Pages


Top Stories

Friday, May 28, 2010

मीडिया और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सतत संवाद जरूरी

 "संकटकाल में मीडिया से संबंध" विषय पर कार्यशाला
गृह मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता ने कहा है कि देश में कानून का प्रवर्तन करने वाली एजेंसियों तथा मीडियाकर्मियों के बीच सतत संवाद बहुत जरूरी है। संवाद की कमी के कारण अनेक ऐसी समस्यायें पैदा होती हैं जिन्हें आसानी से टाला जा सकता है।

Read Full Text......

Friday, January 1, 2010

आज भी पत्रकार योद्धा है-जनसम्पर्क मंत्री

भाषायी पत्रकारिता की सात शोध पुस्तकों का विमोचन
उच्च शिक्षा एवं जनसम्पर्क मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने आज यहां माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय द्वारा स्वतंत्र भारत की भाषायी पत्रकारिता पर प्रकाशित सात शोध पुस्तकों का लोकार्पण किया। श्री शर्मा ने अपने सम्बोधन में कहा कि तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद आज भी पत्रकार योद्धा के रूप में काम कर रहे है। पत्रकारिता के क्षेत्र में मेधावी विद्यार्थी आ रहे है। पत्रकारिता का भविष्य भावी पीढ़ी के हाथों सुरक्षित रहेगा। इसमें कोई संदेह नही है।
श्री शर्मा ने कहा कि पूंजी का जमाना है, व्यवसायिक दृष्टिकोण है। इसके बाद भी पत्रकार चुनौतीपूर्ण ढंग से अपना दायित्व निभा रहे है। उन्होंने शोध परियोजना में अध्ययन और शोध को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति श्री अच्युतानंद मिश्र और परियोजना के निर्देश श्री विजयदत्त श्रीधर को बधाई दी।
मध्यप्रदेश के विकास में पत्रकारों के योगदान को उल्लेखनीय बताते हुए उन्होंने आशा व्यक्त की आने वाली सभी चुनौतियों का मिलजुलकर मुकाबला करेंगे और प्रदेश को विकास की ऊचाईयों तक पहुंचायेंगे।
श्री शर्मा ने शोध करने वाले पत्रकारों का पुष्पहारों से स्वागत करते हुए प्रकाशित पुस्तकों की प्रति भेंट की। उन्होंने श्री सुंधाशु मिश्रा, श्री मनोज कुमार, श्री शिवअनुराग पटेरिया, सुश्री अचला मिश्र, श्री सोमदत्त शास्त्री, श्री रामभुवन सिंह कुशवाह और सुश्री सत्यासिंह राठौर को पुस्तकें भेंट की।
विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार श्री महेश श्रीवास्तव ने कहा कि यह शोध पुस्तके पत्रकारों की भावी पीढ़ी को मार्गदर्शन प्रदान करेगी। उन्होंने पत्रकारिता में चरित्र निर्माण की आवश्यकता बताई।
विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर रमेशचन्द्र शाह ने कहा कि साहित्य एवं पत्रकारिता का घनिष्ठ संबंध है। मूल्यमूढ़ता के इस युग में यह पुस्तके पत्रकारिता में गौरवूपर्ण अग्रजों की परम्परा से भावी पीढ़ी को अवगत करायेंगी और चुनौतियों का मुकाबला करते हुए उन्हें सफल बनाने में फलदायी होगी।
विश्वविद्यालय के कुलपति श्री अच्युतानंद मिश्र ने कहा कि शोध परियोजना के अन्तर्गत बंगला, तमिल, तेलगू और ऊर्दू पत्रकारिता के इतिहास की पाडुलिपि तैयार हो गयी है। हिन्दी पत्रकारिता का शब्दकोष, संदर्भकोष और वर्तनीकोष प्रकाशित किया जा चुका है। लगभग 100 बड़े सम्पादकों के मोनोग्राफ प्रकाशित किये जा रहे है। कार्यक्रम में जनसम्पर्क सचिव श्री मनोज श्रीवास्तव भी उपस्थित थे।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के इन प्रयासों से पत्रकारिता का प्रामाणिक इतिहास बनेगा जो पत्रकारिता की भावी पीढ़ियों के लिए मील का पत्थर साबित होगा। विश्वविद्यालय के कुलाधिसचिव श्री ओ.पी. दुबे ने अपने विचार व्यक्त किये। कुल सचिव श्री पी.एन. साकल्ले ने आभार व्यक्त किया।
आज जो पुस्तकें लोकार्पित की गई है उनमें प्रमुख हिन्दी पत्रिकाओं और समाचार पत्रों पर अध्ययन कर शोध प्रकाशित किया गया है। उनके अंतर्गत साप्ताहिक हिन्दुस्तान, धर्मयुग, दिनमान, रविवार, आज, हिन्दुस्तान, नवज्योति, नवभारत, नवभारत टाईम्स, नई दुनिया, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण,अमर उजाला, राजस्थान पत्रिका, युगधर्म, दैनिक भास्कार, देशबन्धु, स्वदेश और प्रभार खबर समाचार पत्रों का अध्ययन कर शोध पुस्तकें प्रकाशित की गयी है।
भोपाल गैस त्रासदी और मीडिया विषय पर भी शोध पुस्तक प्रकाशित की गयी है। योद्धा पत्रकारों के व्यक्तित्व और कृतित्व पर शोध पुस्तकों की श्रंृखला में गणेश शंकर विद्यार्थी, माखनलाल चतुर्वेदी और रामवृक्षबेनीपुरी पर पुस्तकों का भी प्रकाशन किया गया है। स्वतंत्र भारत में खेल पत्रकारिता पर भी शोध कर पुस्तक का प्रकाशन किया गया है। इन सभी पुस्तकों का विमोचन किया गया।

