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Tuesday, March 9, 2010

साख समितियों के कर्मियों लिये सेवा शर्तें बनीं

 तीस हजार से अधिक कर्मियों की अब शासकीय कर्मियो के अनुरूप सेवा शर्त
प्राथमिक सहकारी साख समितियों में काम करने वाले कर्मियों की शासकीय कर्मचारियों के अनुरूप सेवा शर्तें होंगी। सहकारिता एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन ने बताया कि 26 फरवरी से प्राथमिक सहकारी समितियों में यह सेवा नियम लागू करने के आदेश जारी हो गए हैं। सहकारिता के इतिहास में पहली बार जन प्राथमिक साख समितियों में ये नियम बने हैं।
सहकारिता मंत्री श्री बिसेन ने बताया कि प्राथमिक सहकारी साख समितियों में सेवा नियम बनाए जाने की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने सहकारिता पंचायत में भी अपनी इस मंशा को व्यक्त किया था। सेवा नियम बनाया जाना इसलिए भी जरूरी था ताकि साख समितियों में काम करने वाले पूरे सुरक्षा भाव और मनोबल के साथ काम कर सकें। इन्हीं बिन्दुओं को मद्देनजर सेवा नियम बनाए गए हैं। इससे प्रदेश की साढ़े चार हजार से अधिक सहकारी साख समितियों के तीस हजार से अधिक सेवाकर्मी लाभान्वित होंगे।

श्री बिसेन ने बताया कि सेवा नियम बन जाने से समितियां मनमाने तरीके से न तो नियुक्ति कर सकेंगी और न ही उन्हें निकाल सकेंगी। सेवा नियमों के मुताबिक, अब प्राथमिक सहकारी समितियों में नियुक्ति के पहले निर्धारित प्रक्रिया, पात्रता को अपनाना जरूरी होगा। नियुक्ति के बाद उनके वेतन-भत्तों, अवकाश, सेवानिवृत्ति आयु सभी तय अनुसार प्राप्त होंगे। प्राथमिक सहकारी साख समिति में नियुक्त कर्मियों की सेवानिवृत्ति आयु भी साठ वर्ष होगी।

प्राथमिक सहकारी साख समितियों में सेवा शर्तें लागू करते हुए उनकी स्वायत्तता का भी ध्यान रखा गया है। इसमें वैद्यनाथन पैकेज एवं नाबार्ड की अपेक्षाओं को भी शामिल किया गया। प्राथमिक सहकारी साख समितियों का संगठित स्वरूप न होने से उनके हितों का संरक्षण नही हो पा रहा था। सेवा नियम बन जाने से अब यह समितियां एक अनुशासन में काम कर सकेंगी जिसका लाभ सहकारिता आंदोलन को मिलेगा।

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