलशंकर दाणी भी उपस्थित थे।
छोटे किसानों की मदद के लिये बैलों पर सब्सिडी दिये जाने का विचार
कृषि यंत्रों की पहुँच गाँव-गाँव तक पहुँचाये जाने की आवश्यकता
मध्यप्रदेश में फार्म पावर दो किलोवाट प्रति हेक्टेयर किया जायेगा

किसान कल्याण मंत्री डॉ. कुसमरिया ने कहा कि वर्तमान सिस्टम में कृषि यंत्रों को किसानों तक पहुँचाने में जो व्यावहारिक दिक्कतें आ रही हैं उन्हें शीघ्र दूर कर दिया जायेगा। डॉ. कुसमरिया ने कहा कि मध्यप्रदेश में बड़ी संख्या में छोटे किसान हैं। 
यह किसान बैल आधारित कृषि व्यवस्था पर निर्भर हैं। राज्य सरकार इन किसानों के हित में निर्णय लेते हुये बैलों की खरीदी पर भी उचित सब्सिडी दिये जाने पर विचार कर रही है। किसान कल्याण मंत्री डॉ. कुसमरिया ने कृषि यंत्रों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने एवं गाँव स्तर तक यंत्र संचालन का प्रशिक्षण दिये जाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि कृषि यंत्रों की टेस्टिंग कार्य के लिये भोपाल के कृषि इंजीनियरिंग संस्थान एवं प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों को अधिकृत किया गया है।

उप महानिदेशक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद डॉ. एम.एम. पांडे ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा कृषि यंत्रों पर पर्याप्त सब्सिडी दी जा रही है, जरूरत इस बात की है कि सब्सिडी का पूरा लाभ किसानों तक पहुँचे। उन्होंने कहा कि कृषि राज्य सरकार का मामला है इसलिये राज्य सरकारों को कृषि यंत्रों की पहुँच गाँव-गाँव तक पहुँचाने के लिये आवश्यक पहल करनी होगी। कृषि यंत्रों के बेहतर उपयोग से कृषि उत्पादन आयुक्त 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। 
डॉ. पांडे ने मध्यप्रदेश में कृषि मजदूरों को राज्य सरकार द्वारा दुर्घटना के दौरान मुआवजा देने की योजना की प्रशंसा की। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री एम.के. राय ने कहा कि प्रदेश में फार्म पावर की उपलब्धता 0.80 किलोवाट प्रति हेक्टेयर है उसे राष्ट्रीय स्तर के 1.35 किलोवाट प्रति हेक्टेयर तक पहुँचाने और वर्ष 2020 तक दो किलोवाट प्रति हेक्टेयर तक लक्ष्य को हासिल किया जायेगा।

कार्यक्रम को कृषि संचालक डॉ. डी.एन. शर्मा, केन्द्रीय अभियांत्रिकी संस्थान भोपाल के निदेशक पीतम चन्द्र एवं कार्यशाला में भाग लेने आये प्रगतिशील कृषकों एवं कृषि यंत्रों के निर्माताओं ने भी संबोधित किया। किसानों ने अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा कि मध्यप्रदेश में कृषि यंत्रों पर लगे पांच प्रतिशत के वैट टैक्स को हटाया जाना चाहिए। इससे किसानों को उचित दाम पर कृषि यंत्र उपलब्ध हो सकेंगे। मध्यप्रदेश कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय के संयुक्त संचालक श्री राजेश चौधरी ने मध्यप्रदेश में कृषि यंत्रों के उपयोग, उपलब्धता एवं गुणवत्ता के बारे में प्रजेंटेशन दिया। 
श्री चौधरी ने बताया कि मध्यप्रदेश में कुल कृषक संख्या 73.60 लाख है इनमें सीमान्त कृषक 28.38 लाख एवं लघु कृषक 19.51 लाख है। परिसर में आयोजित प्रदर्शनी में कृषि यंत्रों रिवर्सिबल प्लाउ, रोटावेटर, राइस ट्रान्सप्लांटर, सीड कम फर्टीलाइजर ड्रिल, रेज्ड बेड प्लान्टर, बैल चलित सीड कम फर्टीलाइजर ड्रिल, शुगरकेन कटर प्लान्टर आदि का प्रदर्शन किया गया। किसानों को इन यंत्रों को चलाकर बताया गया।

