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Monday, March 8, 2010

मुख्यमंत्री द्वारा सन् 2013 तक 24 घंटे बिजली आपूर्ती क्षमता विकास के निर्देश

मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा प्रदेश में बिजली की स्थिति की समीक्षा
मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने सन् 2013 तक आबादी क्षेत्रों में 24 घंटे और खेती के लिये न्यूनतम 8 घंटे बिजली उपलब्ध करवाने की क्षमता के विकास के निर्देश दिये हैं। श्री चौहान आज मंत्रालय में प्रदेश में बिजली की स्थिति की समीक्षा कर रहे थे। श्री चौहान ने परीक्षाओं के दौरान शहरों और गांवों में पर्याप्त बिजली आपूर्ति पर भी जोर दिया।

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Friday, February 26, 2010

किसानों को मिलेंगे 7.56 लाख से अधिक बिजली कनेक्शन

विद्युत वितरण कम्पनियों को 225 करोड़ रुपये से ज्यादा राजस्व की प्राप्ति
प्रदेश में वर्तमान वित्तीय वर्ष 2009-10 में गत माह जनवरी तक कृषकों को सिंचाई पम्प और थ्रेशर के लिये सात लाख 56 हजार 531 अस्थाई कनेक्शन प्रदान किये गये। मध्यप्रदेश राज्य विद्युत मण्डल की पूर्व, मध्य और पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी लिमिटेड को अस्थाई कनेक्शनों के माध्यम से 225 करोड़ आठ लाख 15 हजार रुपये राशि का राजस्व प्राप्त हुआ है।उल्लेखनीय है कि पिछले वित्तीय वर्ष के जनवरी माह में कृषकों को सात लाख 41 हजार 768 अस्थाई कनेक्शन प्रदान किये गये थे। इस प्रकार वर्तमान वित्तीय वर्ष में पिछले वर्ष की तुलना में 14 हजार 763 अस्थाई कनेक्शन प्रदान किये गये। इससे विद्युत वितरण कम्पनियों को 82 करोड़ नौ लाख 26 हजार रुपये की राजस्व राशि अधिक प्राप्त हुई।

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Monday, February 22, 2010

प्रदेश में इस वर्ष 1512 सर्किट किलोमीटर पारेषण लाईनों का निर्माण

 2964 एम.व्ही.ए. क्षमता के अति उच्च दाब उपकेन्द्रों का कार्य भी पूर्ण होगा
प्रदेश में पारेषण प्रणाली के सुदृढ़ीकरण एवं उन्नयन के लिये कारगर कदम उठाये गये हैं। वर्तमान में उप-पारेषण एवं वितरण के क्षेत्र में प्रणाली के सुदृढ़ीकरण, एनर्जी ऑडिट, शत-प्रतिशत मीटरीकरण एवं विद्युत चोरी रोकने के कार्यों को भी प्राथमिकता दी गई है।
इस वर्ष 2009-10 के दौरान 1512 सर्किट किलोमीटर पारेषण लाईनों के निर्माण तथा 2964 एम.व्ही.ए. क्षमता के अति उच्च दाब उप केन्द्रों का निर्माण कार्य पूर्ण किया जायेगा। इसमें से गत माह दिसम्बर तक 589 सर्किट किलोमीटर पारेषण लाईनों एवं 2426 एम.व्ही.ए. क्षमता के अति उच्च दाब उप केन्द्रों के निर्माण कार्य पूर्ण हो चुके हैं। वर्ष 2009-10 में 1376 करोड़ रुपये राशि के उप-पारेषण एवं वितरण के कार्य किये जायेंगे।
वर्ष 2009-10 में 1376 करोड़ रुपये के उप-पारेषण एवं वितरण के होंगे कार्य

इस वर्ष 1512 सर्किट किलोमीटर पारेषण लाईनों का निर्माण

2964 एम.व्ही.ए. क्षमता के अति उच्च दाब उप केन्द्रों का कार्य पूर्ण

102 उप केन्द्रों की क्षमता में वृद्धि

6630 नये वितरण ट्रांसफार्मर का कार्य पूर्ण


उल्लेखनीय है कि वर्ष 2008-09 के दौरान 1296 सर्किट किलोमीटर पारेषण लाईनों के निर्माण एवं 3063 एम.व्ही.ए. क्षमता के अति उच्च दाब उप केन्द्रों के निर्माण का कार्य पूर्ण किया गया है। इसके अलावा उप पारेषण एवं वितरण प्रणाली के सुदृढ़ीकरण के लिये किये गये गंभीर प्रयासों से वर्ष 2008-09 में कुल 208 नम्बर 33/11 के.व्ही. के नये विद्युत उप केन्द्रों का निर्माण, 381 उप केन्द्रों की क्षमता वृद्धि तथा 205 अतिरिक्त ट्रांसफार्मरों की स्थापना की गई तथा 7055 नये वितरण ट्रांसफार्मर लगाये गये।

इसी प्रकार गत माह दिसम्बर तक 1071 किलोमीटर 33 के.व्ही. लाईन, 2821 किलोमीटर, 11 के.व्ही. लाईन, 1261 किलोमीटर निम्न दाब लाईनों के कार्य किये गये हैं। इसके अलावा 134 नये 33/11 के.व्ही. के उप केन्द्र तथा अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाये गये हैं। साथ ही 102 उप केन्द्रों की क्षमता वृद्धि की गई तथा 6630 नये वितरण ट्रांसफार्मर का कार्य भी पूर्ण किया जा चुका है।

