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Thursday, January 21, 2010

पिसे मसाले कर सकते हैं सेहत से खिलवाड़

प्रदेश  इन घिनौनी हरकतों से निपटने के लिए चौकस
खाने-पीने की चीजों में मिलावट का गौरखधंधा पिछले कुछ महीनों से देश के विभिन्न स्थानों पर तेजी से उजागर हुआ है। राज्य सरकार प्रदेश में इन घिनौनी हरकतों से निपटने के लिए चौकस है। यदि लोग भी जागरूक होकर इसे प्रशासन की जानकारी में ले आएँ तो बात बन जाएगी और मिलावटिए सीखचों के पीछे हो जाएंगे। सबके लिए यह जानना जरूरी है कि पीसे मसालों से लेकर आटा और चाय पत्ती तथा कॉफी में मिलावट और वह भी सेहत से दुश्मनी निकालने वाली संभव है। यदि वक्त रहते उपभोक्ता नहीं संभले तो हालात गंभीर हो सकते हैं।

सरकारी उपायों के तहत खाद्य विभाग के अफसरों और अमले को इस बारे में बाकायदा ट्रेनिंग देकर मुस्तैद किया जा रहा है। लेकिन उपभोक्ता जो इन सारी चीजों का इस्तेमाल रोज़मर्रा कर रहे हैं, अपने घर पर छोटे से टेस्ट से असलियत जाँच कर तत्काल यह जानकारी प्रशासन को दे सकते हैं। उपभोक्ताओं की इस सजगता से प्रशासनिक अमले की कार्रवाई की पड़ताल भी हो सकेगी और किसी कोताही की सूरत में यह अमला भी कार्रवाई की ज़द से आ जाएगा।

हल्दी में लकड़ी बुरादा, मिर्च में ईंट चूरा

इस जानकारी से चौंकने की बजाय सतर्क होना जरूरी है कि पीसी हल्दी में लकड़ी का रंगीन बुरादा, चाक पाउडर या पीला साबुन और पत्थर का पाउडर हो सकता है। सेहत पर इसका दुष्प्रभाव कोई भी अच्छे से जान सकता है। यही अंदेशा पीसी मिर्च को लेकर भी हो सकता है जबकि इसमें ईंट पाउडर, नमक पाउडर या फिर टैल्कम पाउडर तक मिलाया जा सकता है।

घरेलू जाँच

हल्दी में मेटानिल येलो का पता लगाने के लिए टेस्ट ट्यूब में एक चम्मच हल्दी पाउडर डाल कर उसमें कुछ बूंदें सांद्रित हाइड्रोक्लोरिक एसिड मिलाने पर तत्काल सच्चाई सामने आएगी। इस घोल का रंग यदि तुरंत गुलाबी हो जाए और पानी में घुलकर यह रंग गायब हो जाए तो हल्दी शुद्ध होगी। लेकिन यह रंग गायब न हो तो यह माना जाएगा कि हल्दी में बगैर अनुमति वाला कोलतार रंग मेटानिल येलो मौजूद है।

इसी तरह हल्दी में चाक पाउडर, पीसे साबुन और पत्थर के पाउडर की पड़ताल के लिए टेस्ट ट्यूब में थोड़ा हल्दी पाउडर और पानी डालकर इसमें सांद्रित हाइड्रोक्लोरिक एसिड की कुछ बूँद मिलाने पर स्थिति साफ हो जाएगी। इस क्रिया को करने पर यदि ट्यूब में बुलबुले उठने लगें तो इसमें उपरोक्त घातक चीजों की मिलावट होना पाया जाएगा।

नकली मिर्च की जाँच

एक गिलास पानी में एक चम्मच मिर्च पाउडर डालने के बाद पानी का रंगीन होना इसमें कृत्रिम रंग की मौजूदगी दर्शा देगा। यदि इसमें ईंट पाउडर या रेत है तो वह गिलास की तली में बैठ जाएंगे। यदि गिलास में बचे अवशेष को छूने पर यह चिकना लगे तो यह साबुन या पत्थर मिले होने का इशारा करेगा। मिर्च पाउडर को इस कसौटी पर हाथ से मसलने पर ही मिलावट का पता चल जाता है।

आटा, मैदा, रवा की जाँच

इन चीजों में रेत, मिट्टी, कीड़े, जाले, कूड़ा-कचरा, गोबर और लोहे का चूरा आदि मिलाए जा सकते हैं। इसकी जाँच इन आटों को गौर से देखने पर ही हो सकती है। मिलावटी आटे की रंगत और शक्ल गौर से देखने और सूंघने पर साफ नज़र आएगी। जहाँ तक इनमें लोहे के चूरे की पड़ताल की बात है तो एक चुम्बक इसमें घुमाते ही लोहे का चूरा अलग हो जाएगा। बेसन में खेसरी आटा मिलाकर बेचा जा सकता है। इसका पता लगाने के लिए 10 ग्राम बेसन में 50 मि.ली. हाइड्रोक्लोरिक एसिड डालकर इसे 15 मिनट तक उबलते पानी पर रखें तो खेसरी आटे की बेसन में मिलावट होने पर इसका रंग गुलाबी हो जाएगा। यदि बेसन में कोई मेटानिल येलो मिलाया गया है तो इसमें हाइड्रोक्लोरिक एसिड डालने के बाद और बगैर उबलते पानी पर रखे भी इसका रंग तुरंत गुलाबी हो जाएगा।

