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Monday, February 22, 2010

प्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूँ की खरीद का काम व्यवस्थित रणनीति के मुताबिक

 कृषि साख समितियां सब एजेंट बनेंगी
समर्थन मूल्य पर गेहूँ की खरीद का काम प्रदेश में एक सुविचारित और व्यवस्थित रणनीति के बतौर हाथ में लिया गया है। लक्ष्य को प्राप्त करने के साथ ही इस प्रक्रिया को साफ-सुथरा रखने की ठानी गई है। 

इस सिलसिले में तय किया गया है कि पिछले साल गड़बड़ियां करने वाली दागी समितियों को इस बार उपार्जन प्रक्रिया से बाहर रखा जाएगा। प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों को खरीदी करने वाली एजेंसियों का सब एजेंट बनाया जा रहा है। इसी तरह जिला स्तर पर उपार्जन के काम की निगरानी के लिए प्रशासकीय समितियां गठित की जा रही हैं।

गेहूँ उपार्जन से जुड़े हर काम की नियमित समीक्षा अभी से शुरू हो गई है। जो व्यावहारिक अड़चनें मैदानी अमला और एजेंसियां ध्यान में ला रहे हैं उनका तत्काल निदान किया जा रहा है ताकि ऐन मौके पर काम प्रभावित न हो और न ही किसी को बहाने का मौका मिले। यह जिम्मा विभाग के प्रमुख सचिव श्री अशोक दास खुद संभाल रहे हैं। कार्यक्षेत्रवार सब अफसरों में काम बांटा जा चुका है।

गेहूँ उपार्जन में खरीदी एजेंसियों के सब एजेंट नियुक्त किए जा रहे हैं। इसके लिए प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों का चयन किया गया है। कहीं पर ऐसी समितियों के नहीं होने की सूरत में राज्य सहकारी विपणन संघ से जुड़ी विपणन सहकारी संस्थाओं को सब एजेंट बनाया जाएगा। इन समितियों के स्वच्छ और सुगठित ढांचे के मद्देनज़र केवल उन समितियों को सब एजेंट के रूप में अधिकृत किया जा रहा है जो मध्यप्रदेश सहकारी समिति अधिनियम 1960 के तहत पंजीकृत हैं। इसके अलावा पिछले साल विभिन्न अनियमितताएं करने वाली और समय पर सूचनाएं नहीं भेजने वाली ऐसी समितियों को इस बार उपार्जन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है।

जिला सतर्कता प्रशासकीय समितियां

समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन की विभिन्न स्तरों पर मानीटरिंग की व्यवस्था की गई है। जिला स्तर पर इस उद्देश्य से प्रशासकीय समिति गठित होगी। इसका खाका भोपाल से तैयार कर जिलों को भेज दिया गया है।

इसके मुताबिक जिला कलेक्टर या उनके प्रतिनिधि की अध्यक्षता में यह प्रशासकीय समिति गठित होगी। इसमें सदस्यों के बतौर उप अथवा सहायक पंजीयक सहकारी संस्थाएं, जिला आपूर्ति नियंत्रक या आपूर्ति अधिकारी, जिला अथवा शाखा प्रबंधक भारतीय खाद्य निगम, प्रबंधक जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक, उप संचालक कृषि, जिला प्रबंधक राज्य नागरिक आपूर्ति निगम, जिला प्रबंधक राज्य सहकारी विपणन संघ, जिला प्रबंधक या शाखा प्रभारी राज्य भण्डार गृह निगम और सचिव कृषि उपज मण्डी शामिल रहेंगे। जिला आपूर्ति नियंत्रक या आपूर्ति अधिकारी इस समिति के संयोजक भी होंगे।

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Saturday, February 20, 2010

समर्थन मूल्य पर गेहूँ खरीदी

 पांच भाप्रसे अफसर करेंगे निगरानी, राज्य स्तर पर होगा कंट्रोल रूम
प्रदेश में 15 मार्च से शुरू होने जा रही समर्थन मूल्य पर गेहूँ खरीदी की तैयारियां तेज हो गई हैं। जिला स्तरीय निगरानी के साथ ही राज्य स्तर पर इस पूरे काम की देखरेख भारतीय प्रशासनिक सेवा के पांच आला अफसरों के जिम्मे की गई है।
किसानों की इस खरीदी से जुड़ी किसी दिक्कत को दूर करने राज्य स्तर पर जहां टेलीफोन हेल्पलाईन शुरू की जा रही है वहीं मैदानी क्षेत्रों से रोजमर्रा की रिपोर्ट भेजने और मार्गदर्शन लेने के लिये एक कंट्रोल रूम खोला जा रहा है। ये एक मार्च से काम करना शुरू कर देंगे।

