मध्यप्रदेश में किसानों के कल्याण के प्रयास सराहनीय- सुषमा स्वराज
मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार की किसान हितैषी नीतियों से कृषि कार्य को लाभ का व्यवसाय बनाने में सफलता मिल रही है। बेहतर सिंचाई सुविधाओं, कम ब्याज पर ऋण, पर्याप्त विद्युत आपूर्ति, कृषि फसलों की हानि पर बढ़ी हुई राहत राशि की व्यवस्था से खेती-किसानी फायदे का कार्य बन रहा है।
मध्यप्रदेश में राज्य सरकार ने किसानों को जैविक खेती के लिए भी प्रोत्साहित किया है। राज्य सरकार के कृषक कल्याण के प्रयास जारी रहेंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज यहां कृषि विभाग और के.जे. एजुकेशन सोसायटी के तीन दिवसीय राज्य स्तरीय आत्मा कृषि विज्ञान मेले एवं संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष श्रीमती सुषमा स्वराज थीं। मुख्यमंत्री श्री चौहान एवं श्रीमती स्वराज ने आयोजन स्थल पर आयोजित कृषि प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश, किसानों को गेहूं की खेती पर 100 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देना वाला पहला प्रांत है। इस वर्ष राज्य में बम्पर उत्पादन होने से गेहूं उपार्जन का लक्ष्य 23 लाख मैट्रिक टन तय किया गया था लेकिन खरीदी 35 से 40 लाख मैट्रिक टन के बीच होने की आशा है।
मध्यप्रदेश में वर्तमान बजट में विद्युत प्रदाय सुचारू बनाने के लिए फीडर सेपेरेशन कार्य के लिए पृथक राशि का प्रावधान किया गया है। प्रदेश में विद्युत उत्पादन बढ़ाने के ठोस प्रयास किये गये हैं। इससे आने वाले समय में किसानों को विशेष राहत मिलेगी। कपिलधारा योजना, बलराम तालाब योजना के क्रियान्वयन एवं अनुसूचित जाति. जनजाति के किसानों को डीजल पंप एवं विद्युत मोटर प्रदाय करने की योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है।
कृषि कार्य करते समय करंट से असमय मृत्यु होने, थ्रेशर से हाथ या अंगुली कट जाने, और ट्रेक्टर-ट्राली पलटने से हुई दुर्घटनाओं के प्रकरणों में किसानों को पर्याप्त राहत राशि दी जा रही है। सूखे के साथ ही ओलावृष्टि एवं फसलों में इल्ली लगने की क्षति होने पर अब किसानों को राहत राशि के लिए भटकना नहीं पड़ता। राहत प्रावधनों में राशि बढ़ाकर दी जा रही है। श्री चौहान ने कहा कि किसानों को 3 प्रतिशत के नाममात्र ब्याज पर ऋण की व्यवस्था करने से शेष ब्याज राज्य सरकार वहन करेगी।
लोकसभा नेता प्रतिपक्ष श्रीमती सुषमा स्वराज ने कहा कि कृषि उत्पादकता में वृद्धि और कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने की दिशा में मध्यप्रदेश में हो रहे प्रयास सराहनीय हैं। श्रीमती स्वराज ने इस संगोष्ठी को किसानों के लिए उपयोगी बताया।
लोकसभा नेता प्रतिपक्ष श्रीमती सुषमा स्वराज ने कहा कि कृषि उत्पादकता में वृद्धि और कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने की दिशा में मध्यप्रदेश में हो रहे प्रयास सराहनीय हैं। श्रीमती स्वराज ने इस संगोष्ठी को किसानों के लिए उपयोगी बताया।
श्रीमती स्वराज ने कहा कि जैविक खेती भारत की परंपरा मे शामिल रही है। अब अन्य देशों से जैविक खेती का विचार नये स्वरूप में सामने आ रहा है। श्रीमती स्वराज ने कहा कि अन्य उद्योग उत्पादन की कीमतें स्वयं तय करते हैं। इसके विपरीत किसान को अपनी कृषि उपज का मूल्य निर्धारित करने का अधिकार नहीं है। श्रीमती स्वराज ने कहा कि मध्यप्रदेश में इस वर्ष गेहूं का बढ़ी मात्रा में उत्पादन हुआ है।
श्रीमती स्वराज ने कहा कि उन्हें आशा है कि खाद्य सुरक्षा कानून बनने से मध्यप्रदेश इस क्षेत्र में अग्रणी होगा। उन्होंने किसानों को गेहूं पर 100 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि देने के लिए प्रशंसा की। श्रीमती स्वराज ने कहा कि मध्यप्रदेश में किसानों के हित में महत्वपूर्ण कार्य हो रहा है। देश भर में जब कृषकों को महंगे कृषि उपकरणों और उपज पर कम मूल्य मिल रहा है तब मध्यप्रदेश में बोनस देने के साथ अन्य सुविधाएं देने के कार्यों से निश्चित ही अन्य राज्यों को प्रेरणा मिलेगी।
कार्यक्रम में किसान कल्याण मंत्री डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने कहा कि मध्यप्रदेश में विभिन्न वर्गों के कल्याण के लिए मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा पंचायतों का आयोजन किया गया। इसकी शुरूआत किसान पंचायत से हुई। किसान पहले 18 प्रतिशत तक भारी-भरकम ब्याज देने पर विवश था।
