Sunday, March 28, 2010
मध्यप्रदेश में कृषि अब लाभ का व्यवसाय-मुख्यमंत्री श्री चौहान
Saturday, March 27, 2010
कृषि यंत्रों के उपयोग से कृषि उत्पादन बढ़ाया जा सकता है
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Monday, March 15, 2010
प्रदेश में एक लाख से अधिक किसानों को मिली क्रेडिट कार्ड सुविधा
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प्रदेश में आज से खरीदा जायेगा समर्थन मूल्य पर गेहूँ
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Friday, March 12, 2010
समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी 15 मार्च से
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Friday, February 26, 2010
किसानों को मिलेंगे 7.56 लाख से अधिक बिजली कनेक्शन
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Wednesday, February 24, 2010
मप्र में किसानों को ग्रीष्मकालीन फसल लेने की सलाह
प्रदेश में प्रमुख रूप से रबी सीजन में गेहूँ की बोनी 42.62 लाख हेक्टेयर में तथा चने की बोनी 32.33 लाख हेक्टेयर में की गयी थी। अच्छे मौसम को देखते हुये प्रदेश में गेहूँ एवं चने का रिकार्ड उत्पादन होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
रबी सीजन में खेतों में कटाई के बाद ग्रीष्मकालीन फसल लेने की सलाह
जल संरचनाओं में पानी की अच्छी उपलब्धता के कारण जायद फसलें लिया जाना लाभकारी होगा
ग्रीष्मकालीन फसलों की अवधि 50 से 60 दिन की
किसान कल्याण विभाग ने रबी फसलों की अच्छी स्थिति के बाद प्रदेश में किसानों के लिये ग्रीष्म काल में जायद फसलों के उत्पादन की अच्छी संभावना बताई है। कृषि अधिकारियों ने कहा है कि प्रदेश के कृषक खाली खेतों में अथवा रबी की शीघ्र बोई गयी फसल काटने के बाद मूँग, उड़द, सब्जियों तथा चारे की फसलों की बोनीकर अतिरिक्त लाभ ले सकते हैं। जायद फसलों के तैयार होने की अवधि 50 से 60 दिन की होती है। कृषि अधिकारियों का कहना है कि भूमि संरक्षण और मिट्टी की उर्वरता की दृष्टि से भी इन फसलों का बोया जाना उपयोगी होगा। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री एम.के. राय ने पिछले दिनों मंत्रालय में आयोजित कृषि अधिकारियों की बैठक में रबी फसलों की स्थिति एवं संभावित रबी उत्पादन की समीक्षा की थी। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री राय ने कृषि अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे प्रदेश में किसानों को जायद फसल बोने के लिये अधिक से अधिक प्रोत्साहित करें। संचालक किसान कल्याण डॉ. डी.एन. शर्मा ने बताया कि खाली खेतों में मूँग की खेती के लिये फरवरी के दूसरे सप्ताह से मार्च के तीसरे सप्ताह का समय सबसे उपयुक्त रहता है। प्रदेश में इस वर्ष अच्छी बारिश के कारण जल संरचनाओं में पानी की उपलब्धता अच्छी है। इसका फायदा कृषक गर्मी के मौसम की अल्पकालीक फसलें उड़द, सूरजमुखी, मक्का, चने की फसलें, लोबिया, ग्वार आदि की कम लागत पर सफल खेती कर सकते हैं। सब्जियों में वर्गी फसलें गिल्की, लोकी, खीरा, खरबूज, तरबूज आदि बोया जाना भी किसानों के लिये लाभकारी सिद्ध होगा।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जायद की फसल के रूप में दलहन फसलें बोया जाना कृषि भूमि की उर्वरता वृद्धि के लिये काफी फायदेमंद हैं। जायद फसलें वायुजनित मिट्टी के क्षण को कम करती हैं और प्राकृतिक नत्रजन बढ़ाती हैं। कृषि विशेषज्ञों ने कहा है कि हरदा, होशंगाबाद एवं नर्मदा नदी से जुड़े जिलों के ग्रामीण क्षेत्रो में ग्रीष्मकालीन खेती काफी लाभकारी होगी। किसान कल्याण विभाग ने मैदानी अधिकारियों को ग्रीष्मकालीन फसल लिये जाने के संबंध में किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन दिये जाने के निर्देश दिये हैं।
