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Monday, May 24, 2010

पाठ्य पुस्तकों की संरचना हेतु लेखकों का समूह बनेगा

 शिक्षकों की ट्रेनिंग सतत चलती रहे
स्कूल शिक्षा मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनीस ने स्कूलों की पाठ्य पुस्तकों की संरचना के लिये लेखकों का समूह बनाये जाने को कहा है। श्रीमती अर्चना चिटनीस हाल में मंत्रालय में आयोजित राज्य शिक्षा केन्द्र के टास्क फोर्स की बैठक को सम्बोधित कर रही थीं।

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Thursday, March 25, 2010

मध्यप्रदेश में जनगणना 2011 की तैयारियां शुरू

 एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन 27 मार्च, 2010 को
Census
मध्यप्रदेश में जनगणना 2011 के कार्यों के सुचारू क्रियान्वयन के लिए जरूरी तैयारियां शुरू हो गई है। भारत सरकार गृह मंत्रालय जनगणना कार्य निदेशालय के द्वारा इस उद्देश्य से राजधानी भोपाल स्थित प्रशासन अकादमी में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन 27 मार्च, 2010 को किया जा रहा है। राज्य शासन ने जनगणना 2011 के संबंध में आयोजित इस प्रशिक्षण में संभाग तथा जिला स्तर के संबंधित अधिकारियों को भाग लेने के लिए निर्देशित किया है।

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Tuesday, January 19, 2010

लेखापालों, लिपिकों को एजुकेशन पोर्टल का प्रशिक्षण

भोपाल में  एजुकेशन पोर्टल के प्रशिक्षणार्थियों की संख्या सबसे अधिक
राज्य शासन द्वारा संकुल प्राचार्यो (आहरण संवितरण अधिकारी) के कार्यालयों में कार्यरत लेखापाल/लिपिकों को इन दिनों एजुकेशन पोर्टल का एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण का यह कार्यक्रम प्रदेश के दस डाइट केन्द्रों पर स्थित माइक्रोसॉफ्ट प्रशिक्षण केन्द्रों पर आगामी 16 जनवरी तक चलेगा। प्रशिक्षण में 2 हजार 296 लेखापाल/लिपिक भाग ले रहे हैं।लोक शिक्षण आयुक्त ने समस्त जिलों के सहायक आयुक्त आदिवासी विकास, जिला शिक्षा अधिकारी व डीपीसी (जिला परियोजना समन्वयक) को अपने अमले को अनिवार्य रुप से प्रशिक्षण दिलाने के निर्देश दिये हैं। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि उनके जिले में कोई भी लेखापाल/लिपिक इस प्रशिक्षण से वंचित न रहे। प्रशिक्षणार्थियों को यात्रा भत्ता उनकी कार्यरत संस्था के स्थानीय मद से देय होगा।

जिला शिक्षा केन्द्र के प्रोग्रामर/एम.आई.एस. प्रभारी अपने जिले के सहायक आयुक्त/ जिला शिक्षा अधिकारी से समन्वय कर प्रशिक्षणार्थियों के साथ माइक्रोसॉफ्ट प्रशिक्षण केन्द्र में उपस्थित रहेंगे। वे माइक्रोसॉफ्ट प्रशिक्षण के साथ प्रशिक्षण देने में भी सहयोग करेंगे।

भोपाल स्थित डाइट केन्द्र पर एजुकेशन पोर्टल के प्रशिक्षणार्थियों की संख्या सबसे अधिक है। यहां कुल 300 लेखापाल/लिपिक प्रशिक्षण लेंगे। इसी तरह सागर, इंदौर, उज्जैन, रीवा, जबलपुर, नरसिंहपुर, डाईट केन्द्रों पर प्रत्येक में 240-240 प्रशिक्षणार्थी तथा डाईट रायसेन में 198, डाईट शिवपुरी में 142, ग्वालियर डाईट में 216 प्रशिक्षणार्थी ट्रेनिंग ले रहे हैं।

