मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा कि वनवासियों के हितों का पूरा ख्याल रखा जाएगा। जमीन पर जिन वनवासियों के कब्जे है, उन्हें हटाया नही जाएगा बल्कि उन्हेंे जमीन के पटटे दिये जायेगें।उन्होंने कहा कि वे शीघ्र ही प्रदेश में वनवासी अधिकार यात्रा निकालेगें और वनवासियों को उनके सारे हक दिलाने का प्रयास किया जावेगा। वन अधिकार अधिनियम का पालन भी करवाया जावेगा।
मुख्यमंत्री श्री चौहान आज रतलाम में अखिल भारतीय वनवासी ग्रामीण मजदूर संघ द्वारा आयोजित तृतीय त्रैवार्षिक राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर प्रदेश के गृह एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री गोपाल भार्गव, नगरीय प्रशासन राज्य मंत्री श्री मनोहर ऊटंवाल, पूर्व राज्यपाल श्री बी.एस. कोकजे, नगर निगम के महापौर श्री शैलेन्द्र डागा उपस्थित थे। कार्यक्रम में अखिल भारतीय मजदूर संघ के अध्यक्ष प्रेमसिंह मार्को, महामंत्री श्री सुल्तानसिंह सहित अन्य प्रतिनिधिगण और ग्रामीण वनवासी उपस्थित थे।मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में कपिल धारा योजना तहत एक लाख 13 हजार के लगभग कुएं खुदें है इनमें से अधिकांश कुएं वनवासी प्रधान जिलों में खोदे गए है। प्रदेश सरकार ने यह निर्णय लिया है कि इन कुओं से सिंचाई हेतु पानी निकालने के लिए डीजल पंप या विघुत पंप लगाने की सुविधा दी जावे ताकि वनवासी भी कोदों, कुटकी व मक्का की फसलों के साथ फलों, फूलों व औषधीय फसलों की खेती कर अधिक लाभ कमा सके। उन्होंने कहा कि आदिवासी छात्र-छात्राओं ने प्रतिभा की कमी नही है जरूरत है तो केवल उनकों अवसर व सुविधाएँ दिये जाने की। इसी को दृष्टिगत रखते हुए प्रदेश के आदिवासी क्षेत्र में शिक्षा की सुविधा का विस्तार किया जा रहा है और नये-नये कॉलेज व पोलीटेकनिक स्कूल आदि खोले जा रहे है तथा प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोंचिग व्यवस्था तथा पहली कक्षा से ही छात्रों को छात्रवृत्ति दी जाती है वहीं आदिवासी छात्रों के लिए आश्रम व छात्रावास की व्यवस्था की गई। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में न्यूनतम मजदूरी अब 100रूपये कर दी गई है इसके साथ ही टास्क रेट की व्यवस्था को बदला जा रहा है अब कड़ी ,पत्थरयुक्त जमीन के टास्क अलग होगें व मुलायम जमीन के टास्क अलग होगें।
कार्यक्रम के प्रांरभ में पूर्व राज्यपाल व पूर्व न्यायाधीश श्री बी.एस.कोकजे ने उद्घाटन भाषण देते हुए आदिवासियों की पुरातन संस्कृति की अच्छाईयो से छेड़छाड़ किए बिना आदिवासियों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने व उनको आधुनिक तकनीक का लाभ दिए जाने की बात कही। उन्होने आदिवासी ग्रामीण मजदूरों की भलाई के लिए नियोजक व नियोजितों के बीच ठेकेदारी संस्कृति को समाप्त करने व आदिवासी मजदूरों को छोटे छोटे समूहों में संगठित कर संगठित क्षेत्र के श्रमिकों को मिलनेवाली सुविधाओं को दिलाए जाने व उनकी कुशलता बढाने के लिए प्रशिक्षण आदि दिए जाने के बारे में चिंता किए जाने का आग्रह किया।
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