विधायकों को वाहन ऋण पर ब्याज अनुदान
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में हुई मंत्रि परिषद की बैठक में प्रदेश में कानून व्यवस्था तथा अपराधों की विवेचना को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से पुलिस विभाग के लिये 1500 नये पदों के लिये मंजूरी दी गई।
इनमें से नक्सल प्रभावी क्षेत्र के लिये 176 पद, चार बड़े शहर-भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के थानों-चौकियों के लिये 770 पद अन्य स्थानों के थानों तथा चौकियों के लिये 282 पद, नव गठित जिलों तथा सुरक्षा दस्तों के लिये 272 पद शामिल है।
इन स्वीकृत पदों में एक पुलिस अधीक्षक, 6 पुलिस उप अधीक्षक, 20 निरीक्षक, दो सूबेदार, 180 उप निरीक्षक, 220 सहायक उप निरीक्षक, 336 प्रधान आरक्षक और 735 आरक्षक के पद हैं। इन पदों के निर्माण पर 3788.50 लाख रुपये का सालाना व्यय भार आयेगा।
इसी प्रकार मंत्रि परिषद ने पुलिस विभाग के अंतर्गत विशेष शाखा फील्ड इकाईयों को सुदृढ़ करने की दृष्टि से 331 नये पदों के निर्माण के लिये भी मंजूरी दी। इन पदों में उप पुलिस अधीक्षक 2, निरीक्षक 15, उप निरीक्षक 19, सहायक उप पुलिस निरीक्षक 85, प्रधान आरक्षक 94, आरक्षक 116 पद शामिल हैं।
इसी प्रकार मंत्रि परिषद ने पुलिस विभाग के अंतर्गत विशेष शाखा फील्ड इकाईयों को सुदृढ़ करने की दृष्टि से 331 नये पदों के निर्माण के लिये भी मंजूरी दी। इन पदों में उप पुलिस अधीक्षक 2, निरीक्षक 15, उप निरीक्षक 19, सहायक उप पुलिस निरीक्षक 85, प्रधान आरक्षक 94, आरक्षक 116 पद शामिल हैं।
इन पदों की स्वीकृति से प्रदेश में आंतकवादी गतिविधियों तथा शांति एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आसूचना संगठन को सुदृढ़ किया जा सकेगा। इन पदों के निर्माण पर 6.71 करोड़ रूपये का व्यय भार आयेगा।
मंत्रि परिषद ने आदिवासी विकास विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न छात्रावासों और आश्रमों के लिये चतुर्थ श्रेणी के 600 नये पदों को भी मंजूरी दी।
मंत्रि परिषद ने न्यायिक प्रकरणों में राज्य शासन के पक्ष समर्थन के लिये नियुक्त प्रभारी अधिकारियों को मानदेय स्वीकृत करने का निर्णय लिया है। इसके अनुसार उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित प्रति प्रकरण के लिये एक हजार रूपये तथा उच्चतम न्यायालय के समक्ष प्रति प्रकरण के लिये 1500 रूपये मानदेय दिया जायेगा। एक अधिकारी को इस मानदेय की प्रतिपूर्ति राशि की अधिकतम सीमा दस हजार रूपये प्रतिमाह होगी।
मंत्रि परिषद ने विभागीय जाचं के मामले में जांचकर्ता/प्रस्तुतकर्ता अधिकारियों को मानदेय स्वीकृत करने का भी निर्णय लिया है। जांचकर्ता अधिकारी को रूपये दो हजार प्रति जांच प्रकरण, प्रस्तुतकर्ता अधिकारी को एक हजार रूपये प्रति प्रकरण तथा सेवानिवृत्त जांच अधिकारी को रूपये पांच हजार प्रति प्रकरण मानदेय दिया जा सकेगा।
मंत्रि परिषद ने आदिवासी विकास विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न छात्रावासों और आश्रमों के लिये चतुर्थ श्रेणी के 600 नये पदों को भी मंजूरी दी।
मंत्रि परिषद ने न्यायिक प्रकरणों में राज्य शासन के पक्ष समर्थन के लिये नियुक्त प्रभारी अधिकारियों को मानदेय स्वीकृत करने का निर्णय लिया है। इसके अनुसार उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित प्रति प्रकरण के लिये एक हजार रूपये तथा उच्चतम न्यायालय के समक्ष प्रति प्रकरण के लिये 1500 रूपये मानदेय दिया जायेगा। एक अधिकारी को इस मानदेय की प्रतिपूर्ति राशि की अधिकतम सीमा दस हजार रूपये प्रतिमाह होगी।
मंत्रि परिषद ने विभागीय जाचं के मामले में जांचकर्ता/प्रस्तुतकर्ता अधिकारियों को मानदेय स्वीकृत करने का भी निर्णय लिया है। जांचकर्ता अधिकारी को रूपये दो हजार प्रति जांच प्रकरण, प्रस्तुतकर्ता अधिकारी को एक हजार रूपये प्रति प्रकरण तथा सेवानिवृत्त जांच अधिकारी को रूपये पांच हजार प्रति प्रकरण मानदेय दिया जा सकेगा।
मानदेय इस शर्त पर दिया जायेगा कि संबंधित अधिकारी विभागीय जांच का निराकरण एक वर्ष के भीतर पूर्ण कर लेगा। ऐसा नहीं करने पर मानदेय की पात्रता नहीं होगी तथा उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकेगी।
मंत्रि परिषद ने तेरहवी विधानसभा के सदस्यों को वाहन क्रय ऋण के लिये ब्याज अनुदान देने का निर्णय लिया है। वाहन ऋण की सीमा रूपये पांच लाख से बढ़ाकर आठ लाख रूपये की गई है परन्तु अनुदान पांच लाख की सीमा तक ही दिया जायेगा।
मंत्रि परिषद ने तेरहवी विधानसभा के सदस्यों को वाहन क्रय ऋण के लिये ब्याज अनुदान देने का निर्णय लिया है। वाहन ऋण की सीमा रूपये पांच लाख से बढ़ाकर आठ लाख रूपये की गई है परन्तु अनुदान पांच लाख की सीमा तक ही दिया जायेगा।
अनुदान केवल राष्ट्रीयकृत बैंकों से लिये जाने वाले ऋण पर ही दिया जायेगा। ऐसे सदस्यों को वाहन ऋण के दस वर्ष पूरे हो गये हो और उनका संपूर्ण ऋण ब्याज सहित अदा हो गया हो उन्हें भी दुबारा ऋण और अनुदान के लिये पात्र माना जायेगा।
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