Pages


Top Stories

Wednesday, February 24, 2010

किसान कल्याण मंत्री कॉल सेन्टर में सुनेंगे किसानों की समस्याएँ

कॉल सेन्टर का टोल फ्री नम्बर 1800-233-44-33 
किसान कल्याण मंत्री डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया 24 फरवरी को दोपहर 3 बजे से 4 बजे तक भोपाल के गंगोत्री भवन में स्थित किसान काल सेन्टर उपस्थित रहकर किसानों की समस्याओं को सुनेंगे और उनका निराकरण करेंगे।किसान कॉल सेन्टर किसान कल्याण विभाग की मदद से इण्डियन सोसायटी ऑफ एग्री बिजनेस प्रोफेशनल्स (आईसेफ) के द्वारा संचालित हो रहा है। इस कॉल सेन्टर का टोल फ्री नम्बर 1800-233-44-33 है। किसान कॉल सेन्टर में अब तक प्रदेश के ढाई लाख से अधिक किसानों की समस्याओं का निराकरण किया जा चुका है। यह कॉल सेन्टर सप्ताह में सातों दिन प्रात: 7 बजे से शाम 7 बजे तक संचालित हो रहा है। इस कॉल सेन्टर में कृषि विशेषज्ञों द्वारा कृषि से संबंधित समस्याओं के साथ-साथ पशुपालन, मछलीपालन, डेयरी विषय से संबंधित समस्याओं का भी निराकरण भी किया जा रहा है।

Read Full Text......

Sunday, February 21, 2010

कृषि यंत्रों को गाँव-गाँव तक पहुँचाने की आवश्यकता - किसान कल्याण मंत्री

किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने कहा है कि मध्यप्रदेश में कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने के लिये हरसंभव प्रयास किये जायेंगे। कृषि मंत्री डॉ. कुसमरिया ने कहा कि प्रदेश में कृषि उत्पादन प्रति हेक्टेयर बढ़ सके इसके लिये जरूरी है कि किसानों तक उचित दाम पर पूरी गुणवत्ता के कृषि यंत्र समय पर पहुँचे। 
किसान कल्याण मंत्री डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया भोपाल के नबीबाग स्थित केन्द्रीय कृषि इंजीनियरिंग संस्थान में आज 'कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने में कृषि यंत्रीकरण का योगदान' विषय पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने कृषि इंजीनियरिंग संस्थान में आयोजित कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी का शुभारंभ भी किया।
इस मौके पर उप महानिदेशक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद भारत सरकार डॉ. एम.एम. पांडे, मध्यप्रदेश के कृषि उत्पादन आयुक्त श्री एम.के. राय एवं प्रमुख सचिव किसान कल्याण श्री इन्द्रनीलशंकर दाणी भी उपस्थित थे।
छोटे किसानों की मदद के लिये बैलों पर सब्सिडी दिये जाने का विचार
कृषि यंत्रों की पहुँच गाँव-गाँव तक पहुँचाये जाने की आवश्यकता
मध्यप्रदेश में फार्म पावर दो किलोवाट प्रति हेक्टेयर किया जायेगा

किसान कल्याण मंत्री डॉ. कुसमरिया ने कहा कि वर्तमान सिस्टम में कृषि यंत्रों को किसानों तक पहुँचाने में जो व्यावहारिक दिक्कतें आ रही हैं उन्हें शीघ्र दूर कर दिया जायेगा। डॉ. कुसमरिया ने कहा कि मध्यप्रदेश में बड़ी संख्या में छोटे किसान हैं। 
यह किसान बैल आधारित कृषि व्यवस्था पर निर्भर हैं। राज्य सरकार इन किसानों के हित में निर्णय लेते हुये बैलों की खरीदी पर भी उचित सब्सिडी दिये जाने पर विचार कर रही है। किसान कल्याण मंत्री डॉ. कुसमरिया ने कृषि यंत्रों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने एवं गाँव स्तर तक यंत्र संचालन का प्रशिक्षण दिये जाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि कृषि यंत्रों की टेस्टिंग कार्य के लिये भोपाल के कृषि इंजीनियरिंग संस्थान एवं प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों को अधिकृत किया गया है।