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किसान कल्याण मंत्री कॉल सेन्टर में सुनेंगे किसानों की समस्याएँ
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Tuesday, February 23, 2010
प्रदेश के 14 जिलों में कपास प्रौद्योगिकी मिशन
इस कार्यक्रम के अंतर्गत वर्ष 2007-08 में लगभग सवा चार करोड़ रुपये की राशि, वर्ष 2008-09 में पौने पांच करोड़ रुपये की राशि व्यय की गई। इस वर्ष इस कार्यक्रम में लगभग साढ़े 5 करोड़ रुपये की राशि व्यय की जा रही है।
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Monday, February 22, 2010
प्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूँ की खरीद का काम व्यवस्थित रणनीति के मुताबिक
गेहूँ उपार्जन से जुड़े हर काम की नियमित समीक्षा अभी से शुरू हो गई है। जो व्यावहारिक अड़चनें मैदानी अमला और एजेंसियां ध्यान में ला रहे हैं उनका तत्काल निदान किया जा रहा है ताकि ऐन मौके पर काम प्रभावित न हो और न ही किसी को बहाने का मौका मिले। यह जिम्मा विभाग के प्रमुख सचिव श्री अशोक दास खुद संभाल रहे हैं। कार्यक्षेत्रवार सब अफसरों में काम बांटा जा चुका है।
गेहूँ उपार्जन में खरीदी एजेंसियों के सब एजेंट नियुक्त किए जा रहे हैं। इसके लिए प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों का चयन किया गया है। कहीं पर ऐसी समितियों के नहीं होने की सूरत में राज्य सहकारी विपणन संघ से जुड़ी विपणन सहकारी संस्थाओं को सब एजेंट बनाया जाएगा। इन समितियों के स्वच्छ और सुगठित ढांचे के मद्देनज़र केवल उन समितियों को सब एजेंट के रूप में अधिकृत किया जा रहा है जो मध्यप्रदेश सहकारी समिति अधिनियम 1960 के तहत पंजीकृत हैं। इसके अलावा पिछले साल विभिन्न अनियमितताएं करने वाली और समय पर सूचनाएं नहीं भेजने वाली ऐसी समितियों को इस बार उपार्जन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है।
जिला सतर्कता प्रशासकीय समितियां
समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन की विभिन्न स्तरों पर मानीटरिंग की व्यवस्था की गई है। जिला स्तर पर इस उद्देश्य से प्रशासकीय समिति गठित होगी। इसका खाका भोपाल से तैयार कर जिलों को भेज दिया गया है।
इसके मुताबिक जिला कलेक्टर या उनके प्रतिनिधि की अध्यक्षता में यह प्रशासकीय समिति गठित होगी। इसमें सदस्यों के बतौर उप अथवा सहायक पंजीयक सहकारी संस्थाएं, जिला आपूर्ति नियंत्रक या आपूर्ति अधिकारी, जिला अथवा शाखा प्रबंधक भारतीय खाद्य निगम, प्रबंधक जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक, उप संचालक कृषि, जिला प्रबंधक राज्य नागरिक आपूर्ति निगम, जिला प्रबंधक राज्य सहकारी विपणन संघ, जिला प्रबंधक या शाखा प्रभारी राज्य भण्डार गृह निगम और सचिव कृषि उपज मण्डी शामिल रहेंगे। जिला आपूर्ति नियंत्रक या आपूर्ति अधिकारी इस समिति के संयोजक भी होंगे।
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Sunday, February 21, 2010
कृषि यंत्रों को गाँव-गाँव तक पहुँचाने की आवश्यकता - किसान कल्याण मंत्री
छोटे किसानों की मदद के लिये बैलों पर सब्सिडी दिये जाने का विचार
कृषि यंत्रों की पहुँच गाँव-गाँव तक पहुँचाये जाने की आवश्यकता
मध्यप्रदेश में फार्म पावर दो किलोवाट प्रति हेक्टेयर किया जायेगा