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Friday, February 19, 2010

वर्ष 2013 तक 5186 मेगावाट विद्युत क्षमता वृद्धि का लक्ष्य

क्षमता वृद्धि के लिये 42 कम्पनियों से 55 हजार मेगावाट के एमओयू भी हुये
प्रदेश में बिजली की बढ़ती हुई मांग को देखते हुये विद्युत उत्पादन तथा स्थापित क्षमता बढ़ाने के कारगर प्रयास किये जा रहे हैं। राज्य सरकार प्रदेश को बिजली उत्पादन की दिशा में आत्मनिर्भर बनाने के लिये त्वरित गति से कार्य कर रही है।
सरकार ने वर्ष 2013 तक करीब 5186 मेगावाट विद्युत क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। साथ ही निजी कम्पनियों के माध्यम से भी प्रदेश की विद्युत क्षमता वृद्धि के लिये 42 कम्पनियों से लगभग 55 हजार मेगावाट की ताप विद्युत परियोजनाएं लगाये जाने के लिये समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित भी किये गये हैं।

राज्य सरकार ने वर्ष 2013 तक करीब 5186 मेगावाट विद्युत क्षमता वृद्धि करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसमें मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कम्पनी द्वारा 1200 मेगावाट की श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना एवं सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारणी में 500 मेगावाट की विस्तार इकाईयों का कार्य शुरू कर दिया गया है। साथ ही 1600 मेगावाट क्षमता की ताप विद्युत परियोजना की स्थापना खण्डवा जिले में करने के लिये मेसर्स बी.एच.ई.एल. के साथ अनुबंध हो चुका है। 
नेशनल थर्मल पावर कार्पोरेशन द्वारा 2640 मेगावाट गाडरवारा, जिला नरसिंहपुर में स्थापित करने के लिये गत 9 नवम्बर को समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया गया। साथ ही रिलायंस कम्पनी द्वारा सिंगरौली जिले में 4 हजार मेगावाट क्षमता की सासन अल्ट्रा मेगा परियोजना की स्थापना की जा रही है। इस परियोजना से प्रदेश को करीब 1600 मेगावाट विद्युत मिलेगी।

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Monday, February 15, 2010

मप्र बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होगा - श्री राजेन्द्र शुक्ल

वर्ष 2013 तक करीब 5186 मेगावॉट विद्युत क्षमता वृद्धि करने का लक्ष्य
ऊर्जा तथा खनिज साधन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में बिजली की बढ़ती हुई मांग को देखते हुए विद्युत उत्पादन तथा स्थापित क्षमता बढ़ाने के सघन प्रयास किये जा रहे हैं। सरकार ने वर्ष 2013 तक करीब 5186 मेगावॉट विद्युत क्षमता वृद्धि करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
उन्होंने कहा है कि आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होगा। साथ ही अन्य राज्यों को बिजली बेचने की स्थिति में आएगा। श्री शुक्ल आज सतना जिले के मैहर में राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के शुभारंभ अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे।

श्री शुक्ल ने कहा कि राज्य शासन का लक्ष्य है कि बिजली के क्षेत्र में प्रदेश आत्मनिर्भर हो। उन्होंने कहा कि खेती के लिये पर्याप्त एवं गांवों में 24 घंटे बिजली प्रदाय करना सबसे बड़ा लक्ष्य है। इन लक्ष्यों को अर्जित करके ही हम मध्यप्रदेश को स्वर्णिम प्रदेश के रूप में स्थापित कर सकते हैं। श्री शुक्ल ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश को बिजली उत्पादन की दिशा में आत्मनिर्भर बनाने के लिये त्वरित गति से कार्य कर रही है। 
प्रदेश में नई ताप विद्युत परियोजनाओं की स्थापना को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि विद्यमान विद्युत इकाईयों के नवीनीकरण एवं आधुनीकरण के लिये भी एक विस्तृत कार्यक्रम तैयार किया गया है। ऊर्जा राज्यमंत्री ने इस अवसर पर फीडर विभक्तिकरण योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इसके तहत ग्रामीण कृषि पम्प उपभोक्ताओं एवं ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं को अलग-अलग फीडरों से गुणवत्तापूर्ण एवं सतत विद्युत प्रदाय किये जाने की एक महत्वाकांक्षी योजना है।

श्री शुक्ल ने कहा कि राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य है कि प्रत्येक परिवार को शत-प्रतिशत विद्युत प्रदाय की जाये। आज हम विद्युतीकरण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने जा रहे है। इसके लिये पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराये जा रहे है, जिससे हम पूरे देश में विद्युतीकरण की दिशा मे आगे बढ सकें। 
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों एवं शहरी क्षेत्रों में जहां साधन-संसाधन बढ़े हैं वही विद्युत की खपत भी बढ़ गई है। आज हमारी बहुत सी जरूरतें विद्युत से ही पूरी होती है। इसीलिये हमे विद्युत का दुरूपयोग नही करना चाहिये। इसके लिये विद्युत की बचत करना अनिवार्य है। बिजली की बचत करने के साथ ही जरूरतमंदो को भी बिजली मिल सकेगी।

इस अवसर पर जिले के सांसद गणेश सिंह, विधायक जुगुल किशोर बागरी, मोतीलाल तिवारी, जिला कलेक्टर सुखबीर सिंह, पुलिस अधीक्षक हरि सिंह यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधि, समाजसेवी एवं अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