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सिवनी और बालाघाट जिलों में धान खरीदी की अवधि 15 मार्च तक

बिगड़े मौसमी हालात के चलते बढ़ाई  अवधि
राज्य सरकार ने समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन को लेकर आज सिवनी और बालाघाट जिलों में धान खरीदी की अवधि 15 मार्च तक बढ़ा दी है। यह कार्रवाई इन जिलों के कलेक्टरों द्वारा बिगड़े मौसमी हालात के चलते खरीदी शेष रहने संबंधी सूचना पर की गई है। अलबत्ता सरकार ने इसकी कुछ शर्तें भी तय की हैं।उपरोक्त दोनों जिलों के कलेक्टरों ने राज्य सरकार को भेजी रिपोर्ट में बताया था कि उनके क्षेत्र में दिसम्बर 2009 और हाल ही में जनवरी के महीने में बेमौसम और बारम्बार की बारिश ने धान उपार्जन प्रक्रिया पर असर डाला है। किसानों का कोई 40 प्रतिशत धान बिक्री के लिए शेष रह गया है। उल्लेखनीय यह भी है कि प्रदेश की कुल धान पैदावार का 80 प्रतिशत हिस्सा इन दोनों ही जिलों से मिलता है। राज्य सरकार ने इसे गंभीरता से लेकर उपार्जन अवधि 15 मार्च तक बढ़ा दी है। पहले यह अवधि 15 फरवरी तय थी।

राज्य सरकार ने इस सिलसिले में कुछ शर्तें भी तय की हैं। इनके मुताबिक इन दोनों जिलों में धान अब केवल सहकारी समिति के केन्द्रों पर ही खरीदा जाएगा। मण्डियों में यह खरीदी नहीं होगी। इसी तरह खरीदी के लिए अत्यंत सीमित मात्रा में केन्द्र खोले जाएंगे। ऐसे किसान जो अपना कर्ज चुकाने के मकसद से समर्थन मूल्य पर धान बेचना चाहते हैं केवल उन्हीं से तयशुदा केन्द्रों पर यह खरीद की जाएगी। खरीदी केन्द्रों पर संबंधित जिला कलेक्टर खाद्य विभाग से जुड़ा एक अधिकारी नियुक्त करेंगे। यह अधिकारी आवश्यक व्यवस्थाएं करने के साथ ही खरीदे जाने वाले धान की औसत अच्छी गुणवत्ता भी सुनिश्चित करेगा।

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Saturday, February 20, 2010

समर्थन मूल्य पर गेहूँ खरीदी

 पांच भाप्रसे अफसर करेंगे निगरानी, राज्य स्तर पर होगा कंट्रोल रूम
प्रदेश में 15 मार्च से शुरू होने जा रही समर्थन मूल्य पर गेहूँ खरीदी की तैयारियां तेज हो गई हैं। जिला स्तरीय निगरानी के साथ ही राज्य स्तर पर इस पूरे काम की देखरेख भारतीय प्रशासनिक सेवा के पांच आला अफसरों के जिम्मे की गई है।
किसानों की इस खरीदी से जुड़ी किसी दिक्कत को दूर करने राज्य स्तर पर जहां टेलीफोन हेल्पलाईन शुरू की जा रही है वहीं मैदानी क्षेत्रों से रोजमर्रा की रिपोर्ट भेजने और मार्गदर्शन लेने के लिये एक कंट्रोल रूम खोला जा रहा है। ये एक मार्च से काम करना शुरू कर देंगे।

