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Friday, May 28, 2010

मीडिया और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सतत संवाद जरूरी

 "संकटकाल में मीडिया से संबंध" विषय पर कार्यशाला
गृह मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता ने कहा है कि देश में कानून का प्रवर्तन करने वाली एजेंसियों तथा मीडियाकर्मियों के बीच सतत संवाद बहुत जरूरी है। संवाद की कमी के कारण अनेक ऐसी समस्यायें पैदा होती हैं जिन्हें आसानी से टाला जा सकता है।

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Sunday, April 11, 2010

अधिकारियों का ईमानदारी एवं निष्ठा से कर्त्तव्य पालन

जनहित वाद विषयक कार्यशाला में विशेषज्ञ वक्ताओं के विचार
प्रशासनिक अधिकारियों को अपने कर्त्तव्य का पालन पूर्ण ईमानदारी एवं निष्ठा से करना चाहिये, तभी समाज के कमजोर एवं गरीब लोगों को न्याय प्राप्त होगा। इस आशय के उद्गार आज यहां आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में “जनहित वादा” (पब्लिक इन्ट्रेस्ट लिटीगेशन)

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Wednesday, December 23, 2009

प्रदेश में बाल श्रम उन्मूलन का नया मॉडल

उज्जैन और जबलपुर जिले चुने, राज्य सरकार जरूरी सहयोग देगी
मध्यप्रदेश में बाल श्रम उन्मूलन की दिशा में चल रहे प्रयासों पर अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) ने संतोष जताया है। उसने इस काम को और गति तथा नई दिशा देने के लिए समन्वय (कन्वर्जेन्स) को लेकर एक नया मॉडल तैयार कर उसपर अमल का फैसला किया है। इस मकसद से प्रदेश के दो जिलों उज्जैन और जबलपुर को चुना गया है।इस सिलसिले में श्रम मंत्री श्री जगन्नाथ सिंह ने आज यहाँ आयोजित एक कार्यशाला में उच्च स्तरीय विचार-विमर्श किया। उन्होंने बताया कि नए मॉडल के तहत बाल श्रमिकों को इस काम से हटा कर उनके परिवार को ज्यादा कारगर तरीके से सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जाएगा। श्री सिंह का कहना था कि इस दिशा में जागरूकता के ग्राफ को ऊँचा करने और सरकारी मशीनरी को ज्यादा सक्रिय करने की जरूरत होगी। इसके बगैर अपेक्षित नतीजे नहीं आ पाएंगे।
इस मौके पर हुई कार्यशाला को दो भिन्न सत्रों में बाँट कर विभिन्न समूह तैयार कर मॉडल की रणनीति पर सिरे से चर्चा की गई। इनमें श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों के बतौर भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री श्री सुल्तान सिंह शेखावत, मध्यप्रदेश इंटक के अध्यक्ष श्री आर.डी. त्रिपाठी, महामंत्री सीटू श्री प्रमोद प्रधान, महासचिव एटक श्री रूपसिंह चौहान आदि भी शामिल किए गए थे।
कार्यशाला के सत्रों में संबोधन और मार्गदर्शन के लिए अमेरिकी दूतावास के श्री समीर सेठ और श्री सुकेश के अलावा प्रमुख सचिव श्रम श्री सेवाराम, श्रमायुक्त श्री पी.के. दास, अपर श्रमायुक्त श्री एल.के. पाण्डेय, श्रम कल्याण मंडल के उपायुक्त श्री प्रभात दुबे, अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की सुश्री प्रीत वर्मा तथा श्री नीतू लाम्बा ने संबोधित किया।