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Friday, February 12, 2010

मप्र में विद्युत की स्थापित क्षमता 8573.5 मेगावॉट तक पहुँची

प्रदेश में विद्युत उपलब्धता बढ़ाने के हरसंभव प्रयास
राज्य शासन द्वारा विद्युत उपलब्धता बढ़ाने के हरसंभव प्रयास किये जा रहे हैं। विद्युत की उपलब्धता में सुधार भी परिलक्षित हुआ है। कुल स्थापित क्षमता तथा मध्यप्रदेश का अंश 8573.5 मेगावॉट तक पहुँच गया है। इस वर्ष रबी मौसम में सुचारू ग्रिड प्रबंधन से विद्युत की अधिकतम माँग 7100 मेगावॉट रही है। राज्य सरकार के प्रयासों से प्रदेश की कुल स्थापित क्षमता/अंश विद्युत की मांग से अधिक हो गया है। परन्तु व्यवहारिक कठिनाईयों के चलते विद्युत की उपलब्धता में अंतर आता रहता है।प्रदेश की स्थापित क्षमता वर्ष 2002-03 में 2990 मेगावॉट थी। इसमें गत पांच वर्षों में 3147 मेगावॉट क्षमता की वृद्धि की गई है। कुल स्थापित क्षमता 6137 मेगावॉट हो गई है। वर्तमान में कुल स्थापित क्षमता एवं मध्यप्रदेश का अंश सम्मिलित कर 8573.5 मेगावॉट तक पहुँच गया है। इसमें मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कम्पनी से 2807.5 मेगावॉट (ताप विद्युत), 917 मेगावॉट जल विद्युत, इंदिरा सागर 1010 मेगावॉट (जल विद्युत), ओंकारेश्वर 520 मेगावॉट (जल विद्युत), सरदार सरोवर 826.5 मेगावॉट (जल विद्युत), केन्द्रीय क्षेत्र से 2092.5 मेगावॉट तथा दीर्घकालीन विद्युत क्रय अनुबंध (डीवीसी) 400 मेगावॉट शामिल हैं।

प्रदेश सरकार के समक्ष जीर्ण-शीर्ण विद्युत नेटवर्क एक चुनौतीपूर्ण कार्य था। इसके लिये राज्य सरकार द्वारा तुरंत कार्यवाही की गई तथा उच्च दाब विद्युत केन्द्रों के साथ-साथ वितरण केन्द्रों की भी स्थापना की गई जिससे, रबी मौसम में पर्याप्त विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। वितरण ट्रांसफार्मरों की कमी को भी दूर किया गया है तथा प्रत्येक वितरण कम्पनी के पास वितरण ट्रांसफार्मर की इनवेंट्री बिल्ट की गई है। वर्तमान में विद्युत वितरण कम्पनियों के पास 2 लाख 12 हजार वितरण ट्रांसफार्मर उपलब्ध हैं।

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Monday, January 25, 2010

शहरी क्षेत्र की बिजली अधोसंरचना अभाव वाली

शहरी क्षेत्र की अधिसूचित झुग्गी बस्तियों के अलावा झुग्गी बस्तियों (मलिन बस्ती), घोषित अवैध कालोनियों तथा अविकसित बस्तियों में बकायादार घरेलू उपभोक्ताओं को विद्युत कनेक्शन आसानी से सुलभ हो सके इसके लिये म.प्र. मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी ने अपने कार्यक्षेत्रांतर्गत स्थायी अथवा अस्थायी रूप से विच्छेदित बिजली उपभोक्ताओं को नए विद्युत कनेक्शन देने के लिये प्रक्रिया निर्धारित की है। 
इस प्रक्रिया से उन घरों को भी रोशनी मिल सकेगी जो कि अधिसूचित गंदी बस्ती क्षेत्र, अन्य गंदी बस्ती क्षेत्र (मलिन बस्ती), घोषित अवैध कालोनियों एवं अविकसित बस्तियों में बिजली की अधोसंरचना के अभाव में कनेक्शन नही ले पा रहे हैं, अब उन्हें भी नए कनेक्शन मिल सकेंगे। उल्लेखनीय है कि इन योजनाओं का मकसद लोगों को बिजली मिल सके और विद्युत कम्पनी को आर्थिक हानि भी नहीं हो।

योजना के तहत स्थायी अथवा अस्थायी रूप से कटे आवासीय (घरेलू) कनेक्शनधारी द्वारा पूरी बकाया राशि एक साथ जमा करने पर संबंधित उपभोक्ता का 90 प्रतिशत अधिभार (सरचार्ज) माफ कर दिया जायेगा। यदि बकाया राशि किस्तों में जमा की जाती है तो उपभोक्ता का 80 प्रतिशत अधिभार (सरचार्ज) माफ कर दिया जायेगा।

इसी प्रकार संबंधित उपभोक्ता को नवीन कनेक्शन प्राप्त होने के बाद उपभोक्ता को उसकी खपत के आधार पर बिल जारी किया जायेगा, उसमें इस बिल की राशि 20 प्रतिशत पूर्व बकाया राशि में से किस्तों के रूप में जमा कराया जायेगा। चालू माह के बिल की 20 प्रतिशत के बराबर राशि एरियर के विरूद्ध पूर्ण राशि वसूल होने तक जमा करायी जायेगी। बिल के बिल भुगतान में विलंब होने पर नियमानुसार अधिभार देय होगा। जिन उपभोक्ताओं को यह सुविधा प्रदान की जायेगी, उनका उल्लेख कम्पनी द्वारा पृथक रजिस्टर में संधारित किया जायेगा ताकि इन उपभोक्ताओं को असुविधा का सामना नहीं करना पड़े।

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी ने मैदानी महाप्रबंधकों से इस योजना का अधिकाधिक प्रचार करने को कहा है। साथ ही झुग्गी बस्तियों में बकायादार उपभोक्ताओं के लिये विशेष कैम्प और नए उपभोक्ताओं के लिये नवीन कनेक्शन के लिये विशेष शिविर भी लगाने को कहा है। इसके लिये कम्पनी कार्य क्षेत्र जिलों के राजस्व अधिकारी एवं जनप्रतिनिधियों के सहयोग लिये जाने के निर्देश महाप्रबंधकों को कम्पनी स्तर से जारी किये गये हैं।

