वन मंत्री श्री सरताज सिंह द्वारा वन सूचना प्रौद्योगिकी के कार्यों की समीक्षा
वन मंत्री श्री सरताज सिंह ने वन संरक्षण को प्राथमिकता में रखते हुए सूचना प्रौद्योगिकी के बेहतर उपयोग पर बल दिया है। श्री सिंह आज यहां सतपुड़ा भवन स्थित वन मुख्यालय में सूचना प्रौद्योगिकी गतिविधियों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इन प्रणालियों का जमीनी स्तर पर उपयोग किया जाये ताकि वन प्रबंधन के बेहतर परिणाम मिल सके। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव वन श्री प्रशांत मेहता, प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री ए.के. दुबे तथा वरिष्ठ वन अधिकारी उपस्थित थे।
वन मंत्री ने कहा कि वन क्षेत्रों में अवैध कटाई के साथ ही पशु चराई से होने वाले नुकसान को नियंत्रित करने के लिए प्रयास किये जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि फील्ड में पदस्थ कर्मचारियों को सूचना प्रौद्योगिकी का समुचित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, ताकि इसके उपयोग से वन प्रबंधन को बेहतर किया जा सके। श्री सिंह ने कहा कि वन अधिकार के तहत भूमि सीमांकन का काम सूचना प्रौद्योगिकी के तहत तैयार किये गये साफ्टवेयर द्वारा किया जा रहा है। इसके लिए कर्मचारियों को समुचित प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाये।
वन मंत्री ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी के तहत तैयार की गई प्रणालियों का उपयोग जमीनी स्तर पर वानिकी गतिविधियों के क्रियान्वयन में होना चाहिए ताकि बेहतर परिणाम मिल सके। इससे फील्ड स्तर पर पदस्थ कर्मचारियों में जिम्मेदारी की भावना आने के साथ ही कम समय सीमा मेंं कार्यों को अधिक सक्षमता के साथ किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 से अभी तक वन क्षेत्रों में आये बदलाव का आंकलन किया जाये, ताकि इसके आधार पर क्षेत्र विशेष के लिए वन प्रबंधन की रणनीति तय की जा सके।
बैठक में बताया गया कि देश में मध्य प्रदेश ने अग्रणी होकर वनों एवं वन्य प्राणियों के संरक्षण एवं प्रबंधन के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग किया है जिसका अनुकरण अब अन्य प्रदेशों द्वारा किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग के लिए मध्य प्रदेश, वन विभाग के नेतृत्व में दल गठित किया गया है। प्रदेश में वन अधिकार के तहत भूमि सीमांकन के लिए सूचना प्रौद्योगिकी द्वारा तैयार की गई प्रणाली का उपयोग सफल रहा है। अब अन्य राज्य भी इस प्रणाली का उपयोग कर वन अधिकार के तहत अधिकार पत्र वितरित करने लगे हैं।
अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक सूचना प्रौद्योगिकी श्री अनिल ओबेराय ने बताया कि कम्प्यूटर आधारित वन प्रबंधन प्रणालियों द्वारा विभिन्न वानिकी गतिविधियों का आंकलन किया जा सकता है। इसके लिए विभाग द्वारा डाटा सेंटर स्थापित किया गया है। प्रदेश में स्थित वनक्षेत्रों के मानचित्रों का डिजिटाईजेशन कार्य पूर्ण कर लिया गया है। कौशल उन्नयन के तहत लगभग 10 हजार वन कर्मियों को प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा चुका है। वन क्षेत्रों में अग्नि घटनाओं की सूचना देने के लिए फायर अलर्ट मैसेजिंग सिस्टम काफी उपयोगी रहा है।