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Friday, November 27, 2009

मप्र में सस्ते गेहूँ, चावल का विक्रय

जिलों को तीन महीने का आवंटन
प्रदेश में ओपन मार्केट सेल स्कीम के तहत केन्द्र द्वारा प्रदाय किए गए गेहूँ और चावल का जिलों को आवंटन जारी कर दिया गया है। इस सिलसिले में तीन महीनों के लिए कुल 53 हजार 885 मे. टन गेहूँ और 351 मे. टन चावल का आवंटन दिया गया है।सस्ती दरों पर यह खाद्यान्न मध्यप्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के जरिए विभिन्न जिलों में विक्रय के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। कलेक्टरों को भेजे निर्देश में कहा गया है कि इस गेहूँ और चावल को आम उपभोक्ताओं के साथ ही शैक्षणिक संस्थाओं, अनुसूचित जाति एवं जनजाति तथा महिला छात्रावासों को भी उपलब्ध कराया जा सकेगा। यह भी निर्देश दिए गए हैं कि यह खाद्यान्न सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़ी लीड समितियों या सहकारी समितियों को किसी भी सूरत में नहीं बेचा जाए।
सस्ता गेहूँ, चावल जिन उपभोक्ताओं को बेचा जाएगा उनका नाम, पता और दस्तखत रजिस्टर में दर्ज होगा। कलेक्टरों को संबंधित संस्थाओं और उपभोक्ताओं को चिन्हित करने तथा खाद्यान्न का उठाव करवा कर मांग के मुताबिक इस खाद्यान्न का विक्रय करने के लिए कहा गया है। खाद्यान्न कम या ज्यादा होने पर तत्काल मांग और समर्पण की कार्रवाई के भी निर्देश दिए गए हैं।

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Wednesday, November 11, 2009

अब सुधरेगी सार्वजनिक वितरण प्रणाली

Justify Fullतीन नवंबर से प्रदेश में लागू नया खाद्य नियंत्रण आदेश
Bhopal:Tuesday, November 10, 2009: प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सुधारने का जो बीड़ा राज्य सरकार ने नौ महीने पहले उठाया था, उसे मुकम्मल अंजाम तक पहुँचा दिया गया है। इस सिलसिले में 18 साल पुराने खाद्य और वितरण नियंत्रण आदेश में व्यापक बदलाव कर इसे तीन नवंबर 2009 से पूरे प्रदेश में लागू कर दिया गया है और इसका राजपत्र में प्रकाशन हो गया है।
नए आदेश की 50 हजार प्रतियाँ छपवाई जा रही हैं। प्रत्येक जिले को एक हजार कॉपी सुपुर्द की जाएंगी ताकि आम लोग गरीबों के हित से जुड़े इस अत्यंत महत्वपूर्ण सिस्टम में किए गए सार्थक बदलावों से भलीभांति अवगत हो सकें।
कोई नौ महीने पहले मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की मंशा के मुताबिक प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली में भारी बदलाव लाए जाने की रणनीति पर काम शुरू किया गया था। इसके लिए बाकायदा केबिनेट की एक सब कमेटी बनाई गई थी।
इसमें खाद्य आपूर्ति राज्य मंत्री श्री पारसचंद्र जैन की अध्यक्षता में सहकारिता मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन, कृषि मंत्री डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया और सामाजिक कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती रंजना बघेल शामिल किए गए थे।
भारतीय प्रशासनिक सेवा के आधा दर्जन सीनियर अफसरों ने खाद्य विभाग के प्रमुख सचिव श्री अशोक दास के नेतृत्व में इन मंत्रियों के सुझावों के मुताबिक लगातार चिंतन, सर्वे, पर्यवेक्षण और नीति निर्धारण की कार्रवाई की।
केबिनेट सब कमेटी की इस दौरान एक दर्जन से ज्यादा बैठकें हुई। खाद्य आपूर्ति राज्य मंत्री श्री पारसचंद्र जैन ने प्रस्ताव तैयारी के हर चरण की निरंतर समीक्षा की।
उन्होंने सहकारिता मंत्री श्री बिसेन के साथ खाद्य और सहकारिता विभागों की अलग से कई बैठकें कर इनके जरिए होने वाली कार्रवाई के लिए दोनों में तालमेल कायम कराया। कई व्यावहारिक दिक्कतों के उपयुक्त और ठोस समाधान ढुंढ़कर अमल का रास्ता साफ किया गया। राज्य सरकार इस काम में देरी नहीं चाहती थी इसलिए कुछ वित्तीय प्रावधानों पर भी जल्द सहमति बन गई।
राज्य सरकार की मंशा है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार के इस नए आदेश से प्रदेश के नागरिक भलीभांति परिचित हों ताकि इस व्यवस्था में उनकी जागरूक और सक्रिय भूमिका सुनिश्चित हो सके। इसलिए आदेश के 3 नवंबर को राजपत्र में प्रकाशित होने के बाद इसकी 50 हजार प्रतियाँ एक पुस्तिका की शक्ल में तैयार कराई जा रही हैं। हर जिले को एक हजार प्रतियाँ भेज कर लोगों के सहज अवलोकन की व्यवस्था की जा रही है। आदेश के प्रावधानों का विभिन्न माध्यमों के जरिए सभी जिलों में व्यापक प्रचार भी होगा।
नए आदेश में उचित मूल्य दुकानों, राशनकार्डों, लीड समितियों आदि से संबंधित व्यवस्थाओं के संचालन में भारी बदलाव कर इसे ज्यादा सार्थक, प्रभावी और जवाबदेह बनाया गया है। खामियों को लेकर अनेक दंडात्मक प्रावधान किए गए हैं और समूची कार्रवाई की भोपाल में केन्द्रीय समीक्षा और निगरानी की ऑल लाइन व्यवस्था की गई है।

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