उप महानिदेशक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद डॉ. एम.एम. पांडे ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा कृषि यंत्रों पर पर्याप्त सब्सिडी दी जा रही है, जरूरत इस बात की है कि सब्सिडी का पूरा लाभ किसानों तक पहुँचे। उन्होंने कहा कि कृषि राज्य सरकार का मामला है इसलिये राज्य सरकारों को कृषि यंत्रों की पहुँच गाँव-गाँव तक पहुँचाने के लिये आवश्यक पहल करनी होगी। कृषि यंत्रों के बेहतर उपयोग से कृषि उत्पादन आयुक्त 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। 
डॉ. पांडे ने मध्यप्रदेश में कृषि मजदूरों को राज्य सरकार द्वारा दुर्घटना के दौरान मुआवजा देने की योजना की प्रशंसा की। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री एम.के. राय ने कहा कि प्रदेश में फार्म पावर की उपलब्धता 0.80 किलोवाट प्रति हेक्टेयर है उसे राष्ट्रीय स्तर के 1.35 किलोवाट प्रति हेक्टेयर तक पहुँचाने और वर्ष 2020 तक दो किलोवाट प्रति हेक्टेयर तक लक्ष्य को हासिल किया जायेगा।

कार्यक्रम को कृषि संचालक डॉ. डी.एन. शर्मा, केन्द्रीय अभियांत्रिकी संस्थान भोपाल के निदेशक पीतम चन्द्र एवं कार्यशाला में भाग लेने आये प्रगतिशील कृषकों एवं कृषि यंत्रों के निर्माताओं ने भी संबोधित किया। किसानों ने अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा कि मध्यप्रदेश में कृषि यंत्रों पर लगे पांच प्रतिशत के वैट टैक्स को हटाया जाना चाहिए। इससे किसानों को उचित दाम पर कृषि यंत्र उपलब्ध हो सकेंगे। मध्यप्रदेश कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय के संयुक्त संचालक श्री राजेश चौधरी ने मध्यप्रदेश में कृषि यंत्रों के उपयोग, उपलब्धता एवं गुणवत्ता के बारे में प्रजेंटेशन दिया। 
श्री चौधरी ने बताया कि मध्यप्रदेश में कुल कृषक संख्या 73.60 लाख है इनमें सीमान्त कृषक 28.38 लाख एवं लघु कृषक 19.51 लाख है। परिसर में आयोजित प्रदर्शनी में कृषि यंत्रों रिवर्सिबल प्लाउ, रोटावेटर, राइस ट्रान्सप्लांटर, सीड कम फर्टीलाइजर ड्रिल, रेज्ड बेड प्लान्टर, बैल चलित सीड कम फर्टीलाइजर ड्रिल, शुगरकेन कटर प्लान्टर आदि का प्रदर्शन किया गया। किसानों को इन यंत्रों को चलाकर बताया गया।

Read Full Text......

Thursday, February 11, 2010

मण्डी परिसरों में अतिक्रमण को सख्ती से हटाय

 मण्डी सचिवों की बैठक में निर्देश
किसान कल्याण मंत्री डॉ. कुसमरिया ने मण्डी सचिवों से कहा है कि मण्डी प्रांगणों में अतिक्रमण को सख्ती से हटाया जाये। कृषि विकास मंत्री डॉ. कुसमरिया पिछले दिनों ग्वालियर में संभागस्तरीय बैठक में मण्डी सचिवों की बैठक को संबोधित कर रहे थे।
कृषि विकास मंत्री डॉ. कुसमरिया ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके इसके लिये राज्य शासन ने प्रदेश की कृषि उपज मण्डियों में अनेक सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। मण्डी सचिव यह सुनिश्चित करें कि इन सुविधाओं का लाभ किसानों को पूरा-पूरा मिल सके। डॉ. कुसमरिया ने मण्डी सचिवों से मण्डी प्रांगणों में इलेक्ट्रानिक तौल-काँटे, पांच रुपये थाली भोजन व्यवस्था एवं अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी ली।

डॉ. कुसमरिया ने मण्डी सचिवों से मण्डी प्रांगणों में निर्माणाधीन कार्यों को भी समय-सीमा में पूरा किये जाने के निर्देश भी दिये।

Read Full Text......

