जलाभिषेक अभियान
रतलाम जिले की जामण नदी माही नदी की सहायक नदी है। यह रतलाम नगर की जीवन रेखा है क्योंकि पचास लाख गैलन प्रतिदिन पानी इसी नदी पर बने बांध से दिया जाता है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास सामाजिक न्याय मंत्री श्री गोपाल भार्गव
दस अप्रैल को इसी नदी के संरक्षण करने और उसे पुनर्जिवित करने के कार्य का शुभारंभ करेंगे। पुर्नजीवन के बाद इस क्षेत्र के लिए जीवनदायिनी गंगा जैसा महत्व होगा। जामण नदी जैसी सैकड़ों नदियां हमारे प्रदेश में है जो उपेक्षा, अधिकाधिक शोषण और संरक्षण न होने के कारण मृतप्राय: हो गई है। आज प्रदेश में जल संकट का कारण भी यही है जामण नदी की कथा भी यही है।रतलाम की जीवनदायिनी जामण में बरसात के बाद माह अक्टूबर तक ही पानी उपलब्ध रहता है, उसके बाद सूख जाता है। बरसात के बाद जामण के इस तरह सूख जाने का प्रमुख कारण नदी में अत:सतह स्त्राव (सबसरफेस फ्लो) का समाप्त हो जाना है जो पहले नदी में उसके आस-पास के क्षेत्रों से भूजल रिसाव के रूप में वर्षभर उपलब्ध होता था। जल संसाधन विभाग की भूजल सर्वेक्षण रिपोर्ट में भी यह दर्शाया गया है कि विगत वर्षों में इस नदी के केचमेंट में भूजल स्तर में 1 से 3 मीटर तक की गिरावट दर्ज की गई है। जामण नदी के सूखने से तटीय ग्रामों में विभिन्न प्रयोजनों के लिए पानी की आपूर्ति की समस्या होने लगती है। यदि जामण की केचमेंट में मृदा संरक्षण, जल संरक्षण, भूजल संवर्धन तथा वृक्षारोपण के कार्य किए जाए तो भूजल स्तर में वृद्धि के फलस्वरूप नदी में अंत:सतह स्त्राव (सबसरफेस फ्लो) को जागृत कर जामण को पुनर्जीवित किया जा सकता है। जामण के केचमेंट में पड़ने वाले माइक्रोवाटरशेड़ों, ग्रामों का वाटर बजट भी यह दर्शाता है कि इन ग्रामों में बरसात से सरप्लस वर्षाजल उपलब्ध है, जिसे विधि कार्यों जैसे कन्टूर ट्रेन्च, नाला बंधान, चेकडेम, तालाब, परकोलेशन तालाब इत्यादि के द्वारा संरक्षित एवं संग्रहित कर भूजल संवर्धन किया जा सकता है। जामण के पुनर्जीवित होने से इसमें वर्षभर पानी के प्रवास की संभावनाएं बढ़ेगी, जिससे न केवल तटीय ग्रामों में संवहनीय आजीविका सुनिश्चित हो सकेगी अपितु धोलावाड़ बांध में वर्षभर पानी की आवक भी बनी रहेगी। इसी उद्देश्य से प्रथम चरण में जामण नदी के धोलावाड़ बांध तक के 27 कि.मी. लंबे भाग को पुनर्जीवित किए जाने की योजना है जिसका केचमेंट एरिया 183.81 वर्ग कि.मी. है। इस मार्ग में जामण नदी में 6 मुख्य नाले समा जाते है। उद्गम स्थल से लेकर धोलावाड़ा बांध तक जामण को पुनर्जीवित किए जाने वाले भाग में इसके किनारे पर स्थित 9 पंचायतों तथा इनके 29 ग्रामों धामनिया, आमलीपाड़ा, सांवलियारूण्डी, राजपूरा, सरवनीखुर्द, सागौद, पलसोड़ी, बिबड़ौद, बरबड़, रामपुरिया, बंजली, नंदलई, जामथुन, ईसरथूनी, गोपालपुरा, ताजपुरिया, धबाईपाड़ा, धोलावाड़ एवं जुलवानिया में मृदा संरक्षण, जल संरक्षण, भूजल संवर्धन तथा वृक्षारोपण के कार्य किए जाएगे, जिनका भौगोलिक क्षेत्रफल 15103 हैक्टेयर है। भूमि उपयोग के संदर्भ में इन ग्रामों की कृषि योग्य भूमि 8818 हैक्टैयर, गैर कृषि भूमि 4429 हैक्टेयर, वन भूमि 1580 हैक्टेयर तथा अन्य भूमि 1597 हैक्टेयर है। निश्चित ही जामण नदी जैसी प्रदेश की अन्य नदियों में भी यह काम होगा तो पूरा प्रदेश पानीदार होगा।
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