भारत सरकार के वर्ष 2009 के प्रतिवेदन के अनुसार
भारतीय वन सर्वेक्षण संस्थान, भारत सरकार के वर्ष 2009 के प्रतिवेदन के अनुसार मध्यप्रदेश में वर्ष 2005 की तुलना में 1,687 वर्ग कि.मी. वन आवरण में वृद्धि हुई है। वर्ष 2005 में जारी प्रतिवेदन में 2005 तक मध्यप्रदेश का वनावरण 76,013 वर्ग कि.मी. बताया गया था, जो बढ़कर 77,700 वर्ग कि.मी. हो गया है।मध्यप्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री ए.के. दुबे ने बताया कि प्रतिवेदन के मुताबिक मध्यप्रदेश में वनों के बाहर वृक्ष आवरण क्षेत्र में भी वर्ष 2005 की तुलना में वर्ष 2009 तक 604 वर्ग कि.मी. की वृद्धि हुई है। प्रतिवेदन में पूरे देश के लिये यह आंकड़ा 1106 वर्ग कि.मी. बताया गया है। इसमें से अकेले मध्यप्रदेश की 50 प्रतिशत से ज्यादा की भागीदारी रही है।
श्री दुबे ने बताया कि इसी प्रकार, देश में झाड़ी वन क्षेत्र में 3050 वर्ग कि.मी. की शुद्ध वृद्धि प्रतिवेदन में बताई गई है। इसमें भी प्रतिवेदित अवधि में मध्यप्रदेश के झाड़ी वन क्षेत्र में 4229 वर्ग कि.मी. की वृद्धि हुई है। झाड़ी वन को वन आवरण अथवा वन के बाहर वृक्ष आवरण क्षेत्र में शामिल नहीं किया गया है।
श्री दुबे ने कहा कि प्रतिवेदन में बताया गया है कि मध्यप्रदेश में वन आवरण वृद्धि का कारण वन विभाग द्वारा किये गये वन संवर्द्धन और वन सुरक्षा के उपयों के साथ ही विभाग तथा वन विकास निगम द्वारा किया गया वृक्षारोपण है। यहीं यह भी उल्लेखनीय है कि प्रतिवेदन जिस अवधि का है, उस अवधि में मध्यप्रदेश में 516 वर्ग कि.मी. से अधिक वन क्षेत्र प्रदेश की सिंचाई एवं अन्य विकास परियोजनाओं के लिये भी हस्तांतरित किया गया है।
भारतीय वन सर्वेक्षण संस्थान, देहरादून द्वारा सामान्यत: प्रत्येक 2 वर्ष में वन आवरण एवं वृक्ष आवरण का आंकलन पर प्रतिवेदन प्रकाशित किया जाता है। पिछला प्रतिवेदन वर्ष 2005 का था। इसके बाद, अब 2009 में प्रतिवेदन जारी हुआ है। इस प्रकार, वस्तुत: 2007 का कोई प्रतिवेदन नहीं है।
श्री दुबे ने बताया कि इसी प्रकार, देश में झाड़ी वन क्षेत्र में 3050 वर्ग कि.मी. की शुद्ध वृद्धि प्रतिवेदन में बताई गई है। इसमें भी प्रतिवेदित अवधि में मध्यप्रदेश के झाड़ी वन क्षेत्र में 4229 वर्ग कि.मी. की वृद्धि हुई है। झाड़ी वन को वन आवरण अथवा वन के बाहर वृक्ष आवरण क्षेत्र में शामिल नहीं किया गया है।
श्री दुबे ने कहा कि प्रतिवेदन में बताया गया है कि मध्यप्रदेश में वन आवरण वृद्धि का कारण वन विभाग द्वारा किये गये वन संवर्द्धन और वन सुरक्षा के उपयों के साथ ही विभाग तथा वन विकास निगम द्वारा किया गया वृक्षारोपण है। यहीं यह भी उल्लेखनीय है कि प्रतिवेदन जिस अवधि का है, उस अवधि में मध्यप्रदेश में 516 वर्ग कि.मी. से अधिक वन क्षेत्र प्रदेश की सिंचाई एवं अन्य विकास परियोजनाओं के लिये भी हस्तांतरित किया गया है।
भारतीय वन सर्वेक्षण संस्थान, देहरादून द्वारा सामान्यत: प्रत्येक 2 वर्ष में वन आवरण एवं वृक्ष आवरण का आंकलन पर प्रतिवेदन प्रकाशित किया जाता है। पिछला प्रतिवेदन वर्ष 2005 का था। इसके बाद, अब 2009 में प्रतिवेदन जारी हुआ है। इस प्रकार, वस्तुत: 2007 का कोई प्रतिवेदन नहीं है।
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