मुख्यमंत्री श्री चौहान की अध्यक्षता में मंत्रणा परिषद की बैठक
मध्यप्रदेश में आदिवासियों से गैर कानूनी तरीके से गैर आदिवासियों द्वारा ली गई जमीनों के प्रकरणों की जांच के लिये अभियान चलाया जायेगा। साथ ही वन अधिकार अधिनियम के तहत भूमि अधिकार-पत्र के लिये जिन आदिवासियों के प्रकरण अस्वीकृत किये गये हैं, उन्हें अस्वीकृति के कारण की जानकारी दी जायेगी।यह निर्देश मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने आज विधानसभा के सभा कक्ष में आयोजित आदिम जाति मंत्रणा परिषद की बैठक में दिये। बैठक में आदिम जाति और अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री एवं मंत्रणा परिषद के उपाध्यक्ष श्री विजय शाह, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति कल्याण राज्य मंत्री श्री हरिशंकर खटीक और वन एवं राजस्व राज्य मंत्री श्री जयसिंह मरावी के अलावा मंत्रणा परिषद के सदस्य विधायक श्री प्रेम नारायण ठाकुर, श्री कुंवर सिंह टेकाम, श्री सुदामा सिंह, श्री रामप्यारे कुलस्ते, श्रीमती गीता रामजीलाल उईके, श्रीमती शशि ठाकुर, श्री भगत सिंह नेताम, श्रीमती नन्दिनी मरावी, श्री चंपालाल देवड़ा, श्री नागर सिंह चौहान, श्री प्रेम सिंह पटेल आदि उपस्थित थे।
आदिवासियों की जमीन की खरीदी तथा वन अधिकार अधिनियम के तहत प्रकरणों को अस्वीकृत किये जाने के संबंध में विधायकों द्वारा जानकारी दी गई थी।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि ये दोनों विषय महत्वपूर्ण हैं। वन अधिकार-पत्रों के अस्वीकृत प्रकरणों के एक बार पुन: परीक्षण के निर्देश पहले दिये गये हैं। अब संबंधित आदिवासियों को कारण से भी अवगत कराया जायेगा।
बैठक में डूब क्षेत्र से अन्यत्र पुनर्वासित किये गये लोगों को परियोजना क्षेत्र के लाभ दिलाने, राजस्व भूमि पर वन वाले क्षेत्रों में वन अधिकार-पत्र दिये जाने, दूर-दराज के वन क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण तथा वन भूमि के कारण लंबित सिंचाई योजनाओं की स्वीकृति संबंधी प्रकरणों में भी परीक्षण कर कार्रवाई करने पर सहमति रही।
बैठक में विधायकों के सुझाव पर यह निर्णय भी लिया गया कि आदिवासी बालिका छात्रावासों में महिला अधीक्षकों की ही पदस्थापना सुनिश्चित की जायेगी।
बैठक में आदिम जाति और अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री एवं मंत्रणा परिषद के उपाध्यक्ष श्री विजय शाह ने मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा प्रदेश में आदिवासी कल्याण को दी गई प्राथमिकता के लिये आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आदिम जाति मंत्रणा परिषद की बैठकें भी नियमित हो रही हैं। समिति के सदस्यों एवं विधायकों को अपनी भावना व्यक्त करने और जनहित में प्रस्तुत सुझावों को क्रियान्वित करवाने में अब सुविधा हो रही है। श्री शाह ने प्रदेश में आदिवासी शिक्षा के क्षेत्र में सुविधाओं के विस्तार की भी जानकारी दी।
बैठक में यह भी सहमति रही कि प्रदेश की तीन विशेष पिछड़ी जनजातियों बैगा, सहरिया तथा भारिया को उनके अधिसूचित क्षेत्र के बाहर भी सुविधाएं देने के संबंध में कार्रवाई की जायेगी। परिषद की बैठक में मुख्य सचिव श्री अवनि वैश्य, प्रमुख सचिव आदिम जाति कल्याण श्री देवराज बिरदी तथा संबंधित वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
आदिवासियों की जमीन की खरीदी तथा वन अधिकार अधिनियम के तहत प्रकरणों को अस्वीकृत किये जाने के संबंध में विधायकों द्वारा जानकारी दी गई थी।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि ये दोनों विषय महत्वपूर्ण हैं। वन अधिकार-पत्रों के अस्वीकृत प्रकरणों के एक बार पुन: परीक्षण के निर्देश पहले दिये गये हैं। अब संबंधित आदिवासियों को कारण से भी अवगत कराया जायेगा।
बैठक में डूब क्षेत्र से अन्यत्र पुनर्वासित किये गये लोगों को परियोजना क्षेत्र के लाभ दिलाने, राजस्व भूमि पर वन वाले क्षेत्रों में वन अधिकार-पत्र दिये जाने, दूर-दराज के वन क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण तथा वन भूमि के कारण लंबित सिंचाई योजनाओं की स्वीकृति संबंधी प्रकरणों में भी परीक्षण कर कार्रवाई करने पर सहमति रही।
बैठक में विधायकों के सुझाव पर यह निर्णय भी लिया गया कि आदिवासी बालिका छात्रावासों में महिला अधीक्षकों की ही पदस्थापना सुनिश्चित की जायेगी।
बैठक में आदिम जाति और अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री एवं मंत्रणा परिषद के उपाध्यक्ष श्री विजय शाह ने मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा प्रदेश में आदिवासी कल्याण को दी गई प्राथमिकता के लिये आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आदिम जाति मंत्रणा परिषद की बैठकें भी नियमित हो रही हैं। समिति के सदस्यों एवं विधायकों को अपनी भावना व्यक्त करने और जनहित में प्रस्तुत सुझावों को क्रियान्वित करवाने में अब सुविधा हो रही है। श्री शाह ने प्रदेश में आदिवासी शिक्षा के क्षेत्र में सुविधाओं के विस्तार की भी जानकारी दी।
बैठक में यह भी सहमति रही कि प्रदेश की तीन विशेष पिछड़ी जनजातियों बैगा, सहरिया तथा भारिया को उनके अधिसूचित क्षेत्र के बाहर भी सुविधाएं देने के संबंध में कार्रवाई की जायेगी। परिषद की बैठक में मुख्य सचिव श्री अवनि वैश्य, प्रमुख सचिव आदिम जाति कल्याण श्री देवराज बिरदी तथा संबंधित वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
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