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Friday, February 19, 2010

मध्यप्रदेश को भारत सरकार के चार ई-गवर्नेस अवार्ड मिले

राजस्थान की राज्यपाल ने पुरस्कृत किया
मध्यप्रदेश सरकार को ई-शासन के उत्कृष्टतम क्रियान्वयन में विशेष पहल के लिए भारत सरकार द्वारा नेशनल ई-गवर्नेंस अवार्ड से नवाजा गया है। यह अवार्ड राजस्थान की राज्यपाल श्रीमती प्रभा राव ने 18 फरवरी 2010 को जयपुर में शुरू हुई दो दिवसीय 13वीं नेशनल कॉन्फ्रेन्स ऑन ई-गवर्नेंस के अवसर पर प्रदान किये। 
इस अवसर पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रधानमंत्री कार्यालय और कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन तथा संसदीय कार्य राज्यमंत्री पृथ्वी राज चव्हान, संचार और सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री सचिन पायलट मौजूद थे।

नेशनल अवार्ड फॉर ई-गवर्नेंस 2009-10 के सात श्रेणियों के ये पुरस्कर 17 संगठनों को दिए गए और एक संगठन को विशेष उल्लेख का पुरस्कार दिया गया। 18 विजेताओं में से सर्वाधिक चार अवार्ड मध्यप्रदेश के खाते में आये हैं। यह मध्यप्रदेश सरकार की बड़ी उपलब्धि है।

राजस्थान की राज्यपाल श्रीमती प्रभा राव ने नागरिकों के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन केन्द्रित सेवा वितरण के लिए मध्यप्रदेश सरकार के उपक्रम एमपीऑनलाइन को गोल्डन आईकॉन अवार्ड प्रदान किया। यह अवार्ड राज्य के आईटी विभाग व मुख्यमंत्री के सचिव और एमपी ऑनलाइन के सीईओ अनुराग जैन तथा ओएसडी आईटी विभाग अनुराग श्रीवास्तव ने प्राप्त किया। 
जबकि वन भूमि में काबिज आदिवासियों को वनाधिकार पट्टे वितरण के क्रियान्वयन के लिए मध्यप्रदेश के वन विभाग में ई-शासन में प्रौद्योगिकी के अभिनव प्रयोग के लिए गोल्डन आईकॉन अवार्ड अपर प्रधान मुख्य वनसंरक्षक आईटी, वन विभाग, मध्यप्रदेश अनिल ओबेराय ने प्राप्त किया। इसी श्रेणी में मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण भोपाल को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत इंटरनेट आधारित जीआईएस टेक्नालॉजी अभिनव प्रयोग के लिए सिल्वर आईकॉन अवार्ड मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकारण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संजय दुबे ने प्राप्त किया। शिक्षा के क्षेत्र में विशेष पुरस्कार फोकस के अंतर्गत मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग के एज्यूकेशन पोर्टल को गोल्डन आईकॉन अवार्ड से नवाजा गया है। यह अवार्ड आयुक्त राज्य शिक्षा केन्द्र मनोज झलानी ने प्राप्त किया। इसी के साथ मध्यप्रदेश सर्वाधिक चार अवार्ड हासिल करने वाला देश का पहला प्रदेश बन गया है। ये अवार्ड राजस्थान की राज्यपाल श्रीमती प्रभा राव ने प्रदान किये।

इनफारमेशन कम्यूनिकेशन टेक्नालाजी (आईसीटी) को प्रोत्साहित करने के लिए भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला प्रतिष्ठित ई-गवर्नेंस अवार्ड 2009-2010 का म.प्र. इस मर्तबा विजेता राज्य भी बना है। मध्यप्रदेश सरकार के चार विभागों को उनके कामकाज व गुण-दोष के आधार पर ई-गवर्नेंस अवार्ड मिले हैं। इसी के साथ राज्य के चार विभाग ई-गवर्नेंस के माध्यम से सुशासन प्रदान करने में अग्रणी बन गए हैं।