Wednesday, February 10, 2010

प्रदेश में शीघ्र ही जैविक खेती नीति लागू की जायेगी

 इंदौर में तीन दिवसीय जैविक किसान मेला प्रारंभ
कृषि विकास मंत्री डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने कहा है कि मध्यप्रदेश में शीघ्र ही जैविक कृषि नीति की घोषणा की जायेगी। प्रदेश में जैविक खेती से प्राकृतिक संतुलन बनाये रखने के साथ ही ग्लोबल वार्मिंग के खतरों से भी निपटने में मदद मिलेगी।
कृषि विकास मंत्री डॉ. कुसमरिया रविवार को इंदौर में तीन दिवसीय जैविक कृषि सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। कृषि महाविद्यालय परिसर में आयोजित समारोह में देशभर के करीब पांच हजार से अधिक जैविक खेती विशेषज्ञ तथा किसान भाग ले रहे हैं।

कृषि विकास मंत्री डॉ. कुसमरिया ने जैव-विविधता को नष्ट करने वाली शक्तियों से एकजुट होकर निपटने की बात कही। कार्यक्रम को आर्गेनिक फार्मिंग एसोसिएशन आफ इण्डिया के संस्थापक निदेशक डॉ. क्लाउड अल्वरेंस, मध्यप्रदेश विज्ञान प्रौद्योगिकी के निर्देशक डॉ. पी.के. वर्मा, कृषि विशेषज्ञ डॉ. कुट्टी मेनन एवं डॉ. भारतेन्दु प्रकाशन ने भी संबोधित किया। सम्मेलन का आयोजन उत्तर भारत सजीव कृषि समाज, कृषि विभाग एवं के.जे. एजुकेशन सोसायटी भोपाल द्वारा किया जा रहा है।

आयोजन का खास आकर्षण जैविक हाट है। जैविक हाट में पूर्णत: जैविक खेती के जरिये उत्पादित फल, सब्जिया, मसाले रखे गये हैं। बुरहानपुर का केला, खण्डवा का प्याज, छतरपुर का सरसों तेल, बांदा का दलिया, राजस्थान का जीरा, अमरूद, लहसुन एवं धनिया आदि जैविक हाट में उपलब्ध हैं।

Read Full Text......

Tuesday, February 9, 2010

पारंपरिक खेती की पद्धति को संरक्षित किया जाए – किसान कल्याण मंत्री

फिल्म अभिनेता रज़ा मुराद की कृषि विकास मंत्री से सौजन्य मुलाकात
किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने कहा है कि मध्यप्रदेश में हजारों वर्ष पुरानी पारंपरिक खेती को संरक्षित किये जाने के लिये हर-संभव प्रयास किये जायेंगे। इसी बात को दृष्टिगत रखते हुए प्रदेश में शीघ्र ही जैविक नीति की घोषणा की जाने वाली है। उक्त विचार कृषि विकास मंत्री डॉ. कुसमरिया ने आज भोपाल में उनसे मिलने पहुंचे फिल्म अभिनेता रज़ा मुराद से बातचीत के दौरान व्यक्त किये।प्रदेश में 16 हजार हेक्टेयर में बैंगन की 250 से अधिक किस्मों की खेती
गौ आधारित कृषि व्यवस्था को मध्यप्रदेश में अधिक से अधिक प्रोत्साहन
फिल्म अभिनेता रज़ा मुराद ने जैविक खेती के अभियान में अपनी ओर से मदद दिये जाने की बात कही