इस बार 35 लाख मे. टन गेहूँ समर्थन मूल्य पर खरीदा जायेगा। इसके मुताबिक व्यापक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। पूरी प्रक्रिया साफ-सुथरे ढंग से चलाने और इसके किसी स्तर पर कोई खामी या रोड़े पैदा न हों, शासन ने इसके पूरे बंदोबस्त किये हैं। इस सिलसिले में राज्य स्तर पर भारतीय प्रशासनिक सेवा के पांच आला अफसरों को देखरेख का जिम्मा सौंपा गया है। प्रमुख सचिव खाद्य आपूर्ति श्री अशोक दास के नेतृत्व वाली इस टीम में आयुक्त खाद्य आपूर्ति, प्रबंध संचालक राज्य नागरिक आपूर्ति निगम, प्रबंध संचालक भंडार गृह निगम और प्रबंध संचालक राज्य विपणन संघ को शामिल किया गया है। जिला कलेक्टर अपने स्तर पर अलग से इस काम की समीक्षा के लिये जिम्मेदार होंगे। समीक्षा और निगरानी के क्षेत्र तय कर दिये गये हैं।

हर रोज़ देनी होगी जानकारी

समर्थन मूल्य पर खरीदी की पूरी विस्तृत रिपोर्ट जिसमें मात्रा, भुगतान, ढुलाई, भंडारण आदि के ब्यौरे होंगे, हर रोज़ राज्य स्तरीय समीक्षा के लिये भोपाल भेजी जाएगी। इसी तरह मंडियों में होने वाली इस खरीदी की जानकारी प्रतिदिन संचालक मंडी बोर्ड भेजेंगे। जानकारियों के संप्रेषण के लिये भोपाल में खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय में कंट्रोल रूम कायम किया गया है।
इसका टेलीफोन सम्पर्क नम्बर 1800-2336411 रहेगा। यह कंट्रोल रूम एक मार्च 2010 से 20 जून तक नियमित तौर पर सुबह 9 से रात्रि 9 बजे तक काम करेगा। इसी तरह किसानों की सहूलियत के लिये हेल्पलाईन का सम्पर्क नम्बर 155343 होगा।

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ग्रामीण क्षेत्रों में471 फीडर का हुआ विभक्तिकरण

आगामी पाँच वर्षों में 8900 करोड़ रूपये की राशि का व्यय प्रस्तावित
राज्य शासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के घरेलू उपभोक्ताओं को शहरी क्षेत्रों के समान विद्युत प्रदाय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से फीडर विभक्तिकरण योजना लागू की गई है। प्रथम चरण में इस कार्य को तहसील फीडरों में किया जाना प्रस्तावित किया गया है। गत माह दिसम्बर तक 471 फीडरों का सेपरेशन किया जा चुका है। तीनों विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा आगामी पाँच वर्षों के लिये 8900 करोड़ रूपये राशि के व्यय किया जाना प्रस्तावित किया गया है।उल्लेखनीय है कि प्रदेश में तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानियों के स्तर में कमी लाने के लिये फीडर विभक्तिकरण योजना को अतिउच्च वोल्टेज प्रणाली के साथ लागू किया गया है। इस योजना के तहत जिन ग्रामीण क्षेत्रों में फीडर विभक्तिकरण कार्य किया गया है, वहां विद्युत प्रदाय में सुधार के साथ-साथ वोल्टेज के स्तर में भी सुधार हुआ है तथा तकनीकी हानियों में भी कमी आई है।

प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा 471 फीडरों का विभक्तिकरण कार्य पूर्ण किया गया है। इसमें से म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड जबलपुर द्वारा 194 फीडरों, मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड भोपाल द्वारा 220 तथा मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड इंदौर द्वारा 57 फीडर विभक्तिकरण का कार्य पूर्ण किया गया है।

