बंद पड़ी नलजल योजनाओं के व्यापक सर्वे कराने के निर्देश
प्रदेश के नागरिकों को अब 55 लीटर प्रतिदिन के मानदंड से पानी दिया जायेगा। प्रदेश के जिन नलकूपों का जल स्तर नीचे गिर गया है वहां पर नये नलकूपों का खनन किया जायेगा साथ ही मार्च अंत तक प्रदेश के सभी साढ़े चार लाख हैण्डपंपों का भौतिक सत्यापन कराया जायेगा।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्री बिसेन ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिये कि नये मानदंडों के अनुरूप 55 लीटर पानी देने के लिये ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक प्रबंध किये जाये। उन्होंने आगामी ग्रीष्म ऋतु को ध्यान में रखते हुये ऐसे नलकूप जिनका जल स्तर नीचे चला गया है वहां पर पेयजल के वैकल्पिक स्त्रोत स्थापित करने के निर्देश दिये।
उन्होंने बैठक में यह भी कहा कि जल प्रदाय के लिये जिन गाँवों में पानी की टंकियां स्वीकृत की गई हैं और उनका निर्माण अभी तक नहीं हुआ है वहां स्टील की टंकियों को रखकर पेयजल का वितरण किया जाये। बैठक में श्री बिसेन ने इस बात पर जोर दिया कि अब विभाग को सतही जल योजनाओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस तेजी से भूजल स्तर गिर रहा है उसके मद्देनजर अब यह जरूरी है कि हम सतही जल पर आधारित योजनाओं का निर्माण करें और लोगों के लिये स्थाई रूप से जल की व्यवस्था हो सके। उन्होंने बताया कि इस विचार को सबसे पहले विभाग मालवा अंचल के कुछ जिलों में लागू करने जा रहा है। जहां जल का अधिक संकट है।
बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ने बिजली का बिल न भरने पर पंचायतों की बंद पड़ी नलजल योजनाओं का एक व्यापक सर्वे कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जब वे जिलों के दौरों पर जायेंगे तब वे ऐसी नलजल योजनाओं की भी समीक्षा करेंगे।
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