Read Full Text......

Thursday, December 10, 2009

जनसंपर्क कर्मियों ने सीखे फोटोग्रॉफी के गुर

अफसर भी चलाएंगे अब कैमरा, मीडिया के साथ हमकदम होने की कोशिश
मीडिया की मौजूदा तेज़ रफ्तार में जनसंपर्क कर्मियों के लिए उसका हमकदम बनना भी आज की दरकार है। इसी हकीकत के मद्देनज़र जनसंपर्क संचालनालय ने अपने अफसरों को दक्ष करने की ठान ली है। कलम के विभिन्न रूपों से अवगत कराने के साथ ही आज इस दफ्तर ने फोटोग्रॉफी के गुर भी इन अफसरों को सिखाए। इसके पहले विभिन्न संभागीय और ज़िला मुख्यालयों पर मैदानी अफसरों को यह प्रशिक्षण दिया गया था।
जानकारियों के संप्रेषण में छायाचित्रों का अपना महत्व होता है। छायाचित्र खुद पूरी कहानी बयाँ कर देते हैं। इसी तथ्य के केन्द्र में तय किया गया था कि जनसंपर्क अधिकारियों को छायाचित्र की उपयोगिता और बारीकियाँ बताई जाएँ। 
इस क्षेत्र की पहली जरूरत तो कैमरा चलाना है लिहाजा इसकी संपूर्ण कार्यविधि अफसरों को बताई गई। माना गया था कि अगर अपरिहार्य कारणवश कैमरामेन कार्यक्रम कव्हर करने न पहुँच सके तो उसकी भूमिका पीआरओ भी अच्छे से निभा सकते हैं। इस कसौटी पर पूरा उतरने के लिए उन्हें किन चीजों पर फोकस करना है और इसके क्या तरीके होंगे, ये सारी जानकारियाँ इस मौके पर जुटाई गईं।
पहले दौर में संभाग और जिला मुख्यालयों पर जाकर मैदानी अफसरों के लिए यह कवायद की गई थी। मैदानी क्षेत्रों में अक्सर सरकारी कार्यक्रमों की फोटोग्रॉफी को लेकर कई व्यावहारिक कठिनाइयाँ सामने आती रही हैं। इन्हें समग्र दूर करने के लिए वहाँ जनसंपर्क अधिकारियों को कैमरे उपलब्ध करा कर फोटोग्राफी की अब ट्रैनिंग भी दे दी गई है। 
इसके नतीजे में आज अधिकांश जिलों में ये अफसर ही फोटो खीच रहे हैं। संचालनालय में इस सेवा को वक्त के साथ काफी व्यापक कर दिया गया है और आधुनिकतम डीजिटल वीडियो और स्टील कैमरे यहां जुटाए गए हैं।
जनसंपर्क अधिकारियों को फोटोग्राफी में पारंगत कर विभाग मीडिया की दैनंदिनी जरूरतों को पूरा करने की दिशा में इसके प्रशिक्षण के साथ एक कदम और आगे आ गया है। प्रशिक्षण के मौके पर अपर संचालक समाचार श्री आर.एम.पी. सिंह ने फोटोग्रॉफी के कई तकनीकी पक्षों की बारीकियां समझाईं तो इस सेवा की संपूर्ण प्रक्रिया पर संयुक्त संचालक श्री आर.माकोड़े ने उपयोगी बातें बताईं। 
संचालनालय के समाचार प्रभाग से जुड़े सारे अफसरों को इस मौके पर वरिष्ठ और अनुभवी फोटोग्रॉफरों श्री खुर्शीद अली बहादुर और श्री प्रकाश कुलकर्णी ने कैमरा संचालन के तकनीकी पक्षों से अवगत कराया।

