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Thursday, December 31, 2009

रबी सीजन में किसानों को 6.74 लाख मेट्रिक टन यूरिया उपलब्ध

 उर्वरक विक्रेताओं की  आकस्मिक रूप से जांच
प्रदेश में रबी सीजन में किसानों को रसायन उर्वरक में यूरिया मांग के अनुसार मिल सके इसके लिये किसान कल्याण विभाग द्वारा लगातार प्रयास किये जा रहे हैं।
किसानों को अब तक 6.74 लाख मेट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराया जा चुका है। राज्य में यूरिया की कालाबाज़ारी न हो सके इसके लिये जिला प्रशासन एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारी नियमित रूप से उर्वरक विक्रेताओं के यहां आकस्मिक रूप से जांच कर रहे हैं।
रबी सीजन में किसानों को यूरिया के अलावा डी.ए.पी. 3.34 लाख मेट्रिक टन, काम्पलेक्स 75 हजार मेट्रिक टन, सुपर फास्फेट एक लाख 24 हजार मेट्रिक टन, पोटाश 27 हजार मेट्रिक टन वितरित किया गया है। किसानों को अब तक 12.40 लाख मेट्रिक टन रसायन उर्वरक उपलब्ध कराया गया है।

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Tuesday, December 29, 2009

मप्र में रबी सीजन में 94 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की बोनी का अनुमान

बारिश से रबी का रकबा लगभग 10 लाख हेक्टेयर बढ़ जाने का अनुमान
प्रदेश में इस वर्ष रबी सीजन में बोनी का कार्य लगभग समाप्त हो गया है। किसानों द्वारा अब तक 93.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी की जा चुकी है। कृषि विभाग द्वारा इस वर्ष 94 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी किये जाने का अनुमान लगाया जा रहा है। अक्टूबर-नवम्बर एवं दिसम्बर माह में हुई बारिश से रबी का रकबा लगभग 10 लाख हेक्टेयर बढ़ जाने का अनुमान लगाया जा रहा है।

प्रदेश में पूर्व में कम वर्षा होने के कारण 84 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की बोनी किये जाने की संभावना व्यक्त की गयी थी। इस वर्ष 94 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी का रकबा पिछले तीन वर्षों के मुकाबले 8 से 10 लाख हेक्टेयर अधिक है। यह जानकारी पिछले दिनों कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती रंजना चौधरी की अध्यक्षता में मंत्रालय में आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक में दी गयी।
प्रदेश में पिछले तीन वर्षों के मुकाबले रबी सीजन में 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में अधिक बोनी। 94 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का अनुमान
किसानों को रबी सीजन में उनकी मांग के अनुरूप 11.89 लाख मेट्रिक टन रसायन खाद का वितरण
प्रदेश में गेहूँ की बोनी 40 लाख हेक्टेयर, चना 32.23 लाख हेक्टेयर, मसूर 6.40 लाख हेक्टेयर, सरसो 8.56 लाख हेक्टेयर रकबे में बोया जा चुका है। सागर, उज्जैन, रीवा, इंदौर, शहडोल, ग्वालियर संभाग में लक्ष्य से अधिक रबी की बोनी की गयी है।
किसानों को उनकी मांग के अनुरूप यूरिया उपलब्ध हो सके इसके लिये किसान कल्याण विभाग द्वारा लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। किसानों को अब तक 6.28 लाख मेट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराया जा चुका है।
रबी सीजन में अब तक किसानों को यूरिया समेत 11.89 लाख मेट्रिक टन रसायन उर्वरक उपलब्ध कराया जा चुका है। आगामी जनवरी माह में किसानों को उनकी मांग के अनुसार यूरिया उपलब्ध हो सके इसके लिये जिलेवार प्लान तैयार कर उसकी आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। प्रदेश में किसानों को रबी सीजन में 7.61 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज उपलब्ध कराया गया है।

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Monday, December 21, 2009

मध्यप्रदेश में अब तक 91.81 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की बोनी

 इस वर्ष 94 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की बोनी का अनुमान
मध्यप्रदेश में इस वर्ष रबी सीजन में बोनी का कार्य लगभग समाप्ति की ओर है। किसानों द्वारा अब तक 91.81 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी किये जाने की सूचना है। कृषि विभाग द्वारा इस वर्ष 94 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी किये जाने का अनुमान लगाया जा रहा है।

