जनहित वाद विषयक कार्यशाला में विशेषज्ञ वक्ताओं के विचार
प्रशासनिक अधिकारियों को अपने कर्त्तव्य का पालन पूर्ण ईमानदारी एवं निष्ठा से करना चाहिये, तभी समाज के कमजोर एवं गरीब लोगों को न्याय प्राप्त होगा। इस आशय के उद्गार आज यहां आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में “जनहित वादा” (पब्लिक इन्ट्रेस्ट लिटीगेशन)
विषयक कार्यशाला को छत्तीसगढ़ राज्य के महाधिवक्ता श्री देवराज सिंह सुराना ने संबोधित करते हुये व्यक्त किये। कार्यक्रम में दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री के.सी.मित्तल, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट इंदौर के अधिवक्ता श्री अमित अग्रवाल, हाईकोर्ट मध्यप्रदेश के अधिवक्ता श्री अजय मिश्रा, जूरिस कन्सलटेंटस एडवोकेट श्री अनुराग श्रीवास्तव, प्रशासन अकादमी के महानिदेशक डॉ. संदीप खन्ना के अलावा अखिल भारतीय सेवाओं के प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित थे।महाधिवक्ता छत्तीसगढ़ श्री सुराना ने कहा कि आज कुछ लोग एवं अधिवक्ता प्रचार पाने के लिये पीआईएल (पब्लिक इन्ट्रेस्ट लिटीगेशन) हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट में दायर करते हैं जबकि संविधान में प्राप्त इस विशेषाधिकार का उपयोग हम गरीब एवं कमजोर व्यक्तियों के जीवन स्तर में सुधार लाने में कर सकते हैं।
हाईकोर्ट मध्यप्रदेश इंदौर के अधिवक्ता श्री अमित अग्रवाल ने कार्यशाला में बताया कि कोई भी व्यक्ति जनहित (पब्लिक इन्ट्रेस्ट) में पीआईएल लगा सकता है। संविधान के आर्टिकल 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) एवं आर्टिकल 226 के अंतर्गत हाईकोर्ट (उच्च न्यायालय) में पीआईएल दायर की जा सकती है। उन्होंने जनहितवाद के विभिन्न प्रकारों के बारे में विस्तार से जानकारी भी दी।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के अधिवक्ता श्री अजय मिश्रा ने कहा कि संविधान में कानून के राज्य की स्थापना के लिये पीआईएल का प्रावधान किया गया है। यह केवल पिटीशनर के हित में नहीं वरन् समुदाय के सामूहिक हित में लगाई जाती है। उन्होंने बताया कि सबसे पहले वर्ष 1976 में सुप्रीम कोर्ट में ‘बम्बई कामगार युनियन’ द्वारा कर्मचारियों के बोनस की मॉग को लेकर जनहित याचिका (पीआईएल) लगाई थी। न्याय पाने का अन्य कोई विकल्प समझ ना आने की दशा में पीआईएल लोग लगाते हैं। हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट समाचार पत्र में प्रकाशित समाचार एवं पोस्टकार्ड पर की गई शिकायत को भी जनहित में मानकर पीआईएल का नोटिस जारी करते हैं। श्री मिश्रा ने कहा कि पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों को विभिन्न कानूनों का ज्ञान आवश्यक है, तभी वे लोगों के साथ सही न्याय कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि पीआईएल का नोटिस मिलने पर अधिकारी बिना किसी के दबाब में आये ईमानदारी से अपना जबाब कोर्ट में प्रस्तुत करें।
प्रारंभ में प्रशासन अकादमी महानिदेशक डा. खन्ना ने अतिथियों का स्वागत करते हुये उनका परिचय प्रदान कर कार्यशाला आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला।
दिल्ली हाईकोर्ट के अधिवक्ता श्री के.सी.मित्तल ने दिल्ली में ग्रुप हाउसिंग सोसायटी घोटाले के संबंध में दायर की गई पीआईएल के अलावा जनहित में दायर की गई अन्य याचिकाओं के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहाकि वे अपना कार्य इस प्रकार संपादित करें जिसमें न्यायपालिका का हस्तक्षेप कम से कम हो। कार्यशाला को एडवोकेट श्री अनुराग श्रीवास्तव ने भी संबोधित किया।
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