Read Full Text......

Sunday, December 6, 2009

मीडिया बाज़ारवाद से लड़े, बाज़ार से नहीं

अखबार सदैव बाज़ार में रहे हैं और वे बाज़ार से बाहर रह भी नहीं सकते। अखबारों की बाज़ारवाद के खिलाफ लड़ाई जरूरी है किन्तु बाज़ार से नहीं। उसे यह साबित करना होगा कि वह घोर बाज़ारी है लेकिन बाज़ारू नहीं।

मीडिया के सामने बाज़ारू हुए बिना बाज़ारी होने की चुनौती है। यह बात वरिष्ठ पत्रकार श्री राहुल देव ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय द्वारा समाचार पत्रों के भविष्य विषय पर आधारित दो दिवसीय परिसंवाद में कही।
पत्रकार श्री देव ने कहा कि अखबारों के लिये सबसे बड़ी चुनौती गूगल है। उन्होंने यह सवाल उठाया कि जब किसी संवाद में सभी सहमतों की उपस्थिति होगी तो वहां संवाद कैसे हो सकता है। उनका मानना था कि मालिकों और प्रबंधकों का पक्ष सामने होगा तो संवाद कायम किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि अखबारों का व्यावसायिक भविष्य सुरक्षित है, चिन्ता मूल्यों और कर्म के प्रति होनी चाहिये। संगठित पत्रकारों और पाठकों की शक्ति मिलकर समाचार पत्रों की चुनौतियों का सामना कर सकती है।
परिसंवाद में मीडिया की साख विषय पर बोलते हुए भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली के एसोसिएट प्रो. आनंद प्रधान ने कहा कि विज्ञापनदाता समाचारों के कन्टेन्ट को भी प्रभावित करते हैं
समाचार पत्रों से पब्लिक स्फीयर खत्म होता जा रहा है। युवा वर्ग के लिये पत्र-पत्रिकाएं अप्रासंगिक हो रही हैं। उन्होंने प्राइवेट इक्वटी और नेट कन्टेन्ट जैसे घातक प्रयोगों पर भी चिन्ता व्यक्त की। यह कुछ चुनौतियां अखबार के अन्दर की चुनौतियां हैं जिसके लिये पाठक और समाज को हस्तक्षेप करना होगा। हमें दबाव डालना होगा कि राष्ट्रीय अखबार देश की बात करें।
परिसंवाद में सहारा टाइम्स के सम्पादक श्री उदय सिन्हा ने कहा कि आज सिर्फ पत्रकारिता नहीं बल्कि हर प्रोफेसन की साख गिरी है। अखबार पढ़ना और चुनना एक चैतन्य फैसला होता है। टेलीविजन शाम का मीडिया है लेकिन वह अखबारों को चुनौती नहीं दे सकता। उन्होंने यह भी कहा कि इन्टरनेट भी भारत में समाचार पत्रों के लिये कोई खतरा नहीं है।
वरिष्ठ पत्रकार श्री राजेन्द्र प्रभु ने कहा कि पत्रकारिता की साख गिरने का एक मात्र कारण उनकी विज्ञापन पर बढ़ती निर्भरता है। पत्रकारिता का सबसे पहला सिद्धांत यह होना चाहिये कि हम समाचार को ठीक ढंग से लिखें।
द्वितीय सत्र में 'सम्पादकों की भूमिका' पर चर्चा करते हुए कुलपति श्री अच्युतानंद मिश्र ने कहा कि सम्पादक की भूमिका उसके नैतिक कर्म पर निर्भर होती है। भारत में सम्पादन की एक गौरवशाली परम्परा रही है और यहां सम्पादकों और प्रकाशकों में अनुकरणीय रिश्ते रहे हैं।
सम्पादक की भूमिका पर बोलते हुए श्री रमेश नैयर ने कहा कि सामाजिक गंदगी को साफ करने का काम सम्पादक ही कर सकता है। लखनऊ से आये वरिष्ठ पत्रकार श्री विभांशु दिव्याल ने भी इस मौके पर संबोधित किया।
पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष श्री पुष्पेन्द्र पाल सिंह ने सत्रों का सारांश प्रस्तुत किया। परिसंवाद के सत्रों का संचालन विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री प्रकाश साकल्ले एवं जनसंचार विभाग के अध्यक्ष श्री संजय द्विवेदी ने किया।

