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Saturday, February 20, 2010

मध्यप्रदेश में मछली की उत्पादकता राष्ट्रीय स्तर से अधिक

मध्यप्रदेश में मछली की उत्पादकता 29 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
मध्यप्रदेश में मछली की उत्पादकता राष्ट्रीय उत्पादकता से कहीं अधिक है। मत्स्य महासंघ के वृहद विकसित जलाशयों में मत्स्य की उत्पादकता जहां 29 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है वहीं राष्ट्रीय उत्पादकता 12 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है।महासंघ के जलाशयों में मछली की उत्पादकता में वृद्धि हेतु बड़े माप (150 मि.मी. से बड़ा) के कतला बीज के संचय का नया कार्यक्रम 2 वर्ष पूर्व शुरू किया गया था। चालू वर्ष 2009-10 में जलाशयों में 34 हजार 400 बड़े साईज के मत्स्य बीजों का संचय किया गया है।

जलाशयों में लुप्तप्राय: प्रजाति संरक्षण तथा उत्पादन प्राप्त करने की दृष्टि से “नोटोप्लेरस चिताला एवं महाशीर मत्स्य प्रजाति के बीजों के संचय का कार्य प्रदेश में पहली बार वर्ष 2008-09 से शुरू किया गया था। इस साल 25 हजार मत्स्य बीजों के संचय के कार्यक्रम के तहत अब तक 18 हजार 900 मत्स्य बीज का संचय हो चुका है।

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Saturday, February 6, 2010

मछुआरों स्मार्ट कार्ड से रखेंगे आय व व्यवसाय का ब्यौरा

 मत्स्य महासंघ संचालक समिति की बैठक में निर्णय
प्रदेश के मछुआरों की आय बढ़े इसके लिए उनकी व्यावसायिक गतिविधियों का ब्यौरा रखा जायेगा। इसके लिए उनके स्मार्ट कार्ड बनाये जायेंगे। बड़े जलाशयों के मछुआ परिवारों को शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए संचालित जलदीप योजना पर विशेष ध्यान दिया जायेगा।

यह निर्णय मछली पालन मंत्री श्री अजय विश्नोई की अध्यक्षता में सम्पन्न मध्यप्रदेश मत्स्य महासंघ संचालक समिति की 64वीं बैठक में लिया गया। बैठक में श्री अजय विश्नोई ने बताया कि स्मार्ट कार्ड में मछुआरों की व्यक्तिगत जानकारी सहित उनके द्वारा प्रतिदिन पकड़ी गई मछली, आय, भुगतान की गई राशि आदि का विवरण संकलित रहेगा। उनके डाटा को इकाई स्तर से मुख्यालय स्तर तक प्रदर्शित करने हेतु इंटरनेट के माध्यम का उपयोग करते हुए प्रत्येक मछुआरें का अलग-अलग स्मार्ट कार्ड बनाया जायेगा।

श्री विश्नोई ने कहा कि मछुआ परिवारों की आर्थिक व सामाजिक उन्नति की ओर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। जिन क्षेत्रों में मछली उत्पादन कम हुआ है वहां विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने मछुआ कल्याणकारी गतिविधियों में भी लक्ष्य की पूर्ति निश्चित समयावधि में पूर्ण करने के निर्देश दिये। विलुप्त प्राय: प्रजाति की मछलियों के मत्स्य बीजों के संचय पर भी महासंघ ध्यान दे। महासंघ के बड़े जलाशयों में मत्स्याखेट करने वाले मछुआरों को अधिकतम लाभ दिलाने के लिए अनुबंध की अवधि लम्बी करने पर भी बैठक में चर्चा हुई। इसके लिए शर्ते तथा नियम तय करने के लिए उन्होंने विशेषज्ञ समिति गठित की जायेगी।

बैठक में महासंघ में आवश्यकतानुसार रिक्त पदों की पूर्ति करने का भी निर्णय लिया। इसमें तकनीकी दक्षता वाले पदों का विशेष ध्यान रखा जायेगा। मंथन 2009 कार्यशाला में मत्स्य महासंघ के संबंध में की गई अनुशंसाओं का पालन सुनिश्चित रूप से हो, इस संबंध में अधिकारियों को निर्देशित किया गया। बैठक में आम आदमी बीमा योजना, जनश्री बीमा योजना, महासंघ की गतिविधियां, निविदा कार्रवाई, मंथन की अनुशंसाओं पर हुई कार्यवाही आदि के संबंध में भी विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। वार्षिक साधारण सभा के आयोजन के लिए 12 मार्च की तिथि तय की गई।

