डॉ. नंदकिशोर त्रिखा सम्मानित
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय द्वारा स्थापित गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान वरिष्ठ पत्रकार डॉ. नंद किशोर त्रिखा को प्रदान किया गया। स्थानीय समन्वय भवन में आयोजित एक समारोह में भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष एवं न्यायमूर्ति श्री जी.एन. रे ने यह सम्मान श्री त्रिखा को प्रदान किया। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र प्रभु, स्वदेश के प्रबंध संपादक राजेन्द्र शर्मा, विश्वविद्यालय के कुलपति श्री अच्युतानंद मिश्र एवं कुलाधिसचिव ओ.पी. दुबे विशेष रूप से उपस्थित थे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति श्री रे ने कहा कि मीडिया समाज का दर्पण होता है, पर आज वह दोराहे पर खड़ा है। उसमें गिरावट आ रही है। यह देश और प्रजातंत्र के लिए घातक है। मीडिया को इस स्थिति से उभारने के लिए पत्रकारों को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि श्री त्रिखा का सम्मान पत्रकारिता के आदर्शों का सम्मान है।
श्री त्रिखा ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज पत्रकारिता के सामने सबसे बड़ा संकट विश्वसनीयता का है। पत्रकारिता अपनी जड़ से कट रही है, आज उसको नैतिक और आत्मानुशासी बनाने की जरूरत है। आज आवश्यकता इस बात की है कि मीडिया विश्वसनीयता का सहज सोच और संस्कार अपने कर्म में प्रतिस्थापित करे। पत्रकारिता को अपने उत्तरदायित्व का बोध करना होगा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति श्री रे ने कहा कि मीडिया समाज का दर्पण होता है, पर आज वह दोराहे पर खड़ा है। उसमें गिरावट आ रही है। यह देश और प्रजातंत्र के लिए घातक है। मीडिया को इस स्थिति से उभारने के लिए पत्रकारों को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि श्री त्रिखा का सम्मान पत्रकारिता के आदर्शों का सम्मान है।
श्री त्रिखा ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज पत्रकारिता के सामने सबसे बड़ा संकट विश्वसनीयता का है। पत्रकारिता अपनी जड़ से कट रही है, आज उसको नैतिक और आत्मानुशासी बनाने की जरूरत है। आज आवश्यकता इस बात की है कि मीडिया विश्वसनीयता का सहज सोच और संस्कार अपने कर्म में प्रतिस्थापित करे। पत्रकारिता को अपने उत्तरदायित्व का बोध करना होगा।
उन्होंने कहा कि यदि पत्रकारिता को जीवित रखना है तो उसे अपनी विश्वसनीयता के प्रति संवेदनशील और सतर्क होना होगा। उन्होंने कहा कि 'लोक अभियान' चलाकर मीडिया को ऐसा किए जाने के लिए बाध्य किया जाना चाहिए। उन्होंने 'मीडिया विश्वसनीयता सूचकांक' निर्धारित करने की बात कही। उन्होंने कहा इसके लिए विश्वविद्यालय में अध्ययन पीठ स्थापित किया जाना चाहिए। उन्होंने सम्मान में प्रदान की गई राशि में से इस कार्य के लिए 'बीज राशि' देने की भी घोषणा की।
वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र प्रभु ने श्री त्रिखा के पत्रकारीय आदर्शों के प्रति समर्पण को याद किया। स्वदेश के प्रबंध संपादक श्री राजेन्द्र शर्मा ने कहा कि आज पत्रकारिता की डगर कठिन है। डॉ. त्रिखा ने पत्रकारिता के उच्चतम आदर्शों को छुआ और निरंतर पत्रकारिता के धर्म का पालन किया।
वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र प्रभु ने श्री त्रिखा के पत्रकारीय आदर्शों के प्रति समर्पण को याद किया। स्वदेश के प्रबंध संपादक श्री राजेन्द्र शर्मा ने कहा कि आज पत्रकारिता की डगर कठिन है। डॉ. त्रिखा ने पत्रकारिता के उच्चतम आदर्शों को छुआ और निरंतर पत्रकारिता के धर्म का पालन किया।
राष्ट्रवादी पत्रकारिता के पक्षधर डॉ. त्रिखा पत्रकारिता की विधाओं की त्रिवेणी हैं, उन्होंने पत्रकार, लेखक और अध्यापक तीनों रूपों में अपनी छाप छोड़ी है।
इसके पूर्व न्यायमूर्ति श्री रे ने शाल, श्रीफल और प्रशस्ति पत्र तथा एक लाख एक रुपये सम्मान राशि प्रदान कर श्री त्रिखा को सम्मानित किया। विश्वविद्यालय के कुलपति श्री अच्युतानंद मिश्र ने प्रशस्ति पत्र का वाचन किया।
आभार प्रदर्शन कुलाधिसचिव ओ.पी. दुबे ने किया। कार्यक्रम का संचालन जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष संजय द्विवेदी ने किया।
इसके पूर्व न्यायमूर्ति श्री रे ने शाल, श्रीफल और प्रशस्ति पत्र तथा एक लाख एक रुपये सम्मान राशि प्रदान कर श्री त्रिखा को सम्मानित किया। विश्वविद्यालय के कुलपति श्री अच्युतानंद मिश्र ने प्रशस्ति पत्र का वाचन किया।
आभार प्रदर्शन कुलाधिसचिव ओ.पी. दुबे ने किया। कार्यक्रम का संचालन जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष संजय द्विवेदी ने किया।
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