मध्यप्रदेश जनगढ़ पुरस्कार
गोंड परधान गायकी परम्परा के जनगढ़ सिंह श्याम की स्मृति में आदिम जाति कल्याण विभाग के उपक्रम वन्या द्वारा स्थापित किए गए जनगढ़ सिंह श्याम पुरस्कार के लिए प्रदेश के जनजातीय कलाकारों, शिल्कारों से कलाकृतियाँ 28 फरवरी 2010 तक आमंत्रित की गई है। इस पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ कलाकृति को रुपये 25 हजार की नगद राशि एवं प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया जायेगा।
वन्या के प्रबंध संचालक श्रीराम तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रदर्शनी में भागीदारी के लिए मध्यप्रदेश के आदिवासी कलाकार अपनी कलाकृति वन्या के कार्यालय 35 राजीव गांधी भवन, श्यामला हिल्स में भेज सकते है। यह पुरस्कार आदिवासी पांरपरिक कलाओं के क्षेत्र में जनजातीय कलाकार को दिया जाता है। विगत् दो वर्षो से स्थापित यह पुरस्कार दिलीप सिंह श्याम एवं हीरामन उर्वेती को प्रदान किया गया था। इस वर्ष कलाकृतियाँ आमंत्रित की जा रही है। उन्होंने बताया कि यह पुरस्कार मध्यप्रदेश के मंडला जिले के प्रतापगढ़ में रहने वाले जनगढ़ सिंह श्याम की स्मृति में शुरू किया गया है।उल्लेखनीय है कि स्व. श्याम मूलतः गोंड़ परधान गायकी परम्परा से थे। गीत गाना और बाँसुरी बजाना जनगढ़ को विरासत में वैसे ही मिला था जैसा कि परम्परागत चित्रकारी करना। जनगढ़ मूर्ति बनाने में भी दक्ष थे। जनगढ़ सिंह श्याम ने गोंड परधान चित्रकारी की एक नयी शैली ही विकसित की है जिसे दुनिया के कलाजगत ने सम्मान दिया है।
आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा राज्य स्तरीय मध्यप्रदेश जनगढ़ पुरस्कार ऐसे महान दिवंगत युवा कलाकार जनगढ़ सिंह श्याम की याद को चिरस्थाई बनाने एवं आदिवासी कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू किया है।
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