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Saturday, March 27, 2010

कृषि यंत्रों के उपयोग से कृषि उत्पादन बढ़ाया जा सकता है

 किसानों को सब्सिडी पर दिये जाने वाले कृषि यंत्रों का प्रदर्शन
मध्यप्रदेश में कृषि विस्तार कार्यक्रमों का विस्तार करने के उद्देश्य से किसान कल्याण विभाग द्वारा आत्मा परियोजना का संचालन किया जा रहा है। केन्द्र सरकार की मदद से संचालित होने वाली इस योजना के तहत भोपाल के रवीन्द्र भवन परिसर में आज से तीन दिवसीय कृषि विज्ञान मेला प्रारंभ हुआ। यह कृषि मेला 28 मार्च तक चलेगा।

किसानों को सब्सिडी पर दिये जाने वाले कृषि यंत्रों का प्रदर्शन

प्रदेश में सोयाबीन का उत्पादन बढ़ाने के लिये नई-नई किस्मों की जानकारी

उद्यानिकी फसलों की आधुनिक तकनीक की जानकारी दिये जाने की व्यवस्था


कृषि विज्ञान मेले में प्रदेश के विभिन्न अंचलों के प्रगतिशील किसानों की भागीदारी सुनिश्चित की गयी है। कृषि विज्ञान मेले में प्रमुख रूप से जैविक कृषि उत्पादों का प्रदर्शन एवं विपणन किया जा रहा है। इसके अलावा कृषि मेले में आधुनिक कृषि उपकरणों का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि खेतों में कृषि उपकरणों के इस्तेमाल से कृषि उत्पादन 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। 
कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय द्वारा लगाये गये स्टॉल में किसानों को अनुदान पर दिये जाने वाले कृषि यंत्रों का प्रदर्शन किया गया है। स्टॉल में प्रदर्शित किया गया पोटेटो डिगर 38 किलोग्राम वजन का कृषि यंत्र है। इस यंत्र को एक बैल जोड़ी से आसानी से खीचा जा सकता है। 
इस यंत्र का उपयोग खेत में इस तरह से किया जाता है, जिससे खेत में लगे आलू एक ही बार प्रयोग से मिट्टी की सतह पर आ जाते हैं। किसानों को खेत में अनावश्यक बार-बार खुदाई नहीं करनी पड़ती है। प्रदर्शनी में किसानों के लिये मूँगफली छीलक यंत्र भी आकर्षण का केन्द्र रहा है।
12 किलोग्राम वजन के इस यंत्र की मदद से 40 से 50 किलोग्राम मूँगफली को छिलकर दाने निकाले जा सकते हैं। इस यंत्र की कीमत मात्र 900 रूपये है। किसानों को बड़े कृषि यंत्रों के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। इनमें रोटावेटर, ज़ीरो टिलेज सीड ड्रिल, राइस ट्रान्सप्लांटर, शुगर केन कटरप्लांटर आदि प्रमुख हैं। 
शुगर केन कटरप्लांटर की मदद से किसान खेतों में गन्ने की बुआई दो कतारों में एक साथ कर सकते हैं। इस विधि से गन्ना लगाने से लागत में 30 से 40 प्रतिशत तक की बचत हो जाती है। गन्ने का उत्पादन भी 25 से 30 प्रतिशत बढ़ जाता है।

कृषि विज्ञान मेले में किसानों को उद्यानिकी के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी जा रही है। आजकल किसान फूलों की खेती के तरफ भी अग्रसर हुये हैं। रजनीगंधा नामक सफेद रंग का महकदार फूल बाजार में अपनी अलग पहचान बनाये हुये है। दक्षिण अमेरिकी देश मैक्सिको में पैदा हुये इस पौधे ने दुनिया में अपनी अलग पहचान बनायी है। 
प्रदर्शनी में रजनीगंधा की उत्पादन प्रौद्योगिकी के बारे में किसानों को बताया जा रहा है। इसके अलावा आलू की उन्नत खेती, मसाला विकास कार्यक्रम, औषधीय एवं सुगंधित फसल विकास कार्यक्रमों की जानकारी, आम, अमरूद, सीताफल, केला, आँवला आदि की उन्नत किस्मों के बारे में भी किसानों को बताया जा रहा है। कृषि विज्ञान मेले में सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) का स्टॉल भी लगाया गया है। 
किसानों को बताया जा रहा है कि सोयाबीन विश्व की एक प्रमुख तिलहनी, औषधीय एवं पौष्टिक गुणों से भरपूर लाभदायक फसल है। मध्यप्रदेश में सोयाबीन का प्रचुर उत्पादन होने के कारण पूरे देश में मध्यप्रदेश की पहचान सोया प्रदेश के रूप में होती है।

कृषि विज्ञान मेले में कृषि विशेषज्ञ किसानों को आधुनिक तकनीक की जानकारी देने के साथ-साथ जैविक खेती के महत्व के बारे में भी बता रहे हैं।

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