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Monday, March 15, 2010

सहकारी बैंकों में इसी वर्ष से कोर बैकिंग शुरू होगीं

 अपेक्स बैंक के सदस्यों को इस वर्ष 8 प्रतिशत लाभांश वितरित होगा
अपेक्स बैंक और जिला सहकारी बैंकों में कोर बैंकिंग के लिए कंसलटेंट की नियुक्ति कर दी गई है। इस वर्ष से सहकारी बैंकों में कोर बैंकिंग प्रारंभ हो जाएगी। अपेक्स बैंक अपने सदस्यों को इस वर्ष 8 प्रतिशत लाभांश का वितरण करेगा।

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Wednesday, March 10, 2010

कैसे करें साइबर अपराधियों से कम्प्यूटर की सुरक्षा

सालाना तीन करोड़ से ज्यादा कम्प्यूटर यूजर्स हेकिंग के शिकार हो रहे हैं
कम्प्यूटर कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को भविष्य निर्माण की नई दिशा मिलेगी। यह बात शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय भोपाल के स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ द्वारा उच्च शिक्षा विभाग के सहयोग से 'कम्प्यूटर एप्लीकेशन' विषय पर आज आयोजित रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित करते हुये प्रो. रमन श्रीवास्तव, एम.पी.ऑनलाईन ने आज अपने संबोधन में बतलायी।

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Wednesday, January 20, 2010

डॉ. सैय्यद हैदर रिजवी को मंथन साऊथ एशिया अवार्ड 2009

ज्ञान सहायता विस्तार तकनीक पहल) तकनीक को
'ई-उद्यमिता एवं ई-आजीविका' श्रेणी के अंतर्गत वर्ष 2009 का प्रतिष्ठित मंथन दक्षिण एशिया पुरूस्कार 'खेती' (ज्ञान सहायता विस्तार तकनीक पहल) तकनीक को दिया गया है। यह डॉ. सैय्यद हैदर रिजवी को उन्हें भारत में मध्यप्रदेश राज्य के सिरोंज विकासखण्ड में सिरोंज क्राप प्रोडियूसरस कंपनी लिमिटेड के निर्धन किसानो के साथ उनकी नवप्रवर्तनात्मक अनुसंधान परियोजना, 'ग्रामीण ई-सेवा परियोजना' हेतु दिया गया है यह परियोजना इंग्लैंड के शैफील्ड हेल्लाम विश्वविद्यालय एवं ऑक्फोर्ड विश्वविद्यालय के संयुक्त सहयोग की अभिनव पहल थी। भारत में इस परियोजना का प्रयोग एवं क्रियान्वयन डॉ एस एम हैदर रिज़वी एवं उनके ब्रिटिश सहयोगी डॉ एन्डी डीयरडेन द्वारा प्रदान एवं सफल साल्यूशन के साथ किया गया।
डॉ. हैदर एवं डॉ. डीयरडेन इस तकनीक के विकास कार्य में विगत 3 वर्षो से संलग्नरत् रहे। इस प्रयास ने सम्पूर्ण विश्व के उन नीति निर्माताओं एवं नियोजकों का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट कराया है जो कि आई. सी. टी. (सूचना एवं संचार तकनीक) के माध्यम से विकास की गति को सुनिश्चित करने में रूचि रखते हैं।

डॉ. एस एम हैदर रिज़वी जो कि वर्तमान में मध्यप्रदेश शासन के सुशासन एवं नीति विश्लेषण स्कूल, भोपाल में संचालक (नीति विश्लेषण) के रूप में पदस्थ है को यह पुरूस्कार नई दिल्ली में डिजीटल एम्पावरमेंट फाउन्डेशन द्वारा आयोजित एक समारोह में प्रदान किया गया जो कि भारत सरकार के सूचना तकनीकी मंत्रालय एवं इस क्षेत्र की अन्य महत्वपूर्ण संस्थाओं के संयुक्त सहयोग से आयोजित किया गया था। डॉ हैदर द्वारा इस परियोजना के सफलतापूर्वक पथप्रदर्शन करने के अतिरिक्त 'खेती' के परिप्रेक्ष्य में एक लघु संभाव्यता परीक्षण भी किया जिसमें सिरोंज के छोटे एवं सीमान्त किसानों के सहकारी प्रयासों का अमूल्य योगदान रहा।