राज्य शासन द्वारा गत वर्ष 2008-09 में प्रदेश की तीन विद्युत वितरण कंपनियों को 100 करोड़ रूपये की राशि मुहैया करायी गई थी। फीडर विभक्तिकरण के लिय विश्व बैंक तथा एशियन डेव्हलपमेंट बैंक से ऋण प्राप्त करने के भी प्रयास किये जा रहे हैं। फीडर विभक्तिकरण कार्यों के लिये वर्ष 2009-10 के बजट में 8 करोड़ रूपये का प्रावधान भी किया गया है।

फीडर विभक्तिकरण कार्य के लिये तीनों विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा आगामी पांच वर्षों के लिये 8900 करोड़ रूपये की अनुमानित राशि की मांग की गई है। इसमें से मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र वितरण कंपनी लिमिटेड जबलपुर ने 3500 करोड़ रूपये, मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड भोपाल ने 3000 करोड़ रूपये तथा मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड इंदौर द्वारा 2400 करोड़ रूपये की राशि अनुमानित की गई है।

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Friday, February 19, 2010

वर्ष 2013 तक 5186 मेगावाट विद्युत क्षमता वृद्धि का लक्ष्य

क्षमता वृद्धि के लिये 42 कम्पनियों से 55 हजार मेगावाट के एमओयू भी हुये
प्रदेश में बिजली की बढ़ती हुई मांग को देखते हुये विद्युत उत्पादन तथा स्थापित क्षमता बढ़ाने के कारगर प्रयास किये जा रहे हैं। राज्य सरकार प्रदेश को बिजली उत्पादन की दिशा में आत्मनिर्भर बनाने के लिये त्वरित गति से कार्य कर रही है।
सरकार ने वर्ष 2013 तक करीब 5186 मेगावाट विद्युत क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। साथ ही निजी कम्पनियों के माध्यम से भी प्रदेश की विद्युत क्षमता वृद्धि के लिये 42 कम्पनियों से लगभग 55 हजार मेगावाट की ताप विद्युत परियोजनाएं लगाये जाने के लिये समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित भी किये गये हैं।

राज्य सरकार ने वर्ष 2013 तक करीब 5186 मेगावाट विद्युत क्षमता वृद्धि करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसमें मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कम्पनी द्वारा 1200 मेगावाट की श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना एवं सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारणी में 500 मेगावाट की विस्तार इकाईयों का कार्य शुरू कर दिया गया है। साथ ही 1600 मेगावाट क्षमता की ताप विद्युत परियोजना की स्थापना खण्डवा जिले में करने के लिये मेसर्स बी.एच.ई.एल. के साथ अनुबंध हो चुका है। 
नेशनल थर्मल पावर कार्पोरेशन द्वारा 2640 मेगावाट गाडरवारा, जिला नरसिंहपुर में स्थापित करने के लिये गत 9 नवम्बर को समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया गया। साथ ही रिलायंस कम्पनी द्वारा सिंगरौली जिले में 4 हजार मेगावाट क्षमता की सासन अल्ट्रा मेगा परियोजना की स्थापना की जा रही है। इस परियोजना से प्रदेश को करीब 1600 मेगावाट विद्युत मिलेगी।

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सिंचाई सुविधा ने लौटाया किसान बहादुर सिंह का विश्वास

 सफलता की कहानी
भिण्ड जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूरी पर बसा है, ग्राम नुन्हाटा इस गांव में मुख्य व्यवसाय के रूप में खेती ही होती है। यहां के अधिकतर किसान साक्षर हैं। इसी गांव के 55 वर्षीय कृषक बहादुर सिंह है जो हाई स्कूल तक पढ़े हैं। इनके पास 15 बीघा भूमि है। इस भूमि पर उनके दो भाई और आश्रित है। समय बीतने के साथ परिवार बढ़ता गया और उनके परिवार की आवश्यकतायें भी बढ़ती गईं।
कृषक बहादुर सिंह और उनके भाई पिछले लम्बे समय से नहर के पानी से सिंचाई करके कृषि उत्पादन कर पाते थे। नहर में अक्सर पानी की दिक्कतें आती थीं। पानी की वजह से वे अपनी कृषि भूमि में उत्पादन नहीं बढ़ा पा रहे थे। कई बार तो उन्हें अपने कृषि कार्य के लिये कर्ज लेने की भी नौबत आ जाती थी।