प्रदेश में गेहूँ की बोनी अब तक लगभग 38.36 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में की जा चुकी है। प्रदेश में रबी की अन्य फसलों में चना 31.88 लाख हेक्टेयर, मसूर 6.39 लाख हेक्टेयर, सरसों 8.88 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोया जा चुका है। प्रदेश में इस वर्ष रबी सीजन में 84.45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की बोनी किये जाने की संभावना व्यक्त की गई थी।
प्रदेश में अक्टूबर एवं नवंबर माह में अच्छी बारिश होने के कारण रबी के रकबे में वृद्धि हुई है। इस वजह से भी प्रदेश में फर्टिलाइजर की मांग बढ़ी है। प्रदेश में किसानों को अब तक 10.88 लाख मेट्रिक टन उर्वरक का वितरण किया जा चुका है। इसमें यूरिया 5.47 लाख मेट्रिक टन, डी.ए.पी. 3.22 लाख मेट्रिक टन, काम्पलेक्स 72 हजार मेट्रिक टन, सुपर फास्फेट एक लाख 15 हजार मेट्रिक टन एवं पोटाश 25 हजार मेट्रिक टन किसानों को वितरित किया जा चुका है।
प्रदेश में किसानों को उनकी मांग के अनुरूप यूरिया उपलब्ध हो सके इसके लिये जिलेवार दिसंबर एवं जनवरी माह का प्लान तैयार किया गया है। किसान कल्याण विभाग के अधिकारी केन्द्रीय रसायन मंत्रालय के अधिकारियों से लगातार सम्पर्क कर यूरिया की आपूर्ति सुनिश्चित कर रहे हैं।
प्रदेश में लक्ष्य से अधिक रबी की बोनी उज्जैन, सागर, रीवा, इंदौर, शहडोल संभाग में की जा चुकी है। रबी सीजन में किसानों को 7.50 लाख क्विंटल से अधिक प्रमाणित बीज उपलब्ध कराया गया है।

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Tuesday, December 8, 2009

उज्जैन संभाग में अमानक स्तर उर्वरक बेचने वालों के खिलाफ एफ.आई.आर.

कृषि उत्पादन आयुक्त के निर्देश पर विशेष अभियान
उज्जैन संभाग में मानक स्तर का उर्वरक किसानों को मिल सके इस उद्देश्य से उज्जैन कमिश्नर श्री टी.धर्माराव ने संभाग के समस्त कलेक्टरों को इस संबंध में पत्र लिखा है।कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती रंजना चौधरी ने प्रदेश में किसानों को रसायन उर्वरकों की आपूर्ति उचित दाम पर हो सके इस सिलसिले में प्रदेश के समस्त कमिश्नर एवं कलेक्टरों को पत्र लिखकर राज्यव्यापी अभियान चलाने के निर्देश दिये थे।
प्रदेश में इस वक्त रबी सीजन में बोनी का कार्य अंतिम चरणों में है। किसानों द्वारा मुख्य रूप से गेहूँ की बोनी का कार्य किया जा रहा है। कमिश्नर उज्जैन ने अपने पत्र में कलेक्टरों से यूरिया की सप्लाई पर भी विशेष नज़र रखने के निर्देश दिये हैं। संभाग में कृषि विभाग एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों का संयुक्त दल गठित किये गये हैं।
ये दल समय-समय पर निजी उर्वरक विक्रेताओं के यहां आकस्मिक रूप से पहुंचकर जाँच कर रहे हैं।
उज्जैन कमिश्नर श्री राव ने कलेक्टरों से कहा है कि वे जिलों में ऐसे उर्वरक विक्रेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करें जो निर्धारित दर से अधिक पर उर्वरकों का विक्रय कर रहे हैं तथा यूरिया समेत अन्य रसायन उर्वरकों की कालाबाज़ारी कर रहे हैं।

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रबी मौसम में विद्युत की मांग 6600 मेगावॉट तक पहुंची

 विद्युत नेटवर्क के चलते गत वर्ष के मुकाबले मांग में कमी
रबी मौसम में कृषि पम्पों के भार की वजह से वर्तमान में विद्युत की मांग करीब 6600 मेगावॉट अधिकतम बनी हुई है। इसकी पूर्ति के लिये हर-संभव प्रयास किये जा रहे हैं। इस वर्ष विद्युत नेटवर्क के संचालन पर विशेष ध्यान दिया गया।