किसान कल्याण मंत्री डॉ. कुसमरिया ने कहा कि मध्यप्रदेश आधुनिक कृषि का विरोधी नहीं है। लेकिन पश्चिमी कृषि की ऐसी विधि को एकदम तत्काल नहीं अपनाया जायेगा जो हजारों वर्ष पुरानी भारतीय कृषि पद्धति के लिये घातक हो। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में खेती में रसायन उर्वरक के अधाधुंध उपयोग से कृषि भूमि की उर्वरा शक्ति काफी हद तक घटी है। इसके साथ ही इनका उपयोग पर्यावरण को बिगाड़ने में काफी हद तक जिम्मेदार है। 
कृषि विकास मंत्री ने कहा कि गाय भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था की धुरी रही है। इस बात को दृष्टिगत रखते हुए प्रदेश में गौ-पालन केन्द्रित कृषि व्यवस्था को अधिक से अधिक प्रोत्साहित किया जायेगा। बी.टी. बैंगन की चर्चा करते हुए कृषि विकास मंत्री डॉ. कुसमरिया ने कहा कि इस पर किये गये शोध पर्याप्त नहीं हैं। 
जल्दबाजी में बीटी बैंगन का अनुमति नहीं दी जानी चाहिये। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में 16 हजार हेक्टेयर में बैंगन की खेती होती है। प्रदेश में 250 से अधिक बैंगन की किस्में हैं। इनको संरक्षित करने के लिये मध्यप्रदेश में बीटी बैंगन को अनुमति नहीं दी जायेगी।

फिल्म अभिनेता रज़ा मुराद ने कहा कि प्रदेश में जैविक खेती को प्रोत्साहित किये जाने वाले कार्य प्रशंसनीय हैं। आज दुनियाभर में जैविक कृषि उत्पादों की मांग बढ़ी है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में जैविक खेती को प्रोत्साहित किये जाने वाले प्रयासों में वे अपनी ओर से हर-संभव मदद करेंगे।

Read Full Text......