Read Full Text......

पत्रकारों की लायसेसिंग संबंधी की अनुशंसा पर केन्द्र रुख स्पष्ट करें

प्रसार भारती पब्लिक ब्रॉडकास्टर की भूमिका निभाए
मध्यप्रदेश के जनसंपर्क मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने आज यहां सूचना मंत्रियों के सम्मेलन में लिब्राहन आयोग द्वारा पत्रकारों की लाइसेसिंग की अनुशंसा का मुद्दा उठाकर इस संबंध में भारत सरकार से अपनी नीति स्पष्ट करने की अपेक्षा की। 
सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा आयोजित राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के सूचना मंत्रियों के 27वे सम्मेलन का उद्घाटन केन्द्रीय सूचना प्रसारण मंत्री श्रीमती अंबिका सोनी ने किया। जनसंपर्क मंत्री के साथ राज्य के जनसंपर्क सचिव श्री मनोज श्रीवास्तव ने भी बैठक में भाग लिया।
श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने अपने भाषण में पत्रकारों की लाइसेसिंग के संबंध में लिब्राहन आयोग की अनुशंसा से असहमति व्यक्त करते हुये कहा कि क्या हम पत्रकारों की अधिस्वीकृति से उनकी लाइसेसिंग के युग में प्रवेश कर रहे हैं ? लिब्राहन आयोग ने अपनी अनुशंसा में कहा है कि अन्य प्रोफेशन्स की तरह पत्रकारों को भी लायसेंस से ही काम करने की व्यवस्था आवश्यक है और उन्हें भी अनुशासनिक कार्रवाई का पात्र बनाया जाना चाहिये तथा व्यावसायिक कदाचार सिद्ध होने पर पत्रकारों के काम का अधिकार निलंबित कर देना चाहिये।
केबल नीति में 74 प्रतिशत विदेशी निवेश की अनुमति देशहित में नहीं
श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने केन्द्र सरकार द्वारा नवंबर माह में केबल आपरेटर्स के लिये लाई गई हिट्स संबंधी नीति में 74 प्रतिशत तक विदेशी पूंजी निवेश की अनुमति देने पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुये कहा कि यह देशहित के अनुकूल नहीं है। स्वयं अमेरिका ने अपने टेलीकम्युनिकेशन एक्ट में विदेशी निवेश को 20 प्रतिशत तक सीमित रखा है। 
वर्तमान केबल एक्ट एसओएस और केबल आपरेटरों पर प्रभावी नियमन नहीं कर पा रहा है। समाज और उपभोक्ताओं के हित में केबल एक्ट को और मजबूत बनाये जाने की उन्होंने मांग की। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार केबल आपरेटर्स के संबंध में एक प्रमोशनल पालिसी लाये। केबल आपरेटरों के जरिये राजनैतिक इस्तेमाल और व्यक्तिगत आक्रमण आदि पर निगरानी रखने का भी उन्होंने सुझाव दिया। 
श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने बताया कि मध्यप्रदेश में कापी राईट एक्ट को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिये विशेष प्रकोष्ठ का गठन किया है। उन्होंने वीडियो पायरेसी रोकने के लिये पायरेट गेंगों को ट्रेक कर उनकी परसम्पत्तियों को फ्रीज करने का सुझाव दिया। उन्होंने डिजीटल पायरेसी रोकने के लिये भी ज्यादा सख्त कदम उठाने की जरूरत बताई। 
