प्रविष्टियां 20 फरवरी तक भेजी जा सकेंगी
मध्यप्रदेश में जनजातीय समाज के स्वाभिमान, अस्मिता, नेतृत्व गुणों, त्याग, बलिदान की स्मृति को बनाये रखते हुए समाज के सम्मुख आदर्श प्रस्तुत करने तथा जनजातीय जीवन के पारम्परिक कला-कौशल, सृजनात्मक अवदान को प्रचारित एवं प्रसारित करने के उद्देश्य से आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा तीन राष्ट्रीय सम्मान, एक राज्यस्तरीय सम्मान स्थापित किया है। इन सम्मानों के लिये वर्ष 2010 के लिये पृथक-पृथक प्रविष्टियां आमंत्रित की गई हैं। यह प्रविष्टियां 20 फरवरी, 2010 तक जमा कराई जा सकेंगी।विभाग द्वारा राष्ट्रीय स्तर का पहला सम्मान रानी दुर्गावती सम्मान के रूप में आदिवासी एवं पारम्परिक सृजनात्मक कला, शिल्प, समाजसेवा, प्रशासन में अद्वितीय उपलब्धि एवं योगदान के लिये आदिवासी महिला को प्रदान किया जाता है। इस सम्मान में दो लाख रुपये सम्मान निधि एवं प्रशस्ति पट्टिका प्रदान की जाती है। राष्ट्रीय स्तर का दूसरा सम्मान वीर शंकरशाह-रघुनाथ शाह सम्मान भारतीय साहित्य में जनजातीय जीवन के सृजनात्मक सौंदर्य, परम्परा और विशिष्टता के उत्कृष्ट रेखांकन-लेखन में सुदीर्घ योगदान के लिये तथा आदिवासी पारम्परिक कलाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय साधना के लिये दिया जाता है। इस सम्मान में सम्मान निधि के रूप में दो लाख रुपये एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है। तीसरा राष्ट्रीय स्तर सम्मान ठक्कर बापा सम्मान गरीब, पीड़ित और हर तरह से पिछड़े आदिवासी समुदाय के लोगों की प्रेम, समदृष्टि और ममतापूर्ण सेवा एवं सुदीर्घ साधना के लिये दिया जाता है। इस सम्मान में दो लाख रुपये एवं प्रशस्ति पट्टिका प्रदान की जाती है। राष्ट्रीय स्तर के सम्मान के लिये प्रविष्टियां अखिल भारतीय स्तर पर विभाग द्वारा स्वीकृत की जाती हैं।
आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा जन-नायक टंट्या भील राज्यस्तरीय सम्मान शिक्षा और खेल गतिविधियों में उल्लेखनीय साधना तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिये आदिवासी युवा को प्रदान किया जाता है। इस सम्मान के लिये प्रविष्टियां मध्यप्रदेश स्तर पर आमंत्रित कर स्वीकार की जाती हैं।
इन सम्मानों के लिये भेजी जाने वाली प्रविष्टियों के संबंध में अन्य आवश्यक जानकारी आदिम जाति कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित वन्या प्रकाशन राजीव गांधी भवन, 35 श्यामला हिल्स से प्राप्त की जा सकती हैं।
आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा जन-नायक टंट्या भील राज्यस्तरीय सम्मान शिक्षा और खेल गतिविधियों में उल्लेखनीय साधना तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिये आदिवासी युवा को प्रदान किया जाता है। इस सम्मान के लिये प्रविष्टियां मध्यप्रदेश स्तर पर आमंत्रित कर स्वीकार की जाती हैं।
इन सम्मानों के लिये भेजी जाने वाली प्रविष्टियों के संबंध में अन्य आवश्यक जानकारी आदिम जाति कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित वन्या प्रकाशन राजीव गांधी भवन, 35 श्यामला हिल्स से प्राप्त की जा सकती हैं।
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