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Wednesday, January 20, 2010

शिक्षकों और विद्यार्थियों के अन्तर्महाविद्यालयीन भ्रमण होंगे

उच्च शिक्षा मंत्री द्वारा उत्कृष्टता संस्थान में उपाधि वितरण
उच्च शिक्षा मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने आज यहां उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान में आयोजित समारोह में विद्यार्थियों को उपाधियां वितरित की। श्री शर्मा ने अपने सम्बोधन में कहा कि उत्कृष्ट महाविद्यालयों की उत्कृष्टता से परिचित कराने के लिए सुदूर अंचलों के महाविद्यालयों के शिक्षकों और विद्यार्थियों के अन्तर्महाविद्यालयीन भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किये जाएगें।

उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि उत्कृष्ट शिक्षा संस्थानों को प्रोत्साहित किया जाएगा। शासन ने वर्तमान महाविद्यालयों में रिक्त पदों और बुनियादी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने पर विशेष ध्यान दिया है। उच्च शिक्षण संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की जरूरत बताते हुए उन्होंने कहा कि उत्कृष्टता शिक्षा संस्थान ने अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। शिक्षण संस्थाओं में भारतीय संस्कृति के प्रति विशेष वातावरण बनाने की उन्होंने आवश्यकता बताई। संस्थान में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए उच्च शिक्षा मंत्री ने संस्थान के शिक्षकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में उच्च शिक्षा के विकास के लिए शिक्षकों और विद्यार्थियों के साथ मिलकर टीम भावना से प्रयास करेंगे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रविन्द्र जैन ने कहा कि प्रदेश की शिक्षा की गुणवत्ता में निरन्तर सुधार हो रहा है।

उत्कृष्टता शिक्षा संस्थान के संचालक श्रीमती प्रमिला मैनी ने संस्थान का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उच्च शिक्षा मंत्री ने वर्ष 2008-09 के शिक्षण संत्र में विभिन्न संकायों में सर्वोत्कृष्ट विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल प्रदान किये। समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री ने वर्ष 2008 में उत्तीर्ण विद्यार्थियों को उपाधि वितरित की। उपाधि वितरण और वार्षिक स्नेह सम्मेलन के इस समारोह में संस्थान के छात्र-छात्राओं ने आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये

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Sunday, January 17, 2010

संगीत विश्वविद्यालय का कार्य क्षेत्र राष्ट्रीय बनेगा

संस्कृति मंत्री की अध्यक्षता में साधारण परिषद की बैठक सम्पन्न

संस्कृति मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा की अध्यक्षता में आज यहां स्वराज भवन में राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय ग्वालियर की साधारण परिषद की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में तय किया गया कि संगीत विश्वविद्यालय के वर्तमान कार्य क्षेत्र मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर का स्वरूप दिया जाए।
इसके लिए विश्वविद्यालय के अधिनियम में आवश्यक संधोधन की पहल की जाए। साधारण परिषद में विश्वविद्यालय के प्रस्तावित विषयों, पाठयक्रमों, संकायों, परीक्षा कार्यक्रमों, नये महाविद्यालय की सम्बद्धता, विश्वविद्यालय की डिग्री और डिप्लोमा के मान्यता सम्बंधी विषयों को अनुमोदित किया गया।

विश्वविद्यालय में संगीत, ललितकला, नृत्य, नाट्य, फिल्म, सामाजिक विज्ञान, कला एवं भाषा संकाय होंगे। सभी संकायों के अन्तर्गत एक वर्ष का साटिर्फिकेट और डिप्लोमा पाठ्यक्रम के साथ ही स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम रहेंगे।

संगीत विश्वविद्यालय में स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की परीक्षा सेमेस्टर प्रणाली के अन्तर्गत होगी। विश्वविद्यालय में गुरू शिष्य परम्परा प्रोत्साहित करने के लिए कला एवं संगीत के क्षेत्र के साधकों की सेवाएं गुरू के रूप में विश्वविद्यालय द्वारा ली जाएगी।