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Saturday, December 5, 2009

मीडिया को आत्म-विश्लेषण की जरूरत - जस्टिस श्री रे

 खबरों में मिलावट हो रही है
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय द्वारा 'समाचार पत्रों का भविष्य' विषय पर एकाग्र दो दिवसीय राष्ट्रीय परिसंवाद का उद्घाटन भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री जी.एन. रे ने किया। परिसंवाद में देश व प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार शिरकत कर रहे हैं।
समन्वय भवन में आयोजित इस परिसंवाद में भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष एवं न्यायमूर्ति श्री जी.एन. रे ने प्रिंट मीडिया के भविष्य को सकारात्मक बताते हुए कहा कि वैश्वीकरण और नया मीडिया के बढ़ते वर्चस्व और प्रतिद्वंदिता से जूझते अखबारों को भारतीय समाज में अपना स्थान सुरक्षित रखना है तो उसे चौथे स्तंभ की अपनी भूमिका पर ध्यान देते हुए जन-सरोकारों से जुड़ना होगा।
आज मीडिया को आत्मविश्लेषण की जरूरत है। उन्होंने मीडिया में बड़े समाचार पत्र समूहों के बढ़ते वर्चस्व पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे पाठक और दर्शक को सूचना से वंचित किया जा रहा है, जो लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। परिसंवाद के मुख्य वक्ता के रूप में विचार व्यक्त करते हुए डॉ. राजेन्द्र प्रभु ने कहा कि हम सूचनाओं और समाचार संचार क्रांति और प्रौद्योगिकी की सूनामी के दौर से गुजर रहे हैं। समाचार पत्र खत्म नहीं होंगे उनका रूप बदलेगा, उनकी पहुंच ज्यादा व्यापक और गहरी होगी।
आशा की जानी चाहिए कि वह ज्यादा ताकतवर होंगे। उन्होंने कहा कि नया मीडिया प्रभावी हो सकता है पर पत्रकारिता की परम्पराएं व सरोकार नहीं बदलेंगे वह शाश्वत है। इसके पूर्व विषय का प्रवर्तन करते हुए कुलपति श्री अच्युतानंद मिश्र ने कहा कि पिछली दो शताब्दियों से अखबारों ने जनसरोकार और जनसंघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, बदलते वैश्विक और राष्ट्रीय परिदृश्य में हमें समाचार पत्रों की प्रासंगिक भूमिका और उत्तरदायित्व के बारे में विचार करना होगा।
वरिष्ठ पत्रकार श्री महेश श्रीवास्तव ने कहा कि हमारे देश में अखबारों का आर्थिक भविष्य उज्जवल और सुरक्षित है, पर सामाजिक सरोकार, पत्रकारिता के आदर्श सिद्धांत की दृष्टि से यह पतन की ओर जा रहे हैं। पत्रकारिता का नैतिक पक्ष कमजोर हुआ है। इसने समाचार पत्रों की विश्वसनीयता को खण्डित किया है। आज खबर दी नहीं जा रही, बेची जा रही है।
खबरों में मिलावट हो रही है। यदि यही स्थिति रही तो अखबार समाज द्वारा नकार दिये जायेंगे। इसे रोकने के लिए सामाजिक आंदोलन खड़ा करना होगा। नई दुनिया के प्रधान संपादक श्री अभय छजलानी जी द्वारा भेजा गया आलेख का प्रथम सत्र में वाचन किया गया।
श्री छजलानी जी ने अपने आलेख में पत्रकारिता के विभिन्न संकटों को विश्लेषण के साथ प्रस्तुत किया है। उन्होंने संपादकीय और तकनीकी दोनों चुनौतियों को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया। परिसंवाद के प्रथम सत्र का संचालन पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष श्री पुष्पेन्द्र पाल सिंह ने किया।
समाचार पत्र उद्योग स्वामित्व का स्वरूप और चुनौतियां विषय पर केन्द्रित द्वितीय सत्र की अध्यक्षता स्वदेश के प्रबंध संपादक श्री राजेन्द्र शर्मा ने की। डॉ. आनंद प्रधान, छत्तीसगढ़ हिन्दी ग्रंथ अकादमी के संचालक रमेश नैयर व वरिष्ठ पत्रकार विभांशु दिव्याल ने विचार प्रकट किये। द्वितीय सत्र का संचालन पत्रकार विजय मनोहर तिवारी ने किया।