खेती तकनीक समस्त हितग्राहियों विशेषकर कृषि विशेषज्ञों, कृषक प्रतिनिधियों एवं किसानों के समक्ष सूचना संचार को गति प्रदान करने में संलग्न हैं। अब वे अपने मोबाईल की सहायता से 6 उच्च गुणवता वाले चित्र एवं 1.5 मिनिट की आवाज़ के माध्यम से एक पैकेज (एस डी एस) अपने खेत या गांव में ही निमिर्त कर वेब के माध्यम से अपलोड कर कृषि विशेषज्ञों तक पहुंचा सकते हैं एवं कृषि संबंधी अपनी समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त इस योजना में प्रश्नोत्तरों के ग्रंथालय की ज्ञान रिपोजिटरी भी तैयार की जा रही है ताकि गरीब कृषक समुदाय को इसके व्यापक अनुप्रयोग में सहयोग प्रदान कर उनका सशक्तीकरण किया जा सके।

इस पहल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इस प्रयास एवं तकनीक के विकास में समस्त हितग्राहियों विशेषकर किसानों का सहयोग सहभागितापूर्ण तरीके से प्राप्त किया गया। जिससे समस्त हितग्राहियों की क्षमता विकास एवं सशक्तिकरण पर प्रभावी ढंग से ध्यान केन्द्रित किया जाना संभव हो पाया। इस तकनीक का किसानों की आय, अजीविका एवं सशक्तिकरण की दशा एवं दिशा में सुधार लाने में अत्यन्त महत्वपूर्ण स्थान है। 
'खेती' के इस परीक्षणात्मक पहल में 200 से अधिक प्रश्नो एवं समस्याओं का समाधान किया गया जिनके माध्यम से कुछ अत्यन्त महत्वपूर्ण संरक्षणात्मक जोखिमों को कम किया गया। ये तकनीक अन्य क्षेत्रों में भी संचार एवं सूचना के आदान-प्रदान एवं विस्तार हेतु प्रभावी ढंग से प्रयोग की जा सकती है।

मध्यप्रदेश शासन का 'सुशासन एवं नीति विश्लेषण स्कूल, भोपाल, शैफील्ड हेल्लाम विश्वाद्यालय, इग्लैंड के सहयोग से तकनीकी के सहज अनुप्रयोगों के विस्तार हेतु संभावनाऐं तलाशने में प्रयासरत् है।