शिक्षित बहादुर सिंह ने अपनी दिक्कतों की चर्चा नजदीक के कृषि विकास अधिकारी से की। कृषि विकास अधिकारी ने उन्हें किसान कल्याण विभाग की ट्यूबवेल योजना के बारे में जानकारी दी। बहादुर सिंह ने हिम्मत करके योजना से संबंधित अपने कागज तैयार करके जिला कृषि कार्यालय ते भिजवायें। कृषि विभाग ने भी परीक्षण करने के बाद प्रकरण को मंजूरी दी और उन्हें ट्यूबवेल योजना के तहत 24 हजार रूपये का अनुदान भी उपलब्ध कराया। आज उनके खेत में लगा ट्यूबवेल 12 महीनें सिंचाई के लिये पानी दे रहा है। अब वे और उनके भाई रबी एवं खरीफ सीजन में फसल ले रहे हैं। उन्होंने अपने खेत में पशुपालन के लिये चार दुधारू पशु भी खरीदें हैं।

बहादुर सिंह से ग्राम के अन्य किसानों ने भी प्रेरणा ली है और गांव के किसान ट्यूबवेल योजना का लाभ लेने के लिये किसान कल्याण विभाग से पहल कर रहे हैं।

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भोपाल जिले में वाटर शेड मिशन के अंतर्गत 62 हजार हेक्टेयर भूमि

मिशन के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में जलग्रहण समितियां  बनेंगी 
भोपाल जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षा के पानी के उचित उपयोग एवं भूमि में जल स्तर को बढ़ाने के लिये राजीव गांधी जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन मिशन के अंतर्गत अनेक योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इन योजनाओं के क्रियान्वयन से ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छे परिणाम देखन में आये हैं।
मिशन के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में जलग्रहण समितियां बनाकर अधिक से अधिक जल सरंचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। इस योजना में मिट्टी एवं पानी के उपचार के साथ-साथ स्वालम्बन दलों एवं महिलाओं को आयमूलक गतिविधियों से जोड़कर उनके लिये आजीविका के अवसर सृजित किये जा रहे हैं। 
जिले में वाटर शेड मिशन की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत लगभग 62 हजार हेक्टेयर भूमि को उपचारित किये जाने का कार्यक्रम है। भोपाल जिले के वाटर शेड मिशन के कार्यों का पिछले दिनों उप राष्ट्रपति डॉ. हामिद अंसारी ने ग्राम बगरोदा पहुँचकर अवलोकन किया था। उन्होंने जिले में वाटर शेड मिशन के कार्यों की प्रशंसा भी की थी।
वाटर शेड की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत 62 हजार हेक्टेयर भूमि को उपचारित किये जाने का कार्यक्रम

नरेगा में भी वाटर शेड योजना का लाभ चयनित 90 गाँव को दिलाया जायेगा

वाटर शेड मिशन के बेहतर क्रियान्वयन के लिये महिलाओं के स्व सहायता समूह के गठन पर विशेष ध्यान