इस बार 35 लाख मे. टन गेहूँ समर्थन मूल्य पर खरीदा जायेगा। इसके मुताबिक व्यापक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। पूरी प्रक्रिया साफ-सुथरे ढंग से चलाने और इसके किसी स्तर पर कोई खामी या रोड़े पैदा न हों, शासन ने इसके पूरे बंदोबस्त किये हैं। इस सिलसिले में राज्य स्तर पर भारतीय प्रशासनिक सेवा के पांच आला अफसरों को देखरेख का जिम्मा सौंपा गया है। प्रमुख सचिव खाद्य आपूर्ति श्री अशोक दास के नेतृत्व वाली इस टीम में आयुक्त खाद्य आपूर्ति, प्रबंध संचालक राज्य नागरिक आपूर्ति निगम, प्रबंध संचालक भंडार गृह निगम और प्रबंध संचालक राज्य विपणन संघ को शामिल किया गया है। जिला कलेक्टर अपने स्तर पर अलग से इस काम की समीक्षा के लिये जिम्मेदार होंगे। समीक्षा और निगरानी के क्षेत्र तय कर दिये गये हैं।

हर रोज़ देनी होगी जानकारी

समर्थन मूल्य पर खरीदी की पूरी विस्तृत रिपोर्ट जिसमें मात्रा, भुगतान, ढुलाई, भंडारण आदि के ब्यौरे होंगे, हर रोज़ राज्य स्तरीय समीक्षा के लिये भोपाल भेजी जाएगी। इसी तरह मंडियों में होने वाली इस खरीदी की जानकारी प्रतिदिन संचालक मंडी बोर्ड भेजेंगे। जानकारियों के संप्रेषण के लिये भोपाल में खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय में कंट्रोल रूम कायम किया गया है।
इसका टेलीफोन सम्पर्क नम्बर 1800-2336411 रहेगा। यह कंट्रोल रूम एक मार्च 2010 से 20 जून तक नियमित तौर पर सुबह 9 से रात्रि 9 बजे तक काम करेगा। इसी तरह किसानों की सहूलियत के लिये हेल्पलाईन का सम्पर्क नम्बर 155343 होगा।

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Thursday, February 18, 2010

प्रदेश में 1250 केन्द्रों पर खरीदेंगे गेहूँ

जरूरत के मुताबिक होगा विस्तार, खरीदी केन्द्रों के बुलाए नक्शे
समर्थन मूल्य पर गेहूँ खरीदने के लिए प्रदेश में फिलहाल 1250 केन्द्र तय किए गए हैं। चूंकि 35 लाख मे. टन गेहूँ खरीदे जाने का लक्ष्य तय किया गया है इसलिए इस तादाद में आवश्यकता के अनुसार इजाफा किया जा सकेगा। पूरी प्रक्रिया की इस बार राज्य स्तरीय निगरानी और समीक्षा का बंदोबस्त किया गया है, लिहाजा खरीदी केन्द्रों के नक्शे और तयशुदा प्रारूप में वांछित जानकारी एक मार्च तक कलेक्टरों से भोपाल बुलवाई गई है।किसानों की सुविधा के लिए मण्डियों में पेयजल, जनरेटर आदि के पर्याप्त इंतजाम किए जा रहे हैं। जानकारियों के संकलन के लिए कम्प्यूटरों का इस्तेमाल किया जा रहा है और इसका इंतजाम 10 मार्च तक करने को कहा गया है। मण्डियों में उपार्जन के दौरान बिजली, इलेक्ट्रॉनिक तौल-कांटों और पर्याप्त तुलावटियों की व्यवस्था की जा रही है। सारी मण्डियों में नमी मापक यंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं ताकि औसत अच्छी किस्म के गेहूँ की खरीद के लिए तयशुदा नमी के प्रतिशत की जांच स्थल पर ही की जा सके।