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Monday, January 11, 2010

फीडर विभक्तिकरण के काम को वर्ष 2013 तक होगा पूरा

बिजली चोरी रोकने के लिये चले जन-जागरण अभियान
ऊर्जा तथा खनिज साधन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में फीडर विभक्तिकरण कार्य राज्य शासन की महत्वाकांक्षी योजना है। श्री शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की मंशा के अनुरूप इसके लिये ग्रामीण क्षेत्रों में आवासों तथा खेती के लिये फीडर विभक्तिकरण के काम को वर्ष 2013 तक हर हाल में पूरा किया जाना है।
उन्होंने विद्युत वितरण कंपनियों को फीडर विभक्तिकरण योजना के जिलेवार प्रस्ताव आरईसी को ऋण स्वीकृति के लिये आगामी फरवरी माह तक भेजने के निर्देश दिये। उन्होंने वर्ष 2013 तक विद्युत उत्पादन में पांच हजार मेगावॉट की वृद्धि को मूर्तरूप देने के लिये भी निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि पॉवर जनरेटिंग कम्पनी यह सुनिश्चित करे कि विभिन्न प्रस्तावित परियोजनाएं समय पर पूर्ण हों। वे मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कम्पनी, पॉवर ट्रांसमिशन कम्पनी, पॉवर ट्रेडिंग कम्पनी और मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र वितरण कम्पनी से संबंधित कार्यों, चल रही योजनाओं, गतिविधियों की कल जबलपुर में गहन समीक्षा कर रहे थे।

बैठक में श्री शुक्ल ने कहा कि बिजली के क्षेत्र की सभी कम्पनियां निर्धारित समय-सीमा में उत्पादन, पारेषण और वितरण के कार्य पूर्ण करें। उन्होंने सारणी एक्सटेंशन 500 मेगावॉट एवं सिंगाजी मालवा 1200 मेगावॉट की प्रगति पर विशेष जोर देते हुए निर्देशित किया कि यह दोनों परियोजनाएं समय पर पूर्ण हों। साथ ही उन्होंने ट्रांसमिशन कम्पनी से इस तरह से काम करने को कहा जिससे पारेषण प्रणाली भी उत्पादन शुरू होने के साथ तैयार हो जाये। श्री शुक्ल ने कहा कि राज्य शासन का लक्ष्य है कि 2013 तक जहां प्रदेश स्वर्णिम मध्यप्रदेश के रूप में स्थापित होगा वहीं बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर होगा। इसलिये इस लक्ष्य को दृष्टिगत रखते हुए सभी कम्पनियों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों का दायित्व है कि वे अपने क्षेत्र के उपभोक्ताओं के हित में किये जा रहे कार्यों तथा योजनाओं को समय-सीमा के अंदर अच्छी गुणवत्ता में पूर्ण करें, जिससे कि प्रदेश के हर उपभोक्ता तक निर्धारित अवधि में गुणवत्तापूर्ण बिजली की आपूर्ति हो सके।

राजीव गाँधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के क्रियान्वयन में आ रही कठिनाईयों पर गहन चर्चा करते हुए श्री शुक्ल ने निर्देशित किया कि इसके लिये एक अलग वितरण समर्पित टीम को नामांकित किया जाना चाहिये। साथ ही उन्होंने कहा कि एच.व्ही.डी.एस. योजना को फीडर विभक्तिकरण योजना के सिद्धांत में समावेश किया जाना चाहिये। उन्होंने शहरी क्षेत्रों की वितरण सुदृढ़ीकरण की आरएपीडीआरपी योजना के प्रस्ताव मार्च, 2010 तक पीएफसी को भेजने के लिये निर्देशित किया। बैठक में विद्युत विकास के सभी बिन्दुओं पर चर्चा करते हुए उन्होंने सीएमडी को निर्देशित किया कि वे स्वयं हर 15 दिवस में उनकी सिलसिलेवार सतत मॉनीटरिंग भी करें। उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी समय-समय पर इसकी समीक्षा करेंगे।

बैठक में श्री शुक्ल ने वितरण और ज्यादा करने के साथ राजस्व वृद्धि के कारगर कदम उठाने तथा बिजली चोरी रोकने के लिये जन-जागरण अभियान चलाने के निर्देश भी दिये। उन्होंने कहा कि पारेषण के क्षेत्र में अर्जित सफलता को दृष्टिगत रखते हुए हमें वितरण के क्षेत्र में भी भी वितरण हानि को और अधिक कम करने के साथ राजस्व संग्रह को बढ़ाना चाहिये। श्री शुक्ल ने बिजली चोरी रोकने के लिये जन-जागरण मुहिम चलाने पर भी जोर दिया।

श्री शुक्ल ने कहा कि पिछला वर्ष मध्यप्रदेश में बिजली की दृष्टि से इसलिये महत्वपूर्ण रहा क्योंकि हमने जहां अप्रत्याशित रूप से बढ़ी हुई बिजली की मांग की आपूर्ति करने में सफलता अर्जित की है वहीं नई बिजली परियोजनाओं को स्थापित करने के लिये ठोस कार्य भी किये हैं। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में विद्युत विकास के लिये कार्य किये गये हैं और भविष्य के कार्यों की आधारशिला रखी गई है जिनसे निश्चित रूप से प्रदेश के हर श्रेणी के बिजली उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा।

इस अवसर पर पॉवर ट्रांसमिशन कम्पनी के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक एवं पूर्व क्षेत्र वितरण कम्पनी के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक श्री आर.के. वर्मा, राज्य विद्युत मण्डल के सचिव एवं मध्यप्रदेश पॉवर ट्रेडिंग कम्पनी के प्रबंध संचालक श्री पी.के. वैश्य, पॉवर जनरेटिंग कम्पनी के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक श्री आर.बी. अग्रवाल, मध्यप्रदेश राज्य विद्युत मण्डल के वित्तीय सलाहकार श्री ए.एम. सजनानी, राज्य विद्युत मण्डल के विशेष कर्त्तव्यस्थ अधिकारी श्री संतोष तिवारी सहित कम्पनियों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में सभी कम्पनियों ने अपनी-अपनी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी और विद्युत परिदृश्य पर ऊर्जा मंत्री के समक्ष पॉवर पाइंट प्रजेन्टेशन प्रस्तुत किया।