किसान कल्याण मंत्री डॉ. कुसमरिया ने कहा कि वर्तमान सिस्टम में कृषि यंत्रों को किसानों तक पहुँचाने में जो व्यावहारिक दिक्कतें आ रही हैं उन्हें शीघ्र दूर कर दिया जायेगा। डॉ. कुसमरिया ने कहा कि मध्यप्रदेश में बड़ी संख्या में छोटे किसान हैं।
उप महानिदेशक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद डॉ. एम.एम. पांडे ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा कृषि यंत्रों पर पर्याप्त सब्सिडी दी जा रही है, जरूरत इस बात की है कि सब्सिडी का पूरा लाभ किसानों तक पहुँचे। उन्होंने कहा कि कृषि राज्य सरकार का मामला है इसलिये राज्य सरकारों को कृषि यंत्रों की पहुँच गाँव-गाँव तक पहुँचाने के लिये आवश्यक पहल करनी होगी। कृषि यंत्रों के बेहतर उपयोग से कृषि उत्पादन आयुक्त 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है।
कार्यक्रम को कृषि संचालक डॉ. डी.एन. शर्मा, केन्द्रीय अभियांत्रिकी संस्थान भोपाल के निदेशक पीतम चन्द्र एवं कार्यशाला में भाग लेने आये प्रगतिशील कृषकों एवं कृषि यंत्रों के निर्माताओं ने भी संबोधित किया। किसानों ने अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा कि मध्यप्रदेश में कृषि यंत्रों पर लगे पांच प्रतिशत के वैट टैक्स को हटाया जाना चाहिए। इससे किसानों को उचित दाम पर कृषि यंत्र उपलब्ध हो सकेंगे। मध्यप्रदेश कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय के संयुक्त संचालक श्री राजेश चौधरी ने मध्यप्रदेश में कृषि यंत्रों के उपयोग, उपलब्धता एवं गुणवत्ता के बारे में प्रजेंटेशन दिया।
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सिवनी और बालाघाट जिलों में धान खरीदी की अवधि 15 मार्च तक
राज्य सरकार ने इस सिलसिले में कुछ शर्तें भी तय की हैं। इनके मुताबिक इन दोनों जिलों में धान अब केवल सहकारी समिति के केन्द्रों पर ही खरीदा जाएगा। मण्डियों में यह खरीदी नहीं होगी। इसी तरह खरीदी के लिए अत्यंत सीमित मात्रा में केन्द्र खोले जाएंगे। ऐसे किसान जो अपना कर्ज चुकाने के मकसद से समर्थन मूल्य पर धान बेचना चाहते हैं केवल उन्हीं से तयशुदा केन्द्रों पर यह खरीद की जाएगी। खरीदी केन्द्रों पर संबंधित जिला कलेक्टर खाद्य विभाग से जुड़ा एक अधिकारी नियुक्त करेंगे। यह अधिकारी आवश्यक व्यवस्थाएं करने के साथ ही खरीदे जाने वाले धान की औसत अच्छी गुणवत्ता भी सुनिश्चित करेगा।
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Saturday, February 20, 2010
समर्थन मूल्य पर गेहूँ खरीदी
इस बार 35 लाख मे. टन गेहूँ समर्थन मूल्य पर खरीदा जायेगा। इसके मुताबिक व्यापक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। पूरी प्रक्रिया साफ-सुथरे ढंग से चलाने और इसके किसी स्तर पर कोई खामी या रोड़े पैदा न हों, शासन ने इसके पूरे बंदोबस्त किये हैं। इस सिलसिले में राज्य स्तर पर भारतीय प्रशासनिक सेवा के पांच आला अफसरों को देखरेख का जिम्मा सौंपा गया है। प्रमुख सचिव खाद्य आपूर्ति श्री अशोक दास के नेतृत्व वाली इस टीम में आयुक्त खाद्य आपूर्ति, प्रबंध संचालक राज्य नागरिक आपूर्ति निगम, प्रबंध संचालक भंडार गृह निगम और प्रबंध संचालक राज्य विपणन संघ को शामिल किया गया है। जिला कलेक्टर अपने स्तर पर अलग से इस काम की समीक्षा के लिये जिम्मेदार होंगे। समीक्षा और निगरानी के क्षेत्र तय कर दिये गये हैं।
हर रोज़ देनी होगी जानकारी