खरीदी केन्द्र जुड़ेंगे गोदाम से

उपार्जन व्यवस्था को पुख्ता और साफ-सुथरी बनाने के लिए गेहूँ खरीदी केन्द्रों को जोड़ा जा रहा है। इसके चलते भण्डारण में अफरातफरी की स्थिति भी नहीं उपजेगी। चूंकि हर खरीदी केन्द्र अपने तयशुदा भण्डार गृह से जुड़ा रहेगा इसलिए माल के परिवहन का रास्ता और स्थान भी पहले से निश्चित होगा। इसी मकसद से गोदामों और खरीदी केन्द्रों की सूचनाओं को पहले से इकट्ठा किया जा रहा है।

गफलत में नहीं रहेंगे किसान

कोई बिचौलिया या अन्य अवांछित तत्व किसानों से बारदाने, सुतली, स्टीचिंग मशीन, कांटा-बांट आदि का इंतजाम खुद करने को कहता है तो सीधे पकड़ में आ जाएगा। किसानों से कहा गया है कि ये सारे इंतजाम सरकार खुद कर रही है इसलिए उन्हें बिचौलियों या व्यापारियों के किसी भड़कावे में नहीं आना है।

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Wednesday, January 13, 2010

मप्र में मावठे से गेहूँ का रिकार्ड उत्पादन का अनुमान

कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती रंजना चौधरी द्वारा रबी फसलों की  समीक्षा
मध्यप्रदेश में रबी सीजन में पिछले वर्ष अक्टूबर, नवम्बर एवं दिसम्बर माहों में हुई बारिश से रबी की बोनी का रकबा लगभग 11 लाख हेक्टेयर तक बढ़ गया है। प्रदेश में इस वर्ष 95.36 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों द्वारा रबी की बोनी की गई है। रबी सीजन में गेहूँ की बोनी 42.3 लाख हेक्टेयर तथा चने की बोनी 32.3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में की गई है। प्रदेश में समय पर मावठा गिरने से गेहूँ का उत्पादन पिछले वर्ष के मुकाबले 15 प्रतिशत अधिक आने का अनुमान लगाया गया है। कृषि विभाग को अनुमान है कि इस वर्ष प्रदेश में 85 लाख मैट्रिक टन गेहूँ का उत्पादन होगा। यह जानकारी पिछले दिनों मंत्रालय में कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती रंजना चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में दी गई।
सामयिक मावठे से गेहूँ का रिकार्ड 85 लाख मैट्रिक टन उत्पादन का अनुमान
रबी सीजन में लक्ष्य से अधिक 95.36 लाख हेक्टेयर में बोनी
रबी सीजन में 15.70 लाख मैट्रिक टन रसायन उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित की गई

बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती रंजना चौधरी ने बताया कि इस वर्ष रबी की बोनी पिछले वर्ष के मुकाबले 113 प्रतिशत है। प्रदेश में किसानों को उनकी मांग के अनुसार रसायन उर्वरक मिल सके इसके लिये भी केन्द्रीय रसायन मंत्रालय एवं रेल मंत्रालय से निरंतर सम्पर्क कर इसकी आपूर्ति सुनिश्चित की गई। प्रदेश में इस रबी सीजन में अब तक 15.70 लाख मैट्रिक टन उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित की गई, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 25 प्रतिशत अधिक है। किसानों को अब तक 13.81 लाख मैट्रिक टन उर्वरक का वितरण किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 22 प्रतिशत अधिक है। प्रदेश में पिछले वर्ष के मुकाबले डीएपी की उपलब्धता 17.5 प्रतिशत एवं यूरिया की उपलब्धता 26 प्रतिशत अधिक रही है। कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती रंजना चौधरी के निर्देश पर आगामी वर्ष 2010-11 के लिये डीएपी उर्वरक की उपलब्धता के लिये अग्रिम भण्डारण की कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है।

प्रदेश में इस वित्तीय वर्ष में किसानों को कृषि कार्य के लिये सहकारी बैंकों के माध्यम से 3 हजार 407 करोड़ रुपये का ऋण वितरण किया गया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 50 प्रतिशत अधिक है।

प्रदेश में गेहूँ के अच्छे उत्पादन को देखते हुए शासकीय रूप से गेहूँ उपार्जन की व्यवस्था के लिये खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को अग्रिम व्यवस्था किये जाने के लिये कहा गया है।

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