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Friday, February 12, 2010

मप्र में विद्युत की स्थापित क्षमता 8573.5 मेगावॉट तक पहुँची

प्रदेश में विद्युत उपलब्धता बढ़ाने के हरसंभव प्रयास
राज्य शासन द्वारा विद्युत उपलब्धता बढ़ाने के हरसंभव प्रयास किये जा रहे हैं। विद्युत की उपलब्धता में सुधार भी परिलक्षित हुआ है। कुल स्थापित क्षमता तथा मध्यप्रदेश का अंश 8573.5 मेगावॉट तक पहुँच गया है। इस वर्ष रबी मौसम में सुचारू ग्रिड प्रबंधन से विद्युत की अधिकतम माँग 7100 मेगावॉट रही है। राज्य सरकार के प्रयासों से प्रदेश की कुल स्थापित क्षमता/अंश विद्युत की मांग से अधिक हो गया है। परन्तु व्यवहारिक कठिनाईयों के चलते विद्युत की उपलब्धता में अंतर आता रहता है।प्रदेश की स्थापित क्षमता वर्ष 2002-03 में 2990 मेगावॉट थी। इसमें गत पांच वर्षों में 3147 मेगावॉट क्षमता की वृद्धि की गई है। कुल स्थापित क्षमता 6137 मेगावॉट हो गई है। वर्तमान में कुल स्थापित क्षमता एवं मध्यप्रदेश का अंश सम्मिलित कर 8573.5 मेगावॉट तक पहुँच गया है। इसमें मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कम्पनी से 2807.5 मेगावॉट (ताप विद्युत), 917 मेगावॉट जल विद्युत, इंदिरा सागर 1010 मेगावॉट (जल विद्युत), ओंकारेश्वर 520 मेगावॉट (जल विद्युत), सरदार सरोवर 826.5 मेगावॉट (जल विद्युत), केन्द्रीय क्षेत्र से 2092.5 मेगावॉट तथा दीर्घकालीन विद्युत क्रय अनुबंध (डीवीसी) 400 मेगावॉट शामिल हैं।

प्रदेश सरकार के समक्ष जीर्ण-शीर्ण विद्युत नेटवर्क एक चुनौतीपूर्ण कार्य था। इसके लिये राज्य सरकार द्वारा तुरंत कार्यवाही की गई तथा उच्च दाब विद्युत केन्द्रों के साथ-साथ वितरण केन्द्रों की भी स्थापना की गई जिससे, रबी मौसम में पर्याप्त विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। वितरण ट्रांसफार्मरों की कमी को भी दूर किया गया है तथा प्रत्येक वितरण कम्पनी के पास वितरण ट्रांसफार्मर की इनवेंट्री बिल्ट की गई है। वर्तमान में विद्युत वितरण कम्पनियों के पास 2 लाख 12 हजार वितरण ट्रांसफार्मर उपलब्ध हैं।

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