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Monday, January 4, 2010

फीडर विभक्तीकरण के लिये 4375 करोड़ रूपये की परियोजना मंजूर

मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने ऊर्जा विभाग की समीक्षा के दौरान कहा कि खेती के लिये पर्याप्त और गांवों में 24 घंटे बिजली प्रदाय करना राज्य शासन की प्राथमिकता है। उन्होंने इसके लिये बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण क्षमता में वृद्धि के कामों को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिये। 
श्री चौहान ने कहा कि इसके लिये ग्रामीण क्षेत्रों में आवासों तथा खेती के लिये फीडर विभक्तीकरण के काम को वर्ष 2013 तक हर हाल में पूर्णता दी जाना है। फीडर विभक्तीकरण से खेती के लिये बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्युत केन्द्रों और उपकेन्द्रों की स्थापना के लिये ऊर्जा विभाग को राज्य शासन द्वारा नि:शुल्क भूमि दी जायेगी। उन्होंने कहा कि बिजली संयंत्रों के रख-रखाव और सुधार के लिये विश्व बैंक से सहायता का प्रस्ताव शीघ्र तैयार किया जाये।
ऊर्जा सचिव श्री एस.पी.एस. परिहार ने जानकारी दी कि विश्व बैंक से 576 करोड़ की सहायता का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। उन्होंने सारणी की 500 मेगावाट क्षमता की विस्तार इकाई और 1200 मेगावाट की सिंगाजी परियोजना का काम शुरू होने की जानकारी दी। बैठक में बताया गया कि पिछले वर्ष 100 करोड़ के व्यय से 473 फीडर का विभक्तीकरण के कार्य को पूरा किया गया है। 
फीडर विभक्तीकरण के शेष काम को पूरा करने के लिये ग्रामीण विद्युतीकरण निगम द्वारा 4375 करोड़ रूपये की सहायता की सैद्धांतिक स्वीकृति प्राप्त हो गई है। वर्तमान में फीडर सेपरेशन के जिलावार परियोजना प्रतिवेदन तैयार किये जा रहे हैं। 
बैठक में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने विभाग से संबंधित मुख्यमंत्री की घोषणाएं अधिकारियों के मैदानी भ्रमण और मंथन की अनुशंसाओं पर की गई कार्रवाई की भी जानकारी ली। समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव श्री राकेश साहनी, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, ऊर्जा सचिव श्री एस.पी.एस. परिहार, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अनुराग जैन और अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

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Wednesday, December 30, 2009

रबी मौसम में विद्युत वितरण कम्पनियों के पास अतिरिक्त ट्रांसफार्मर उपलब्ध

जले तथा खराब ट्रांसफार्मरों को बदलने के  काम  तेजी
रबी मौसम में वितरण ट्रांसफार्मर्स की इन्वेंटरी बिल्ट की गई है। जले तथा खराब ट्रांसफार्मरों को बदलने का काम भी तेजी से किया जा रहा है। विद्युत वितरण कम्पनियों के पास साढ़े चार हजार वितरण ट्रांसफार्मर अतिरिक्त रूप से उपलब्ध हैं।
इनमें से मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी के पास तीन हजार वितरण ट्रांसफार्मर, मध्यप्रदेश पश्चिम विद्युत वितरण कम्पनी के पास एक हजार तथा मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी के पास 500 वितरण ट्रांसफार्मर अतिरिक्त रूप से उपलब्ध हैं।
तीनों विद्युत वितरण कम्पनियों को ऊर्जा विभाग द्वारा निर्देश दिये गये हैं कि आवश्यकता पड़ने पर पूर्व तथा पश्चिम क्षेत्र की कम्पनी मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी से ट्रांसफार्मर आहरण कर सुचारु रूप से विद्युत प्रदाय करे।

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Friday, December 25, 2009

मध्यप्रदेश राज्य विद्युत मण्डल की वित्तीय स्थिति में सुधार

मध्यप्रदेश में इस वर्ष बेहतर वित्तीय प्रबंधन के कारण राज्य विद्युत मण्डल की वित्तीय स्थिति में काफी सुधार आया है। बिजली चोरी की रोकथाम तथा राजस्व वसूली में प्रशासनिक अधिकारियों के समन्वय तथा सहयोग से अच्छे परिणाम आ रहे हैं। 
गत वर्ष के माह नवम्बर के मुकाबले इस वर्ष माह नवम्बर में अधिक राजस्व प्राप्त हुआ है। गत वर्ष नवम्बर में 692 करोड़ रुपये का राजस्व एकत्रित हुआ था, वहीं इस वर्ष 30 नवम्बर की स्थिति में 739 करोड़ रुपये की राजस्व प्राप्ति हुई है। इसमें मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी का विशेष योगदान रहा है। माह नवम्बर में 45 करोड़ रुपये की बिजली चोरी भी पकड़ी गई है। रबी मौसम में अन्य राज्यों से अतिरिक्त विद्युत क्रय न करने से करीब 500 करोड़ रुपये की बचत भी आंकी गई है।
गत वर्ष माह नवम्बर के मुकाबले इस वर्ष नवम्बर माह में ज्यादा राजस्व एकत्रित।
विद्युत मण्डल को 739 करोड़ रुपये की राजस्व प्राप्ति।
45 करोड़ रुपये की बिजली चोरी पकड़ी गई।
गत पांच वर्षों में पहली बार इस वर्ष अतिरिक्त विद्युत का क्रय नहीं।
विद्युत क्रय न करने से 500 करोड़ रुपये की बचत।
विद्युत मण्डल द्वारा विद्युत प्रणाली से कम विद्युत आहरित करने पर 170 करोड़ रुपये मिले।
ग्रिड अनुशासन का पालन भी।
प्रदेश में इस वर्ष विद्युत नेटवर्क के व्यवस्थित संचालन को देखते हुए रबी मौसम में अधिक विद्युत क्रय अन्य राज्यों से नहीं किया जा रहा है। यह विगत पांच वर्षों में पहली बार हो रहा है कि अतिरिक्त विद्युत क्रय किये बिना बेहतर नेटवर्क के चलते विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। 
उल्लेखनीय है कि राज्य शासन को प्रतिवर्ष लगभग 500-600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त विद्युत क्रय करना पड़ती थी। राज्य शासन द्वारा बिना अतिरिक्त विद्युत क्रय किये तथा ग्रिड से अधिक आहरण न करते हुए उपभोक्ताओं को बेहतर विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। इस वर्ष अतिरिक्त विद्युत क्रय न करने से शासन को लगभग 500 करोड़ रुपये की बचत होगी।
ज्ञातव्य हो कि गत वर्ष विद्युत की प्रणाली से विद्युत का आहरण अधिक किया गया था, उस पर केन्द्रीय विद्युत नियामक आयोग द्वारा ऐसा न करने के लिये राज्य विद्युत मण्डल को चेतावनी मिली थी। इस वर्ष इस बात का विशेष ध्यान रखा जा रहा है कि अधिक बिजली का आहरण न हो। 
वर्तमान वित्तीय वर्ष में विद्युत मण्डल द्वारा विद्युत प्रणाली से कम विद्युत आहरित की है, जिसके कारण यू.आई. चार्जेस 170 करोड़ रुपये विद्युत मण्डल को प्राप्त हुए हैं। वर्तमान में रबी मौसम में विद्युत की मांग में कमी आई है। इसलिये अब विद्युत का आहरण और कम किया जायेगा जिससे विद्युत मण्डल को पश्चिम ग्रिड से और यू.आई. चार्जेस प्राप्त होंगे। साथ ही ऊर्जा विभाग द्वारा ग्रिड अनुशासन का पालन भी किया जा रहा है।

