अखबार सदैव बाज़ार में रहे हैं और वे बाज़ार से बाहर रह भी नहीं सकते। अखबारों की बाज़ारवाद के खिलाफ लड़ाई जरूरी है किन्तु बाज़ार से नहीं। उसे यह साबित करना होगा कि वह घोर बाज़ारी है लेकिन बाज़ारू नहीं।
मीडिया के सामने बाज़ारू हुए बिना बाज़ारी होने की चुनौती है। यह बात वरिष्ठ पत्रकार श्री राहुल देव ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय द्वारा समाचार पत्रों के भविष्य विषय पर आधारित दो दिवसीय परिसंवाद में कही।
पत्रकार श्री देव ने कहा कि अखबारों के लिये सबसे बड़ी चुनौती गूगल है। उन्होंने यह सवाल उठाया कि जब किसी संवाद में सभी सहमतों की उपस्थिति होगी तो वहां संवाद कैसे हो सकता है। उनका मानना था कि मालिकों और प्रबंधकों का पक्ष सामने होगा तो संवाद कायम किया जा सकता है।
पत्रकार श्री देव ने कहा कि अखबारों के लिये सबसे बड़ी चुनौती गूगल है। उन्होंने यह सवाल उठाया कि जब किसी संवाद में सभी सहमतों की उपस्थिति होगी तो वहां संवाद कैसे हो सकता है। उनका मानना था कि मालिकों और प्रबंधकों का पक्ष सामने होगा तो संवाद कायम किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि अखबारों का व्यावसायिक भविष्य सुरक्षित है, चिन्ता मूल्यों और कर्म के प्रति होनी चाहिये। संगठित पत्रकारों और पाठकों की शक्ति मिलकर समाचार पत्रों की चुनौतियों का सामना कर सकती है।
परिसंवाद में मीडिया की साख विषय पर बोलते हुए भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली के एसोसिएट प्रो. आनंद प्रधान ने कहा कि विज्ञापनदाता समाचारों के कन्टेन्ट को भी प्रभावित करते हैं।
परिसंवाद में मीडिया की साख विषय पर बोलते हुए भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली के एसोसिएट प्रो. आनंद प्रधान ने कहा कि विज्ञापनदाता समाचारों के कन्टेन्ट को भी प्रभावित करते हैं।
समाचार पत्रों से पब्लिक स्फीयर खत्म होता जा रहा है। युवा वर्ग के लिये पत्र-पत्रिकाएं अप्रासंगिक हो रही हैं। उन्होंने प्राइवेट इक्वटी और नेट कन्टेन्ट जैसे घातक प्रयोगों पर भी चिन्ता व्यक्त की। यह कुछ चुनौतियां अखबार के अन्दर की चुनौतियां हैं जिसके लिये पाठक और समाज को हस्तक्षेप करना होगा। हमें दबाव डालना होगा कि राष्ट्रीय अखबार देश की बात करें।
परिसंवाद में सहारा टाइम्स के सम्पादक श्री उदय सिन्हा ने कहा कि आज सिर्फ पत्रकारिता नहीं बल्कि हर प्रोफेसन की साख गिरी है। अखबार पढ़ना और चुनना एक चैतन्य फैसला होता है। टेलीविजन शाम का मीडिया है लेकिन वह अखबारों को चुनौती नहीं दे सकता। उन्होंने यह भी कहा कि इन्टरनेट भी भारत में समाचार पत्रों के लिये कोई खतरा नहीं है।
वरिष्ठ पत्रकार श्री राजेन्द्र प्रभु ने कहा कि पत्रकारिता की साख गिरने का एक मात्र कारण उनकी विज्ञापन पर बढ़ती निर्भरता है। पत्रकारिता का सबसे पहला सिद्धांत यह होना चाहिये कि हम समाचार को ठीक ढंग से लिखें।
द्वितीय सत्र में 'सम्पादकों की भूमिका' पर चर्चा करते हुए कुलपति श्री अच्युतानंद मिश्र ने कहा कि सम्पादक की भूमिका उसके नैतिक कर्म पर निर्भर होती है। भारत में सम्पादन की एक गौरवशाली परम्परा रही है और यहां सम्पादकों और प्रकाशकों में अनुकरणीय रिश्ते रहे हैं।
सम्पादक की भूमिका पर बोलते हुए श्री रमेश नैयर ने कहा कि सामाजिक गंदगी को साफ करने का काम सम्पादक ही कर सकता है। लखनऊ से आये वरिष्ठ पत्रकार श्री विभांशु दिव्याल ने भी इस मौके पर संबोधित किया।
परिसंवाद में सहारा टाइम्स के सम्पादक श्री उदय सिन्हा ने कहा कि आज सिर्फ पत्रकारिता नहीं बल्कि हर प्रोफेसन की साख गिरी है। अखबार पढ़ना और चुनना एक चैतन्य फैसला होता है। टेलीविजन शाम का मीडिया है लेकिन वह अखबारों को चुनौती नहीं दे सकता। उन्होंने यह भी कहा कि इन्टरनेट भी भारत में समाचार पत्रों के लिये कोई खतरा नहीं है।
वरिष्ठ पत्रकार श्री राजेन्द्र प्रभु ने कहा कि पत्रकारिता की साख गिरने का एक मात्र कारण उनकी विज्ञापन पर बढ़ती निर्भरता है। पत्रकारिता का सबसे पहला सिद्धांत यह होना चाहिये कि हम समाचार को ठीक ढंग से लिखें।
द्वितीय सत्र में 'सम्पादकों की भूमिका' पर चर्चा करते हुए कुलपति श्री अच्युतानंद मिश्र ने कहा कि सम्पादक की भूमिका उसके नैतिक कर्म पर निर्भर होती है। भारत में सम्पादन की एक गौरवशाली परम्परा रही है और यहां सम्पादकों और प्रकाशकों में अनुकरणीय रिश्ते रहे हैं।
सम्पादक की भूमिका पर बोलते हुए श्री रमेश नैयर ने कहा कि सामाजिक गंदगी को साफ करने का काम सम्पादक ही कर सकता है। लखनऊ से आये वरिष्ठ पत्रकार श्री विभांशु दिव्याल ने भी इस मौके पर संबोधित किया।
पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष श्री पुष्पेन्द्र पाल सिंह ने सत्रों का सारांश प्रस्तुत किया। परिसंवाद के सत्रों का संचालन विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री प्रकाश साकल्ले एवं जनसंचार विभाग के अध्यक्ष श्री संजय द्विवेदी ने किया।
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