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Sunday, December 6, 2009

पत्रकारों की लायसेसिंग संबंधी की अनुशंसा पर केन्द्र रुख स्पष्ट करें

प्रसार भारती पब्लिक ब्रॉडकास्टर की भूमिका निभाए
मध्यप्रदेश के जनसंपर्क मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने आज यहां सूचना मंत्रियों के सम्मेलन में लिब्राहन आयोग द्वारा पत्रकारों की लाइसेसिंग की अनुशंसा का मुद्दा उठाकर इस संबंध में भारत सरकार से अपनी नीति स्पष्ट करने की अपेक्षा की। 
सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा आयोजित राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के सूचना मंत्रियों के 27वे सम्मेलन का उद्घाटन केन्द्रीय सूचना प्रसारण मंत्री श्रीमती अंबिका सोनी ने किया। जनसंपर्क मंत्री के साथ राज्य के जनसंपर्क सचिव श्री मनोज श्रीवास्तव ने भी बैठक में भाग लिया।
श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने अपने भाषण में पत्रकारों की लाइसेसिंग के संबंध में लिब्राहन आयोग की अनुशंसा से असहमति व्यक्त करते हुये कहा कि क्या हम पत्रकारों की अधिस्वीकृति से उनकी लाइसेसिंग के युग में प्रवेश कर रहे हैं ? लिब्राहन आयोग ने अपनी अनुशंसा में कहा है कि अन्य प्रोफेशन्स की तरह पत्रकारों को भी लायसेंस से ही काम करने की व्यवस्था आवश्यक है और उन्हें भी अनुशासनिक कार्रवाई का पात्र बनाया जाना चाहिये तथा व्यावसायिक कदाचार सिद्ध होने पर पत्रकारों के काम का अधिकार निलंबित कर देना चाहिये।
केबल नीति में 74 प्रतिशत विदेशी निवेश की अनुमति देशहित में नहीं
श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने केन्द्र सरकार द्वारा नवंबर माह में केबल आपरेटर्स के लिये लाई गई हिट्स संबंधी नीति में 74 प्रतिशत तक विदेशी पूंजी निवेश की अनुमति देने पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुये कहा कि यह देशहित के अनुकूल नहीं है। स्वयं अमेरिका ने अपने टेलीकम्युनिकेशन एक्ट में विदेशी निवेश को 20 प्रतिशत तक सीमित रखा है। 
वर्तमान केबल एक्ट एसओएस और केबल आपरेटरों पर प्रभावी नियमन नहीं कर पा रहा है। समाज और उपभोक्ताओं के हित में केबल एक्ट को और मजबूत बनाये जाने की उन्होंने मांग की। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार केबल आपरेटर्स के संबंध में एक प्रमोशनल पालिसी लाये। केबल आपरेटरों के जरिये राजनैतिक इस्तेमाल और व्यक्तिगत आक्रमण आदि पर निगरानी रखने का भी उन्होंने सुझाव दिया। 
श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने बताया कि मध्यप्रदेश में कापी राईट एक्ट को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिये विशेष प्रकोष्ठ का गठन किया है। उन्होंने वीडियो पायरेसी रोकने के लिये पायरेट गेंगों को ट्रेक कर उनकी परसम्पत्तियों को फ्रीज करने का सुझाव दिया। उन्होंने डिजीटल पायरेसी रोकने के लिये भी ज्यादा सख्त कदम उठाने की जरूरत बताई। 
उन्होंने बताया कि प्रदेश में मनोरंजन कर की दरों का युक्तियुक्तकरण किया गया है। मध्यप्रदेश में मनोरंजन कर की दरें अन्य राज्यों की तुलना में कम हैं। मनोरंजन कर को प्रस्तावित गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स के अंतर्गत लाने के मामले में राज्य के विवेकाधिकार के मुद्दों पर विशेष ध्यान देने की बात कहीं। केबल क्षेत्र के डिजिटलीकरण पर उन्होंने सहमति व्यक्त की।
प्रसार भारती पब्लिक सर्विस ब्राडकास्टर की भूमिका निभाये
जनसंपर्क मंत्री श्री शर्मा ने प्रसार भारती द्वारा जनहित के मुद्दों, लोकधर्मी कार्यक्रमों और सांस्कृतिक उत्सवों के प्रसारण के लिये शुल्क लिये जाने का विरोध करते हुये कहा कि प्रसार भारती स्वयं को पब्लिक सर्विस ब्राडकास्टर बताता है और लोकधर्मी विषयों के प्रसारण के लिये शुल्क मांगकर कामशिर्यल संगठन की भूमिका में आ जाता है, जो आपत्तिजनक है। 
उन्होंने इस संबंध में खजुराहो समारोह, तानसेन समारोह और मुख्यमंत्री के जनशिकायत निवारण की जानकारी के लिये दूरदर्शन द्वारा शुल्क मांगे जाने का उल्लेख किया। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा सामुदायिक रेडियो के लिये भारत सरकार को भेजे गये प्रस्तावों को मंजूरी नहीं दिये जाने का मामला भी उन्होंने उठाया। श्री शर्मा ने ब्राडकास्टिगं सर्विस रेगुलेशन के संबंध में एक स्वतंत्र टीआरपी रेगुलेशन बनाये जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि 11 वीं योजना के अंत तक लगभग पौने पांच सौ चैनल हो जायेंगे। टीआरपी के बारे में ग्रामीण क्षेत्रों या एक लाख से कम जनसंख्या के कस्बों के लोगों के दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व होता ही नहीं है। टीआरपी टारगेट ग्रुप के निर्णय को विकृत कर रही है।
पुस्तकों के लिये स्पष्ट प्रावधान हो
जनसंपर्क मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने प्रेस एंड बुक्स् रजिस्ट्रेशन एक्ट 1867 में प्रस्तावित संशोधनों को उपयोगी बताते हुये इसमें से पुस्तकों को बाहर करने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि इस प्रावधान को इस एक्ट से हटाया जाता है तो पुस्तकों के रजिस्ट्रेशन के लिये अलग से स्पष्ट प्रावधान किया जाना चाहिये। 
श्री शर्मा ने आरएनआई द्वारा शीर्षक आवंटन में सर्तकता बरतने की आवश्यकता बताई। प्रसारण सेवा विनियमन विधेयक 2007 के संबंध में जनसंपर्क मंत्री ने सहमति व्यक्त की। उन्होंने इस अधिनियम में दिशा निर्देश और नियम बनाने के लिये राज्यों को कोई शक्तियां प्रदान नहीं करने पर आपत्ति व्यक्त की। श्री शर्मा ने भारतीय पब्लिक रिलेशंस कौंसिल के गठन, भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय और राज्य स्तर के जनसंपर्क एवार्ड और केन्द्र तथा राज्य सरकारों के सूचना विभागों के बीच अधिकाधिक समन्वय और कार्यक्रम संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव दिये।

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