Monday, December 28, 2009

जैविक विधि से खेती को हरसंभव मदद दी जायेगी - किसान कल्याण मंत्री डा. कुसमरिया

अप्रवासी भारतीय ने प्रदेश की जैविक नीति के संबंध में जानकारी ली
मध्यप्रदेश के निवासी श्री प्रदीप जैन जो अमेरिका के शिकागो के नजदीक विंड लैंड में पिछले दो साल से जैविक विधि से खेती कर रहे हैं। उन्होंने पिछले दिनों अपने भोपाल प्रवास के दौरान किसान कल्याण मंत्री डा. रामकृष्ण कुसमरिया से मिलकर प्रदेश में बनायी जा रही जैविक नीति के संबंध में जानकारी प्राप्त की। किसान कल्याण मंत्री डा. कुसमरिया ने कहा कि प्रदेश में जैविक विधि से खेती करने वाले किसानों को राज्य सरकार की ओर से हरसंभव मदद दी जायेगी।किसान कल्याण मंत्री डा. कुसमरिया ने बताया कि मध्यप्रदेश में वर्तमान में लगभग चार लाख हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक विधि से खेती की जा रही है। यह रकबा पूरे देश का एक तिहाई के करीब है। प्रदेश को जैविक राज्य बनाने की दृष्टि से शीघ्र ही जैविक नीति की घोषणा की जाने वाली है। 
अमेरिका की नागरिकता प्राप्त कर चुके श्री प्रदीप जैन और उनकी पत्नी श्रीमती लीसा जैन ने बताया है कि शिकागो के नजदीक विंड लैंड में वे पिछले दो वर्षों से जैविक विधि से खेती कर रहे हैं। खेतों में रसायन खाद के बढ़ते उपयोग के कारण विदेशों में जैविक विधि से पैदा किये गये अनाज की मांग बढ़ी है। वे अपने दो एकड़ के कृषि फार्म में जैविक विधि से सब्जी, फल एवं अनाज की विभिन्न किस्में प्राप्त कर रहे हैं।
किसान कल्याण मंत्री डा. कुसमरिया से समर्पण महिला विकास केन्द्र मण्डला की श्रीमती प्रीति पटेल ने भी मुलाकात कर उन्हें मण्डला एवं डिण्डोरी जिले में आदिवासी किसानों द्वारा जैविक खेती किये जाने की जानकारी दी। श्रीमती प्रीति पटेल ने बताया कि उनका संगठन आदिवासी क्षेत्रों में किसानों को जैविक खेती से आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास कर रहा है। 
नैनपुर ब्लॉक में 50 आदिवासी परिवार 1/4-1/4 एकड़ के क्षेत्र में अपने उपयोग के लिये अनाज एवं फल-सब्जी खुद पैदा कर रहे हैं। यह आदिवासी परिवार मजदूरी करने के बाद जो राशि मिलती है उसका उपयोग अन्य कार्यों में कर रहे हैं, ऐसे करने से उनकी माली हालत में सुधार आया है।
श्री प्रदीप जैन ने कृषि विकास मंत्री डा. कुसमरिया के साथ भोपाल के नजदीक कृषि विभाग के फन्दा कृषि फार्म को देखा। कृषि फार्म के प्रभारी श्री मनोहर दिलवारिया ने बताया कि इस फार्म में रसायन खाद एवं जैविक विधि से खेती की जा रही है। यहां फार्म में आने वाले किसानों को दोनों विधियों रसायन खाद एवं जैविक खाद से की गयी खेती के अंतर को दिखाया जा रहा है। 
कृषि फार्म में वर्मी कम्पोस्ट, नाडेप कम्पोस्ट, गोबर स्लेरी, ग्रीन मेनरिंग आदि विधियों का उपयोग हो रहा है। इस फार्म में बीज प्रक्रिया केन्द्र भी है। प्रतिवर्ष मध्यप्रदेश के अलावा अन्य राज्यों के किसानों के दल जैविक खेती एवं जैविक खाद तैयार करने की विधि को देखने के लिये आते हैं।
किसान कल्याण मंत्री डा. कुसमरिया ने बताया कि उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को प्रत्येक गांव में एक-एक आदर्श जैविक कृषि फार्म तैयार किये जाने के निर्देश दिये हैं।

Read Full Text......

Thursday, December 24, 2009

प्रदेश में खुलेगा जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिये राष्ट्रीय कामधेनु अनुसंधान केन्द्र