उन्होंने बताया कि प्रदेश में मनोरंजन कर की दरों का युक्तियुक्तकरण किया गया है। मध्यप्रदेश में मनोरंजन कर की दरें अन्य राज्यों की तुलना में कम हैं। मनोरंजन कर को प्रस्तावित गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स के अंतर्गत लाने के मामले में राज्य के विवेकाधिकार के मुद्दों पर विशेष ध्यान देने की बात कहीं। केबल क्षेत्र के डिजिटलीकरण पर उन्होंने सहमति व्यक्त की।
प्रसार भारती पब्लिक सर्विस ब्राडकास्टर की भूमिका निभाये
जनसंपर्क मंत्री श्री शर्मा ने प्रसार भारती द्वारा जनहित के मुद्दों, लोकधर्मी कार्यक्रमों और सांस्कृतिक उत्सवों के प्रसारण के लिये शुल्क लिये जाने का विरोध करते हुये कहा कि प्रसार भारती स्वयं को पब्लिक सर्विस ब्राडकास्टर बताता है और लोकधर्मी विषयों के प्रसारण के लिये शुल्क मांगकर कामशिर्यल संगठन की भूमिका में आ जाता है, जो आपत्तिजनक है। 
उन्होंने इस संबंध में खजुराहो समारोह, तानसेन समारोह और मुख्यमंत्री के जनशिकायत निवारण की जानकारी के लिये दूरदर्शन द्वारा शुल्क मांगे जाने का उल्लेख किया। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा सामुदायिक रेडियो के लिये भारत सरकार को भेजे गये प्रस्तावों को मंजूरी नहीं दिये जाने का मामला भी उन्होंने उठाया। श्री शर्मा ने ब्राडकास्टिगं सर्विस रेगुलेशन के संबंध में एक स्वतंत्र टीआरपी रेगुलेशन बनाये जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि 11 वीं योजना के अंत तक लगभग पौने पांच सौ चैनल हो जायेंगे। टीआरपी के बारे में ग्रामीण क्षेत्रों या एक लाख से कम जनसंख्या के कस्बों के लोगों के दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व होता ही नहीं है। टीआरपी टारगेट ग्रुप के निर्णय को विकृत कर रही है।
पुस्तकों के लिये स्पष्ट प्रावधान हो
जनसंपर्क मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने प्रेस एंड बुक्स् रजिस्ट्रेशन एक्ट 1867 में प्रस्तावित संशोधनों को उपयोगी बताते हुये इसमें से पुस्तकों को बाहर करने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि इस प्रावधान को इस एक्ट से हटाया जाता है तो पुस्तकों के रजिस्ट्रेशन के लिये अलग से स्पष्ट प्रावधान किया जाना चाहिये। 
श्री शर्मा ने आरएनआई द्वारा शीर्षक आवंटन में सर्तकता बरतने की आवश्यकता बताई। प्रसारण सेवा विनियमन विधेयक 2007 के संबंध में जनसंपर्क मंत्री ने सहमति व्यक्त की। उन्होंने इस अधिनियम में दिशा निर्देश और नियम बनाने के लिये राज्यों को कोई शक्तियां प्रदान नहीं करने पर आपत्ति व्यक्त की। श्री शर्मा ने भारतीय पब्लिक रिलेशंस कौंसिल के गठन, भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय और राज्य स्तर के जनसंपर्क एवार्ड और केन्द्र तथा राज्य सरकारों के सूचना विभागों के बीच अधिकाधिक समन्वय और कार्यक्रम संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव दिये।

