मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा मत्स्य-पालन विभाग की समीक्षा
प्रदेश के बड़े शहरों में मछली की बिक्री के लिये आधुनिक सुविधायुक्त बिक्री केन्द्रों का निर्माण कराया जायेगा। यह केन्द्र कृषि उपज मण्डी और एन.एफ.डी. के माध्यम से निर्मित होंगे। यह जानकारी मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान की अध्यक्षता में मंत्रालय में संपन्न विभागीय समीक्षा बैठक में दी गयी।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रदेश में मत्स्य-उत्पादन को बढ़ावा देने के लिये मत्स्य-बीज उत्पादन में वृद्धि की जरूरत रेखांकित की। उन्होंने कहा कि बड़े जलाशयों से अधिकतम मत्स्य-उत्पादकता प्राप्त करने की योजना छह माह में बनाकर प्रस्तुत की जाये।प्रदेश में मछुआरों को मछली पालन के लिये कार्यशील पूंजी सहकारी बैंकों के माध्यम से उपलब्ध करवाने की कार्रवाई की जा रही है। इसके लिये मछुआरों को फिशरमेन क्रेडिट कार्ड जारी करने की कार्रवाई अभियान चलाकर की जा रही है। इसी तरह गांवों के तालाबों से मछली उत्पादन में वृद्धि के मद्देनजर नरेगा योजना के जरिये तालाबों को गहरा कर बारहमासी बनाने की एक साला योजना भी बनायी गई है।
बैठक में जानकारी दी गयी कि किसानों के समान मछुआरों को भी 5 प्रतिशत ब्याज दर पर सहकारी बैंकों से अल्पकालीन ऋण दिलवाया जा रहा है। इसके अलावा मछुआरों को सिंचाई जलाशय की भूमि पट्टे पर देने की अवधि को 7 से बढ़ाकर दस वर्ष कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री के विशेष निर्देश पर वर्ष 2010-11 में मत्स्य-बीज की पूर्ति को प्राथमिकता देने की योजना बनायी गई है। तीन करोड़ से ज्यादा की लागत की इस योजना के जरिये 5800 लाख स्टैण्डर्ड फ्राई की पूर्ति का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बैठक में मुख्यमंत्री की घोषणाओं, मंथन की विभागीय अनुशंसाओं, कॉडर मैनेजमेंट, मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित पंचायतों की घोषणाओं के क्रियान्वयन, बजट प्रावधान और अब तक व्यय, भौतिक और वित्तीय लक्ष्य की प्राप्ति, जनसंकल्प के बिन्दुओं के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की।
बैठक में मछलीपालन मंत्री श्री अजय विश्नोई, मुख्य सचिव श्री अवनि वैश्य, अपर मुख्य सचिव श्री एम.के. राय, मत्स्य महासंघ (सहकारी) मर्यादित की प्रबंध संचालक श्रीमती कंचन जैन, मुख्यमंत्री के अपर सचिव श्री विवेक अग्रवाल और अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
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