म.प्र. में चल रहे ई-शासन के उत्कृष्टतम कार्य को न केवल भारत सरकार के प्रशासनिक सुधार और सार्वजनिक शिकायत विभाग एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने मान्यता प्रदान की है। बल्कि उसके क्रियान्वयन में विशेष पहल को प्रोत्साहन देने के लिए ई-गवर्नेंस का प्रतिष्ठित पुरस्कार भारत सरकार के प्रशासनिक सुधार और सार्वजनिक शिकायत विभाग एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने संयुक्त रूप से प्रदान किए।

मुख्यमंत्री म.प्र. शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में प्रदेश में ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में लगातार नये-नये प्रयास और प्रयोग हो रहे है मुख्यमंत्री की मंशा है कि आमजन को सुविधायें सरलता से और तुरंत बिना किसी बाधा के कैसे मिले, इस दिशा में म.प्र. का आईटी विभाग निरंतर प्रयास कर रहा है। ई-गवर्नेंस के चार अवार्ड मिलने पर राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व आईटी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विजेता विभागों की टीम को बधाई दी है।

उल्लेखनीय है कि ई-शासन के उत्कृष्टतम कार्य को मान्यता प्रदान करने, उसके क्रियान्वयन में विशेष पहल को प्रोत्साहन देने के लिए ई-गवर्नेंस का प्रतिष्ठित पुरस्कार भारत सरकार के प्रशासनिक सुधार और सार्वजनिक शिकायत विभाग एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग संयुक्त रूप से प्रतिवर्ष प्रदान करता है।

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Tuesday, January 26, 2010

निर्माण विभाग सुनिश्चित करें ई-टेंडरिंग व्यवस्था - मुख्यमंत्री

  सचिवों एवं प्रमुख सचिवों को कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश जारी
मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने निर्माण विभागों में ई-टेंडरिंग व्यवस्था सहित निर्माण कार्यों को समय-सीमा में पूर्ण करने के लिये संबंधित सचिवों एवं प्रमुख सचिवों को कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिये हैं। 
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने मंत्रालय में लोक निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, जल संसाधन विभाग और ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान ये निर्देश दिये। इसी तरह कार्यों की गुणवत्ता के लिये मुख्य तकनीकी परीक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण बनाने के साथ ही स्वतंत्र मानीटरिंग व्यवस्था को सशक्त बनाने के निर्देश दिये गये।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रत्येक निर्माण विभाग में ई-टेंडरिंग व्यवस्था लागू करने के लिये उठाये गये कदमों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि निर्माण कार्यों में विलम्ब न हो इसके लिये टेंडर प्राप्त होने से लेकर निर्माण कार्य के देयक तैयार करने तक की प्रक्रिया में सुधार करते हुए पारदर्शिता से कार्रवाई पूरी की जाये। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने लोक निर्माण विभाग में 31 दिसम्बर को टेंडर की अंतिम तिथि के पश्चात 5 जनवरी को टेंडर एवार्ड करने के कार्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रत्येक विभाग इसी तरह समय-सीमा तय कर कार्यों का निपटारा करे।
बैठक में विभागों के सचिवों ने टेंडर प्राप्त करने के बाद निर्णय के लिये एक सप्ताह से लेकर दो सप्ताह की अवधि निर्धारित करने पर सहमति व्यक्त की। नर्मदा घाटी विकास विभाग और विश्व बैंक से संबंधित निविदाओं के लिये पृथक प्रक्रिया होने से समय-सीमा की अलग व्यवस्था निर्धारित की जायेगी।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्माण विभागों को विभिन्न कार्यों के लिये भू-अर्जन की कार्रवाई समय पर करने के भी निर्देश दिये। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने योजनाओं का कार्य पूरा होने पर आवश्यक बोर्ड लगाने एवं संबंधित विभागाध्यक्ष को इसकी समीक्षा करने के निर्देश दिये। बैठक में अपर मुख्य सचिव नर्मदा घाटी श्री ओ.पी. रावत, प्रमुख सचिव वित्त श्री जी.पी. सिंहल के अलावा विभिन्न निर्माण विभागों के प्रमुख सचिव, सचिव, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अनुराग जैन, अपर सचिव श्री विवेक अग्रवाल उपस्थित थे।

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