नई दिल्ली में भारतीय अनुसंधान परिषद की 81वीं वार्षिक सभा आयोजित
किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने कहा है कि मध्यप्रदेश को पूरे देश में जैविक राज्य के रूप में पहचान दिलाने के लिये लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। प्रदेश में शीघ्र ही नई जैविक नीति घोषित की जा रही है। इस बात को दृष्टिगत रखते हुए प्रदेश में एक उच्च स्तरीय राष्ट्रीय कामधेनु अनुसंधान केन्द्र खोले जाने की जरूरत है। इस केन्द्र के खुलने से मध्यप्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। डॉ. कुसमरिया आज नई दिल्ली में केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शरद पवार की अध्यक्षता में आयोजित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की 81वीं वार्षिक सामान्य सभा को संबोधित कर रहे थे।
प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिये राष्ट्रीय कामधेनु अनुसंधान खोला जाये
मालवा क्षेत्र में एक कृषि विश्वविद्यालय, दो महाविद्यालय प्रारंभ किये जाने की जरूरत
छिन्दवाड़ा जिले में आदिवासियों के आर्थिक विकास के लिये पॉपकार्न प्रसंस्करण केन्द्र खोले जाने की आवश्यकता
नरसिंहपुर में गन्ना अनुसंधान केन्द्र प्रारंभ किया जाये
कृषि विकास मंत्री डॉ. कुसमरिया ने कहा कि प्रदेश में कृषि को लाभ का धंधा बनाने के लिये राज्य सरकार ने अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिये हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में जबलपुर तथा ग्वालियर में दो कृषि विश्वविद्यालय कार्य कर रहे हैं। बड़े प्रदेश होने के नाते इंदौर-मालवा क्षेत्र में कम से कम एक कृषि विश्वविद्यालय तथा दो कृषि महाविद्यालयों को प्रारंभ किये जाने की आवश्यकता है।
उन्होंने इसके लिये केन्द्र से सहयोग दिये जाने का आग्रह किया। डॉ. कुसमरिया ने कृषि महाविद्यालयों की अधोसंरचना विकास के लिये परिषद के समक्ष लंबित पांच करोड़ रुपये के प्रस्ताव को भी शीघ्र स्वीकृति दिये जाने का भी आग्रह किया। डॉ. कुसमरिया ने प्रदेश में मसाला फसलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिये राज्य में नवीन मसाला अनुसंधान परियोजना प्रारंभ करने की आवश्यकता भी बताई।
कृषि विकास मंत्री डॉ. कुसमरिया ने प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर क्षेत्र में फूलों के बढ़ते उत्पादन को ध्यान में रखते हुए पुष्प अनुसंधान परियोजना शुरू करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 58 लाख हेक्टेयर रकबे में मक्का की खेती की जा रही है। छिन्दवाड़ा जिला मक्का के सर्वाधिक उत्पादन वाला जिला है। 
इस जिले में आदिवासियों के आर्थिक विकास के लिये पॉपकार्न, बेबी कार्न इम्प्रूवमेंट एवं प्रसंस्करण केन्द्र स्थापित किये जाने की जरूरत है। कृषि विकास मंत्री डॉ. कुसमरिया ने कहा कि राज्य सरकार की मदद से संचालित जबलपुर के गेहूँ अनुसंधान केन्द्र को अखिल भारतीय समन्वित गेहूँ अनुसंधान परियोजना के रूप में 11वीं पंचवर्षीय योजना में शामिल किया जाना चाहिये।
इसी प्रकार जबलपुर नेहरू कृषि विश्वविद्यालय को औषधीय एवं सुगंधित पौधों के संरक्षण, संवर्धन की आवश्यकता को देखते हुए इस केन्द्र को ऑल इण्डिया नेटवर्क प्रोजेक्ट ऑन एम.एण्ड ए.पी. के अंतर्गत शामिल किये जाने की जरूरत है।
प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में गन्ने का व्यापक उत्पादन होता है। आसपास के जिलों में गन्ने के उत्पादन को बढ़ाने के लिये नरसिंहपुर में गन्ना अनुसंधान केन्द्र की स्थापना किये जाने की आवश्यकता है। 
डॉ. कुसमरिया ने प्रदेश में जैविक विधि से उत्पादक फसलों के प्रमाणीकरण के लिये राष्ट्रीय स्तर की संस्था गठित करने की आवश्यकता बताई। कृषि विकास मंत्री डॉ. कुसमरिया ने प्रदेश के कृषि महाविद्यालयों में उपलब्ध सीटों को बढ़ाये जाने एवं शिक्षण परिसरों के समुचित विकास के लिये और अधिक आर्थिक सहायता देने का सुझाव दिया।

Read Full Text......