इसके चलते गत वर्ष के मुकाबले मांग में कमी आई है। साथ ही इस वर्ष रात्रि में 1400 मेगावॉट की विद्युत बैंकिंग की जा रही है। केन्द्रीय उपक्रम से प्रदेश को 460 मेगावॉट बिजली कम प्राप्त हो रही है।
प्रदेश में गत वर्षा ऋतु में ताप विद्युतगृहों का रख-रखाव किया गया था। इसके कारण ताप विद्युत उत्पादन अधिकतम 2300 मेगावॉट तथा 76 प्रतिशत पी.एल.एफ. पर चल रहा है। कुल जल विद्युत उत्पादन 1500 मेगावॉट का किया जा रहा है।
इसमें से विद्युत मण्डल के जलगृहों से अधिकतम विद्युत उत्पादन 500 मेगावॉट, इन्दिरा सागर से 700 मेगावॉट, ओंकारेश्वर से 250 मेगावॉट तथा सरदार सरोवर से 50 मेगावॉट का विद्युत उत्पादन किया जा रहा है। केन्द्रीय उपक्रम से 2160 मेगावॉट के स्थान पर केवल 1700 मेगावॉट का विद्युत का अंश प्रदेश को मिल रहा है। साथ ही इस वर्ष दामोदर वेली कार्पोरेशन में कोयला कम होने के कारण प्रदेश को 400 मेगावॉट के स्थान पर मात्र 40 मेगावॉट विद्युत प्राप्त हो रही है।
प्रदेश में इस वर्ष विद्युत नेटवर्क के संचालन पर विशेष ध्यान दिये जाने के पारिणामस्वरूप इस वर्ष विद्युत की अधिकतम मांग 6600 मेगावॉट तक ही पहुंच पाई है, जबकि गत वर्ष यह 7500 मेगावॉट थी।
रबी मौसम में इस वर्ष रात्रि में 1400 मेगावॉट की विद्युत बैंकिंग की जा रही है। विद्युत की बैंकिंग जिन पांच राज्यों से की जा रही है उनमें पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, आंध्रप्रदेश तथा महाराष्ट्र शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश द्वारा वर्षा ऋतु में बिजली की अधिक उपलब्धता को देखते हुए विद्युत अन्य राज्यों को दी जाती है। रबी मौसम में विद्युत की मांग को अधिक देखते हुए इसका 105 प्रतिशत वापस प्रदेश को मिल जाता है।

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Monday, December 7, 2009

मप्र में अब तक 83.65 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी का बोनी कार्य पूरा

गेहूँ की बोनी 32 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में पूरी
प्रदेश में इस वर्ष रबी सीजन में किसानों द्वारा 83.65 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी किये जाने की सूचना है। इस वर्ष प्रदेश में रबी सीजन में 92 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी किये जाने का कार्यक्रम तय किया गया था। प्रदेश में इस वर्ष अब तक किसानों द्वारा 32.04 हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूँ की बोनी की जा चुकी है।प्रदेश में रबी सीजन में 83.65 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का कार्य पूरा
32 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूँ की बोनी का कार्य पूरा
किसानों को 8.53 लाख मेट्रिक टन रसायन उर्वरक का वितरण
रबी सीजन में किसानों द्वारा चना 30.35 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में, मसूर 6.33 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में, सरसो 8.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोया जा चुका है। प्रदेश में सर्वाधिक बोनी लक्ष्य से अधिक उज्जैन संभाग 106.6 प्रतिशत, सागर में 105 प्रतिशत की जा चुकी है।
रीवा संभाग में 96 प्रतिशत, शहडोल में 95 प्रतिशत, चम्बल में 90 प्रतिशत, ग्वालियर में 89 प्रतिशत, भोपाल में 89 प्रतिशत, इन्दौर में 85 प्रतिशत, नर्मदापुरम में 77 प्रतिशत एवं जबलपुर संभाग में लगभग 75 प्रतिशत बोनी का कार्य लक्ष्य की तुलना में किया जा चुका है। प्रदेश में किसानों द्वारा मुख्य रूप से गेहूँ की बोनी का कार्य ही तेज गति से किया जा रहा है।
राज्य में किसानों को उनकी मांग के अनुसार अब तक 8.53 लाख मेट्रिक टन रसायन उर्वरक का वितरण किया जा चुका है। इसमें यूरिया 3.97 लाख, डीएपी 2.75 लाख, काम्पलेक्स 54 हजार, सुपरफास्फेट एक लाख एक हजार मेट्रिक टन एवं पोटाश 21 हजार मेट्रिक टन है। प्रदेश में यूरिया की आपूर्ति नियमित रूप से हो सके इसके लिये कृषि विभाग के अधिकारी केन्द्रिय रसायन मंत्रालय के अधिकारियों से लगातार सम्पर्क कर रहे हैं। जिलों तक रसायन उर्वरकों के रेल्वे रेक समय पर पहुंच सके इसके लिये रेल मंत्रालय के अधिकारियों से भी लगतार अनुरोध किया जा रहा है।