समर्थन मूल्य पर खरीदी की पूरी विस्तृत रिपोर्ट जिसमें मात्रा, भुगतान, ढुलाई, भंडारण आदि के ब्यौरे होंगे, हर रोज़ राज्य स्तरीय समीक्षा के लिये भोपाल भेजी जाएगी। इसी तरह मंडियों में होने वाली इस खरीदी की जानकारी प्रतिदिन संचालक मंडी बोर्ड भेजेंगे। जानकारियों के संप्रेषण के लिये भोपाल में खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय में कंट्रोल रूम कायम किया गया है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में471 फीडर का हुआ विभक्तिकरण
प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा 471 फीडरों का विभक्तिकरण कार्य पूर्ण किया गया है। इसमें से म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड जबलपुर द्वारा 194 फीडरों, मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड भोपाल द्वारा 220 तथा मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड इंदौर द्वारा 57 फीडर विभक्तिकरण का कार्य पूर्ण किया गया है।
राज्य शासन द्वारा गत वर्ष 2008-09 में प्रदेश की तीन विद्युत वितरण कंपनियों को 100 करोड़ रूपये की राशि मुहैया करायी गई थी। फीडर विभक्तिकरण के लिय विश्व बैंक तथा एशियन डेव्हलपमेंट बैंक से ऋण प्राप्त करने के भी प्रयास किये जा रहे हैं। फीडर विभक्तिकरण कार्यों के लिये वर्ष 2009-10 के बजट में 8 करोड़ रूपये का प्रावधान भी किया गया है।
फीडर विभक्तिकरण कार्य के लिये तीनों विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा आगामी पांच वर्षों के लिये 8900 करोड़ रूपये की अनुमानित राशि की मांग की गई है। इसमें से मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र वितरण कंपनी लिमिटेड जबलपुर ने 3500 करोड़ रूपये, मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड भोपाल ने 3000 करोड़ रूपये तथा मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड इंदौर द्वारा 2400 करोड़ रूपये की राशि अनुमानित की गई है।
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Friday, February 19, 2010
वर्ष 2013 तक 5186 मेगावाट विद्युत क्षमता वृद्धि का लक्ष्य
राज्य सरकार ने वर्ष 2013 तक करीब 5186 मेगावाट विद्युत क्षमता वृद्धि करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसमें मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कम्पनी द्वारा 1200 मेगावाट की श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना एवं सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारणी में 500 मेगावाट की विस्तार इकाईयों का कार्य शुरू कर दिया गया है। साथ ही 1600 मेगावाट क्षमता की ताप विद्युत परियोजना की स्थापना खण्डवा जिले में करने के लिये मेसर्स बी.एच.ई.एल. के साथ अनुबंध हो चुका है।
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सिंचाई सुविधा ने लौटाया किसान बहादुर सिंह का विश्वास
शिक्षित बहादुर सिंह ने अपनी दिक्कतों की चर्चा नजदीक के कृषि विकास अधिकारी से की। कृषि विकास अधिकारी ने उन्हें किसान कल्याण विभाग की ट्यूबवेल योजना के बारे में जानकारी दी। बहादुर सिंह ने हिम्मत करके योजना से संबंधित अपने कागज तैयार करके जिला कृषि कार्यालय ते भिजवायें। कृषि विभाग ने भी परीक्षण करने के बाद प्रकरण को मंजूरी दी और उन्हें ट्यूबवेल योजना के तहत 24 हजार रूपये का अनुदान भी उपलब्ध कराया। आज उनके खेत में लगा ट्यूबवेल 12 महीनें सिंचाई के लिये पानी दे रहा है। अब वे और उनके भाई रबी एवं खरीफ सीजन में फसल ले रहे हैं। उन्होंने अपने खेत में पशुपालन के लिये चार दुधारू पशु भी खरीदें हैं।
बहादुर सिंह से ग्राम के अन्य किसानों ने भी प्रेरणा ली है और गांव के किसान ट्यूबवेल योजना का लाभ लेने के लिये किसान कल्याण विभाग से पहल कर रहे हैं।Read Full Text......