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Saturday, December 5, 2009

वन संरक्षण में सूचना प्रौद्योगिकी के बेहतर उपयोग को प्राथमिकता

वन मंत्री श्री सरताज सिंह द्वारा वन सूचना प्रौद्योगिकी के कार्यों की समीक्षा
वन मंत्री श्री सरताज सिंह ने वन संरक्षण को प्राथमिकता में रखते हुए सूचना प्रौद्योगिकी के बेहतर उपयोग पर बल दिया है। श्री सिंह आज यहां सतपुड़ा भवन स्थित वन मुख्यालय में सूचना प्रौद्योगिकी गतिविधियों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इन प्रणालियों का जमीनी स्तर पर उपयोग किया जाये ताकि वन प्रबंधन के बेहतर परिणाम मिल सके। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव वन श्री प्रशांत मेहता, प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री ए.के. दुबे तथा वरिष्ठ वन अधिकारी उपस्थित थे।
वन मंत्री ने कहा कि वन क्षेत्रों में अवैध कटाई के साथ ही पशु चराई से होने वाले नुकसान को नियंत्रित करने के लिए प्रयास किये जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि फील्ड में पदस्थ कर्मचारियों को सूचना प्रौद्योगिकी का समुचित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, ताकि इसके उपयोग से वन प्रबंधन को बेहतर किया जा सके। श्री सिंह ने कहा कि वन अधिकार के तहत भूमि सीमांकन का काम सूचना प्रौद्योगिकी के तहत तैयार किये गये साफ्टवेयर द्वारा किया जा रहा है। इसके लिए कर्मचारियों को समुचित प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाये।
वन मंत्री ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी के तहत तैयार की गई प्रणालियों का उपयोग जमीनी स्तर पर वानिकी गतिविधियों के क्रियान्वयन में होना चाहिए ताकि बेहतर परिणाम मिल सके। इससे फील्ड स्तर पर पदस्थ कर्मचारियों में जिम्मेदारी की भावना आने के साथ ही कम समय सीमा मेंं कार्यों को अधिक सक्षमता के साथ किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 से अभी तक वन क्षेत्रों में आये बदलाव का आंकलन किया जाये, ताकि इसके आधार पर क्षेत्र विशेष के लिए वन प्रबंधन की रणनीति तय की जा सके।
बैठक में बताया गया कि देश में मध्य प्रदेश ने अग्रणी होकर वनों एवं वन्य प्राणियों के संरक्षण एवं प्रबंधन के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग किया है जिसका अनुकरण अब अन्य प्रदेशों द्वारा किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग के लिए मध्य प्रदेश, वन विभाग के नेतृत्व में दल गठित किया गया है। प्रदेश में वन अधिकार के तहत भूमि सीमांकन के लिए सूचना प्रौद्योगिकी द्वारा तैयार की गई प्रणाली का उपयोग सफल रहा है। अब अन्य राज्य भी इस प्रणाली का उपयोग कर वन अधिकार के तहत अधिकार पत्र वितरित करने लगे हैं।
अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक सूचना प्रौद्योगिकी श्री अनिल ओबेराय ने बताया कि कम्प्यूटर आधारित वन प्रबंधन प्रणालियों द्वारा विभिन्न वानिकी गतिविधियों का आंकलन किया जा सकता है। इसके लिए विभाग द्वारा डाटा सेंटर स्थापित किया गया है। प्रदेश में स्थित वनक्षेत्रों के मानचित्रों का डिजिटाईजेशन कार्य पूर्ण कर लिया गया है। कौशल उन्नयन के तहत लगभग 10 हजार वन कर्मियों को प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा चुका है। वन क्षेत्रों में अग्नि घटनाओं की सूचना देने के लिए फायर अलर्ट मैसेजिंग सिस्टम काफी उपयोगी रहा है।
बैठक में वन मंत्री के समक्ष प्रस्तावित नवीन वन भवन के निर्माण की प्रगति का प्रस्तुतीकरण किया गया। मुख्य वन संरक्षक सामुदायिक वन प्रबंधन परियोजना श्री जव्वाद हसन ने बताया कि भोपाल में वर्तमान में वन विभाग के विभिन्न संस्थानों के मुख्यालय (प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय, म.प्र.राज्य लघु वनोपज संघ कार्यालय, म.प्र. राज्य वन विकास निगम कार्यालय एवं ईको पर्यटन विकास बोर्ड कार्यालय) विभिन्न भवनों में स्थापित हैं तथा इन भवनों में पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं हैं।
अन्य कई राज्यों में पृथक से वन भवन बनाये गये हैं तथा बनाये जा रहे हैं। अतः वन भवन की आवश्यकता मध्य प्रदेश में भी है। यह प्रस्तावित वन भवन तुलसी नगर स्थित लिंक रोड नंबर 2 पर शासकीय भूमि, जो शासन द्वारा उपलब्ध कराई गयी है, पर बनाया जाना प्रस्तावित है।
प्रस्तावित नवीन वन भवन का निर्माण क्षेत्र लगभग 2 लाख 80 हजार वर्ग फुट होगा तथा 1024 अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिये यह बनाया जायेगा। प्रथम चरण के प्राक्कलन अनुसार भवन की लागत लगभग रूपये 49 करोड़ आंकी गयी है। माननीय मुख्य मंत्रीजी द्वारा नवीन वन भवन का शिलान्यास 27 जुलाई, 2008 को किया जा चुका है।
पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन के माध्यम से काउन्सिल ऑफ आर्किटेक्चर (भारत सरकार की वैधानिक संस्था) के दिशा निर्देशों का पालन करते हुये मेसर्स इनफार्म आर्किटेक्ट, बैंगलोर का चयन वास्तुविद के रूप में किया गया है। म.प्र. राज्य पर्यटन विकास निगम को निर्माण एजेन्सी नियुक्त किया गया है जिसके द्वारा राष्ट्रीय स्तर के 6 भवन निर्माताओं को चयन सूची में रखा गया है। वास्तुविद द्वारा भवन के नक्शे, डिजाइन, टेण्डर संबंधित अभिलेख, वन विभाग को प्रस्तुत किये जा चुके हैं।
प्रस्तावित भवन में अग्नि सुरक्षा एवं जल संरक्षण का प्रावधान विशेष रूप से किया गया है। वन विभाग द्वारा विकसित किये जा रहे जी.आई.एस. (भौगोलिक सूचना प्रबंध प्रणाली) एवं कम्प्यूटर तकनीक के लिये वन भवन को विशेष सुविधायुक्त बनाया जायेगा। भवन में वाहनों के लिए बेसमेंट पार्किंग का प्रावधान किया जायेगा। भवन का डिजाइन एवं सामग्री का उपयोग इस प्रकार किया जायेगा कि यह ग्रीन बिल्डिंग सर्टिफिकेशन के मापदंडों पर खरा उतरे। भवन अत्याधुनिक स्तर का होगा।

