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Thursday, March 4, 2010

गर्मी के दिनों में पेयजल मुहैया कराने राहत राशि आवंटन

पयोगिता प्रमाण-पत्र समय सीमा में भेजने के निर्देश

मुख्य सचिव श्री अवनि वैश्य ने जिला कलेक्टरों को निर्देश दिये हैं कि वे आपदा राहत निधि (सी.आर.एफ.) तथा राष्ट्रीय आपदा आकस्मिक निधि (एन.सी.सी.एफ.) से राहत कार्यों के लिये जारी धनराशि के उपयोगिता प्रमाण-पत्र तीन माह की समय सीमा में राजस्व विभाग को अनिवार्य रुप से उपलब्ध कराएं। श्री अवनि वैश्य आज मंत्रालय में आपदा राहत निधि एवं राष्ट्रीय आपदा आकस्मिक निधि से प्राप्त धनराशि के प्रबंधन के बारे में गठित सचिव स्तरीय समिति की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।

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Sunday, November 15, 2009

लाख की खेती बनायेगी लखपति

22 हजार पलाश एवं बेर के पेड़ों पर लाख की खेती प्रारंभ
बैतूल जिले में लाख की खेती को प्रोत्साहित करने के लिये जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर के अंतर्गत बैतूल में संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र के तकनीकी मार्गदर्शन में लाख का उत्पादन कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है।राष्ट्रीय कृषि परियोजना के अंतर्गत कृषि विज्ञान केन्द्र बैतूल द्वारा तीन विकासखण्डों आमला, मुलताई एवं बैतूल के तीन-तीन गांवों का चयन किया गया है। इन गांवों के चयनित किसानों के यहां लगभग 22 हजार पलाश एवं बेर के पेड़ों पर लाख की खेती प्रारंभ की गई है। 
लाख एक कीट कोरिया लक्का की कार्यकीय प्रक्रिया द्वारा उत्सर्जित पदार्थ है जो ठोस रूप से एकत्र हो जाता है। सौन्दर्य प्रसाधन, पेंट, इलेक्ट्रानिक उपकरणों, गहनों व दवाइयों आदि में इसका प्रयोग होता है। जिले में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधन जंगल को देखते हुए कृषकों के लिये लाख का उत्पादन कम लागत एवं मेहनत में अतिरिक्त आमदनी का जरिया हो सकता है।
जिले में किसानों की परम्परागत फसलों से निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा लाख के उत्पादन का कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है। लाख की खेती पलाश, बेर, गटोर आदि के पेड़ों पर होती है। यह पेड़ जिले के इन तीनों विकासखण्डों में बहुतायत में पाये जाते हैं। 
लाख उत्पादन के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी देने के उद्देश्य से पिछले दिनों एक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किया जा चुका है। इस प्रशिक्षण में चयनित 9 गांवों के 30 युवा किसानों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को लाख की खेती पर केन्द्रित डाक्यूमेंट्री फिल्म भी दिखाई गई। जिन 30 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया है, वे रिसोर्स पर्सन की हैसियत से अपने क्षेत्रों में अन्य किसानों को भी लाख की खेती करने के लिये प्रोत्साहित कर रहे हैं।
कृषि विज्ञान केन्द्र बैतूल से जुड़े कृषि वैज्ञानिक समय-समय पर किसानों के खेतों पर पहुंचकर लाख की खेती की गतिविधियों का अवलोकन कर रहे हैं और उन्हें इससे जुड़े अन्य पहलुओं की भी जानकारी दे रहे हैं।

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