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Monday, December 21, 2009

89 ग्राम न्यायालयों के लिए पद स्वीकृत

 (मंत्रि परिषद के निर्णय)
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित आज यहां सम्पन्न मंत्रि परिषद की बैठक में 89 ग्राम न्यायालय खोलने के लिए विभिन्न पद स्वीकृत किये गये। इनमें 40 पद व्यवहार न्यायाधीश वर्ग-2, 40 पद रीडर, 40 पद डिपोजीशन राइटर, 40 पद एक्जीक्यूशन क्लर्क, 40 पद प्रोसेस राइटर, 40 पद स्टेनो क्लर्क, 49 पद वाहन चालक तथा 40 पद भृत्य के शामिल है।
प्रदेश में पारेषण एवं वितरण हानियों में कमी लाने तथा प्रति यूनिट राजस्व में वृद्धि के लिये तीनों वितरण कंपनियों द्वारा इस विषय पर किये गये अध्ययन और प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर अधिक हानि वाले क्षेत्रों में विद्युत वितरण कार्य फ्रेंचायजी के माध्यम से कराये जाने की सैद्धांतिक रूप से सहमति दी गई।
वितरण फ्रेंचायजी नियुक्त करने के पूर्व वितरण कम्पनियां यह भी सुनिश्चित करेंगी कि वितरण कम्पनियों द्वारा सर्विस टैक्स अथवा अन्य कोई दायित्व देय होने की स्थिति में भी कम्पनियों को फ्रेंचायजी आवंटित क्षेत्र से प्राप्त हो रहे राजस्व से प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
मंत्रि मंडल ने राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत 11 वीं पंचवर्षीय योजना की अवधि में दतिया, शिवपुरी और श्योपुर जिले की योजनाओं के लिये सहमति पत्र ग्रामीण विद्युतीकरण निगम को प्रेषित करने का निर्णय लिया गया। उनकी नियम एवं शर्तें सामान्य है तथा ऋण पर ब्याज की दर के अतिरिक्त अन्य स्वीकृति की शर्ते 11 वीं पंचवर्षीय योजना में पूर्व में स्वीकृत 21 योजनाओं के अनुरुप है।
मंत्रि परिषद ने प्रदेश में पॉपीस्ट्रा के लिये वर्ष 2010-11 के दौरान न्यूनतम विक्रय मूल्य 100 रूपये प्रति किलोग्राम निर्धारित करने का निर्णय लिया।
मंत्रि परिषद ने स्टेट इंस्टीटियूट ऑफ एजुकेशनल मेनजमेंट एंड ट्रेनिंग की स्थापना करने का निर्णय लिया। इसकी स्थापना प्रशासन अकादमी की विंग के रुप में किया जायेगा। संस्थान के लिए प्रशासन अकादमी के अधोसंरचना का उपयोग किया जायेगा। फैक्ल्टी के लिए आवश्यकतानुसार आउटसोर्स किया जायेगा।
मंत्रि परिषद ने राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 में अक्टूबर 2009 में किये गये संशोधन का अनुसमर्थन किया। इसमें प्राकृतिक आपदाओं के कारण मकान नष्ट हो जाने पर दी जाने वाली राहत राशि को बढ़ाया गया है। पक्का मकान पूरी तरह नष्ट हो जाने की स्थिति में पूर्व में 25000 रुपये की राहत दी जाती थी जिसे बढ़ाकर 35000 रुपये किया गया है।
मंत्रि परिषद ने वाणिज्यिककर मंत्री द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत किये गये मध्यप्रदेश स्टाम्प विधेयक 2009 के खंड 48 के उपखंड 6 के शासकीय संशोधन को कार्योंतर रुप से अनुमोदित किया।
मंत्रि परिषद ने मध्यप्रदेश वेट ( संशोधन) अध्यादेश 2009 के प्रारूप का अनुमोदन किया। यह अध्यादेश मध्यप्रदेश वेट अधिनियम 2002 की कतिपय धाराओं में संशोधन के लिए लाया जाना प्रस्तावित है। एक ही व्यवसाई की एक इकाई से दूसरी इकाई में माल के हस्तांतरण को अधिनियम 2002 के अंतर्गत मान्य नहीं किया जाता था।
इस कारण व्यवसाइयों को इन पर टेक्स रिबेट की पात्रता नहीं थी। उन्हें पात्रता दिलाने के लिए मध्यप्रदेश वेट (संशोधन) अधिनियम, 2009 द्वारा यथोचित प्रावधान किया गया था। परन्तु यह पाया गया कि ऐसा करने से उन व्यवसाइयों को कठिनाई हो रही है, जिनकी दूसरी इकाई द्वारा कर मुक्त माल का निर्माण किया जाता हैं। इसे मध्यप्रदेश वेट (संशोधन) अधिनियम 2009 की मंशा के अनुरुप नहीं पाया गया। अत धारा 2 में संशोधन प्रस्तावित किया गया है।
धारा 20-क में विवरण पत्र पुनरीक्षित विवरण पत्र 40 लाख रूपए तक विक्रय वाले व्यवसाइयों द्वारा पश्चातवर्ती वर्ष की 31 जुलाई तक तथा अन्य व्यवसाई द्वारा पश्चातवर्ती वर्ष की 31 अक्टूबर तक प्रस्तुत किये जाने पर स्व-निर्धारण की व्यवस्था की गयी है। इस संबंध में प्रस्तावित है कि स्वनिर्धारण की ओर अधिक प्रभावी बनाने के लिए आयुक्त को विवरण पत्र/पुनरीक्षित विवरण पत्र प्रस्तुत करने की तिथि 31 दिसम्बर तक बढ़ाने की शक्तियां दी जाएं, जिससे आवश्यकता एवं व्यवसाई की श्रेणी अनुसार तिथियां निर्धारित की जा सके।
मंत्रि परिषद ने मध्यप्रदेश जन शिक्षा (संशोधन) अध्यादेश 2009 का भी अनुमोदन किया। संशोधन अध्यादेश में जन शिक्षा केन्द्र के प्रभारी के रुप में मिडिल स्कूल के प्रधानाध्यापक की जगह हायर सेकण्डरी स्कूल अथवा हाई स्कूल के प्राचार्य को बनाया जाएगा। साथ ही प्रौढ़ शिक्षा की गुणवत्ता में वृद्धि के लिए प्रत्येक जिले में कुछ अथवा सभी हायर सेकण्डरी अथवा हाई स्कूलों को जन शिक्षा केन्द्र के रुप में पदानिहित किया जाएगा। प्रत्येक जन शिक्षा केन्द्र में दो जन शिक्षक होंगे, जो कि केन्द्र तथा इसके स्कूलों के बीच समन्वय का कार्य करेंगे। जन शिक्षा का चयन जिले के शिक्षकों में से किया जाएगा।

