महिला बाल विकास मंत्री, महापौर और पत्रकार महिलाओं की प्रतिक्रिया
महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए मध्यप्रदेश में जो कोशिशें प्रारंभ की गई हैं और जो परिणाम हासिल किए गए हैं वे कल लोकसभा में पेश होने वाले आरक्षण बिल की मंशा को पूरा करते हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती रंजना बघेल ने महिला आरक्षण बिल पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश सरकार मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में महिलाओं को सशक्त बनाने, उन्हें संरक्षण देने, सत्ता और समाज में उन्हें पर्याप्त भागीदारी का काम इस प्रदेश में पहले से ही प्रारंभ कर चुके हैं।
महिला बाल विकास राज्यमंत्री श्रीमती बघेल ने बताया कि मध्यप्रदेश अन्य राज्यों में पूरे देश में सबसे अग्रणी है जहां महिलाओं को बराबरी का हक देने और सशक्त बनाने के काम सात साल पूर्व से ही शुरू हो गए। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल तो केन्द्र सरकार आज ला रही है लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लाड़ली लक्ष्मी योजना की शुरूआत कर जनम से ही महिलाओं को संरक्षण प्रदान कर पूरे देश में अव्वल स्थान प्रदान किया। आज इस योजना का कई राज्य अनुसरण कर रहे हैं। प्रदेश में चार लाख लाड़लियों को पढ़ने से लेकर विवाह तक का जो सामाजिक आरक्षण दिया वह पूरे देश में एक अनुपम उदाहरण है। नगरीय निकायों और पंचायतों में महिलाओं को पचास प्रतिशत आरक्षण देने का परिणाम यह है कि आज प्रदेश की इन स्थानीय संस्थाओं में तीन लाख से अधिक महिलाएं राजनीति में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं। कन्यादान योजना के जरिए मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश में ऐसी महिलाओं को सामाजिक रूप से आरक्षित किया जो धनाभाव के कारण ब्याही नहीं जाती थीं। कन्यादान योजनाओं के जरिए उनका नि:शुल्क विवाह कराने के साथ ही घर-गृहस्थी का सामान उन्हें मदद स्वरूप नई जिंदगी शुरू करने के लिये दिया जा रहा है। इस योजना के तहत एक लाख गरीब परिवारों की कन्याओं का विवाह कराया गया है।श्रीमती बघेल ने बताया कि मध्यप्रदेश उन राज्यों में अग्रणी है जहां जेंडर बजट की व्यवस्था शुरू की गई है। इसके साथ ही वर्ष 2002-03 में महिलाओं, बच्चों के लिए मात्र 335.86 करोड़ रुपये का प्रावधान बजट था जो आज बढ़कर 1655.30 करोड़ रुपये हो गया।
भोपाल की महापौर श्रीमती कृष्णा गौर ने महिला आरक्षण बिल पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि आज महिलाओं को प्रदेश में सत्ता में जो जिम्मेदारी मिली है यह मध्यप्रदेश सरकार द्वारा नगरीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने का ही परिणाम है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के प्रति प्रगतिशील और बराबरी की सोच का ही परिणाम है कि मुख्यमंत्री निवास में उन महिलाओं के बारे में भी चिंता की गई जो लोगों के घरों में काम करके एक उपेक्षित, शोषित और कई बार अपमानित जीवन बिताती थीं। मध्यप्रदेश सरकार ने न केवल उनकी सुध ली बल्कि उनके संरक्षण के लिए पंचायत बुलाकर उन्हें एक सम्मानित जीवन प्रदान किया। उनके परिवार की बेहतरी के लिए कई फैसले किए। श्रीमती गौर ने कहा कि महिला आरक्षण बिल की सोच से आगे जाकर मध्यप्रदेश सरकार ने महिलाओं की बेहतरी के लिए काम किए हैं।
मध्यप्रदेश समाज कल्याण बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती उषा चतुर्वेदी ने महिला आरक्षण बिल पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि जिस राज्य में महिलाओं के जन्म से ही उनके संरक्षण की योजना चल रही हो और उसके परिणाम आने शुरू गये हैं। हमारे प्रदेश में तो बहुत पहले से ही महिलाओं का सम्मान और उनके अधिकार की दिशा में काम शुरू हो चुका है।
ग्वालियर की महापौर श्रीमती समीक्षा गुप्ता ने कहा कि महिला आरक्षण बिल अगर संसद से पारित हो जाता है तो यह मध्यप्रदेश के लिए सिर्फ संविधान का एक हिस्सा होगा जबकि इस आरक्षण बिल के समान महिलाओं को भागीदार बनाने उन्हें सक्षम और सशक्त बनाने का काम प्रदेश में शुरू हुए कई वर्ष हो गए हैं। उन्होंने कहा कि बच्चियों को पढ़ने में कोई रुकावट न हो तो उन्हें दस लाख साइकिल देने, जननी सुरक्षा योजना के तहत 38 लाख महिलाओं को लाभान्वित करने, वीरता और सेवा के क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए पुरस्कार देने की योजना ऐसी है जो महिला सशक्तिकरण का उदाहरण हैै।
अध्यक्ष महिला पत्रकार संघ मध्यप्रदेश सुश्री अनुराधा त्रिवेदी ने महिला विधेयक के संबंध में अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि राज्यों की विधानसभा और लोकसभा में महिलाओं के 33 प्रतिशत आरक्षण दिये जाने से दुनियाभर में भारत की महिलाओं के सशक्तिकरण आंदोलन के प्रति एक मिसाल पैदा होगी। मध्यप्रदेश सरकार के प्रयासों की चर्चा करते हुए सुश्री त्रिवेदी ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार देश भर में ऐसी राज्य सरकार है जिसने महिला सशक्तिकरण की दिशा में प्रभावी पहल की है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने शहरी घरेलू कामकाजी महिलाओं की समस्याओं के निराकरण के लिये मुख्यमंत्री निवास पर पंचायत का आयोजन किया।
राजधानी भोपाल की एक अन्य महिला पत्रकार श्रीमती ऋचा अनुरागी ने महिला विधेयक को प्रस्तुत किये जाने का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने स्थानीय एवं पंचायत निकायों में महिलाओं के लिये 50 प्रतिशत आरक्षण देकर महिला सशक्तिकरण आंदोलन को एक नई गति दी है। आज प्रदेश के कोने-कोने में जागरूक महिला नेतृत्व उभरकर सामने आया है। प्रदेश के विकास में अब महिलाएं बराबर की हकदार हैं।
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