जिले में एकीकृत पड़त भूमि विकास कार्यक्रम के अंतर्गत तीन परियोजनाएं स्वीकृत की गयी हैं। इन योजनाओं के क्रियान्वयन पर लगभग साढ़े आठ करोड़ रूपये की राशि खर्च की जायेगी और इससे लगभग 14 हजार हेक्टेयर भूमि में जल संग्रहण का कार्य किया जायेगा। तीन परियोजनाओं में से पहली योजना पर लगभग तीन करोड़ रूपये की राशि व्यय कर 4 हजार 750 हेक्टेयर भूमि का उपचार किया गया है। दूसरी योजना पर लगभग दो करोड़ 35 लाख रूपये की राशि व्यय कर 3700 हेक्टेयर भूमि को उपचारित किया जा चुका है। तीसरी योजना में लगभग दो करोड़ रूपये की राशि व्यय कर 3300 क्षेत्र को उपचारित किया जा चुका है।

भोपाल जिले में राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (नरेगा) के अंतर्गत भी वाटर शेड की पांच परियोजनाओं को मंजूरी दी गयी है। इन पांच परियोजनाओं में 22 करोड़ 40 लाख रूपये की राशि की मंजूरी दी गयी है। इस परियोजना में 90 गाँव की लगभग 28 हजार हेक्टेयर भूमि का उपचार किया जायेगा। नरेगा में वाटर शेड का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है।

भोपाल जिले में एकीकृत जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन कार्यक्रम (आईडब्ल्यूएमपी) के अंतर्गत चार परियोजनाएं स्वीकृत की गयी हैं। इन परियोजनाओं के लिये 24 करोड़ रूपये की राशि को मंजूरी दी गयी है। वाटर शेड की इस परियोजना के जरिये चयनित क्षेत्र की 20 हजार हेक्टेयर भूमि का उपचार किया जायेगा।

जिले में वर्षा के पानी के उचित संग्रहण के लिये ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक तौर पर जन जागृति का अभियान भी चलाया जा रहा है।

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Thursday, February 18, 2010

प्रदेश में 1250 केन्द्रों पर खरीदेंगे गेहूँ

जरूरत के मुताबिक होगा विस्तार, खरीदी केन्द्रों के बुलाए नक्शे
समर्थन मूल्य पर गेहूँ खरीदने के लिए प्रदेश में फिलहाल 1250 केन्द्र तय किए गए हैं। चूंकि 35 लाख मे. टन गेहूँ खरीदे जाने का लक्ष्य तय किया गया है इसलिए इस तादाद में आवश्यकता के अनुसार इजाफा किया जा सकेगा। पूरी प्रक्रिया की इस बार राज्य स्तरीय निगरानी और समीक्षा का बंदोबस्त किया गया है, लिहाजा खरीदी केन्द्रों के नक्शे और तयशुदा प्रारूप में वांछित जानकारी एक मार्च तक कलेक्टरों से भोपाल बुलवाई गई है।किसानों की सुविधा के लिए मण्डियों में पेयजल, जनरेटर आदि के पर्याप्त इंतजाम किए जा रहे हैं। जानकारियों के संकलन के लिए कम्प्यूटरों का इस्तेमाल किया जा रहा है और इसका इंतजाम 10 मार्च तक करने को कहा गया है। मण्डियों में उपार्जन के दौरान बिजली, इलेक्ट्रॉनिक तौल-कांटों और पर्याप्त तुलावटियों की व्यवस्था की जा रही है। सारी मण्डियों में नमी मापक यंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं ताकि औसत अच्छी किस्म के गेहूँ की खरीद के लिए तयशुदा नमी के प्रतिशत की जांच स्थल पर ही की जा सके।

खरीदी केन्द्र जुड़ेंगे गोदाम से

उपार्जन व्यवस्था को पुख्ता और साफ-सुथरी बनाने के लिए गेहूँ खरीदी केन्द्रों को जोड़ा जा रहा है। इसके चलते भण्डारण में अफरातफरी की स्थिति भी नहीं उपजेगी। चूंकि हर खरीदी केन्द्र अपने तयशुदा भण्डार गृह से जुड़ा रहेगा इसलिए माल के परिवहन का रास्ता और स्थान भी पहले से निश्चित होगा। इसी मकसद से गोदामों और खरीदी केन्द्रों की सूचनाओं को पहले से इकट्ठा किया जा रहा है।