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Saturday, December 19, 2009

विद्युत की माँग कम होकर 6000 मेगावॉट हुई

विद्युत की  उपलब्धता  30 दिसम्बर तक 6400 मेगावॉट रहेगी
प्रदेश में हुई वर्षा के चलते विद्युत की मांग में कमी आई है। आज विद्युत की मांग करीब 6000 मेगावॉट रही है। रबी मौसम में इसके पूर्व कृषि पम्पों के भार की वजह से विद्युत की मांग करीब 6800 मेगावॉट अधिकतम बनी हुई थी।
विद्युत की मांग में आई कमी को ध्यान में रखते हुए जल विद्युत गृहों में आई खराबी को ठीक किया जा रहा है। साथ ही बिगड़े तथा जले ट्रांसफार्मरों को तेजी से दुरूस्त किया जा रहा है। इससे अधिक मांग के समय विद्युत की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
नेटवर्क के प्रभावी उपयोग होने से रबी मौसम में अंतिम छोर तक पर्याप्त वोल्टेज के साथ गुणवत्तापूर्ण विद्युत का प्रदाय किया गया है। गत वर्ष 7500 मेगावॉट के स्थान पर इस वर्ष 6800 मेगावॉट की मांग रही है। इस वर्ष विद्युत प्रदाय में लघु अवधि की विद्युत क्रय करने की आवश्यकता भी नहीं आई है। इसे देखते हुए माह अक्टूबर से 15 दिसम्बर तक लगभग 300 करोड़ रूपये राशि की बचत आँकी गई है। संभागीय एवं जिला मुख्यालयों में भी रात्रि में कोई कटौती नहीं की गई है।
विद्युत नेटवर्क का प्रभावी एंव व्यवस्थित उपयोग हो रहा है। गत वर्ष दिसम्बर माह के मुकाबले इस वर्ष माह दिसम्बर में संभागीय मुख्यालयों को 22 घंटें, जिला मुख्यालयों को 20 घंटें, तहसील मुख्यालयों को 15 घंटें तथा ग्रामीण क्षेत्रों को 10 घंटें विद्युत प्रदाय किया जाना प्रस्तावित है।
विद्युत की अधिकतम उपलब्धता आगामी 30 दिसम्बर तक 6400 मेगावॉट रहेगी। ताप विद्युत गृहों के उचित रखरखाव के चलते आने वाले 15 दिनों में लगभग 2200 मेगावॉट अधिकतम उपलब्धता रहेगी। प्रयास किये जा रहे हैं कि पीएलएफ भी लगभग 75 प्रतिशत बना रहा।

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Wednesday, December 9, 2009

मतदान और मतगणना के दिन बिजली कटौती नहीं

नगरीय निकाय चुनाव-2009)
मध्यप्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव-2009 के मद्देनजर मतदान और मतगणना के दिन बिजली कटौती नहीं होगी। इस संबंध राज्य शासन द्वारा निर्देश जारी किये गये हैं। तद्नुसार 11 एवं 14 दिसम्बर, 2009 को मतदान के दिन तथा 15 और 17 दिसम्बर, 2009 को मतगणना के दिन जिला और संभागीय मुख्यालयों पर बिजली कटौती नहीं होगी।
साथ ही संबंधित तहसील और ग्रामीण फीडरों पर भी मतदान और मतगणना के दिन बिजली कटौती नहीं की जायेगी। मतगणना स्थान वाले फीडरों पर 24 घण्टे विद्युत प्रदाय रहेगा। सचिव ऊर्जा श्री एस.पी.एस. परिहार ने यह जानकारी देते हुये बताया कि विद्युत प्रदाय के लिये वितरण कम्पनियों को आवश्यक दिशा निर्देश जारी कर दिये गये हैं।
आकस्मिकता अथवा ग्रिड से ओवर ड्राल की स्थिति में ऐसे तहसील फीडरों से आवश्यकतानुसार हेण्डट्रीप किया जायेगा जहां चुनाव नहीं हैं। इसके लिये स्टेट लोड शेडिंग सेन्टर द्वारा निर्देश जारी किये जायेंगे। विद्युत वितरण कम्पनियों को निर्देश दिये गये हैं कि वे अग्रिम रूप से ऐसे फीडरों की पहचान कर लें ताकि समय पर कार्यवाही की जा सके।

