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Thursday, March 4, 2010

भ्रष्टाचार के प्रकरण में अधीक्षण यंत्री की गई नौकरी

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधीक्षण यंत्री  अरविंद शर्मा
राज्य सरकार ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधीक्षण यंत्री श्री अरविंद शर्मा को कदाचरण के कारण सेवामुक्त (पदच्युत) करने का निर्णय लिया है। यह कार्रवाई न्यायालय द्वारा उन्हें भ्रष्टाचार के प्रकरण में दोषी पाये जाने पर की गई है।

विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त से प्राप्त जानकारी के अनुसार उज्जैन जिले में गंभीर नदी पर बांध बनाये जाने के दौरान निविदा क्रमांक-27 के अंतर्गत कराये गये पिचिंग कार्य में निविदा राशि 7.20 लाख रुपये के विरुद्ध 16 लाख रुपये का भुगतान ठेकेदार को किया गया और ठेकेदार को 8.50 लाख रुपये का अनुचित लाभ पहुंचाया। ठेकेदार द्वारा सीमेन्ट की खाली बोरियां वापिस नहीं की गईं जिसके कारण 25 हजार 630 रुपये का अनुचित भुगतान और डिसिल्टिंग कार्य के लिये ठेकेदार को 24.51 लाख रुपये का अनुचित भुगतान किया गया।

विवेचना में श्री एम.के कराहलकर, ए.ई. श्री अरविंद शर्मा एवं अन्य गंभीर परियोजना, जिला-उज्जैन के विरुद्ध अरोप प्रमाणित पाये जाने से प्रकरण में अभियोजन स्वीकृति प्राप्त करके दिनांक 18 नवम्बर, 2003 को चालान विशेष न्यायालय उज्जैन में प्रस्तुत किया गया।

विशेष न्यायालय उज्जैन के पीठासीन अधिकारी श्री एस.के. शर्मा ने निर्णय देकर दिनांक 21 अगस्त, 09 से आरोपी श्री अरविन्द शर्मा तत्कालीन कार्यपालन यंत्री को धारा 13 (1) डी, 13 (2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-1988 के अंतर्गत एक वर्ष का सश्रम कारावास एवं सात हजार रुपये अर्थदण्ड से दण्डित किया है।

मध्यप्रदेश शासन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग भोपाल द्वारा श्री अरविन्द शर्मा, अधीक्षण यंत्री का कृत्य शासकीय सेवक के अनुरूप नहीं होने से तथा मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 के उप नियम (1) एवं (3) के अंतर्गत कदाचरण की परिधि में आने से श्री अरविन्द शर्मा को पदच्युत (डिसमिस) किये जाने की दीर्घ शास्ति से दण्डित करने का निर्णय लिया गया।

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