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Friday, December 4, 2009

किसानों को फसलों में कीट नियंत्रण की सलाह

अनुरूप तापमान होने के कारण फसलों की वृद्धि दर काफी अच्छी
मध्यप्रदेश में इस वर्ष रबी के बोनी का कार्य लगभग समाप्ति की ओर है। इन दिनों मुख्य तौर पर किसानों द्वारा गेहूँ की बोनी का कार्य किया जा रहा है। भोपाल के गंगोत्री भवन स्थित किसान कॉल सेन्टर में इन दिनों किसान फसलों में लगने वाले रोगों के बचाव के संबंध में जानकारी प्राप्त कर रहे हैं।
किसान कॉल सेन्टर के प्रभारी श्री सुरेश मोटवानी ने बताया कि इस वर्ष रबी सीजन में अक्टूबर एवं नवम्बर माह में हुई बारिश से रबी की फसलों को काफी फायदा पहुंचा है। मौसम में फसलों के अनुरूप तापमान होने के कारण फसलों की वृद्धि दर काफी अच्छी है। प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में चने की फसल में कीट लगने की जानकारी मिल रही है। इसके लिये किसान कॉल सेन्टर में उपलब्ध कृषि विशेषज्ञों द्वारा कीट नियंत्रण हेतु कृषि उपचार के बारे में बताया जा रहा है।
किसान कल्याण विभाग द्वारा इस वर्ष रबी सीजन में किसानों को अब तक 12 लाख 70 हजार कल्चर पैकेट का वितरण किया जा चुका है। किसानों को 2804 क्विंटल बीज उपचार जैविक एवं रासायनिक औषधि का भी वितरण किया गया है। किसान रबी सीजन में फसलों की समस्याओं के संबंध में कॉल सेन्टर के टोल फ्री नम्बर 1800-233-4433 पर संपर्क कर सकते हैं। 
यह कॉल सेन्टर सातों दिन सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक खुला रहता है। किसान कल्याण विभाग की मदद से किसान कॉल सेन्टर इंडियन सोसायटी ऑफ एग्री बिजनेस प्रोफेशनल (आईसेप) द्वारा संचालित किया जा रहा है।

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Monday, November 30, 2009

प्रदेश में अब तक 75 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की बोनी हुई