Read Full Text......

Saturday, December 5, 2009

गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान

डॉ. नंदकिशोर त्रिखा सम्मानित
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय द्वारा स्थापित गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान वरिष्ठ पत्रकार डॉ. नंद किशोर त्रिखा को प्रदान किया गया। स्थानीय समन्वय भवन में आयोजित एक समारोह में भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष एवं न्यायमूर्ति श्री जी.एन. रे ने यह सम्मान श्री त्रिखा को प्रदान किया। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र प्रभु, स्वदेश के प्रबंध संपादक राजेन्द्र शर्मा, विश्वविद्यालय के कुलपति श्री अच्युतानंद मिश्र एवं कुलाधिसचिव ओ.पी. दुबे विशेष रूप से उपस्थित थे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति श्री रे ने कहा कि मीडिया समाज का दर्पण होता है, पर आज वह दोराहे पर खड़ा है। उसमें गिरावट आ रही है। यह देश और प्रजातंत्र के लिए घातक है। मीडिया को इस स्थिति से उभारने के लिए पत्रकारों को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि श्री त्रिखा का सम्मान पत्रकारिता के आदर्शों का सम्मान है।
श्री त्रिखा ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज पत्रकारिता के सामने सबसे बड़ा संकट विश्वसनीयता का है। पत्रकारिता अपनी जड़ से कट रही है, आज उसको नैतिक और आत्मानुशासी बनाने की जरूरत है। आज आवश्यकता इस बात की है कि मीडिया विश्वसनीयता का सहज सोच और संस्कार अपने कर्म में प्रतिस्थापित करे। पत्रकारिता को अपने उत्तरदायित्व का बोध करना होगा। 
उन्होंने कहा कि यदि पत्रकारिता को जीवित रखना है तो उसे अपनी विश्वसनीयता के प्रति संवेदनशील और सतर्क होना होगा। उन्होंने कहा कि 'लोक अभियान' चलाकर मीडिया को ऐसा किए जाने के लिए बाध्य किया जाना चाहिए। उन्होंने 'मीडिया विश्वसनीयता सूचकांक' निर्धारित करने की बात कही। उन्होंने कहा इसके लिए विश्वविद्यालय में अध्ययन पीठ स्थापित किया जाना चाहिए। उन्होंने सम्मान में प्रदान की गई राशि में से इस कार्य के लिए 'बीज राशि' देने की भी घोषणा की।
वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र प्रभु ने श्री त्रिखा के पत्रकारीय आदर्शों के प्रति समर्पण को याद किया। स्वदेश के प्रबंध संपादक श्री राजेन्द्र शर्मा ने कहा कि आज पत्रकारिता की डगर कठिन है। डॉ. त्रिखा ने पत्रकारिता के उच्चतम आदर्शों को छुआ और निरंतर पत्रकारिता के धर्म का पालन किया। 
राष्ट्रवादी पत्रकारिता के पक्षधर डॉ. त्रिखा पत्रकारिता की विधाओं की त्रिवेणी हैं, उन्होंने पत्रकार, लेखक और अध्यापक तीनों रूपों में अपनी छाप छोड़ी है।
इसके पूर्व न्यायमूर्ति श्री रे ने शाल, श्रीफल और प्रशस्ति पत्र तथा एक लाख एक रुपये सम्मान राशि प्रदान कर श्री त्रिखा को सम्मानित किया। विश्वविद्यालय के कुलपति श्री अच्युतानंद मिश्र ने प्रशस्ति पत्र का वाचन किया।
आभार प्रदर्शन कुलाधिसचिव ओ.पी. दुबे ने किया। कार्यक्रम का संचालन जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष संजय द्विवेदी ने किया।

