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Wednesday, February 24, 2010

मप्र में किसानों को ग्रीष्मकालीन फसल लेने की सलाह

जायद फसलों के तैयार होने की अवधि 50 से 60 दिन
मध्यप्रदेश में रबी की फसल स्थिति काफी अच्छी है। इसकी वजह प्रदेश में अक्टूबर, नवम्बर एवं दिसम्बर में सही अंतराल से हुई बारिश का होना रहा है। प्रदेश में रबी सीजन में इस वर्ष लगभग 95 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की बोनी की गयी थी। प्रदेश में रबी के सामान्य क्षेत्रफल से लगभग 11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की अतिरिक्त बोनी की गयी।
प्रदेश में प्रमुख रूप से रबी सीजन में गेहूँ की बोनी 42.62 लाख हेक्टेयर में तथा चने की बोनी 32.33 लाख हेक्टेयर में की गयी थी। अच्छे मौसम को देखते हुये प्रदेश में गेहूँ एवं चने का रिकार्ड उत्पादन होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
रबी सीजन में खेतों में कटाई के बाद ग्रीष्मकालीन फसल लेने की सलाह
जल संरचनाओं में पानी की अच्छी उपलब्धता के कारण जायद फसलें लिया जाना लाभकारी होगा
ग्रीष्मकालीन फसलों की अवधि 50 से 60 दिन की

किसान कल्याण विभाग ने रबी फसलों की अच्छी स्थिति के बाद प्रदेश में किसानों के लिये ग्रीष्म काल में जायद फसलों के उत्पादन की अच्छी संभावना बताई है। कृषि अधिकारियों ने कहा है कि प्रदेश के कृषक खाली खेतों में अथवा रबी की शीघ्र बोई गयी फसल काटने के बाद मूँग, उड़द, सब्जियों तथा चारे की फसलों की बोनीकर अतिरिक्त लाभ ले सकते हैं। जायद फसलों के तैयार होने की अवधि 50 से 60 दिन की होती है। कृषि अधिकारियों का कहना है कि भूमि संरक्षण और मिट्टी की उर्वरता की दृष्टि से भी इन फसलों का बोया जाना उपयोगी होगा। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री एम.के. राय ने पिछले दिनों मंत्रालय में आयोजित कृषि अधिकारियों की बैठक में रबी फसलों की स्थिति एवं संभावित रबी उत्पादन की समीक्षा की थी। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री राय ने कृषि अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे प्रदेश में किसानों को जायद फसल बोने के लिये अधिक से अधिक प्रोत्साहित करें। संचालक किसान कल्याण डॉ. डी.एन. शर्मा ने बताया कि खाली खेतों में मूँग की खेती के लिये फरवरी के दूसरे सप्ताह से मार्च के तीसरे सप्ताह का समय सबसे उपयुक्त रहता है। प्रदेश में इस वर्ष अच्छी बारिश के कारण जल संरचनाओं में पानी की उपलब्धता अच्छी है। इसका फायदा कृषक गर्मी के मौसम की अल्पकालीक फसलें उड़द, सूरजमुखी, मक्का, चने की फसलें, लोबिया, ग्वार आदि की कम लागत पर सफल खेती कर सकते हैं। सब्जियों में वर्गी फसलें गिल्की, लोकी, खीरा, खरबूज, तरबूज आदि बोया जाना भी किसानों के लिये लाभकारी सिद्ध होगा।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जायद की फसल के रूप में दलहन फसलें बोया जाना कृषि भूमि की उर्वरता वृद्धि के लिये काफी फायदेमंद हैं। जायद फसलें वायुजनित मिट्टी के क्षण को कम करती हैं और प्राकृतिक नत्रजन बढ़ाती हैं। कृषि विशेषज्ञों ने कहा है कि हरदा, होशंगाबाद एवं नर्मदा नदी से जुड़े जिलों के ग्रामीण क्षेत्रो में ग्रीष्मकालीन खेती काफी लाभकारी होगी। किसान कल्याण विभाग ने मैदानी अधिकारियों को ग्रीष्मकालीन फसल लिये जाने के संबंध में किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन दिये जाने के निर्देश दिये हैं।

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Thursday, February 18, 2010

मप्र के लिए केन्द्र ने किया शक्कर का कोटा कम

गरीब उपभोक्ताओं पर पड़ा असर, खाद्य मंत्री ने जताया विरो, प्रधानमंत्री को लिखा पत्र
केन्द्र से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत प्रदेश को मिलने वाले शक्कर के कोटे में लगातार कमी हो रही है। इस शक्कर को सिर्फ बीपीएल और अन्त्योदय अन्न योजना के हितग्राहियों को प्रदाय किया जाता है, लिहाजा शक्कर के कोटे में कमी का सीधा असर गरीब उपभोक्ताओं पर पड़ा है। खाद्य आपूर्ति राज्यमंत्री श्री पारसचंद्र जैन ने इस भेदभावपूर्ण रवैये पर अफसोस और कड़ा विरोध जताते हुए प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को पत्र लिखा है।केन्द्र से साविप्र के तहत मिलने वाली इस शक्कर में कमी का सिलसिला चार महीने पहले शुरू हुआ है। इससे पहले अक्टूबर तक प्रदेश को 15 हजार 274 मे. टन शक्कर मिल रही थी। नवम्बर में करीब पौने तीन हजार मे. टन शक्कर कम करके प्रदेश को 12 हजार 571 और इसके बाद दिसम्बर और जनवरी में इस मात्रा में और कमी करते हुए 12 हजार 513 मे. टन शक्कर दी गई है। फरवरी में तो केन्द्र ने सारी हदें पार कर प्रदेश को केवल 9 हजार 863 मे. टन शक्कर ही आवंटित की है।