बैठक में प्रमुख सचिव मछली पालन श्री मनोज गोयल और महासंघ की प्रबंध संचालक श्रीमती कंचन जैन भी उपस्थित थी। राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम, क्षेत्रीय निदेशालय के मुख्य निदेशक श्री जे.वी. त्यागी, एनवीडीए के वस्तु विषय विशेषज्ञ श्री हीरासिंह ठाकुर, संचालक मत्स्योद्योग डा. एच.एस. सिददू सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

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Wednesday, February 3, 2010

शहरों में आधुनिक सुविधा वाले मछली बिक्री केन्द्र बनेंगे

  मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा मत्स्य-पालन विभाग की समीक्षा
प्रदेश के बड़े शहरों में मछली की बिक्री के लिये आधुनिक सुविधायुक्त बिक्री केन्द्रों का निर्माण कराया जायेगा। यह केन्द्र कृषि उपज मण्डी और एन.एफ.डी. के माध्यम से निर्मित होंगे। यह जानकारी मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान की अध्यक्षता में मंत्रालय में संपन्न विभागीय समीक्षा बैठक में दी गयी।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रदेश में मत्स्य-उत्पादन को बढ़ावा देने के लिये मत्स्य-बीज उत्पादन में वृद्धि की जरूरत रेखांकित की। उन्होंने कहा कि बड़े जलाशयों से अधिकतम मत्स्य-उत्पादकता प्राप्त करने की योजना छह माह में बनाकर प्रस्तुत की जाये।

प्रदेश में मछुआरों को मछली पालन के लिये कार्यशील पूंजी सहकारी बैंकों के माध्यम से उपलब्ध करवाने की कार्रवाई की जा रही है। इसके लिये मछुआरों को फिशरमेन क्रेडिट कार्ड जारी करने की कार्रवाई अभियान चलाकर की जा रही है। इसी तरह गांवों के तालाबों से मछली उत्पादन में वृद्धि के मद्देनजर नरेगा योजना के जरिये तालाबों को गहरा कर बारहमासी बनाने की एक साला योजना भी बनायी गई है।

बैठक में जानकारी दी गयी कि किसानों के समान मछुआरों को भी 5 प्रतिशत ब्याज दर पर सहकारी बैंकों से अल्पकालीन ऋण दिलवाया जा रहा है। इसके अलावा मछुआरों को सिंचाई जलाशय की भूमि पट्टे पर देने की अवधि को 7 से बढ़ाकर दस वर्ष कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री के विशेष निर्देश पर वर्ष 2010-11 में मत्स्य-बीज की पूर्ति को प्राथमिकता देने की योजना बनायी गई है। तीन करोड़ से ज्यादा की लागत की इस योजना के जरिये 5800 लाख स्टैण्डर्ड फ्राई की पूर्ति का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बैठक में मुख्यमंत्री की घोषणाओं, मंथन की विभागीय अनुशंसाओं, कॉडर मैनेजमेंट, मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित पंचायतों की घोषणाओं के क्रियान्वयन, बजट प्रावधान और अब तक व्यय, भौतिक और वित्तीय लक्ष्य की प्राप्ति, जनसंकल्प के बिन्दुओं के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की।

बैठक में मछलीपालन मंत्री श्री अजय विश्नोई, मुख्य सचिव श्री अवनि वैश्य, अपर मुख्य सचिव श्री एम.के. राय, मत्स्य महासंघ (सहकारी) मर्यादित की प्रबंध संचालक श्रीमती कंचन जैन, मुख्यमंत्री के अपर सचिव श्री विवेक अग्रवाल और अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