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Saturday, January 2, 2010

आई.पी.एस. अधिकारियों का प्रशिक्षण 16 जनवरी स

15 सप्ताह के विशेष आधारभूत प्रशिक्षण
भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी भोपाल में भारतीय पुलिस सेवा (आई.पी.एस.) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अन्य अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों का 15 सप्ताह के विशेष आधारभूत प्रशिक्षण का आयोजन किया जा रहा है।महानिदेशक प्रशासन अकादमी भोपाल डॉ. संदीप खन्ना ने जानकारी दी है कि शनिवार 16 जनवरी 2010 से प्रारंभ होने वाले इस प्रशिक्षण में 2002 से 2006 बैंच के 92 आई.पी.एस. अधिकारियों सहित भारतीय वन सेवा, इंडियन पोस्टल सर्विसेज, भारतीय रक्षा संपदा आदि सेवाओं के कुल 116 अधिकारी भाग लेंगे।

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Sunday, December 27, 2009

वक्फ प्रबंधन के लिये अधिकारियों को दिया जायेगा प्रशिक्षण

वक्फ बोर्डों का कम्प्यूटरीकरण  शुरू
वक्फ की सम्पत्ति एवं उसके कार्यों के कुशल प्रबंधन के लिये देश के समस्त राज्यों के वक्फ बोर्ड के अधिकारियों के साथ संबंधित विभागों जैसे राजस्व, पुलिस आदि विभागों के अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जायेगा। 
यह बात आज यहां आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में तत्संबंध में राज्यों के वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (सी.ई.ओ.) की आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. एम.आर. हक, सचिव, केन्द्रीय वक्फ परिषद, नई दिल्ली ने बतलाई। बैठक में वक्फ प्रबंधन के प्रशिक्षण के बारे में गहन विचार-विमर्श किया गया।
प्रारंभ में प्रशासन अकादमी महानिदेशक डॉ. संदीप खन्ना ने बैठक में उपस्थित केन्द्रीय वक्फ परिषद सचिव, राज्यों के सी.ई.ओ. एवं अन्य अधिकारियों का स्वागत करते हुए आशा व्यक्त की कि आज की अतिमहत्वपूर्ण इस बैठक में विशेषज्ञों की मदद से वक्फ प्रबंधन के प्रशिक्षण की आदर्श रूपरेखा विचार-विमर्श कर तैयार की जायेगी।
केन्द्रीय वक्फ परिषद सचिव डॉ. हक ने बैठक में जानकारी दी कि वक्फ ऐसी सम्पत्ति है जो गरीबों, विधवाओं, मुसाफिरों के लिये लोगों ने दान कर रखी है। इसमें बहुत सी सम्पत्ति धार्मिक कामों और शिक्षा के लिये दी गई है। इन सम्पत्तियों पर काफी अतिक्रमण है। 
जो वक्फ के पास सम्पत्तियां हैं उनसे भी उतनी आमदनी नहीं हो रही है, जितनी होनी चाहिये। आमदनी जितनी ज्यादा होगी, उतना ज्यादा जन-कल्याण का कार्य होगा। इसके लिये भारत सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं और कानून को चुस्त-दुरुस्त किया जा रहा है। इस सिलसिले में वक्फ एक्ट संशोधन विधेयक संसद में आने को है। 
सारे वक्फ बोर्डों का कम्प्यूटरीकरण का काम शुरू कर दिया गया है, ताकि समस्त रिकार्ड डिजिटिलाईज्ड होकर काम ऑन लाईन शुरू हो जाये। इसके साथ ही वक्फ सम्पत्तियों के विकास के लिये 'केन्द्रीय वक्फ परिषद' की मौजूदा योजना को बड़ा करके एक 'कार्पोरेशन' की शक्ल देने की कोशिश भी जारी है। 
लेकिन यह सब तभी कामयाब होगा जब वक्फ का काम करने वाले सरकारी अधिकारियों और वक्फ बोर्ड के अधिकारियों को 'वक्फ-प्रबंधन' का अच्छा प्रशिक्षण दिया जाये। यह काम आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, भोपाल और केन्द्रीय वक्फ परिषद, नई दिल्ली ने मिलकर शुरू किया है। इसमें भारत सरकार का कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग सहयोग देने को तैयार है।
बैठक में श्री नूरूल हक, गुवाहाटी, श्री ए.के. अंसारी, गुजरात, श्री मुनीर अहमद, कर्नाटक, श्री पी.एम. जमाल, केरला, श्री आसिफ अली एवं श्री मंजूर खान महाराष्ट्र राज्य, श्री इकबाल अहमद खान, हरियाणा, डॉ. एस.एम. जैदी, मध्यप्रदेश ने वक्फ सम्पत्ति के प्रबंधन हेतु अधिकारियों को प्रदान किये जाने वाले प्रशिक्षण हेतु अपने उपयोगी सुझाव दिये। प्रशासन अकादमी के प्रोफेसर नजमी ने बैठक में उपस्थित अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।