वितरण पर असर

केन्द्र से मिली कम शक्कर से इसका गरीबों को वितरण गड़बड़ा गया है। खुले बाजार में इसकी कीमत वैसे ही गरीबों की पहुंच के बाहर है। अगर सीधेतौर पर गौर करें तो फरवरी में बीपीएल और अन्त्योदय अन्न योजना (एएवाय) के हितग्राहियों को पूर्व की तयशुदा मात्रा से करीब 700 ग्राम शक्कर कम मिलेगी। अक्टूबर में जहां इन लोगों को 2 किलो 205 ग्राम शक्कर प्रति राशनकार्ड दी जा रही थी, नवम्बर में कम कोटा मिलने से इसे घटाकर 1 किलो 810 ग्राम किया गया और अब फरवरी मं इसे 1 किलो 500 ग्राम के हिसाब से प्रदाय किया जा सकेगा।

प्रधानमंत्री को पत्र

खाद्य आपूर्ति राज्यमंत्री श्री पारसचंद्र जैन फरवरी महीने के इस कोटे के जिलेवार आवंटन की सोमवार को अनुमोदन के लिए उनके पास आई फाईल देखते ही सकते में आ गए। महंगाई की मार झेल रहे लोग और खास कर गरीब पहले से ही टूट रहे हैं। उसके बाद केन्द्र के इस रवैये का इशारा क्या हो सकता है, यह एकाएक श्री जैन भांप नहीं सके। 
अपना कड़ा विरोध जताते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री को तत्काल पत्र लिखकर यह पूरी वस्तुस्थिति साफ करना उचित समझा। श्री जैन ने पत्र में स्मरण कराया है कि पिछले सप्ताह ही केन्द्र सरकार ने सारे राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाकर देश में महंगाई के खिलाफ कदम उठाए जाने की जरूरत बताई थी। 
इसके नतीजों का इंतजार हो ही रहा है और अब इस महीने केन्द्र ने प्रदेश का शक्कर कोटा और घटा दिया है। इसने गरीबों के हितों पर कुठाराघात कर महंगाई में आग पर घी का काम किया है। राज्यमंत्री श्री जैन ने इस मामले में प्रधानमंत्री से सीधे हस्तक्षेप का अनुरोध करते हुए प्रदेश का शक्कर कोटा तत्काल बढ़ाए जाने की मांग की है।

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Wednesday, January 13, 2010

मप्र में मावठे से गेहूँ का रिकार्ड उत्पादन का अनुमान

कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती रंजना चौधरी द्वारा रबी फसलों की  समीक्षा
मध्यप्रदेश में रबी सीजन में पिछले वर्ष अक्टूबर, नवम्बर एवं दिसम्बर माहों में हुई बारिश से रबी की बोनी का रकबा लगभग 11 लाख हेक्टेयर तक बढ़ गया है। प्रदेश में इस वर्ष 95.36 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों द्वारा रबी की बोनी की गई है। रबी सीजन में गेहूँ की बोनी 42.3 लाख हेक्टेयर तथा चने की बोनी 32.3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में की गई है। प्रदेश में समय पर मावठा गिरने से गेहूँ का उत्पादन पिछले वर्ष के मुकाबले 15 प्रतिशत अधिक आने का अनुमान लगाया गया है। कृषि विभाग को अनुमान है कि इस वर्ष प्रदेश में 85 लाख मैट्रिक टन गेहूँ का उत्पादन होगा। यह जानकारी पिछले दिनों मंत्रालय में कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती रंजना चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में दी गई।
सामयिक मावठे से गेहूँ का रिकार्ड 85 लाख मैट्रिक टन उत्पादन का अनुमान
रबी सीजन में लक्ष्य से अधिक 95.36 लाख हेक्टेयर में बोनी
रबी सीजन में 15.70 लाख मैट्रिक टन रसायन उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित की गई

बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती रंजना चौधरी ने बताया कि इस वर्ष रबी की बोनी पिछले वर्ष के मुकाबले 113 प्रतिशत है। प्रदेश में किसानों को उनकी मांग के अनुसार रसायन उर्वरक मिल सके इसके लिये भी केन्द्रीय रसायन मंत्रालय एवं रेल मंत्रालय से निरंतर सम्पर्क कर इसकी आपूर्ति सुनिश्चित की गई। प्रदेश में इस रबी सीजन में अब तक 15.70 लाख मैट्रिक टन उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित की गई, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 25 प्रतिशत अधिक है। किसानों को अब तक 13.81 लाख मैट्रिक टन उर्वरक का वितरण किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 22 प्रतिशत अधिक है। प्रदेश में पिछले वर्ष के मुकाबले डीएपी की उपलब्धता 17.5 प्रतिशत एवं यूरिया की उपलब्धता 26 प्रतिशत अधिक रही है। कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती रंजना चौधरी के निर्देश पर आगामी वर्ष 2010-11 के लिये डीएपी उर्वरक की उपलब्धता के लिये अग्रिम भण्डारण की कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है।