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Saturday, January 23, 2010

मछली पालन के लिए मिलेगा अल्पकालीन ऋण

फिशरमेन क्रेडिट कार्ड योजना
राज्य शासन मछली पालन कर रहे मछुआरों को 'फिशरमेन क्रेडिट कार्ड योजना' के तहत अल्पकालीन ऋण/साख उपलब्ध करायेगा। योजना के क्रियान्वयन हेतु मध्यप्रदेश राज्य सहकारी बैंक (एपेक्स बैंक) ने समस्त जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निर्देश किये है।
निर्देशों में कहा गया है कि फिशरमेन क्रेडिट कार्ड योजना को संचालक मण्डल के अनुमोदन एवं ऋण नीति में शामिल कर मत्स्य पालन विभाग के सहयोग से क्रियान्वित किया जाए। साथ ही अल्पकालीन ऋण/साख उपलब्ध कराया जाना भी सुनिश्चित किया जाए।
फिशरमेन क्रेडिट कार्ड योजना
ऋण/साख            इकाई                                                                                            लागत अवधि

1    ग्रामीण तालाबों में मछली पालन (1.00 हे)    18300/-                                            18 माह
2    सिंचाई तालाबों में मछली पालन (प्रति हे.)    2000/-    
3    मौसमी तालाबों में स्पॉन संवर्धन (0.25 हे.) कर मत्स्य बीज उत्पादन    23000/-            6 माह


प्रदेश में मछली पालन कार्य में संलग्न पंजीकृत मछुआ सहकारी समितियों, स्व सहायता समूह, मछुआ समूह के हितग्राही मछुआरों द्वारा ग्रामीण एवं सिंचाई जलाशय को लम्बी अवधि के लिए पट्टे पर लेकर मछली पालन किया जा रहा है। मछुआरों को प्राथमिक आवश्यकताओं जैसे तालाब की पट्टा राशि, मत्स्य बीज क्रय, खाद, नाव एवं जाल आदि के क्रय हेतु कार्यशील पूंजी की आवश्यकता होती है। जिसके लिए राज्य सरकार ने अल्पकालीन ऋण/साख उपलब्ध कराने हेतु उक्त योजना एपेक्स बैंक के सहयोग से प्रारंभ की है।

एपेक्स बैंक द्वारा समस्त जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को जारी पत्र में योजना के संचालन के लिए मत्सय विभाग के अधिकारियों से भी सहयोग लेने को कहा गया है। प्रत्येक जिले में मछली पालन विभाग के मैदानी अधिकारी पदस्थ है। योजना में संबंधित विकासखंड स्तरीय अधिकारी द्वारा हितग्राहियों को योजना का लाभ दिलाने के लिए प्रकरण तैयार कर बैंक को प्रस्तुत किये जायेंगे। हितग्राहियों के कार्यों पर सतत निगरानी रखी जायेगी तथा उन्हें तकनीकी सहायता भी दी जायेगी। बैंक वसूली में भी विभागीय अधिकारियों द्वारा हरसंभव सहायता दी जायेगी। फिशरमेन क्रेडिट कार्ड योजना को जिला बैंकों में लागू किये जाने के संबंध में पिछले माह 'मंथन' कार्यक्रम में भी चर्चा हुई थी तथा लक्ष्य निर्धारित किये गये थे।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश के ग्रामीण तालाबों में मत्स्य पालन की गतिविधियां मत्स्य कृषक विकास अभिकरण योजना के तहत संचालित है। इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत हितग्राहियों का चयन किया जाता है। सिंचाई जलाशयों में मछली पालन का कार्य चिन्हित हितग्राहियों द्वारा किया जाता है।

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Wednesday, November 25, 2009

मछुआ दुर्घटना बीमा योजना के अमल में प्रदेश देश में दूसरा

मुख्यमंत्री श्री चौहान को समर्पित की द्वितीय पुरस्कार ट्राफी
मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान को आज यहां विधानसभा स्थित कक्ष में मत्स्य-पालन विभाग को मछुआ दुर्घटना बीमा योजना के अमल पर प्रदेश को मिले द्वितीय पुरस्कार की ट्राफी को समर्पित किया गया। इस अवसर पर मत्स्य-पालन मंत्री श्री अजय विश्नोई, प्रमुख सचिव मत्स्य-पालन श्री मनोज गोयल और संचालक मत्स्योद्योग श्री एच.एस. सिद्धू उपस्थित थे।उल्लेखनीय है कि प्रदेश ने मछुओं तथा उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान करने की केन्द्र प्रवर्तित दुर्घटना बीमा योजना के अमल में वर्ष 2008-09 में देश में द्वितीय स्थान अर्जित किया है। प्रदेश में इस अवधि में 72 हजार 954 मछुओं का दुर्घटना बीमा कर उन्हें सुरक्षा प्रदान की गई।

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