मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बारहमासी सड़क योजना योजना अनुमोदित
प्रदेश के 9338 गांव अगले 3 साल में बारहमासी सड़कों से जोड़ दिये जायेंगे। इन गांवों के सड़कों से जुड़ते ही प्रदेश के सभी गांव सड़कों से जुड़ जायेंगे। मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में सम्पन्न बारहमासी सड़क योजना की आगामी 3 वर्षों की कार्य योजना अनुमोदित की गई।मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि यह योजना राज्य शासन की महत्वाकांक्षी योजना है। इससे न केवल प्रदेश के सभी गांवों को सड़कों से जोड़ा जा सकेगा बल्कि ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार भी होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की तर्ज पर प्रोजेक्ट मोड में संचालित की जाने वाली इस योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध होंगे और भविष्य में सड़कों के रख-रखाव से भी निरंतर रोजगार सृजन होता रहेगा। श्री चौहान ने कहा कि आवागमन की सुविधा से कृषि तकनीक के आदान-प्रदान और कृषि उपजों के विपणन को बढ़ावा मिलने के साथ ही गांवों के स्तर पर उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का बेहतर लाभ सुलभ होने में मदद मिलेगी।
बैठक में ग्रामीण विकास मंत्री श्री गोपाल भार्गव, मुख्य सचिव श्री अवनि वैश्य, प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्री आर. परशुराम, प्रमुख सचिव वित्त श्री जी.पी. सिंहल, सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्री अजय तिर्की, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अनुराग जैन, राज्य रोजगार गारंटी परिषद की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती रश्मि अरूण शमी, मुख्यमंत्री के अपर सचिव श्री विवेक अग्रवाल और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
एक अप्रैल से शुरू होने वाली इस बारहमासी सड़क योजना के अंतर्गत वर्ष 2013 तक सामान्य क्षेत्र में 500 एवं आदिवासी विकासखंड क्षेत्रों में 250 से कम आबादी वाले ग्रामों को मिलाकर कुल 9338 गांवों को बारहमासी सड़क से जोड़ा जायेगा। इसके लिये वर्ष 2013 तक तीन चरणों में 19 हजार 386 किलोमीटर लम्बाई की ग्रेवल रोड का निर्माण किया जायेगा। योजना के पहले चरण में वर्ष 2010-11 में 5816 किलोमीटर, वर्ष 2011-12 में 7754 और 2012-13 में 5816 किलोमीटर लम्बाई की ग्रेवल सड़कें बनेंगी।
योजना के अंतर्गत बारहमासी सड़कों के निर्माण पर अनुमानत: 3296 करोड़ रूपये व्यय होंगे। इसके अंतर्गत नरेगा से 2050 करोड़, बेकवर्ड रीजन ग्रांट फंड से 303 करोड़ और मुख्यमंत्री सड़क योजना से 943 करोड़ रूपये व्यय किये जायेंगे।
आज की बैठक में योजना के अंतर्गत बनने वाली सड़कों के निर्माण में बड़े पुलों को छोड़कर पाईप कल्वर्ट, वेटेंड काजवे, 6 मीटर तक के स्लेब और बाक्स कलवर्ट का कार्य कलस्टर एप्रोच के माध्यम से ठेकेदारों से करवाने का निर्णय लिया गया। यह कार्य 29 जिलों में बी.आर.जी.एफ. योजना से और 21 जिलों में मुख्यमंत्री सड़क योजना की राशि से करवाया जायेगा। योजना में 6 मीटर से अधिक लम्बाई के पुलों का कार्य मुख्यमंत्री सड़क योजना से अतिरिक्त बजट आवंटन के माध्यम से करवाने का तय किया गया।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सड़कों के निर्माण में प्रयुक्त होने वाली समस्त खनिज सामग्री की रायल्टी का भुगतान भी मुख्यमंत्री सड़क योजना के अंतर्गत किये जाने की सहमति दी। उन्होंने 500 किलोमीटर से अधिक सड़क निर्माण वाले 14 जिलों में प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट की स्थापना की स्वीकृति दी। यह यूनिट ग्रामीण यांत्रिकी सेवा एवं अन्य कार्य विभागों के अनुभवी सहायक यंत्री या उप यंत्री को प्रतिनियुक्ति पर लेकर बनाने की भी मंजूरी बैठक में दी गई।
बैठक में ग्रामीण विकास मंत्री श्री गोपाल भार्गव, मुख्य सचिव श्री अवनि वैश्य, प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्री आर. परशुराम, प्रमुख सचिव वित्त श्री जी.पी. सिंहल, सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्री अजय तिर्की, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अनुराग जैन, राज्य रोजगार गारंटी परिषद की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती रश्मि अरूण शमी, मुख्यमंत्री के अपर सचिव श्री विवेक अग्रवाल और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
एक अप्रैल से शुरू होने वाली इस बारहमासी सड़क योजना के अंतर्गत वर्ष 2013 तक सामान्य क्षेत्र में 500 एवं आदिवासी विकासखंड क्षेत्रों में 250 से कम आबादी वाले ग्रामों को मिलाकर कुल 9338 गांवों को बारहमासी सड़क से जोड़ा जायेगा। इसके लिये वर्ष 2013 तक तीन चरणों में 19 हजार 386 किलोमीटर लम्बाई की ग्रेवल रोड का निर्माण किया जायेगा। योजना के पहले चरण में वर्ष 2010-11 में 5816 किलोमीटर, वर्ष 2011-12 में 7754 और 2012-13 में 5816 किलोमीटर लम्बाई की ग्रेवल सड़कें बनेंगी।
योजना के अंतर्गत बारहमासी सड़कों के निर्माण पर अनुमानत: 3296 करोड़ रूपये व्यय होंगे। इसके अंतर्गत नरेगा से 2050 करोड़, बेकवर्ड रीजन ग्रांट फंड से 303 करोड़ और मुख्यमंत्री सड़क योजना से 943 करोड़ रूपये व्यय किये जायेंगे।
आज की बैठक में योजना के अंतर्गत बनने वाली सड़कों के निर्माण में बड़े पुलों को छोड़कर पाईप कल्वर्ट, वेटेंड काजवे, 6 मीटर तक के स्लेब और बाक्स कलवर्ट का कार्य कलस्टर एप्रोच के माध्यम से ठेकेदारों से करवाने का निर्णय लिया गया। यह कार्य 29 जिलों में बी.आर.जी.एफ. योजना से और 21 जिलों में मुख्यमंत्री सड़क योजना की राशि से करवाया जायेगा। योजना में 6 मीटर से अधिक लम्बाई के पुलों का कार्य मुख्यमंत्री सड़क योजना से अतिरिक्त बजट आवंटन के माध्यम से करवाने का तय किया गया।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सड़कों के निर्माण में प्रयुक्त होने वाली समस्त खनिज सामग्री की रायल्टी का भुगतान भी मुख्यमंत्री सड़क योजना के अंतर्गत किये जाने की सहमति दी। उन्होंने 500 किलोमीटर से अधिक सड़क निर्माण वाले 14 जिलों में प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट की स्थापना की स्वीकृति दी। यह यूनिट ग्रामीण यांत्रिकी सेवा एवं अन्य कार्य विभागों के अनुभवी सहायक यंत्री या उप यंत्री को प्रतिनियुक्ति पर लेकर बनाने की भी मंजूरी बैठक में दी गई।

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