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Sunday, November 22, 2009

विश्व व्यापार एवं अंर्तराष्ट्रीय कूटनीति पर व्याख्यान

 आयात-निर्यात में आये परिवर्तनों एवं विश्व व्यापार संगठन पर चर्चा

आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी भोपाल में अखिल भारतीय सिविल सेवाओं के अधिकारियों के जारी प्रशिक्षण के अंतर्गत आयोजित किये जा रहे विशेष व्याख्यान, सेमीनार एवं कार्यशालाओं के क्रम में शनिवार को श्री पी.के. दास, संयुक्त सचिव वाणिज्य मंत्रालय, भारत सरकार का व्याख्यान आयोजित किया गया।
प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुये श्री दास ने वर्तमान विश्व व्यापार की प्रवृत्तियों, विश्व व्यापार संगठन एवं उसके अस्तित्व में आनें के बाद से अब तक आये परिवर्तनों पर चर्चा की। उन्होंने विश्व व्यापार में भारत के योगदान और कमियों पर प्रकाश भी डाला। इसके साथ वर्तमान में आयात-निर्यात में आये परिवर्तनों एवं विश्व व्यापार संगठन के द्वारा नवीन अवसरों के संबंध में प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।
श्री दास ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफ.टी.ए.) एवं रीजनल ट्रेड एग्रीमेंट के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुये इसकी प्रासंगिकता को प्रतिपादित किया। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुये अफ्रीकी देशों के साथ भारत के अंर्तराष्ट्रीय व्यापार में कमी, चीन की भूमिका, द्विपक्षीय समझौतों की उपादेयता के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।

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Friday, November 20, 2009

न्यायालय के आदेशों का पालन जरूरी-न्यायमूर्ति श्री जे.एस. वर्मा

“न्यायालय की अवमानना अधिनियम’' कार्यशाला

कानून का शासन स्थापित करने के लिये न्यायालयीन आदेशों का पालन किया जाये। भले ही ऐसे आदेश से आप असहमत भी हों, उन्हें जब तक वैधानिक उपचार के माध्यम से स्थगित ना कर लिया जाये, उनका पालन हो।
इस आशय के उद्गार आज यहां आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासन अकादमी में “न्यायालय की अवमानना अधिनियम’' कार्यशाला को भारत के भूतपूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री जे.एस. वर्मा ने अपने संबोधन में व्यक्त किये। कार्यक्रम में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय,भोपाल के संचालक श्री एस.एस. सिंह, प्रमुख सचिव विधि विभाग श्री एन.के. गुप्ता, उच्च न्यायालय दिल्ली के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री आदित्य मदान, प्रशासन अकादमी महानिदेशक डॉ. संदीप खन्ना एवं संचालक श्री एम.के. वार्ष्णेय के अलावा अखिल भारतीय सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी, प्रशिक्षु सहायक जिला अभियोजन अधिकारी आदि उपस्थित थे।
न्यायमूर्ति श्री वर्मा ने कहा कि शासन की ओर से पेश की जाने वाली अपीलें समयबाधित होती है, अत: उनमें तत्परता पूर्वक कार्यवाही की जानी चाहिये। न्यायाधीशों को न्याय का सम्मान करना चाहिये और व्यक्तिगत हितों को न्याय के आड़े नहीं आने देना चाहिये।
उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19(1) में विचार प्रकट करने की स्वतंत्रता सभी को दी गयी है। परन्तु संविधान के अनुच्छेद 19 (2) में इस स्वतंत्रता में कुछ उपयुक्त प्रतिबंध भी लगाये गये हैं । कोई प्रतिबंध उपयुक्त है या नहीं, इसका निर्णय न्यायपालिका को करना है।
परन्तु विचारों की स्वतंत्रता की आड़ में न्यायपालिका की अनावश्यक अवमानना नहीं की जा सकती। श्री वर्मा ने बताया कि भारतीय न्यायपालिका समूचे विश्व में शाक्तिशाली है, जिसकी सर्वोच्चता बनाये रखने की जिम्मेदारी देश के समस्त नागरिकों की है।
राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के संचालक श्री सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय न्यायपालिका के पास तलवार या पैसे की नहीं पेन (कलम) की ताकत होती है। न्यायदान की कार्यवाही हेतु कार्यपालिका का सहयोग आवश्यक है। न्यायदान में आने वाली रूकावटों को दूर करने के लिये न्यायपालिका के पास “अवमानना” रूपी एक प्रमुख अधिकार है, जिसका सोच समझकर उपयोग होना चाहिये।
दिल्ली उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मदान ने कार्यशाला को संबोधित करते हुये कहा कि अवमानना की स्थिति न्यायालय के आदेशों का पालन न करने से निर्मित होती है। या तो ये आदेश संबंधित को बतलाये नहीं जाते अथवा जानबूझकर आदेश का पालन नहीं किया जाता है।
अवमानना से बचने के लिये प्रभारी अधिकारी अपने सरकारी वकील से सतत संपर्क बनाये रखें। इंटरनेट के माध्यम से अब हाई कोर्ट के आदेशों की जानकारी अब प्रभारी अधिकारी ले सकते हैं।  उन्होंने कहा कि प्रभारी अधिकारी (ओ.आई.सी.) सरकारी वकील को तथ्यात्मक सही जानकारी दें। प्रमुख सचिव विधि विभाग श्री गुप्ता ने भी न्यायालय की अवमानना से बचने के लिये प्रभारी अधिकारियों को आदेशानुसार समय पर सही जानकारी कोर्ट में प्रस्तुत करने का परामर्श दिया।
प्रारंभ में अकादमी महानिदेशक डॉ. खन्ना ने कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों एवं प्रशिक्षु अधिकारियों का स्वागत करते हुये कार्यशाला आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विख्यात विधि विशेषज्ञों के परामर्श अनुसार प्रशिक्षु अधिकारी भविष्य में प्रभारी अधिकारी के रूप में कार्यवाही करके न्यायालय की अवमानना से बच सकेंगे। इस अवसर पर संचालक लोक अभियोजन श्री एन.के. गर्ग, संकाय सदस्य डॉ. नजमी एवं श्री भारद्वाज उपस्थित भी थे।