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Friday, December 11, 2009

अधिकारी निर्भीक होकर सही निर्णय लें - श्री राकेश साहनी

 केन्द्रीय सिविल सेवाओं के अधिकारियों का आधारभूत प्रशिक्षण सम्पन्न,
भविष्य में बहुत चुनौतियां हैं। अत: अधिकारी जनता के साथ सतत संवाद रखें और निर्भीक होकर सही निर्णय लें। इस आशय का संबोधन प्रदेश के मुख्य सचिव श्री राकेश साहनी ने आज यहां आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में केन्द्रीय सिविल सेवाओं के अधिकारियों के 83वें आधारभूत प्रशिक्षण के समापन अवसर पर दिया।

कार्यक्रम में श्री दुर्गेश शंकर, विशेष सचिव भारत सरकार एवं सदस्य केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड, महानिदेशक प्रशासन अकादमी डॉ. संदीप खन्ना, संचालक प्रशासन अकादमी श्री मुक्तेश वार्ष्णेय के अलावा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्य सचिव श्री साहनी ने प्रशिक्षु अधिकारियों से अपने संबोधन में कहा कि प्राय: यह देखने में आ रहा है कि सूचना के अधिकार अधिनियम आने के बाद अधिकारियों में निर्णय टालने अथवा ना लेने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है, यह उचित नहीं है। सूचना का अधिकार अधिनियम 'जनतांत्रिक-सुशासन' की दिशा में उचित कदम है।
अत: अधिकारियों को निर्भीकतापूर्वक सही निर्णय लेना चाहिये। मुख्य सचिव ने कहा कि अधिकारी केन्द्रीय राजस्व सेवा के भले ही हों परंतु भविष्य में भारत शासन के विभिन्न विभागों में उन्हें कार्य करना होगा। इसलिये उन्हें प्रजातंत्र के मूल आधार राजनीतिज्ञों के साथ संवाद रखना, उन्हें सही तथ्यों से अवगत कराना और सहमत कराना आना चाहिये।
विशेष सचिव श्री दुर्गेश शंकर ने प्रशिक्षु अधिकारियों को बताया कि प्रायवेट सेक्टर की तुलना में शासकीय सेवा में वेतन भले ही कम हो, परंतु अधिकार और प्रतिष्ठा में शासकीय अधिकारी निजी क्षेत्रों से बहुत आगे हैं। इसे सेवा में रहने के दौरान प्रशिक्षु अधिकारी भविष्य में स्वयं महसूस करेंगे।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1973 में जब वह केन्द्रीय सेवा में आये थे तब भारत में आयकर से होने वाली आय एक हजार करोड़ रुपये थी, जो वर्तमान में बढ़कर 2 लाख 32 हजार करोड़ रुपये हो गयी है। भविष्य में आयकर से होने वाली आय नई ऊँचाईयों को छुएगी। अधिकारियों को निष्ठा और सतर्कता के साथ अपने संस्थान की अपेक्षानुरूप कार्य करना तथा जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना होगा।
प्रारंभ में प्रशासन अकादमी संचालक श्री मुक्तेश वार्ष्णेय ने अतिथियों का स्वागत करते हुए जानकारी दी कि केन्द्रीय सिविल सेवाओं के अधिकारियों का 83वां आधारभूत प्रशिक्षण 31 अगस्त, 2009 को प्रशासन अकादमी में प्रारंभ हुआ था। पन्द्रह सप्ताह के इस प्रशिक्षण में सात केन्द्रीय सेवाओं के कुल 78 अधिकारियों ने भाग लिया।