बैठक में बताया गया कि राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय को भारतीय विश्वविद्यालय संघ की सदस्यता प्रदान कर दी गई है। इससे विश्वविद्यालय एवं अखिल भारतीय स्तर पर खेलकूद एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में संगीत विश्वविद्यालय सम्मिलित हो सकेगा। बैठक में तय किया गया कि विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम यू.जी.सी. के पाठ्यक्रमों के अनुरूप होने चाहिये ताकि विद्यार्थियों को ज्यादा से ज्यादा अवसर प्राप्त हो सकें।

बैठक में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर चितरंजन ज्योतिषी, सचिव उच्च शिक्षा श्री आशीष उपाध्याय और साधारण परिषद के गणमान्य सदस्य उपस्थित थे।

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Sunday, January 3, 2010

सेमेस्टर पद्धति से विश्वविद्यालयों के परीक्षा परिणामों में उल्लेखनीय सुधार

 सबसे अच्छा परिणाम डा. हरीसिंह विश्वविद्यालय सागर का
प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में सेमेस्टर प्रणाली से परीक्षा परिणाम में उल्लेखनीय सुधार आया है। उच्च शिक्षा मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने सेमेस्टर पद्धति लागू होने के बाद परीक्षा परिणामों की समीक्षा की। मध्यप्रदेश में सेमेस्टर पद्धति 2008-09 से लागू की गई है।

वार्षिक परीक्षा पद्धति में सत्र 2007-08 के दौरान महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में स्नातक परीक्षा में परिणाम 55.6 प्रतिशत था जबकि सेमेस्टर प्रणाली में 2008-09 के द्वितीय सेमेस्टर में यह बढ़कर 81.12 प्रतिशत हो गया है। इसी प्रकार स्नातकोत्तर परीक्षा परिणामों में वार्षिक परीक्षा पद्धति में उत्तीर्ण प्रतिशत 64.88 प्रतिशत था जो द्वितीय सेमेस्टर में बढ़कर 80.48 प्रतिशत हो गया है।
समीक्षा में पाया गया कि वर्ष 2008-09 के द्वितीय सेमेस्टर के स्नातक उत्तीर्ण प्रतिशत में सबसे अच्छा परिणाम डा. हरीसिंह विश्वविद्यालय सागर का 85.16 प्रतिशत रहा है। विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन का उत्तीर्ण प्रतिशत 80.83, जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर का 79.12 प्रतिशत, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर का 79.65 प्रतिशत, देवी अहिल्याबाई विश्वविद्यालय इंदौर का 80.06 प्रतिशत, अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय का 71.24 प्रतिशत और बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल का उत्तीर्ण प्रतिशत 78 प्रतिशत रहा है।
समीक्षा के अनुसार स्नातकोत्तर परीक्षाओं के द्वितीय सेमेस्टर में सबसे अच्छा परिणाम 91.67प्रतिशत अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा का रहा है। सागर विश्वविद्यालय का 87.42 प्रतिशत, उज्जैन विश्वविद्यालय का 87.11 प्रतिशत, ग्वालियर विश्वद्यालय का 79.39 प्रतिशत, जबलपुर विश्वविद्यालय का 81.34 प्रतिशत, इंदौर विश्वविद्यालय का 7704 प्रतिशत, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का 7278 प्रतिशत रहा है।
उच्च शिक्षा मंत्री ने सेमेस्टर प्रणाली से परीक्षा परिणामों में आ रहे सुधार पर संतोष व्यक्त करते हुये कम प्रतिशत वाले विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में शिक्षण के गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिये हैं। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश देश का ऐसा राज्य है जहां एक साथ पूरे प्रदेश में सेमेस्टर पद्धति लागू की गई है। इस पद्धति में शैक्षणिक सत्र को दो समान हिस्सों में बाटकर विद्यार्थियों को अधिक से अधिक अकादमिक गतिविधियों में शामिल करते हुये प्रगति का सतत मूल्यांकन संभव हुआ है। इस पद्धति में आंतरिक परीक्षा के मूल्यांकन के साथ ही एक प्रोजेक्ट वर्क भी विद्यार्थियों को दिया जाता है।

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