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भोपाल जिले में वाटर शेड मिशन के अंतर्गत 62 हजार हेक्टेयर भूमि
वाटर शेड की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत 62 हजार हेक्टेयर भूमि को उपचारित किये जाने का कार्यक्रम
नरेगा में भी वाटर शेड योजना का लाभ चयनित 90 गाँव को दिलाया जायेगा
वाटर शेड मिशन के बेहतर क्रियान्वयन के लिये महिलाओं के स्व सहायता समूह के गठन पर विशेष ध्यान
जिले में एकीकृत पड़त भूमि विकास कार्यक्रम के अंतर्गत तीन परियोजनाएं स्वीकृत की गयी हैं। इन योजनाओं के क्रियान्वयन पर लगभग साढ़े आठ करोड़ रूपये की राशि खर्च की जायेगी और इससे लगभग 14 हजार हेक्टेयर भूमि में जल संग्रहण का कार्य किया जायेगा। तीन परियोजनाओं में से पहली योजना पर लगभग तीन करोड़ रूपये की राशि व्यय कर 4 हजार 750 हेक्टेयर भूमि का उपचार किया गया है। दूसरी योजना पर लगभग दो करोड़ 35 लाख रूपये की राशि व्यय कर 3700 हेक्टेयर भूमि को उपचारित किया जा चुका है। तीसरी योजना में लगभग दो करोड़ रूपये की राशि व्यय कर 3300 क्षेत्र को उपचारित किया जा चुका है।
भोपाल जिले में राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (नरेगा) के अंतर्गत भी वाटर शेड की पांच परियोजनाओं को मंजूरी दी गयी है। इन पांच परियोजनाओं में 22 करोड़ 40 लाख रूपये की राशि की मंजूरी दी गयी है। इस परियोजना में 90 गाँव की लगभग 28 हजार हेक्टेयर भूमि का उपचार किया जायेगा। नरेगा में वाटर शेड का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है।
भोपाल जिले में एकीकृत जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन कार्यक्रम (आईडब्ल्यूएमपी) के अंतर्गत चार परियोजनाएं स्वीकृत की गयी हैं। इन परियोजनाओं के लिये 24 करोड़ रूपये की राशि को मंजूरी दी गयी है। वाटर शेड की इस परियोजना के जरिये चयनित क्षेत्र की 20 हजार हेक्टेयर भूमि का उपचार किया जायेगा।
जिले में वर्षा के पानी के उचित संग्रहण के लिये ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक तौर पर जन जागृति का अभियान भी चलाया जा रहा है।
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Thursday, February 18, 2010
प्रदेश में 1250 केन्द्रों पर खरीदेंगे गेहूँ
खरीदी केन्द्र जुड़ेंगे गोदाम से
उपार्जन व्यवस्था को पुख्ता और साफ-सुथरी बनाने के लिए गेहूँ खरीदी केन्द्रों को जोड़ा जा रहा है। इसके चलते भण्डारण में अफरातफरी की स्थिति भी नहीं उपजेगी। चूंकि हर खरीदी केन्द्र अपने तयशुदा भण्डार गृह से जुड़ा रहेगा इसलिए माल के परिवहन का रास्ता और स्थान भी पहले से निश्चित होगा। इसी मकसद से गोदामों और खरीदी केन्द्रों की सूचनाओं को पहले से इकट्ठा किया जा रहा है।
गफलत में नहीं रहेंगे किसान
कोई बिचौलिया या अन्य अवांछित तत्व किसानों से बारदाने, सुतली, स्टीचिंग मशीन, कांटा-बांट आदि का इंतजाम खुद करने को कहता है तो सीधे पकड़ में आ जाएगा। किसानों से कहा गया है कि ये सारे इंतजाम सरकार खुद कर रही है इसलिए उन्हें बिचौलियों या व्यापारियों के किसी भड़कावे में नहीं आना है।
