करीब 1300 कुटीर उद्योग लगेंगे
प्रदेश में वन विभाग की रोजगार सृजन क्षमता को ध्यान में रखते हुए वनोपज आधारित कुटीर उद्योगों के माध्यम से 25 हजार वनवासी युवाओं को रोजगार के नये अवसर सुलभ कराने के लिये एक पंचवर्षीय योजना पर काम शुरू कर दिया गया है।
इससे प्रदेश के 32 जिलों में वनों के आसपास करीब 1300 कुटीर उद्योग स्थापित होंगे। यह जानकारी विदेश यात्रा पर रवाना होने के पूर्व हाल में वनमंत्री श्री सरताज सिंह ने भोपाल में दी। उन्होंने बताया कि 70 करोड़ रूपये की इस योजना के लिये 16 करोड़ रूपये विभाग द्वारा, 30 करोड़ रूपये लघु वनोपज संघ द्वारा और 24 करोड़ रूपये ईको पर्यटन बोर्ड द्वारा प्रबंधित किये जायेंगे।
उन्होंने बताया कि योजना के तहत वर्ष 2009-10 में 6 हजार 947 युवाओं को चिन्दी से रस्सी निर्माण, मुर्गीपालन, बांस फर्नीचर, ट्री गार्ड निर्माण, वर्मी कम्पोस्ट, सवई रस्सी निर्माण आदि रोजगारमूलक कार्यों से जोड़ा गया है।
वन मंत्री ने बताया कि योजना क्रियान्वयन के लिये तय की गई कार्ययोजना के अनुसार बलाघाट, बुरहानपुर, बैतूल, छतरपुर, पन्ना, छिन्दवाड़ा, हरदा, होशंगाबाद, इन्दौर, झाबुआ, जबलपुर, डिण्डोरी, खण्डवा, कटनी, मंदसौर, सागर, सीधी, सतना, रीवा, रायसेन, रतलाम, शहडोल, श्योपुर, दमोह, सिवनी, सीहोर, नरसिंहपुर, गुना, अनूपपुर, उमरिया, देवास, उज्जैन आदि जिलों के वनवासी युवाओं को कुटीर उद्योगों का प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा जायेगा। कार्ययोजना में इस तथ्य का विशेष ध्यान रखा गया है कि स्थानीय रूप से उपलब्ध सामग्री से ऐसे उत्पाद बनाये जाये जिनके लिये स्थानीय एवं आसपास के जिलों में बाजार भी उपलब्ध हो और उत्पादित वस्तुओं की स्थाई मांग भी हो।
श्री सरताल सिंह ने बताया कि वनवासी युवाओं को दोना-पत्तल, अगरबत्ती निर्माण, सवई/केतकी रेशा रस्सी, शहद प्रसंस्करण, महुआफूल एवं गुल्ली, मेडिसिनल प्लान्ट रिसोर्स आगमेन्टेशन, वर्मीकम्पोस्ट, लेन्टाना चारकोल निर्माण, पलाश फूल चूर्ण, बेल चूर्ण, हर्बल कलर्स निर्माण, चिरौंजी प्रसंस्करण, मसाला निर्माण, छींद-बुहारी निर्माण, बांस आधारित उद्यम के साथ ही ईको पर्यटन सम्बन्धी प्रशिक्षण देकर रोजगारमूलक कार्यों से जोड़ा जायेगा। उन्होंने बताया कि इन उद्यमों से प्रदेश के वन क्षेत्रों के आसपास लगभग 1300 कुटीर उद्योग स्थापित होंगे।
वनमंत्री ने बताया कि उपरोक्त के अलावा वनरोपणी, वृक्षारोपण आदि कार्यों से भी वनवासी युवाओं को रोजगार मिलेगा।
उन्होंने बताया कि योजना के तहत वर्ष 2009-10 में 6 हजार 947 युवाओं को चिन्दी से रस्सी निर्माण, मुर्गीपालन, बांस फर्नीचर, ट्री गार्ड निर्माण, वर्मी कम्पोस्ट, सवई रस्सी निर्माण आदि रोजगारमूलक कार्यों से जोड़ा गया है।
वन मंत्री ने बताया कि योजना क्रियान्वयन के लिये तय की गई कार्ययोजना के अनुसार बलाघाट, बुरहानपुर, बैतूल, छतरपुर, पन्ना, छिन्दवाड़ा, हरदा, होशंगाबाद, इन्दौर, झाबुआ, जबलपुर, डिण्डोरी, खण्डवा, कटनी, मंदसौर, सागर, सीधी, सतना, रीवा, रायसेन, रतलाम, शहडोल, श्योपुर, दमोह, सिवनी, सीहोर, नरसिंहपुर, गुना, अनूपपुर, उमरिया, देवास, उज्जैन आदि जिलों के वनवासी युवाओं को कुटीर उद्योगों का प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा जायेगा। कार्ययोजना में इस तथ्य का विशेष ध्यान रखा गया है कि स्थानीय रूप से उपलब्ध सामग्री से ऐसे उत्पाद बनाये जाये जिनके लिये स्थानीय एवं आसपास के जिलों में बाजार भी उपलब्ध हो और उत्पादित वस्तुओं की स्थाई मांग भी हो।
श्री सरताल सिंह ने बताया कि वनवासी युवाओं को दोना-पत्तल, अगरबत्ती निर्माण, सवई/केतकी रेशा रस्सी, शहद प्रसंस्करण, महुआफूल एवं गुल्ली, मेडिसिनल प्लान्ट रिसोर्स आगमेन्टेशन, वर्मीकम्पोस्ट, लेन्टाना चारकोल निर्माण, पलाश फूल चूर्ण, बेल चूर्ण, हर्बल कलर्स निर्माण, चिरौंजी प्रसंस्करण, मसाला निर्माण, छींद-बुहारी निर्माण, बांस आधारित उद्यम के साथ ही ईको पर्यटन सम्बन्धी प्रशिक्षण देकर रोजगारमूलक कार्यों से जोड़ा जायेगा। उन्होंने बताया कि इन उद्यमों से प्रदेश के वन क्षेत्रों के आसपास लगभग 1300 कुटीर उद्योग स्थापित होंगे।
वनमंत्री ने बताया कि उपरोक्त के अलावा वनरोपणी, वृक्षारोपण आदि कार्यों से भी वनवासी युवाओं को रोजगार मिलेगा।
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