बैठक में वन मंत्री के समक्ष प्रस्तावित नवीन वन भवन के निर्माण की प्रगति का प्रस्तुतीकरण किया गया। मुख्य वन संरक्षक सामुदायिक वन प्रबंधन परियोजना श्री जव्वाद हसन ने बताया कि भोपाल में वर्तमान में वन विभाग के विभिन्न संस्थानों के मुख्यालय (प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय, म.प्र.राज्य लघु वनोपज संघ कार्यालय, म.प्र. राज्य वन विकास निगम कार्यालय एवं ईको पर्यटन विकास बोर्ड कार्यालय) विभिन्न भवनों में स्थापित हैं तथा इन भवनों में पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं हैं।
वन मंत्री ने कहा कि वन क्षेत्रों में अवैध कटाई के साथ ही पशु चराई से होने वाले नुकसान को नियंत्रित करने के लिए प्रयास किये जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि फील्ड में पदस्थ कर्मचारियों को सूचना प्रौद्योगिकी का समुचित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, ताकि इसके उपयोग से वन प्रबंधन को बेहतर किया जा सके। श्री सिंह ने कहा कि वन अधिकार के तहत भूमि सीमांकन का काम सूचना प्रौद्योगिकी के तहत तैयार किये गये साफ्टवेयर द्वारा किया जा रहा है। इसके लिए कर्मचारियों को समुचित प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाये।
वन मंत्री ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी के तहत तैयार की गई प्रणालियों का उपयोग जमीनी स्तर पर वानिकी गतिविधियों के क्रियान्वयन में होना चाहिए ताकि बेहतर परिणाम मिल सके। इससे फील्ड स्तर पर पदस्थ कर्मचारियों में जिम्मेदारी की भावना आने के साथ ही कम समय सीमा मेंं कार्यों को अधिक सक्षमता के साथ किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 से अभी तक वन क्षेत्रों में आये बदलाव का आंकलन किया जाये, ताकि इसके आधार पर क्षेत्र विशेष के लिए वन प्रबंधन की रणनीति तय की जा सके।
बैठक में बताया गया कि देश में मध्य प्रदेश ने अग्रणी होकर वनों एवं वन्य प्राणियों के संरक्षण एवं प्रबंधन के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग किया है जिसका अनुकरण अब अन्य प्रदेशों द्वारा किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग के लिए मध्य प्रदेश, वन विभाग के नेतृत्व में दल गठित किया गया है। प्रदेश में वन अधिकार के तहत भूमि सीमांकन के लिए सूचना प्रौद्योगिकी द्वारा तैयार की गई प्रणाली का उपयोग सफल रहा है। अब अन्य राज्य भी इस प्रणाली का उपयोग कर वन अधिकार के तहत अधिकार पत्र वितरित करने लगे हैं।
अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक सूचना प्रौद्योगिकी श्री अनिल ओबेराय ने बताया कि कम्प्यूटर आधारित वन प्रबंधन प्रणालियों द्वारा विभिन्न वानिकी गतिविधियों का आंकलन किया जा सकता है। इसके लिए विभाग द्वारा डाटा सेंटर स्थापित किया गया है। प्रदेश में स्थित वनक्षेत्रों के मानचित्रों का डिजिटाईजेशन कार्य पूर्ण कर लिया गया है। कौशल उन्नयन के तहत लगभग 10 हजार वन कर्मियों को प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा चुका है। वन क्षेत्रों में अग्नि घटनाओं की सूचना देने के लिए फायर अलर्ट मैसेजिंग सिस्टम काफी उपयोगी रहा है।
बैठक में वन मंत्री के समक्ष प्रस्तावित नवीन वन भवन के निर्माण की प्रगति का प्रस्तुतीकरण किया गया। मुख्य वन संरक्षक सामुदायिक वन प्रबंधन परियोजना श्री जव्वाद हसन ने बताया कि भोपाल में वर्तमान में वन विभाग के विभिन्न संस्थानों के मुख्यालय (प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय, म.प्र.राज्य लघु वनोपज संघ कार्यालय, म.प्र. राज्य वन विकास निगम कार्यालय एवं ईको पर्यटन विकास बोर्ड कार्यालय) विभिन्न भवनों में स्थापित हैं तथा इन भवनों में पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं हैं।