Read Full Text......

मीडिया को आत्म-विश्लेषण की जरूरत - जस्टिस श्री रे

 खबरों में मिलावट हो रही है
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय द्वारा 'समाचार पत्रों का भविष्य' विषय पर एकाग्र दो दिवसीय राष्ट्रीय परिसंवाद का उद्घाटन भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री जी.एन. रे ने किया। परिसंवाद में देश व प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार शिरकत कर रहे हैं।
समन्वय भवन में आयोजित इस परिसंवाद में भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष एवं न्यायमूर्ति श्री जी.एन. रे ने प्रिंट मीडिया के भविष्य को सकारात्मक बताते हुए कहा कि वैश्वीकरण और नया मीडिया के बढ़ते वर्चस्व और प्रतिद्वंदिता से जूझते अखबारों को भारतीय समाज में अपना स्थान सुरक्षित रखना है तो उसे चौथे स्तंभ की अपनी भूमिका पर ध्यान देते हुए जन-सरोकारों से जुड़ना होगा।
आज मीडिया को आत्मविश्लेषण की जरूरत है। उन्होंने मीडिया में बड़े समाचार पत्र समूहों के बढ़ते वर्चस्व पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे पाठक और दर्शक को सूचना से वंचित किया जा रहा है, जो लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। परिसंवाद के मुख्य वक्ता के रूप में विचार व्यक्त करते हुए डॉ. राजेन्द्र प्रभु ने कहा कि हम सूचनाओं और समाचार संचार क्रांति और प्रौद्योगिकी की सूनामी के दौर से गुजर रहे हैं। समाचार पत्र खत्म नहीं होंगे उनका रूप बदलेगा, उनकी पहुंच ज्यादा व्यापक और गहरी होगी।
आशा की जानी चाहिए कि वह ज्यादा ताकतवर होंगे। उन्होंने कहा कि नया मीडिया प्रभावी हो सकता है पर पत्रकारिता की परम्पराएं व सरोकार नहीं बदलेंगे वह शाश्वत है। इसके पूर्व विषय का प्रवर्तन करते हुए कुलपति श्री अच्युतानंद मिश्र ने कहा कि पिछली दो शताब्दियों से अखबारों ने जनसरोकार और जनसंघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, बदलते वैश्विक और राष्ट्रीय परिदृश्य में हमें समाचार पत्रों की प्रासंगिक भूमिका और उत्तरदायित्व के बारे में विचार करना होगा।
वरिष्ठ पत्रकार श्री महेश श्रीवास्तव ने कहा कि हमारे देश में अखबारों का आर्थिक भविष्य उज्जवल और सुरक्षित है, पर सामाजिक सरोकार, पत्रकारिता के आदर्श सिद्धांत की दृष्टि से यह पतन की ओर जा रहे हैं। पत्रकारिता का नैतिक पक्ष कमजोर हुआ है। इसने समाचार पत्रों की विश्वसनीयता को खण्डित किया है। आज खबर दी नहीं जा रही, बेची जा रही है।
खबरों में मिलावट हो रही है। यदि यही स्थिति रही तो अखबार समाज द्वारा नकार दिये जायेंगे। इसे रोकने के लिए सामाजिक आंदोलन खड़ा करना होगा। नई दुनिया के प्रधान संपादक श्री अभय छजलानी जी द्वारा भेजा गया आलेख का प्रथम सत्र में वाचन किया गया।
श्री छजलानी जी ने अपने आलेख में पत्रकारिता के विभिन्न संकटों को विश्लेषण के साथ प्रस्तुत किया है। उन्होंने संपादकीय और तकनीकी दोनों चुनौतियों को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया। परिसंवाद के प्रथम सत्र का संचालन पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष श्री पुष्पेन्द्र पाल सिंह ने किया।
समाचार पत्र उद्योग स्वामित्व का स्वरूप और चुनौतियां विषय पर केन्द्रित द्वितीय सत्र की अध्यक्षता स्वदेश के प्रबंध संपादक श्री राजेन्द्र शर्मा ने की। डॉ. आनंद प्रधान, छत्तीसगढ़ हिन्दी ग्रंथ अकादमी के संचालक रमेश नैयर व वरिष्ठ पत्रकार विभांशु दिव्याल ने विचार प्रकट किये। द्वितीय सत्र का संचालन पत्रकार विजय मनोहर तिवारी ने किया।