श्रीमती स्वराज ने कहा कि उन्हें आशा है कि खाद्य सुरक्षा कानून बनने से मध्यप्रदेश इस क्षेत्र में अग्रणी होगा। उन्होंने किसानों को गेहूं पर 100 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि देने के लिए प्रशंसा की। श्रीमती स्वराज ने कहा कि मध्यप्रदेश में किसानों के हित में महत्वपूर्ण कार्य हो रहा है। देश भर में जब कृषकों को महंगे कृषि उपकरणों और उपज पर कम मूल्य मिल रहा है तब मध्यप्रदेश में बोनस देने के साथ अन्य सुविधाएं देने के कार्यों से निश्चित ही अन्य राज्यों को प्रेरणा मिलेगी।
कार्यक्रम में किसान कल्याण मंत्री डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने कहा कि मध्यप्रदेश में विभिन्न वर्गों के कल्याण के लिए मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा पंचायतों का आयोजन किया गया। इसकी शुरूआत किसान पंचायत से हुई। किसान पहले 18 प्रतिशत तक भारी-भरकम ब्याज देने पर विवश था।
मध्यप्रदेश में किसानों को खाद और बीज पर लगने वाले ब्याज को कम करते-करते 3 प्रतिशत तक ला दिया गया है। किसानो को नई कृषि तकनीक नई पद्धतियों और जैविक खेती की जानकारी दी जा रही है। प्रदेश की जैविक नीति भी तैयार की गई है। इन्दौर संभाग में जैविक कृषि व्यापक पैमाने पर हो रही है।
कृषि राज्यमंत्री श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने आभार व्यक्त किया। इसके पहले उन्होंने किसानों की भलाई के लिए मध्यप्रदेश सरकार द्वारा उठाये गये कदमों का विस्तार से ब्यौरा दिया।
प्रमुख सचिव कृषि श्री आई.एस. दाणी ने कहा कि प्रदेश में कषि विस्तार कार्यक्रमों को सुदृढ़ बनाने एवं गति देने के उद्देश्य से आत्मा परियोजना संचालित की जा रही है। केन्द्र प्रवर्तित इस योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश प्रथम स्थान पर है। इस परियोजना के तहत प्रशिक्षण, कृषि मेले, फार्म-फील्ड स्कूल, प्रचार-प्रसार एवं आत्मा संदेश बुलेटिन का प्रकाशन किया जा रहा है। किसान दीदी, किसान मित्र, अनुसूचित जाति, जनजाति के कृषकों और महिला किसानों को रोजगारन्मुखी प्रशिक्षण आत्मा की प्रमुख उपलब्धियां हैं। इसी तारतम्य में मध्यप्रदेश किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग एवं के.जे. एजुकेशन सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में आत्मा कृषि विज्ञान मेला एवं संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है।
कार्यक्रम का संचालन श्रीमती साधना गंगराड़े ने किया। प्रारंभ में अपर मुख्य सचिव एवं कृषि उत्पादन आयुक्त श्री एम.के. राय, प्रमुख सचिव कृषि श्री आई.एस. दाणी, संचालक कृषि श्री डी.एन. शर्मा एवं के.जे. एजुकेशन सोसायटी के संचालक श्री सुनील गंगराड़े ने अतिथियों का स्वागत किया। संगोष्ठी में कृषक कल्याण आयोग के अध्यक्ष श्री राजेन्द्र पाठक और किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्री शिवकुमार शर्मा भी उपस्थित थे।
कृषि राज्यमंत्री श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने आभार व्यक्त किया। इसके पहले उन्होंने किसानों की भलाई के लिए मध्यप्रदेश सरकार द्वारा उठाये गये कदमों का विस्तार से ब्यौरा दिया।
प्रमुख सचिव कृषि श्री आई.एस. दाणी ने कहा कि प्रदेश में कषि विस्तार कार्यक्रमों को सुदृढ़ बनाने एवं गति देने के उद्देश्य से आत्मा परियोजना संचालित की जा रही है। केन्द्र प्रवर्तित इस योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश प्रथम स्थान पर है। इस परियोजना के तहत प्रशिक्षण, कृषि मेले, फार्म-फील्ड स्कूल, प्रचार-प्रसार एवं आत्मा संदेश बुलेटिन का प्रकाशन किया जा रहा है। किसान दीदी, किसान मित्र, अनुसूचित जाति, जनजाति के कृषकों और महिला किसानों को रोजगारन्मुखी प्रशिक्षण आत्मा की प्रमुख उपलब्धियां हैं। इसी तारतम्य में मध्यप्रदेश किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग एवं के.जे. एजुकेशन सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में आत्मा कृषि विज्ञान मेला एवं संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है।
कार्यक्रम का संचालन श्रीमती साधना गंगराड़े ने किया। प्रारंभ में अपर मुख्य सचिव एवं कृषि उत्पादन आयुक्त श्री एम.के. राय, प्रमुख सचिव कृषि श्री आई.एस. दाणी, संचालक कृषि श्री डी.एन. शर्मा एवं के.जे. एजुकेशन सोसायटी के संचालक श्री सुनील गंगराड़े ने अतिथियों का स्वागत किया। संगोष्ठी में कृषक कल्याण आयोग के अध्यक्ष श्री राजेन्द्र पाठक और किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्री शिवकुमार शर्मा भी उपस्थित थे।

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