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Friday, May 21, 2010

पेट्रोलियम पदार्थ तथा अन्य ईधन वस्तु एवं सेवाकर के दायरे से बाहर

वित्त एवं वाणिज्यिक कर मंत्री श्री राघवजी ने केन्द्र सरकार से आग्रह किया है कि न केवल पेट्रोलियम पदार्थ बल्कि अन्य ईधन भी वस्तु एवं सेवाकर के दायरे से बाहर होना चाहिए। छोटे निर्माताओं तथा व्यवसायों को केन्द्रीय वस्तु एवं सेवाकर (सीजीएसटी) के कर आधार से बाहर रखा जाना चाहिए। श्री राघवजी ने यह सुझाव आज यहां राज्यों के वित्त मंत्रियों की सशक्त समिति की बैठक में दिया।

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Wednesday, March 24, 2010

बीस सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन में मप्र की स्थिति बेहतर हुई

वित्त मंत्री पेंशनर्स कल्याण बोर्ड की नियमित बैठकें बुलाने के निर्देश
बीस सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश की स्थिति में पिछले वर्ष की तुलना में अच्छा सुधार आया है। पिछले वर्ष इस कार्यक्रम के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश का देश में सत्रहवा स्थान था जो इस वर्ष ग्यारहवां हो गया है शीघ्र ही इसके नौवें स्थान पर पहुँच जाने की आशा है। 

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Friday, December 25, 2009

वाणिज्यिक कर निर्धारण प्रकरणों की अवधि बढ़ाकर 30 अप्रैल की

पूर्व वर्ष 2006-07 के प्रकरणों के लिए अवधि छह माह बढ़ाई
राज्य शासन ने वाणिज्यिक कर के लिए वर्ष 2007-08 के लंबित प्रकरणों में निर्धारण (असेसमेन्ट) की अवधि को बढ़ाकर 30 अप्रैल, 2010 कर दिया है। यह अवधि 31 दिसम्बर, 2009 को समाप्त हो रही थी। व्यापारियों के प्रतिनिधि मण्डल ने वित्त एवं वाणिज्यिक कर मंत्री श्री राघवजी से भेंट कर इस अवधि को बढ़ाने का आग्रह किया था।पूर्व वर्ष 2006-07 के प्रकरणों के लिए अवधि छह माह बढ़ाई गयी थी। इस अवधि के बड़ी संख्या में प्रकरण लंबित है। इस साल लोकसभा, नगरीय निकायों के सिलसिले में अधिकारी व्यस्त रहे और अब पंचायत चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। साथ ही 31 मार्च तक वसूली अभियान भी चल रहा है। इन तथ्यों के मद्देनजर निर्धारण अवधि को बढ़ाया गया है।

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Friday, November 13, 2009

आँकडों की सटीकता ही प्रभावी योजना का मूलमंत्र

मानव विकास योजना पर सेमीनार का शुभारंभ
राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर योजनाएं बनाने संकलित किये जाने वाले आँकडों में फर्क दूर करने के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करने के उद्देश्य से आज यहाँ राज्य स्तरीय सेमीनार सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। 
इसमें कृषि एवं संबद्ध विकास विभागों के मैदानी अधिकारियों ने वर्तमान आँकड़ा संकलन व्यवस्था की कमियों तथा उन्हें दूर करने के लिए गहन मंथन किया। इसका आयोजन आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग द्वारा राज्य योजना आयोग के सहयोग से किया गया था।
सेमीनार का शुभारंभ करते हुए योजना मंत्री श्री राघवजी ने कहा कि आँकड़ों की सटीकता प्रभावी योजना निर्माण का मूलमंत्र है। आँकडों में फर्क तथा ओवरलेपिंग के चलते मानव विकास की योजनाएं प्रभावी रूप से नहीं बन पातीं। अनेक स्रोतों से आँकड़ो में फर्क होता है। 
इसके लिए निर्धारित प्रारूपों का वैज्ञानिक रूप सें वर्तमान संदर्भ में विश्लेषण कर उनमें एक रूपता बनाने से इस समस्या का समाधान हो सकता है। सभी योजनाएं मानव विकास पर केन्द्रित होती है और किसी भी कारण से इनकी असफलता का मानव पर विपरीत प्रभाव पडता है। 
साथ ही उपलब्ध आँकड़ो को लगातार अद्यतन करते रहना चाहिए। उन्होंने आशा व्यक्त की इस कार्यशाला से आँकड़ो के संकलन में व्याप्त विसंगतियां दूर करने मे मद्द मिलेगी, जिससे योजनाएं और अधिक सार्थक रूप ले सकेंगी।
प्रमुख सचिव, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी श्रीं देवेन्द्र सिंघई ने कार्यशाला के उदे्दश्यों पर प्रकाश डालते हुये कहा कि इसमें कृषि और छह अन्य संबद्ध विभागों के मैदानी अधिकारी भाग ले रहे है। वे विभिन्न विषयों पर सामूहिक चर्चा कर आँकड़ो की विसंगतियां दूर करने का कारगर हल निकालेंगे।
योजना आयोग के सलाहकार श्री मंगेश त्यागी ने कहा कि मानव विकास सूचकांक सुधारने में आँकड़ो के सटीक ऑकड्रा संकलन की महत्वपूर्ण भूमिका है। जेण्डर विकास में भी इनका बहुत कारगर उपयोग हो सकता है।
आयुक्त, आर्थिक एवं सांख्यिकी डाँ. ओ.पी. पाठक ने स्वागत भाषण देते हुए कार्यशाला की पृष्ठ भूमिपर प्रकाश डाला। संयुक्त संचालक श्री परिहार ने आभार व्यक्त किया।

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