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Wednesday, January 20, 2010

डॉ. सैय्यद हैदर रिजवी को मंथन साऊथ एशिया अवार्ड 2009

ज्ञान सहायता विस्तार तकनीक पहल) तकनीक को
'ई-उद्यमिता एवं ई-आजीविका' श्रेणी के अंतर्गत वर्ष 2009 का प्रतिष्ठित मंथन दक्षिण एशिया पुरूस्कार 'खेती' (ज्ञान सहायता विस्तार तकनीक पहल) तकनीक को दिया गया है। यह डॉ. सैय्यद हैदर रिजवी को उन्हें भारत में मध्यप्रदेश राज्य के सिरोंज विकासखण्ड में सिरोंज क्राप प्रोडियूसरस कंपनी लिमिटेड के निर्धन किसानो के साथ उनकी नवप्रवर्तनात्मक अनुसंधान परियोजना, 'ग्रामीण ई-सेवा परियोजना' हेतु दिया गया है यह परियोजना इंग्लैंड के शैफील्ड हेल्लाम विश्वविद्यालय एवं ऑक्फोर्ड विश्वविद्यालय के संयुक्त सहयोग की अभिनव पहल थी। भारत में इस परियोजना का प्रयोग एवं क्रियान्वयन डॉ एस एम हैदर रिज़वी एवं उनके ब्रिटिश सहयोगी डॉ एन्डी डीयरडेन द्वारा प्रदान एवं सफल साल्यूशन के साथ किया गया।
डॉ. हैदर एवं डॉ. डीयरडेन इस तकनीक के विकास कार्य में विगत 3 वर्षो से संलग्नरत् रहे। इस प्रयास ने सम्पूर्ण विश्व के उन नीति निर्माताओं एवं नियोजकों का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट कराया है जो कि आई. सी. टी. (सूचना एवं संचार तकनीक) के माध्यम से विकास की गति को सुनिश्चित करने में रूचि रखते हैं।

डॉ. एस एम हैदर रिज़वी जो कि वर्तमान में मध्यप्रदेश शासन के सुशासन एवं नीति विश्लेषण स्कूल, भोपाल में संचालक (नीति विश्लेषण) के रूप में पदस्थ है को यह पुरूस्कार नई दिल्ली में डिजीटल एम्पावरमेंट फाउन्डेशन द्वारा आयोजित एक समारोह में प्रदान किया गया जो कि भारत सरकार के सूचना तकनीकी मंत्रालय एवं इस क्षेत्र की अन्य महत्वपूर्ण संस्थाओं के संयुक्त सहयोग से आयोजित किया गया था। डॉ हैदर द्वारा इस परियोजना के सफलतापूर्वक पथप्रदर्शन करने के अतिरिक्त 'खेती' के परिप्रेक्ष्य में एक लघु संभाव्यता परीक्षण भी किया जिसमें सिरोंज के छोटे एवं सीमान्त किसानों के सहकारी प्रयासों का अमूल्य योगदान रहा।

खेती तकनीक समस्त हितग्राहियों विशेषकर कृषि विशेषज्ञों, कृषक प्रतिनिधियों एवं किसानों के समक्ष सूचना संचार को गति प्रदान करने में संलग्न हैं। अब वे अपने मोबाईल की सहायता से 6 उच्च गुणवता वाले चित्र एवं 1.5 मिनिट की आवाज़ के माध्यम से एक पैकेज (एस डी एस) अपने खेत या गांव में ही निमिर्त कर वेब के माध्यम से अपलोड कर कृषि विशेषज्ञों तक पहुंचा सकते हैं एवं कृषि संबंधी अपनी समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त इस योजना में प्रश्नोत्तरों के ग्रंथालय की ज्ञान रिपोजिटरी भी तैयार की जा रही है ताकि गरीब कृषक समुदाय को इसके व्यापक अनुप्रयोग में सहयोग प्रदान कर उनका सशक्तीकरण किया जा सके।

इस पहल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इस प्रयास एवं तकनीक के विकास में समस्त हितग्राहियों विशेषकर किसानों का सहयोग सहभागितापूर्ण तरीके से प्राप्त किया गया। जिससे समस्त हितग्राहियों की क्षमता विकास एवं सशक्तिकरण पर प्रभावी ढंग से ध्यान केन्द्रित किया जाना संभव हो पाया। इस तकनीक का किसानों की आय, अजीविका एवं सशक्तिकरण की दशा एवं दिशा में सुधार लाने में अत्यन्त महत्वपूर्ण स्थान है। 
'खेती' के इस परीक्षणात्मक पहल में 200 से अधिक प्रश्नो एवं समस्याओं का समाधान किया गया जिनके माध्यम से कुछ अत्यन्त महत्वपूर्ण संरक्षणात्मक जोखिमों को कम किया गया। ये तकनीक अन्य क्षेत्रों में भी संचार एवं सूचना के आदान-प्रदान एवं विस्तार हेतु प्रभावी ढंग से प्रयोग की जा सकती है।

मध्यप्रदेश शासन का 'सुशासन एवं नीति विश्लेषण स्कूल, भोपाल, शैफील्ड हेल्लाम विश्वाद्यालय, इग्लैंड के सहयोग से तकनीकी के सहज अनुप्रयोगों के विस्तार हेतु संभावनाऐं तलाशने में प्रयासरत् है।

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