Read Full Text......

Sunday, November 22, 2009

अधिकारी मीडिया ट्रायल से बचें – न्यायमूर्ति श्री के.के. वर्मा

 मीडिया का हस्तक्षेप बढ़ा 
अभियोजन एवं अनुसंधान अधिकारी को मीडिया ट्रायल से यथासंभव बचना चाहिये, ताकि प्रकरण की वास्तविकता और अनुसंधान कार्य प्रभावित ना होने पायें। यह विचार न्यायमूर्ति श्री के.के. वर्मा ने आज यहाँ आर.सी.व्ही.पी. प्रशासन अकादमी में अभियोजन अधिकारियों के प्रशिक्षण समापन सत्र को संबोधित करते हुये व्यक्त किये।
न्यायमूर्ति श्री वर्मा ने कहा कि आज इलेक्ट्रानिक मीडिया तथा प्रिंट मीडिया में किसी भी घटनाक्रम को लेकर तथा हाईप्रोफाईल मामलों में न्यायालय में हुये गवाहों के कथनों में तथा अद्यतन स्थिति के संबंध में चर्चा करता है। मीडिया की इन तीव्र गतिविधियों से कुछ हद तक आपराधिक न्याय प्रणाली प्रभावित होने लगीं हैं।
घटना घटित होने अथवा घटना के बाद एफ.आई.आर दर्ज न होने आदि के संबंध में भी मीडिया का हस्तक्षेप बढ़ गया है। इससे आम जनता का मनोभाव आकर्षित होना स्वाभाविक है। घटना की वास्तविकता चाहे सही रूप में हो या घटना के बारे में वह लोगों के विचार हों, यद्यपि लोगों के विचारों का कोई वैधानिक सात्विक मूल्य नहीं होता है।
इसलिये अनुसंधान अधिकारी को मीडिया ट्रायल से अपने आपको परे रखना चाहिये, ताकि किसी भी प्रकार से अनुसंधान प्रभावित न हो और वास्तविक तथ्य तथा साक्ष्य रिकार्ड पर आयें। उन्होंने कहा कि कई बार न्यायालय की कार्यवाही के संबंध में भी अभियोजक से प्रश्न-उत्तर किये जाते हैं, अभियोजक को उत्तर देते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिये कि उनके द्वारा व्यक्त विचार से किसी भी तरह प्रकरण की वास्तविकता प्रभावित ना हो।
संचालक लोक अभियोजना श्री नवल किशोर गर्ग ने सभी प्रशिक्षु अधिकारियों के उज्जवल भविष्य की शुभकामनायें दी। इस अवसर पर प्रशिक्षण संचालक डॉ. नजमी, संयुक्त संचालक श्री मानसिंह अचाले, उप संचालक श्री सतीश दिनकर, प्रशिक्षु अभियोजन अधिकारी आदि उपस्थित थे।

Read Full Text......
Related Posts with Thumbnails
 
Blog template by mp-watch.blogspot.com : Header image by Admark Studio