अन्य कई राज्यों में पृथक से वन भवन बनाये गये हैं तथा बनाये जा रहे हैं। अतः वन भवन की आवश्यकता मध्य प्रदेश में भी है। यह प्रस्तावित वन भवन तुलसी नगर स्थित लिंक रोड नंबर 2 पर शासकीय भूमि, जो शासन द्वारा उपलब्ध कराई गयी है, पर बनाया जाना प्रस्तावित है।
प्रस्तावित नवीन वन भवन का निर्माण क्षेत्र लगभग 2 लाख 80 हजार वर्ग फुट होगा तथा 1024 अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिये यह बनाया जायेगा। प्रथम चरण के प्राक्कलन अनुसार भवन की लागत लगभग रूपये 49 करोड़ आंकी गयी है। माननीय मुख्य मंत्रीजी द्वारा नवीन वन भवन का शिलान्यास 27 जुलाई, 2008 को किया जा चुका है।
पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन के माध्यम से काउन्सिल ऑफ आर्किटेक्चर (भारत सरकार की वैधानिक संस्था) के दिशा निर्देशों का पालन करते हुये मेसर्स इनफार्म आर्किटेक्ट, बैंगलोर का चयन वास्तुविद के रूप में किया गया है। म.प्र. राज्य पर्यटन विकास निगम को निर्माण एजेन्सी नियुक्त किया गया है जिसके द्वारा राष्ट्रीय स्तर के 6 भवन निर्माताओं को चयन सूची में रखा गया है। वास्तुविद द्वारा भवन के नक्शे, डिजाइन, टेण्डर संबंधित अभिलेख, वन विभाग को प्रस्तुत किये जा चुके हैं।
प्रस्तावित भवन में अग्नि सुरक्षा एवं जल संरक्षण का प्रावधान विशेष रूप से किया गया है। वन विभाग द्वारा विकसित किये जा रहे जी.आई.एस. (भौगोलिक सूचना प्रबंध प्रणाली) एवं कम्प्यूटर तकनीक के लिये वन भवन को विशेष सुविधायुक्त बनाया जायेगा। भवन में वाहनों के लिए बेसमेंट पार्किंग का प्रावधान किया जायेगा। भवन का डिजाइन एवं सामग्री का उपयोग इस प्रकार किया जायेगा कि यह ग्रीन बिल्डिंग सर्टिफिकेशन के मापदंडों पर खरा उतरे। भवन अत्याधुनिक स्तर का होगा।
प्रस्तावित नवीन वन भवन का निर्माण क्षेत्र लगभग 2 लाख 80 हजार वर्ग फुट होगा तथा 1024 अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिये यह बनाया जायेगा। प्रथम चरण के प्राक्कलन अनुसार भवन की लागत लगभग रूपये 49 करोड़ आंकी गयी है। माननीय मुख्य मंत्रीजी द्वारा नवीन वन भवन का शिलान्यास 27 जुलाई, 2008 को किया जा चुका है।
पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन के माध्यम से काउन्सिल ऑफ आर्किटेक्चर (भारत सरकार की वैधानिक संस्था) के दिशा निर्देशों का पालन करते हुये मेसर्स इनफार्म आर्किटेक्ट, बैंगलोर का चयन वास्तुविद के रूप में किया गया है। म.प्र. राज्य पर्यटन विकास निगम को निर्माण एजेन्सी नियुक्त किया गया है जिसके द्वारा राष्ट्रीय स्तर के 6 भवन निर्माताओं को चयन सूची में रखा गया है। वास्तुविद द्वारा भवन के नक्शे, डिजाइन, टेण्डर संबंधित अभिलेख, वन विभाग को प्रस्तुत किये जा चुके हैं।
प्रस्तावित भवन में अग्नि सुरक्षा एवं जल संरक्षण का प्रावधान विशेष रूप से किया गया है। वन विभाग द्वारा विकसित किये जा रहे जी.आई.एस. (भौगोलिक सूचना प्रबंध प्रणाली) एवं कम्प्यूटर तकनीक के लिये वन भवन को विशेष सुविधायुक्त बनाया जायेगा। भवन में वाहनों के लिए बेसमेंट पार्किंग का प्रावधान किया जायेगा। भवन का डिजाइन एवं सामग्री का उपयोग इस प्रकार किया जायेगा कि यह ग्रीन बिल्डिंग सर्टिफिकेशन के मापदंडों पर खरा उतरे। भवन अत्याधुनिक स्तर का होगा।
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