प्रदेश में इस वित्तीय वर्ष में किसानों को कृषि कार्य के लिये सहकारी बैंकों के माध्यम से 3 हजार 407 करोड़ रुपये का ऋण वितरण किया गया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 50 प्रतिशत अधिक है।

प्रदेश में गेहूँ के अच्छे उत्पादन को देखते हुए शासकीय रूप से गेहूँ उपार्जन की व्यवस्था के लिये खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को अग्रिम व्यवस्था किये जाने के लिये कहा गया है।

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Saturday, December 19, 2009

बेमौसम की वजह से फसलों में इल्ली के प्रकोप की ज्यादा संभावना बनी

फसलों में कीट नियंत्रण की समसामायिक सलाह
प्रदेश में पिछले दो दिनों में लगातार बारिश होने से मौसम में नमी आई है। इस नमी की वजह से फसलों में इल्ली के प्रकोप की ज्यादा संभावना बनी है। कीट नियंत्रण के संबंध में भोपाल के गंगोत्री भवन में संचालित किसान कॉल सेंटर के जरिए किसानों को सलाह दी जा रही है।किसान कॉल सेंटर के प्रभारी श्री सुरेश मोटवानी ने बताया कि प्रदेश के कुछ स्थानों में गेहूँ में ज्यादा पीलेपन एवं फसलों में खरपतवार की समस्या देखने को मिली है। ऐसे में किसानों को खेतों में निदाई गुढ़ाई करके नियंत्रण करना चाहिए। किसानों को गेहूँ की फसल में यूरिया का छिड़काव भी लगातार करते रहना चाहिए। 
चने की फसल में बोवाई के बाद यूरिया के छिड़काव की जरूरत नहीं पड़ती है। श्री मोटवानी ने बताया कि किसान अपने खेत में जैविक विधि से कीट नियंत्रण कर सकते हैं। जिसके लिये नीम आधारित कीटनाशक एवं सेरोमन प्रपंच का उपयोग किसान भाई कर सकते हैं।
किसान अपनी समस्याओं के संबंध में कॉल सेंटर के टोल फ्री नम्बर 1800-233-4433 पर संपर्क कर सकते हैं। यह कॉल सेंटर सातों दिन सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक खुला रहता है। किसान कल्याण विभाग की मदद से किसान कॉल सेंटर इंडियन सोसायटी ऑफ एग्री बिजनेस प्रोफेशनल (आईसेप) द्वारा संचालित किया जा रहा है।

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Friday, December 4, 2009

किसानों को फसलों में कीट नियंत्रण की सलाह

अनुरूप तापमान होने के कारण फसलों की वृद्धि दर काफी अच्छी
मध्यप्रदेश में इस वर्ष रबी के बोनी का कार्य लगभग समाप्ति की ओर है। इन दिनों मुख्य तौर पर किसानों द्वारा गेहूँ की बोनी का कार्य किया जा रहा है। भोपाल के गंगोत्री भवन स्थित किसान कॉल सेन्टर में इन दिनों किसान फसलों में लगने वाले रोगों के बचाव के संबंध में जानकारी प्राप्त कर रहे हैं।
किसान कॉल सेन्टर के प्रभारी श्री सुरेश मोटवानी ने बताया कि इस वर्ष रबी सीजन में अक्टूबर एवं नवम्बर माह में हुई बारिश से रबी की फसलों को काफी फायदा पहुंचा है। मौसम में फसलों के अनुरूप तापमान होने के कारण फसलों की वृद्धि दर काफी अच्छी है। प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में चने की फसल में कीट लगने की जानकारी मिल रही है। इसके लिये किसान कॉल सेन्टर में उपलब्ध कृषि विशेषज्ञों द्वारा कीट नियंत्रण हेतु कृषि उपचार के बारे में बताया जा रहा है।
किसान कल्याण विभाग द्वारा इस वर्ष रबी सीजन में किसानों को अब तक 12 लाख 70 हजार कल्चर पैकेट का वितरण किया जा चुका है। किसानों को 2804 क्विंटल बीज उपचार जैविक एवं रासायनिक औषधि का भी वितरण किया गया है। किसान रबी सीजन में फसलों की समस्याओं के संबंध में कॉल सेन्टर के टोल फ्री नम्बर 1800-233-4433 पर संपर्क कर सकते हैं। 
यह कॉल सेन्टर सातों दिन सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक खुला रहता है। किसान कल्याण विभाग की मदद से किसान कॉल सेन्टर इंडियन सोसायटी ऑफ एग्री बिजनेस प्रोफेशनल (आईसेप) द्वारा संचालित किया जा रहा है।

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