खबरों में मिलावट हो रही है
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय द्वारा 'समाचार पत्रों का भविष्य' विषय पर एकाग्र दो दिवसीय राष्ट्रीय परिसंवाद का उद्घाटन भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री जी.एन. रे ने किया। परिसंवाद में देश व प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार शिरकत कर रहे हैं।
समन्वय भवन में आयोजित इस परिसंवाद में भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष एवं न्यायमूर्ति श्री जी.एन. रे ने प्रिंट मीडिया के भविष्य को सकारात्मक बताते हुए कहा कि वैश्वीकरण और नया मीडिया के बढ़ते वर्चस्व और प्रतिद्वंदिता से जूझते अखबारों को भारतीय समाज में अपना स्थान सुरक्षित रखना है तो उसे चौथे स्तंभ की अपनी भूमिका पर ध्यान देते हुए जन-सरोकारों से जुड़ना होगा।आज मीडिया को आत्मविश्लेषण की जरूरत है। उन्होंने मीडिया में बड़े समाचार पत्र समूहों के बढ़ते वर्चस्व पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे पाठक और दर्शक को सूचना से वंचित किया जा रहा है, जो लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। परिसंवाद के मुख्य वक्ता के रूप में विचार व्यक्त करते हुए डॉ. राजेन्द्र प्रभु ने कहा कि हम सूचनाओं और समाचार संचार क्रांति और प्रौद्योगिकी की सूनामी के दौर से गुजर रहे हैं। समाचार पत्र खत्म नहीं होंगे उनका रूप बदलेगा, उनकी पहुंच ज्यादा व्यापक और गहरी होगी।
आशा की जानी चाहिए कि वह ज्यादा ताकतवर होंगे। उन्होंने कहा कि नया मीडिया प्रभावी हो सकता है पर पत्रकारिता की परम्पराएं व सरोकार नहीं बदलेंगे वह शाश्वत है। इसके पूर्व विषय का प्रवर्तन करते हुए कुलपति श्री अच्युतानंद मिश्र ने कहा कि पिछली दो शताब्दियों से अखबारों ने जनसरोकार और जनसंघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, बदलते वैश्विक और राष्ट्रीय परिदृश्य में हमें समाचार पत्रों की प्रासंगिक भूमिका और उत्तरदायित्व के बारे में विचार करना होगा।
वरिष्ठ पत्रकार श्री महेश श्रीवास्तव ने कहा कि हमारे देश में अखबारों का आर्थिक भविष्य उज्जवल और सुरक्षित है, पर सामाजिक सरोकार, पत्रकारिता के आदर्श सिद्धांत की दृष्टि से यह पतन की ओर जा रहे हैं। पत्रकारिता का नैतिक पक्ष कमजोर हुआ है। इसने समाचार पत्रों की विश्वसनीयता को खण्डित किया है। आज खबर दी नहीं जा रही, बेची जा रही है।
वरिष्ठ पत्रकार श्री महेश श्रीवास्तव ने कहा कि हमारे देश में अखबारों का आर्थिक भविष्य उज्जवल और सुरक्षित है, पर सामाजिक सरोकार, पत्रकारिता के आदर्श सिद्धांत की दृष्टि से यह पतन की ओर जा रहे हैं। पत्रकारिता का नैतिक पक्ष कमजोर हुआ है। इसने समाचार पत्रों की विश्वसनीयता को खण्डित किया है। आज खबर दी नहीं जा रही, बेची जा रही है।
खबरों में मिलावट हो रही है। यदि यही स्थिति रही तो अखबार समाज द्वारा नकार दिये जायेंगे। इसे रोकने के लिए सामाजिक आंदोलन खड़ा करना होगा। नई दुनिया के प्रधान संपादक श्री अभय छजलानी जी द्वारा भेजा गया आलेख का प्रथम सत्र में वाचन किया गया।
श्री छजलानी जी ने अपने आलेख में पत्रकारिता के विभिन्न संकटों को विश्लेषण के साथ प्रस्तुत किया है। उन्होंने संपादकीय और तकनीकी दोनों चुनौतियों को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया। परिसंवाद के प्रथम सत्र का संचालन पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष श्री पुष्पेन्द्र पाल सिंह ने किया।
समाचार पत्र उद्योग स्वामित्व का स्वरूप और चुनौतियां विषय पर केन्द्रित द्वितीय सत्र की अध्यक्षता स्वदेश के प्रबंध संपादक श्री राजेन्द्र शर्मा ने की। डॉ. आनंद प्रधान, छत्तीसगढ़ हिन्दी ग्रंथ अकादमी के संचालक रमेश नैयर व वरिष्ठ पत्रकार विभांशु दिव्याल ने विचार प्रकट किये। द्वितीय सत्र का संचालन पत्रकार विजय मनोहर तिवारी ने किया।
समाचार पत्र उद्योग स्वामित्व का स्वरूप और चुनौतियां विषय पर केन्द्रित द्वितीय सत्र की अध्यक्षता स्वदेश के प्रबंध संपादक श्री राजेन्द्र शर्मा ने की। डॉ. आनंद प्रधान, छत्तीसगढ़ हिन्दी ग्रंथ अकादमी के संचालक रमेश नैयर व वरिष्ठ पत्रकार विभांशु दिव्याल ने विचार प्रकट किये। द्वितीय सत्र का संचालन पत्रकार विजय मनोहर तिवारी ने किया।
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