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Sunday, November 15, 2009

उज्जैन का हायब्रिड तारामंडल "आचार्य वराहमिहिर अंतरिक्ष विहार" के नाम पर

उज्जैन में देश के प्रथम हायब्रिड तारामंडल का शिलान्यास
सूचना प्रौद्योगिकी एवं उद्योग मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने आज उज्जैन में देश के प्रथम हायब्रिड तारामंडल का शिलान्यास किया। उन्होंने इस मौके पर कहा कि यह तारामंडल 'आचार्य वराहमिहिर अंतरिक्ष विहार' के नाम से जाना जायेगा। 12 करोड़ रूपये की लागत से बनने वाला यह तारामंडल मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद तथा उज्जैन विकास प्राधिकरण संयुक्त रूप से मिलकर बना रहे हैं।सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री विजयवर्गीय ने कहा कि आचार्य वराहमिहिर के गणित शोध संबंधी कार्यों का संकलन कर सम्पूर्ण विवरण भारत सरकार को भेजा जायेगा और उनके नाम पर डाक टिकिट जारी किये जाने का आग्रह किया जायेगा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सह-सर कार्यवाह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ श्री सुरेश सोनी थे। 
उन्होंने भारत के प्राचीन विज्ञान की अनेक स्वर्णिम परम्पराओं का उल्लेख किया। उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. मोहन यादव ने बताया कि उज्जैन की गिनती पूरी दुनिया में उत्कृष्ट कालगणना केन्द्र के रूप में विख्यात थी। अब यह ख्याति आधुनिक तारामंडल के बन जाने से पुन: पूरी दुनिया में स्थापित होगी। उन्होंने बताया कि हाई ऑप्टिकल फाइबर से वेधाशाला को जोड़ा जायेगा जिससे अंतरिक्ष के समस्त घटनाक्रम को तारामंडल में प्रत्यक्ष देखा जा सकेगा। यह तारामंडल रोबोटिक कंट्रोल तथा 3-डी एनीमेशन युक्त होगा।

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