गफलत में नहीं रहेंगे किसान

कोई बिचौलिया या अन्य अवांछित तत्व किसानों से बारदाने, सुतली, स्टीचिंग मशीन, कांटा-बांट आदि का इंतजाम खुद करने को कहता है तो सीधे पकड़ में आ जाएगा। किसानों से कहा गया है कि ये सारे इंतजाम सरकार खुद कर रही है इसलिए उन्हें बिचौलियों या व्यापारियों के किसी भड़कावे में नहीं आना है।

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Wednesday, February 17, 2010

दो हेक्टेयर तक के किसानों के लिये आदर्श कृषि मॉडल तैयार करें

केन्द्रीय कृषि आयुक्त डॉ. गुरूवचन सिंह ने खेतों में पहुँचकर किसानों से बात की
भारत सरकार के कृषि आयुक्त डॉ. गुरूवचन सिंह ने कहा है कि देश में 80 प्रतिशत किसान दो हेक्टेयर कृषि भूमि वाले हैं। इनमें से 50 प्रतिशत तो ऐसे किसान हैं जिनके पास एक हेक्टेयर कृषि भूमि है।
ऐसे किसानों को ध्यान में रखते हुये उनके खेतों में ऐसे आदर्श कृषि मॉडल तैयार किये जायें जिनमें किसान परम्परागत फसलों के साथ-साथ उद्यानिकी, मत्स्य, पशुपालन आदि गतिविधियां अपने खेतों में कर सकें। कृषि आयुक्त डॉ. सिंह सोमवार को साप्ताहिक कृषक जगत कार्यालय में किसान कल्याण विभाग द्वारा आत्मा परियोजना के अंतर्गत प्रायवेट पार्टनरशिप के प्रतिनिधियों से चर्चा कर रहे थे।
दो हेक्टेयर तक के किसानों के लिये आदर्श कृषि मॉडल तैयार करें
कृषि की आधुनिक तकनीक के प्रचार के लिये मासिक आत्मा संदेश का नियमित प्रकाशन
मध्यप्रदेश में कृषि कार्यक्रमों के विस्तार के लिये आत्मा परियोजना के अंतर्गत किसान कल्याण विभाग ने 19 एजेंसियों के साथ अनुबंध किये हैं। यह एजेंसियां कृषि में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, किसानों को उन्नत तकनीक की जानकारी देने, ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि पाठ्य शालाओं का संचालन कर रही हैं। संचालक किसान कल्याण डॉ. डी.एन. शर्मा ने बताया कि आत्मा परियोजना का संचालन प्रदेश के 50 जिलों के 313 विकासखंडों में किया जा रहा है। आत्मा परियोजना में किसानों को कृषि जानकारी के लिये भ्रमण एवं प्रशिक्षण के कार्य भी किये जा रहे हैं।

कृषि आयुक्त डॉ. गुरूवचन सिंह ने कहा कि भारत में पिछले ढ़ाई दशकों में मौसम में भारी बदलाव आया है। इस बदलाव का फर्क खेती किसानी पर ज्यादा पड़ रहा है। अब जरूरत है कि किसानों को बदलते मौसम के अनुसार कृषि तकनीकों की जानकारी दी जाये। लगातार पानी की घटती उपलब्धता को देखते हुये भी हमें कृषि नीति में बदलाव की जरूरत होगी। के.जे. एजुकेशन सोसायटी के श्री सुनील गंगराडे ने बताया कि किसानों को कृषि समाचार देने के लिये प्रतिमाह आत्मा संदेश का प्रकाशन किया जा रहा है। यह कृषि संदेश प्रदेश के एक लाख से ज्यादा किसान मित्र एवं किसान दीदी तक पहुँच रहा है।