रबी सीजन में किसानों को 7.14 लाख मेट्रिक टन उर्वरक का वितरण
मध्यप्रदेश में इस वर्ष रबी सीजन में किसानों द्वारा 75 लाख 6 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का कार्य किया जा चुका है। इस वर्ष प्रदेश में रबी सीजन में 92 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी किये जाने का कार्यक्रम तय किया गया है। प्रदेश के कुछ जिलों में अल्प वर्षा के कारण 84.45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की बोनी की संभावना व्यक्त की गई थी। 
अक्टूबर एवं नवम्बर माह में अच्छी बारिश होने के कारण रबी का 8 लाख हेक्टेयर रकबा और बढ़ा। इस कारण रसायन उर्वरक की मांग बढ़ी। प्रदेश में किसानों को उनकी मांग के अनुसार रसायन उर्वरक मिल सके इसके लिये किसान कल्याण विभाग द्वारा विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती रंजना चौधरी की अध्यक्षता में मंत्रालय में नियमित रूप से समीक्षा की जा रही है।
प्रदेश में 75 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का कार्य पूरा 92 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य
किसानों को 7 लाख मेट्रिक टन से अधिक रसायन का वितरण
गेहूँ की बोनी 35 लाख हेक्टेयर के विरूद्ध 25 लाख हेक्टेयर में पूरी
प्रदेश में अब तक 75 लाख 6 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की बोनी की गई है। इसमें चना 29 लाख 6 हजार हेक्टेयर, मसूर 6 लाख 30 हजार हेक्टेयर, सरसो 8 लाख 73 हजार हेक्टेयर, गेहूँ 25 लाख 4 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में प्रमुख रूप से बोया जा चुका है। प्रदेश में इन दिनों गेहूँ की बोनी का कार्य तेज गति से चल रहा है। प्रदेश में इस वर्ष रबी सीजन में 35 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूँ की बोनी किये जाने का कार्यक्रम तय किया गया है। 
अब तक सर्वाधिक बोनी उज्जैन संभाग में 97 प्रतिशत, सागर संभाग में 93 प्रतिशत, शहडोल जिले में 89 प्रतिशत, रीवा में 85 प्रतिशत, भोपाल में 84 प्रतिशत, चम्बल संभाग में 83 प्रतिशत, ग्वालियर में 81 प्रतिशत, इंदौर में 78 प्रतिशत एवं जबलपुर संभाग में 69 प्रतिशत बोनी का कार्य पूरा किया जा चुका है। नर्मदापुरम् संभाग में बोनी का कार्य किसानों द्वारा तेज गति से किया जा रहा है।
प्रदेश में किसानों को उनकी मांग के अनुसार 7 लाख 14 हजार मेट्रिक टन उर्वरक वितरण किया जा चुका है। इसमें यूरिया 3.28 लाख मेट्रिक टन, डीएपी 2.33 लाख, काम्पलेक्स 39 हजार, सुपर फास्फेट 90 हजार एवं पोटाश 20 हजार मेट्रिक टन वितरित किया जा चुका है। प्रदेश में यूरिया की मांग के अनुपात में पूर्ति हो सके इसके लिये कृषि विभाग के अधिकारी केन्द्रीय रसायन मंत्रालय से लगातार सम्पर्क कर रहे हैं। रसायन उर्वरक के रैक नियमित रूप से जिलों में पहुंच सके इसके लिये रेल मंत्रालय से भी लगातार अनुरोध किया जा रहा है।

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Tuesday, November 24, 2009

प्रदेश में अब तक 65 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की बोनी

   अब तक 3 लाख मेट्रिक टन रसायन उर्वरक का वितरण
मध्यप्रदेश में पिछले दिनों हुई लगातार बारिश के बाद रबी सीजन में बोनी के कार्य में तेजी आई है। प्रदेश में अब तक 65.41 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी किये जाने की सूचना है। रबी सीजन में चना 26.57 लाख हेक्टेयर, मसूर 6.24 लाख हेक्टेयर, गेहूँ 18.54 लाख हेक्टेयर एवं सरसो 8.53 लाख हेक्टेयर में किसानों द्वारा बोया जा चुका है। प्रदेश में इस वर्ष 92 लाख हेक्टेयर में बोनी का कार्यक्रम तय किया गया है।प्रदेश में 65.41 लाख हेक्टेयर में रबी की बोनी का कार्य पूरा। 92 लाख हेक्टेयर में रबी की बोनी का कार्यक्रम
सहकारी संस्थाओं के माध्यम से किसानों को 3 लाख 4 हजार मेट्रिक टन रसायन उर्वरक का वितरण
प्रदेश के सागर संभाग में 83 प्रतिशत, चंबल संभाग में 79 प्रतिशत, उज्जैन संभाग में 77 प्रतिशत, भोपाल संभाग में 77 प्रतिशत, रीवा में 76 प्रतिशत, ग्वालियर में 68 प्रतिशत, इंदौर में 66 प्रतिशत, शहडोल में 79 प्रतिशत, जबलपुर में 60 प्रतिशत बोनी हुई है। 
प्रदेश में इन दिनों गेहूँ की बोनी का कार्य तेज गति से चल रहा है। प्रदेश में इस वर्ष 38 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूँ की बोनी किये जाने का कार्यक्रम तय किया गया था। राज्य में पूर्व में 84.77 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की बोनी किये जाने का कार्यक्रम तय किया गया था। इस वर्ष अक्टूबर माह में हुई बारिश के बाद रबी का संशोधित कार्यक्रम तैयार किया गया।
प्रदेश में इस वर्ष 92 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की बोनी किये जाने का कार्यक्रम तय किया गया। बोनी का 8 लाख हेक्टेयर रकबा बढ़ने से रसायन उर्वरक की मांग भी बढ़ी है। प्रदेश में पिछले पांच हफ्तों में प्रतिदिन 1.25 लाख से 1.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी किसानों द्वारा की गई है।
प्रदेश में किसानों को रसायन उर्वरक किसानों की मांग के अनुसार मिल सके इसके लिये कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती रंजना चौधरी द्वारा मंत्रालय में नियमित रूप से समीक्षा की जा रही है। किसानों को कितना यूरिया लगेगा उसका आंकलन जिले वार तैयार किया गया है। इसके अनुरूप कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा रेल मंत्रालय को भी नियमित रूप से रैक लगाए जाने का अनुरोध किया गया है। 
प्रदेश में वर्तमान में सहकारी संस्थाओं में 3 लाख 89 हजार 714 मेट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है। इनमें यूरिया एक लाख 69 हजार 999 मेट्रिक टन, सुपर फास्फेट 65 हजार 662 मेट्रिक टन, डीएपी एक लाख 76 हजार 252 मेट्रिक टन, कॉम्पलेक्स इफको 22 हजार 439 एवं पोटाश 8 हजार 362 मेट्रिक टन है। उपलब्ध उर्वरक में से अब तक किसानों को 3 लाख 4 हजार 617 मेट्रिक टन उर्वरक मांग के अनुसार वितरित किया जा चुका है। किसानों को 2 हजार 720 क्विंटल बीजोपचार औषधि का वितरण भी किया जा चुका है।