Sunday, December 20, 2009

मप्र को जैविक प्रदेश बनाने के लिये एकजुट प्रयास किये जायेगे- डा. कुसमरिया

जैविक नीति निर्धारण की बैठक सम्पन्न
मध्यप्रदेश की जैविक नीति के निर्धारण के लिये इंदौर जिले के महू विकासखंड के ग्राम बसी पीपरी में शुक्रवार को आयोजित बैठक में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री रामकृष्ण कुसमरिया ने कहा कि प्रदेश की नयी जैविक नीति शीघ्र ही लागू की जायेगी। मध्यप्रदेश को जैविक प्रदेश बनाने के लिये एकजुट प्रयास किये जायेंगे। इस अवसर पर डा. कुसमरिया ने किसानों को मृदा परीक्षण कार्ड भी वितरित किये।कृषि विकास मंत्री डा. कुसमरिया ने कहा कि इस समय पूरे देश में कुल 12 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती की जा रही है। मध्यप्रदेश में इस समय पूरे देश का लगभग एक तिहाई क्षेत्र 4 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती की जा रही है। इस प्रकार मध्यप्रदेश का देश की कुल जैविक खेती में एक तिहाई हिस्सेदारी है। 
उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग रोकने, पर्यावरण संरक्षण और जमीन की उर्वरा शक्ति को बनाये रखने के लिये जैविक खेती अत्यंत आवश्यक है। जैविक खेती को बढ़ावा देना धरती का ऋण चुकाने के बराबर है। हमारा कृषि संबंधी ज्ञान तभी सार्थक होगा जब हम जैविक खेती को अपनायेंगे। रासायनिक खाद एवं दवाओं के जनस्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव को भी जैविक खेती से ही समाप्त किये जा सकता है।
बैठक में उपस्थित कृषि राज्य मंत्री श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि यह समय परम्पराओं एवं जड़ों की तरफ लौटने का है। हम योग, आयुर्वेद एवं वैदिक संस्कृति की तरफ तेजी से लौट रहे हैं। इसी श्रृंखला में हमें पारंपरिक जैविक खेती की ओर भी तेजी से लौटना होगा। 
बैठक के प्रारंभ में किसान कल्याण विभाग के उप सचिव श्री एच.व्ही.एस. भदौरिया ने जैविक नीति के प्रारूप की जानकारी देते हुये बताया कि नीति में किसानों को जैविक खेती की तरफ कैसे ले जाया जाना है तथा उनके उत्पादन वृद्धि, विपणन, बीज, आदान व्यवस्था कैसे की जायेगी। इस अवसर पर कृषि विश्वविद्यालय से आये वरिष्ठ कृषि विशेषज्ञ एवं कृषि वैज्ञानिकों ने अपने सुझाव भी दिये।
बैठक में कृषि संचालक श्री डी.एन.शर्मा और मध्यप्रदेश एग्रो इंडस्ट्रीज के प्रबंध संचालक डॉ. व्ही.एस. निरंजन सहित विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक उपस्थित थे।

Read Full Text......

Tuesday, November 10, 2009

कृषि योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंचे राज्यमंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह

बुंदेलखण्ड क्षेत्र में अपार नदी संपदा
Bhopal:Monday, November 9, 2009: किसान कल्याण एवं कृषि विकास राज्यमंत्री श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने आज मंत्रालय में किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग का कार्यभार ग्रहण किया। उनके द्वारा कार्यभार ग्रहण किये जाने के समय किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया, लोक निर्माण मंत्री श्री नागेन्द्र सिंह, राज्य कृषक आयोग के अध्यक्ष श्री राजेन्द्र पाठक, विधायक श्री दीपक जोशी, पूर्व पार्षद आलोक शर्मा एवं बुंदेलखण्ड क्षेत्र के अनेक जन-प्रतिनिधि मौजूद थे।
श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने कार्यभार ग्रहण करने के बाद कहा कि उनका प्रयास होगा कि कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ जरूरतमंद किसानों तक आवश्यक रूप से पहुंचे। श्री सिंह ने कहा कि बुंदेलखण्ड क्षेत्र में अपार नदी संपदा है लेकिन इसके बावजूद इन नदियों का खेती-किसानी के लिये सिंचाई के तौर पर उपयोग नहीं हो पा रहा है।
उनके द्वारा इस दिशा में भी विशेष प्रयास किये जायेंगे। कृषि विकास राज्यमंत्री श्री सिंह ने कहा कि वे प्रदेश के विभिन्न अंचलों में जाकर छोटे किसानों की दिक्कतों को उनके खेतों में पहुंचकर समझेंगे। इसके आधार पर वे कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन में विशेष ध्यान देंगे।

Read Full Text......
Related Posts with Thumbnails
 
Blog template by mp-watch.blogspot.com : Header image by Admark Studio