किसान कॉल सेंटर का निरीक्षण

कृषि आयुक्त डॉ. गुरूवचन सिंह ने भोपाल के गंगोत्री भवन स्थित किसान कॉल सेंटर का निरीक्षण किया। यह कॉल सेंटर इण्डियन सोसायटी ऑफ एग्री बिजनेस प्रोफेशनल्स (आईसेप) की मदद से संचालित हो रहा है। किसान कॉल सेंटर के प्रभारी डॉ. एस. मोटवानी ने बताया कि अब तक ढ़ाई लाख से अधिक किसानों की समस्याओं का निराकरण टोल फ्री सेवा के माध्यम से किया जा चुका है। किसान कॉल सेंटर के टोल फ्री नम्बर 1800-233-4433 पर पन्द्रह लाईनें उपलब्ध हैं। इस कॉल सेंटर में किसानों को कृषि के अलावा उद्यानिकी, पशुपालन, फसल संरक्षण, मिट्टी परीक्षण आदि से संबंधित जानकारी दी जा रही है।

कृषि आयुक्त ने खेतो में पहुँचकर किसानों से चर्चा की

कृषि आयुक्त डॉ. गुरूवचन सिंह ने भोपाल जिले के ग्राम बरखेड़ानाथू, धामनिया ग्राम, ग्राम कोलूखेड़ी में किसानों के खेतों में पहुँचकर फसलों की स्थिति, सिंचाई सुविधा, ग्रामीण क्षेत्रों में बनाये गये बायो गैस संयत्र, बलराम तालाब आदि के बारे में चर्चा की। कृषि आयुक्त ने मटर का मिनी किट प्रदर्शन, जैविक कृषि एवं भू-जल संवर्धन के कार्यों को देखा। 
ग्रामीणों ने चर्चा के दौरान बताया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन का क्रियान्वयन भोपाल संभाग के अन्य जिलों में तो किया जा रहा है लेकिन इसका क्रियान्वयन भोपाल जिले में नहीं है। ग्रामीणों ने इस योजना का क्रियान्वयन भोपाल जिले में भी किये जाने का आग्रह किया।
भोपाल जिले के किसान कल्याण विभाग के उप संचालक श्री ओ.पी चौरे ने बताया कि भोपाल जिले में बलराम तालाबों के निर्माण से किसानों को कृषि में सिंचाई की सुविधा मिली है। कृषि आयुक्त डॉ. गुरूवचन सिंह ने भोपाल के नजदीक शासकीय फन्दा कृषि फार्म की गतिविधियों को भी देखा।

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Thursday, February 11, 2010

मण्डी परिसरों में अतिक्रमण को सख्ती से हटाय

 मण्डी सचिवों की बैठक में निर्देश
किसान कल्याण मंत्री डॉ. कुसमरिया ने मण्डी सचिवों से कहा है कि मण्डी प्रांगणों में अतिक्रमण को सख्ती से हटाया जाये। कृषि विकास मंत्री डॉ. कुसमरिया पिछले दिनों ग्वालियर में संभागस्तरीय बैठक में मण्डी सचिवों की बैठक को संबोधित कर रहे थे।
कृषि विकास मंत्री डॉ. कुसमरिया ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके इसके लिये राज्य शासन ने प्रदेश की कृषि उपज मण्डियों में अनेक सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। मण्डी सचिव यह सुनिश्चित करें कि इन सुविधाओं का लाभ किसानों को पूरा-पूरा मिल सके। डॉ. कुसमरिया ने मण्डी सचिवों से मण्डी प्रांगणों में इलेक्ट्रानिक तौल-काँटे, पांच रुपये थाली भोजन व्यवस्था एवं अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी ली।

डॉ. कुसमरिया ने मण्डी सचिवों से मण्डी प्रांगणों में निर्माणाधीन कार्यों को भी समय-सीमा में पूरा किये जाने के निर्देश भी दिये।

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