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Thursday, November 19, 2009

नैतिक मूल्यों की स्थापना से अपराधों में कमी आयेगी

 अभियोजक निष्पक्षता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर
भोपाल के आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासन अकादमी में अभियोजन अधिकारियों के चौथे समूह प्रशिक्षण सत्र के समापन अवसर पर न्यायमूर्ति श्री नारायणसिंह आजाद ने अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा कि यदि समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना हो तो अपराध स्वयंमेव कम हो जावेंगे किन्तु ऐसा संभव न होने से लागतार बढ़ते रहेंगे।

अपराधों पर रोक लगाने के लिए आवश्यक हैं कि अभियोजन की भूमिका निष्पक्ष हो। पुलिस अपराध के अनुसंधान में आवश्यक सावधानी बरतते हुये वैंधानिक कार्यवाही करें।
न्यायमूर्ति श्री आजाद ने कहा कि अभियोजक निष्पक्षता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें एवं तथ्य की खोज के लिये न्यायालय में सहयोग प्रदान करें। ऐसा करने से समाज में अपराधों की रोकथाम में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, वहीं दूसरी और प्रजातंत्र की सफलता का मूलभूत उद्देश्य भी पूरा होगा।
समापन सत्र में प्रशिक्षण ले रहे अभियोजन अधिकारियों ने न्यायमूर्ति श्री नारायण सिंह आजाद से वैधानिक कार्यवाही के संबंध में अपनी समस्याओं को सामने रखकर समाधान प्राप्त किया। अधिकारीगणों ने अपने कर्तव्यों के निष्पक्ष निर्वहन के लिये सामूहिक शपथ भी लीं। लोक अभियोजन संचालक श्री नवलकिशोर गर्ग ने प्रशिक्षण के उद्देश्य के बारे में बताया। इस मौके पर प्रशिक्षण प्राप्त अधिकारियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किये गये।

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Saturday, October 31, 2009

प्रशासनिक अमले को संवेदनशील बनाने में मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण