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Tuesday, November 17, 2009

आकस्मिक बारिश से रबी के उत्पादन के बढ़ने की संभावनाए

ऐसे समय में चना के स्थान पर गेहूँ की बोनी लाभकारी
मध्यप्रदेश के ज्यादातर स्थानों पर हो रही बारिश ने रबी के उत्पादन के बढ़ने की संभावनाएं बढ़ाई हैं। किसान कल्याण विभाग ने लगातार हो रही बारिश को ध्यान में रखकर कृषि सलाह दी है।किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग ने बताया है कि पूर्व में बोई गई फसलों को इस सीजन में हुई आकस्मिक बारिश ने सिंचाई का लाभ दिया है। आगे भी बिना पलेवा किये गेहूँ बोने की अच्छी संभावनाएं बनी हैं।
प्रदेश में मौसम साफ होने तथा बतर मिलने के बाद रबी की रुकी हुई बुवाई फिर शुरू की जा सकेगी। संचालक कृषि डॉ. डी.एन. शर्मा ने बताया कि कृषि विभाग मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। किसानों को सलाह दी गई है कि बरसात रुकने के बाद खेती के अनुकूल परिस्थिति मिलते ही अधिक से अधिक क्षेत्रफल में बोनी की जाये। किसी भी स्थिति में खेत खाली न छोड़ा जाए।
ऐसे समय में चना के स्थान पर गेहूँ की बोनी करना अधिक लाभकारी है। किसानों द्वारा पूर्व में बोई गई गेहूँ की फसल में यूरिया की टाप ड्रेसिंग बतर आने पर करना चाहिये। इसके लिये फसल की सिफारिशी मात्रा में एक तिहाई हिस्से का बुरकाव करें किन्तु गेहूँ के अलावा किसी अन्य फसल में यूरिया का प्रयोग न करें।
दलहनी तथा तिलहनी फसलों में यदि निचली भूमि में कहीं जल का भराव हो रहा हो तो नाली बनाकर जल निकास की व्यवस्था की जाना चाहिये। इसके अलावा संबंधित फसल का रायजोबियम कल्चर तथा पीएसबी गोबर की खाद में मिलाकर खेतों में बुरकाव करने से लाभकारी जीवाणुओं की संख्या में वृद्धि की जा सकती है। बतर आने पर फसलों की कतारों के बीच ‘हेण्ड व्हील हो’ चलाने से जड़ों तक हवा का संचार होगा, इससे भी पौधों की वृद्धि को बनाये रखने में सहायता मिलेगी।
नये खेतों में जहां बोनी की जा सकती है वहां दलहनी व तिलहनी फसलों में जिप्सम तथा गेहूँ की फसल में जिंक सल्फेट का प्रयोग करना उपयोगी होगा। जैविक खादों का अधिकतम उपयोग भी उत्पादन के लिये किया जाना चाहिये। बोये जाने वाले शत-प्रतिशत बीज का उपचार करने तथा जीवाणु खादों का प्रयोग करने की सलाह भी किसानों को दी गई है।
प्रदेश के अंचलों में पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश के संबंध में किसान कल्याण विभाग द्वारा संचालित किसान कॉल सेन्टर में भी किसानों के फोन कॉल्स प्राप्त हो रहे हैं। किसान कॉल सेन्टर के प्रभारी श्री सुरेश मोटवानी ने बताया कि लगातार बारिश से जिन किसानों ने सप्ताहभर पूर्व बोनी की है और उनके खेतों में फसलों के अंकुरण की स्थिति नहीं बनी है उन किसानों को अपने खेतों में पानी निकासी के लिये नाली की व्यवस्था करनी होगी।
इसके अलावा ऐसे किसानों जिन्होंने अब तक बोनी नहीं की है उन्हें 8 से 10 दिन के भीतर खेत तैयार करके गेहूँ की ऐसी किस्म लेना चाहिये जो देर से पकने वाली हों। किसान अपने खेत में गेहूँ की ‘लोकवन किस्म’ बो सकते हैं। लगातार बारिश से दलहनी-तिलहनी विशेष रूप से चने की फसल पर इल्ली के प्रकोप की संभावना बढ़ जाती है।
ऐसी स्थिति में किसानों को बगैर देरी किये फसलों पर जैविक कीटनाशक का छिड़काव करना चाहिये। किसान इस मौसम में अपनी अन्य समस्याओं के निराकरण के लिये टोल फ्री नम्बर 1800-233-4433 पर संपर्क कर सकते हैं। किसान कॉल सेन्टर में कृषि विशेषज्ञ सातों दिन सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक किसानों को आवश्यक कृषि सलाह देने के लिये उपलब्ध रहते हैं। यह काल सेन्टर भोपाल के गंगोत्री भवन में इंडियन सोसायटी ऑफ एग्री बिजनेस प्रौफेशनल्स (आईसेप) द्वारा संचालित हो रहा है।