जिन्हें मसूरी अकादमी के पाठ्यक्रम के अनुसार विशेषज्ञ सेवाओं के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के दौरान राष्ट्रीय स्तर के सेमीनार एवं वर्कशाप के आयोजन के साथ प्रशिक्षु अधिकारियों को पचमढ़ी, अमरकंटक, मण्डला एवं बांधवगढ़ सात दिवसीय ट्रेकिंग तथा ग्रामीण क्षेत्र की जानकारी से अवगत कराने के लिये भेजा गया।
इसके साथ ही खेल एवं पी.टी. के प्रशिक्षण की समुचित व्यवस्था की गयी। प्रशिक्षु अधिकारी निम्बालकर संतोष उत्तमराव एवं सुश्री चामर्थी हिमा बिन्दु ने प्रशिक्षण के लिये प्रशासन अकादमी में की गयी व्यवस्थाओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रशिक्षण के दौरान प्रदान ग्रामीणों की दैनिक दिनचर्या की जानकारी उन्हें अपना कार्य करने में सदैव प्रेरणादायी रहेगी।
प्रशासन अकादमी महानिदेशक डॉ. संदीप खन्ना ने कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि प्रशासन अकादमी भोपाल में पहली बार केन्द्रीय सिविल सेवा के अधिकारियों को आधारभूत प्रशिक्षण प्रदान किया गया है, जो कि अकादमी तथा म.प्र. के लिये गौरव की बात है।
प्रशिक्षु अधिकारी पुरस्कृत- समापन समारोह के अंत में मुख्य सचिव श्री राकेश साहनी तथा विशेष सचिव भारत सरकार श्री दुर्गेश शंकर ने प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न गतिविधियों में विशिष्ट योग्यता प्राप्त करने वाले पुरुष एवं महिला प्रशिक्षु अधिकारियों को पुरस्कार प्रदान किये।
जिसमें सर्वोत्तम आल राउण्डर ट्राफी, प्रशिक्षु अधिकारी श्री निम्बालकर संतोष उत्तमराव को प्रदान की गई। खेल गतिविधियों में पुरुष वर्ग में श्री कल्याणम, राजेश रामाराव (प्रथम) एवं महिला वर्ग में सुश्री चामर्थी हिमा बिन्दु (प्रथम) को ट्राफी तथा द्वितीय स्थान प्राप्त करने पर श्री सत्यनारायण एवं सुश्री नितिना नागोरी को रनरअप का पुरस्कार प्रदान किया गया।
पी.टी. में श्री मानवजीत सिंह ढिल्लों एवं सुश्री मीनू शुक्ला को सर्वोत्तम प्रदर्शन के लिये महानिदेशक स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। इसमें श्री दीनदयाल वर्मा एवं सुश्री सारिका शाह रामचन्द्र को महानिदेशक का रजत पदक तथा श्री मुकाम्बिकेएन एस. एवं सुश्री चामर्थी हिमा बिन्दु को महानिदेशक का कांस्य पदक प्रदान किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान आयोजित लिखित परीक्षा में प्रथम आने पर श्री मृत्युंजय शर्मा को महानिदेशक स्वर्ण पदक, श्री निम्बालकर संतोष उत्तमराव को द्वितीय स्थान पाने पर महानिदेशक रजत पदक एवं सुश्री भावना गुप्ता को तृतीय स्थान प्राप्त करने पर महानिदेशक कांस्य पदक से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव प्रशासन श्री सुदेश कुमार, प्रमुख सचिव राजस्व श्री एम.एम. उपाध्याय एवं सचिव, सामान्य प्रशासन श्री प्रदीप खरे भी उपस्थित थे।