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Wednesday, February 17, 2010
दो हेक्टेयर तक के किसानों के लिये आदर्श कृषि मॉडल तैयार करें
दो हेक्टेयर तक के किसानों के लिये आदर्श कृषि मॉडल तैयार करें
कृषि की आधुनिक तकनीक के प्रचार के लिये मासिक आत्मा संदेश का नियमित प्रकाशन
मध्यप्रदेश में कृषि कार्यक्रमों के विस्तार के लिये आत्मा परियोजना के अंतर्गत किसान कल्याण विभाग ने 19 एजेंसियों के साथ अनुबंध किये हैं। यह एजेंसियां कृषि में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, किसानों को उन्नत तकनीक की जानकारी देने, ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि पाठ्य शालाओं का संचालन कर रही हैं। संचालक किसान कल्याण डॉ. डी.एन. शर्मा ने बताया कि आत्मा परियोजना का संचालन प्रदेश के 50 जिलों के 313 विकासखंडों में किया जा रहा है। आत्मा परियोजना में किसानों को कृषि जानकारी के लिये भ्रमण एवं प्रशिक्षण के कार्य भी किये जा रहे हैं।
कृषि आयुक्त डॉ. गुरूवचन सिंह ने कहा कि भारत में पिछले ढ़ाई दशकों में मौसम में भारी बदलाव आया है। इस बदलाव का फर्क खेती किसानी पर ज्यादा पड़ रहा है। अब जरूरत है कि किसानों को बदलते मौसम के अनुसार कृषि तकनीकों की जानकारी दी जाये। लगातार पानी की घटती उपलब्धता को देखते हुये भी हमें कृषि नीति में बदलाव की जरूरत होगी। के.जे. एजुकेशन सोसायटी के श्री सुनील गंगराडे ने बताया कि किसानों को कृषि समाचार देने के लिये प्रतिमाह आत्मा संदेश का प्रकाशन किया जा रहा है। यह कृषि संदेश प्रदेश के एक लाख से ज्यादा किसान मित्र एवं किसान दीदी तक पहुँच रहा है।
किसान कॉल सेंटर का निरीक्षण
कृषि आयुक्त डॉ. गुरूवचन सिंह ने भोपाल के गंगोत्री भवन स्थित किसान कॉल सेंटर का निरीक्षण किया। यह कॉल सेंटर इण्डियन सोसायटी ऑफ एग्री बिजनेस प्रोफेशनल्स (आईसेप) की मदद से संचालित हो रहा है। किसान कॉल सेंटर के प्रभारी डॉ. एस. मोटवानी ने बताया कि अब तक ढ़ाई लाख से अधिक किसानों की समस्याओं का निराकरण टोल फ्री सेवा के माध्यम से किया जा चुका है। किसान कॉल सेंटर के टोल फ्री नम्बर 1800-233-4433 पर पन्द्रह लाईनें उपलब्ध हैं। इस कॉल सेंटर में किसानों को कृषि के अलावा उद्यानिकी, पशुपालन, फसल संरक्षण, मिट्टी परीक्षण आदि से संबंधित जानकारी दी जा रही है।
कृषि आयुक्त ने खेतो में पहुँचकर किसानों से चर्चा की
कृषि आयुक्त डॉ. गुरूवचन सिंह ने भोपाल जिले के ग्राम बरखेड़ानाथू, धामनिया ग्राम, ग्राम कोलूखेड़ी में किसानों के खेतों में पहुँचकर फसलों की स्थिति, सिंचाई सुविधा, ग्रामीण क्षेत्रों में बनाये गये बायो गैस संयत्र, बलराम तालाब आदि के बारे में चर्चा की। कृषि आयुक्त ने मटर का मिनी किट प्रदर्शन, जैविक कृषि एवं भू-जल संवर्धन के कार्यों को देखा।
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Thursday, February 11, 2010
मण्डी परिसरों में अतिक्रमण को सख्ती से हटाय
डॉ. कुसमरिया ने मण्डी सचिवों से मण्डी प्रांगणों में निर्माणाधीन कार्यों को भी समय-सीमा में पूरा किये जाने के निर्देश भी दिये।Read Full Text......
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