मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित बढ़ी पीठ का निर्णय
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित लार्जर वेंच द्वारा आज पारित न्यायिक निर्णय के बाद अब प्रदेश में मदिरा दुकानों के निष्पादन के लिए दिनांक 29 मार्च 2010 को बुलाये जाने वाले टेंडरों में अपेक्षित मूल्य के साथ निष्पादन की संभावनायें बढ़ गयी हैं।
न्यायिक निर्णय में वर्ष 2010-11 की आबकारी नीति को नियमों के अनुरूप पाया है और यह मान्य किया है कि इस नीति से मदिरा व्यवसाय में एकाधिकार नहीं बढ़ता है और यह राजस्व के हित में है। न्यायिक निर्णय में नवीनीकरण या अन्य तरीकों से लायसेंस दिए जाने की प्रक्रिया को भी विधिसम्मत मान्य किया है।इस संबंध में आबकारी विभाग द्वारा प्रेषित समाचार विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्रदेश के मंत्रिपरिषद के अनुमोदन उपरांत वर्ष 2010-11 के लिये देशी/विदेशी मदिरा की फुटकर विक्रय दुकानों के निष्पादन के लिये जारी विज्ञप्ति दिनांक 28 जनवरी 2010 के प्रावधानों को मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 एवं इसके अंतर्गत बनाये गये नियमों के अनुरूप न होने के आधार पर आबकारी नीति की संवैधानिक वैधता को माननीय उच्च न्यायालय की ग्वालियर, इंदौर एवं जबलपुर पीठ में अलग-अलग याचिकाओं द्वारा चुनौती दी गई थी।
उक्त सभी याचिकाओं को माननीय उच्च न्यायालय की जबलपुर पीठ में अंतरित किया गया तथा डिवीजन बैंच द्वारा दिनांक 25 फरवरी, 2010 को दिये गये अंतरिम आदेश में पाँच बिन्दुओं पर निर्णय हेतु माननीय उच्च न्यायालय की लार्जर बेंच को प्रकरण भेजा गया।
माननीय मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित लार्जर बेंच में इन बिन्दुओं पर दिनांक 10 एवं 11 मार्च, 2010 को विस्तृत सुनवाई हुई। दिनांक 26 मार्च, 2010 को माननीय मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित लार्जर बेंच द्वारा पारित निर्णय में मध्यप्रदेश के वर्ष 2010-11 की आबकारी नीति को देशी एवं विदेशी मदिरा नियमों के अनुरूप पाया तथा यह मान्य किया कि इस नीति से मदिरा व्यवसाय में एकाधिकार नहीं बढ़ता है और यह राजस्व के हित में है।
मदिरा दुकानों के नवीनीकरण के संबंध में मदनमोहन चतुर्वेदी की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय की ग्वालियर पीठ द्वारा दिये गये निर्णय के अनुरूप नवीनीकरण या अन्य तरीकों से लायसेंस दिये जाने की प्रक्रिया को विधिसम्मत मान्य किया गया।
उक्त निर्णय से प्रदेश के मदिरा व्यवसाय में मदिरा दुकानों के निष्पादन के संबंध में कतिपय शंकाओं का समाधान हो गया है तथा दिनांक 29 मार्च, 2010 को बुलाये जाने वाले टेण्डरों में अपेक्षित मूल्य के साथ निष्पादन की संभावनायें बढ़ी हैं।
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