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Monday, November 9, 2009

प्रदेश में 55 से 60 प्रतिशत बोनी हुई

प्रदेश में खाद-बीज का पर्याप्त भंडार
कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती रंजना चौधरी ने कहा है कि रबी सीजन वर्ष 2009-10 में प्रदेश में निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध 55 से 60 प्रतिशत बोनी हो चुकी है। प्रदेशभर से मिल रही सूचनाओं के अनुसार कुल मिलाकर पौने दो लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रोजाना बोनी हो रही है।
इस प्रकार पन्द्रह-बीस दिनों में बोनी का निर्धारित लक्ष्य पूरा होने का अनुमान है। प्रदेश में रबी सीजन के लिये किसानों को उनकी मांग के अनुसार खाद, बीज, अन्य आदान उपलब्ध कराये जाने की पूरी व्यवस्था है। इसकी रणनीति डेढ़-दो माह पूर्व ही तैयार कर ली गयी थी।
कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा कि प्रदेश में खाद और बीज का पर्याप्त भंडार है। सभी संभागायुक्तों और जिला कलेक्टरों को किसानों को उनकी मांग के अनुसार खाद, बीज आदि की वितरण व्यवस्था सुचारू रूप से सम्पन्न कराने के निर्देश दिये गये हैं।
बीज पर सरकार द्वारा निर्धारित सब्सिडी भी प्रदान की जाती है। कृषि विभाग के अधिकारियों को भी निर्देश दिये गये हैं कि वे किसानों को बोनी के लिये खाद, बीज उपलब्ध कराने के कार्य को चुनौती के रूप में लें। वे यह भी सुनिश्चित करें कि किसानों को सरकार से मिलने वाली सहायता और रियायत का लाभ मिल सके और बोनी का निर्धारित लक्ष्य भी समय पूरा हो सके।
राज्य शासन द्वारा जिला कलेक्टरों को खाद की काला बाजारी करने वालों पर कड़ी निगाह रखने और काला बाजारी करते पाये जाने पर कड़ी कार्यवाही करने के भी निर्देश दिये गये हैं। श्रीमती चौधरी ने कहा कि प्राय: असामाजिक तत्व खाद की कमी का नकली संकट खड़ाकर काला बाजारी करते हैं।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इस समय प्रदेश में खाद और बीज की कमी नहीं है बल्कि प्रदेश में आवश्यकतानुसार खाद, बीज का पर्याप्त भंडार है। कलेक्टरों को कहा गया है कि उनके प्रभार के जिलों में खाद, बीज, अन्य आदान पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं, वे किसानों की मांग के अनुरूप उनकी बिक्री और वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित करायें।

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