मीडिया लोगों को तथ्यपरक जानकारी दे
Bhopal:Friday, October 30, 2009:Updated 17:38IST विभिन्न शासकीय योजनाओं एवं कार्यक्रमों में होने वाले भ्रष्टाचार को रोकने के लिये सरकार ने 'सूचना का अधिकार अधिनियम' लागू किया है। सूचना के अधिकार के बारे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूक तथा संबंधित प्रशासनिक अमले को संवेदनशील बनाने में मीडिया की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है।
इस आशय के विचार आज यहां आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासन अकादमी में 'प्रशासन, मीडिया एवं सूचना का अधिकार' विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में विभिन्न वक्ताओं ने व्यक्त किये। कार्यशाला को सुश्री नीलांजना भादुरी झा, मुख्य समाचार संपादक एन.डी.टी.व्ही., नई दिल्ली, श्री अभिलाष खाण्डेकर, स्टेट हैड दैनिक भास्कर, श्री राजेश सीरोठिया, ज्वाइंट रेसीडेंट एडीटर नवदुनिया भोपाल ने संबोधित किया।
कार्यक्रम में प्रशासन अकादमी महानिदेशक डॉ. संदीप खन्ना के अलावा केन्द्रीय सेवाओं तथा राज्य प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों के अलावा डॉ. माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
एन.डी.टी.व्ही. की मुख्य समाचार संपादक सुश्री झा ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि सूचना का अधिकार आम लोगों को शासन द्वारा उनके लिये किये जा रहे कार्यों के बारे में जानकारी लेने के लिये बनाया गया है। परंतु जानकारी के अभाव में सामान्यजन इस अधिकार का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।
परंतु मीडिया इस अधिकार के माध्यम से जन-सामान्य तक जानकारी पहुंचाने की पहल कर रहा है। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि वे सूचना के अधिकार के अंतर्गत मीडिया द्वारा चाही गई जानकारी नियमों का पालन कर शीघ्र प्रदान करें और मीडिया के बारे में किसी प्रकार की गलत धारणा पूर्व से ही अपने मन में ना बनायें। मीडिया लोगों को तथ्यपरक जानकारी दे किसी प्रकार की मसालेदार स्टोरी ना बनाये।
श्री अभिलाष खाण्डेकर, स्टेट हैड दैनिक भास्कर ने बताया कि मीडिया लोकतंत्र के चौथे पाये के रूप में अपनी भूमिका निर्वहन करते हुए कोई भी महत्वपूर्ण जानकारी समाज के पास अविलम्ब पहुंचाने का प्रयास करता है। वर्तमान समय में सामान्य आदमी का जीवन दूभर है, गांवों में अभी भी छोटे से शासकीय कर्मचारी से लोग भय खाते हैं। नवनियुक्त शासकीय अधिकारियों को प्रशासनिक व्यवस्थाओं में व्याप्त बाधाओं से अवगत होने की जरूरत है, तभी वे भविष्य में उन्हें दूर करने की पहल कर पायेंगे।
श्री राजेश सीरोठिया, ज्वाइंट रेसीडेन्ट एडिटर नवदुनिया ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय सूचना छुपाने नहीं, वरन् उन्हें उजागर करने का है। सूचना के इस युग में 'सूचना का अधिकार' काफी महत्वपूर्ण है। इसे बाध्यता नहीं अपितु स्वाभाविक रूप से लेकर वांछित जानकारी इच्छुक व्यक्ति को शीघ्र दें, तभी ऐसी सूचना का महत्व रहेगा।
मीडिया जन-सामान्य तक सूचना पहुंचाने में संवाहक का काम करता है। अधिकारियों के मीडिया से अच्छे संबंध समाज के हित में होते हैं। संवादहीनता की स्थिति काफी विस्फोटक होती है, इस बात को शासकीय अमला जानें। उन्होंने कहा कि 'सूचना के अधिकार' के लागू होने से आज शासकीय अमला काफी सतर्कतापूर्वक अपने दायित्व का निर्वहन करने लगा है।
प्रारंभ में प्रशासन अकादमी महानिदेशक डॉ. संदीप खन्ना ने कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला आयोजन के उद्देश्यों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मीडिया के कारण देश में भ्रष्टाचार के अनेक मामलों का खुलासा हुआ है। सूचना का अधिकार भ्रष्टाचार को रोकने में औजार का काम करता है।
डॉ. खन्ना ने प्रशिक्षु अधिकारियों को जानकारी दी कि विभिन्न अवसरों पर शासकीय सेवकों द्वारा किसी प्रकार की गिफ्ट लेना भी भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है। उन्होंने प्रशासकीय सेवकों में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को बाईट देने के बढ़ते प्रचलन के प्रति सतर्क रहने की हिदायत भी दी।

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