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Sunday, November 8, 2009

रबी मौसम में विद्युत प्रदाय के लिये कंट्रोल रूम की स्थापना

अस्पताल तथा न्यायालय विद्युत कटौती से मुक्त
Bhopal:Saturday, November 7, 2009:Updated 17:35IST प्रदेश में किसानों को रबी मौसम में सिंचाई के लिये विद्युत प्रदाय के लिये सभी आवश्यक तैयारियां की गई हैं। रबी मौसम में विद्युत कम्पनी स्तर पर कंट्रोल रूम की स्थापना भी की गई है। किसान रबी फसलों का पलेवा कर सकें इसे देखते हुए शासन द्वारा विशेष प्रयास किये जा रहे हैं।
सभी मुख्य ताप विद्युतगृहों का रख-रखाव कार्य भी पूर्ण कर लिया गया है। विद्युत बैंकिंग के तहत 700 मेगावॉट बिजली दूसरे राज्यों से प्राप्त की जा रही है। यह प्रदेश अपने उत्पादन गृहों से कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि रबी मौसम में अतिरिक्त बिजली खरीदे बिना विद्युत का प्रदाय किया जा रहा है।
ऐसी स्थिति चार साल में पहली बार बनी है। यह संभव हुआ है विद्युत के बेहतर प्रबंध के चलते। इसी प्रकार विद्युत के नेटवर्क पर विशेष ध्यान दिये जाने के साथ ही अपव्यय को भी रोका गया है।
संभागीय मुख्यालय, जिला, तहसील तथा ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत प्रदाय के लिये समय भी निर्धारित किया गया है। प्रदेश की राजधानी भोपाल को विद्युत कटौती से मुक्त रखा गया है। राजधानी के जिन फीडरों पर राजस्व प्राप्त नहीं हो रहा है केवल उन्हीं फीडरों पर विद्युत कटौती की जा रही है।
साथ ही प्रदेश के अस्पताल तथा न्यायालय भी विद्युत कटौती से मुक्त रखे गये हैं। रबी मौसम में नवम्बर माह के दौरान प्रदेश के संभागीय मुख्यालयों में 20 घंटे, जिला मुख्यालयों पर 18 घंटे, तहसील मुख्यालयों पर 14 घंटे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 10 घंटे विद्युत प्रदाय की जायेगी।
विद्युत वितरण एवं पारेषण नेटवर्क के तहत 220 के.व्ही., 33 के.व्ही. तथा 11 के.व्ही. निम्न दाब लाईनों तथा उपकेन्द्रों का रख-रखाव कार्य करीब-करीब पूर्ण कर लिया गया है। साथ ही जिन फीडरों पर विगत 12 माह में विद्युत प्रदाय संतोषजनक नहीं हुआ है अथवा बार-बार व्यवधान आया है उन फीडरों का प्राथमिकता पर रख-रखाव किया गया है।
रबी मौसम शुरू होने के पूर्व समस्त वितरण ट्रांसफार्मरों का भौतिक सत्यापन कर उनमें आईल की कमी तथा तकनीकी त्रुटियों का निदान भी किया गया है। सभी जले/खराब ट्रांसफार्मरों को निर्धारित समय-सीमा तथा ग्रामीण क्षेत्रों में किसी भी माध्यम से प्राप्त सूचना के 72 घंटे एवं शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे के पूर्व बदले तथा जले हुए ट्रांसफार्मरों को बिना किसी विलंब के दुरुस्त कराकर चालू किया जाना सुनिश्चित किया जा रहा है।
विद्युत कटौती की अवधि में ही जले/खराब वितरण ट्रांसफार्मर बदले जा रहे हैं जिससे विद्युत प्रदाय की घोषित अवधि में अवरोध उत्पन्न न हो।
सिंचाई के लिये कृषकों को अस्थाई कनेक्शन प्रदान करने में विलंब न हो यह सुनिश्चित किया जा रहा है। वितरण ट्रांसफार्मरों की सुरक्षा के लिये पूर्व में गठित ग्राम सुरक्षा समितियों को पुनर्जीवित कर ग्रामीणों का सहयोग प्राप्त करने के लिये निर्देश दिये गये हैं।
सभी 33/11 के।व्ही. उपकेन्द्रों में स्थापित कैपेसिटर बैंक को सुधारा गया है। विद्युत बिलों की गड़बड़ी के निराकरण के लिये समय-समय पर विभिन्न स्थानों पर विद्युत पंचायत भी आयोजित की जा रही है। प्रत्येक ग्राम पंचायत, कोटवारों, उत्साही ग्रामीणों से सहयोग प्राप्त कर सूचना तंत्र विकसित किया जा रहा है, जिससे ट्रांसफार्मर खराब तथा लाईन काटने, कंडेक्टर चोरी करने इत्यादि की जानकारी तुरंत प्राप्त हो सके तथा कम से कम अवधि में व्यवस्था बहाल की जा सके।
कम्पनी स्तर पर कंट्रोल रूम की स्थापना
रबी मौसम में कम्पनी स्तर पर कंट्रोल रूम की स्थापना की गई है। इसके तहत अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है ताकि तुरंत व्यवस्था बहाल करने में सुचारु रूप से कार्य किया जा सके। विद्युत उपकेन्द्रों का उच्च अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया जा रहा है।

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