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Tuesday, November 24, 2009

दोषी व्यक्ति के छूटने पर समाज का विश्वास न्यायपालिका के प्रति डगमगानें लगता है

अभियोजक का दायित्व  निष्पक्ष एवं निडर  पैरवी
आम जनता का कानून पर विश्वास बनाये रखने में अभियोजक की भूमिका महत्वपूर्ण है। क्योंकि अपराध व्यक्ति विशेष के प्रति ना होकर सम्पूर्ण समाज के प्रति होता है। यदि अपराध का दोषी व्यक्ति छूट जाता है, तो समाज का विश्वास न्यायपालिका के प्रति डगमगानें लगता है। इस आशय के उद्गार न्यायमूर्ति श्री नारायण सिंह आजाद ने आज यहाँ प्रशासन अकादमी में अभियोजन अधिकारियों के पंचम समूह के प्रशिक्षण सत्र का शुभारंभ करते हुये व्यक्त किये।न्यायमूर्ति श्री आजाद ने कहा कि अभियोजक का दायित्व है कि वह निष्पक्ष एवं निडर होकर न्यायालय में पैरवी करे, ताकि दोषी छूटनें ना पाये। अभियोजक आपराधिक प्रकरण का सूक्ष्म परीक्षण करके ही न्यायालय में पैरवी करे। प्रकरण वापसी के समय भी अभियोजक को अपना स्वतंत्र एवं वैधानिक मत न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिये।
संचालक लोक अभियोजन श्री नवल किशोर गर्ग ने प्रशिक्षु अधिकारियों से पदीय गरिमा बनाये रखनें की अपील की। उन्होंने बताया कि अभियोजन अधिकारियों को प्रशिक्षण के माध्यम से वैधानिक जानकारी देने के साथ-साथ आत्मविश्वास, निष्पक्षता एवं निर्भय होकर अपना कार्य करनें की भावना जाग्रत की जा रही है। इस अवसर पर संयुक्त संचालक लोक अभियोजन श्री एम.एस. अचाले, श्री डी.के. पालीवाल, न्यायाधीश (सर्तकता) ग्वालियर, प्रशिक्षण संचालक डॉ. नजमी, उप संचालक लोक अभियोजन श्री सतीश दिनकर के अलावा प्रशिक्षु अभियोजन अधिकारी उपस्थित थे।

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Sunday, November 22, 2009

अधिकारी मीडिया ट्रायल से बचें – न्यायमूर्ति श्री के.के. वर्मा

 मीडिया का हस्तक्षेप बढ़ा 
अभियोजन एवं अनुसंधान अधिकारी को मीडिया ट्रायल से यथासंभव बचना चाहिये, ताकि प्रकरण की वास्तविकता और अनुसंधान कार्य प्रभावित ना होने पायें। यह विचार न्यायमूर्ति श्री के.के. वर्मा ने आज यहाँ आर.सी.व्ही.पी. प्रशासन अकादमी में अभियोजन अधिकारियों के प्रशिक्षण समापन सत्र को संबोधित करते हुये व्यक्त किये।
न्यायमूर्ति श्री वर्मा ने कहा कि आज इलेक्ट्रानिक मीडिया तथा प्रिंट मीडिया में किसी भी घटनाक्रम को लेकर तथा हाईप्रोफाईल मामलों में न्यायालय में हुये गवाहों के कथनों में तथा अद्यतन स्थिति के संबंध में चर्चा करता है। मीडिया की इन तीव्र गतिविधियों से कुछ हद तक आपराधिक न्याय प्रणाली प्रभावित होने लगीं हैं।
घटना घटित होने अथवा घटना के बाद एफ.आई.आर दर्ज न होने आदि के संबंध में भी मीडिया का हस्तक्षेप बढ़ गया है। इससे आम जनता का मनोभाव आकर्षित होना स्वाभाविक है। घटना की वास्तविकता चाहे सही रूप में हो या घटना के बारे में वह लोगों के विचार हों, यद्यपि लोगों के विचारों का कोई वैधानिक सात्विक मूल्य नहीं होता है।
इसलिये अनुसंधान अधिकारी को मीडिया ट्रायल से अपने आपको परे रखना चाहिये, ताकि किसी भी प्रकार से अनुसंधान प्रभावित न हो और वास्तविक तथ्य तथा साक्ष्य रिकार्ड पर आयें। उन्होंने कहा कि कई बार न्यायालय की कार्यवाही के संबंध में भी अभियोजक से प्रश्न-उत्तर किये जाते हैं, अभियोजक को उत्तर देते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिये कि उनके द्वारा व्यक्त विचार से किसी भी तरह प्रकरण की वास्तविकता प्रभावित ना हो।
संचालक लोक अभियोजना श्री नवल किशोर गर्ग ने सभी प्रशिक्षु अधिकारियों के उज्जवल भविष्य की शुभकामनायें दी। इस अवसर पर प्रशिक्षण संचालक डॉ. नजमी, संयुक्त संचालक श्री मानसिंह अचाले, उप संचालक श्री सतीश दिनकर, प्रशिक्षु अभियोजन अधिकारी आदि उपस्थित थे।

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