प्रदेशभर में स्किल्ड मेन पावर की जानकारी संकलित करने का निर्णय
प्रदेश के तेजी से बदल रहे औद्योगिक परिदृश्य में विकास की बेहतर संभावनाएं निहित हैं। उद्योगों की आवश्यकताएं सहजता से पूरी हों, उन्हें सुविधाएं उपलब्ध हो सकें और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर सुलभ हो सकें। इस दिशा में राज्य शासन द्वारा निरन्तर प्रयास किये जा रहे हैं।
गौरतलब है कि मंथन-2009 के अंतर्गत गठित कार्यसमूहों की वाणिज्य, उद्योग और रोजगार विभाग से संबंधित सिफारिशों को मंत्रिपरिषद के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। मंत्रिपरिषद द्वारा लिये गये निर्णय के अनुसार प्रदेश में स्थापित होने वाले उद्योगों में स्थानीय व्यक्तियों को अधिक से अधिक रोजगार मिल सके और निवेशकों को कुशल श्रमिकों की उपलब्धता सरलतापूर्वक हो सके, इसके लिये वृहद औद्योगिक परियोजनाओं द्वारा स्वयं आई.टी.आई. की स्थापना की जाये ताकि उनकी आवश्यकता और मांग के अनुरूप प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित कर रोजगार प्रदान किया जा सके।उद्योग मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा विभागीय अधिकारियों को मंत्रिपरिषद के निर्णय के अनुरूप मंथन-2009 की सिफारिशों को तेजी से क्रियान्वित करने के निर्देश दिये गये हैं। उद्योग विभाग द्वारा संबंधित शासकीय विभागों, औद्योगिक संगठनों और उद्योग समूहों की बैठक आयोजित कर इस दिशा में आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। ऐसी ही एक बैठक हाल ही में सम्पन्न हुई। ऐसी बैठकें आगे भी समय-समय पर आयोजित की जायेंगी।
इस परिप्रेक्ष्य में हुई बैठक में प्रदेशभर में स्किल्ड मेन पावर की जानकारी संकलित करने का निर्णय लिया गया है। किन उद्योगों को किस प्रकार के स्किल्ड मेन पावर की आवश्यकता है, इसकी पुख्ता जानकारी एकत्रित की जायेगी। यह कार्य मध्यप्रदेश फेडरेशन ऑफ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री को दो माह के भीतर करने के लिये निर्देशित किया गया है।
प्रदेश में ऐसी औद्योगिक इकाईयाँ मौजूद हैं जिनके द्वारा कौशल विकास के लिये प्रशिक्षण संस्थाएं संचालित की जा रही हैं। ऐसे उद्योगों में एसीसी, टाटा एक्सपोर्ट शामिल हैं। ऐसी सभी औद्योगिक इकाइयों का डाक्यूमेंटेशन किया जायेगा। इन प्रशिक्षण संस्थाओं में अन्य औद्योगिक इकाईयों के लिये प्रशिक्षण देने की संभावनाओं का परीक्षण करने के लिये संचालक प्रशिक्षण को कहा गया है। इसका उद्देश्य अन्य उद्योगों को प्रशिक्षित स्थानीय युवाओं की सेवाएं उपलब्ध कराना है।
इसके अलावा प्रदेश के आई.टी.आई. को इण्डस्ट्रीयल ट्रेनिंग सेंटर (आई.टी.सी.) के रूप में संचालित करने के लिये विभिन्न उद्योग समूहों को सौंपने की संभावनाओं का भी अध्ययन करने का निर्णय लिया गया है। ऐसे आई.टी.आई. चिन्हित किये जायेंगे जिन्हें आई.टी.सी. के रूप में संचालित किया जा सकता है। वर्तमान में पीपीपी मॉडल पर दिये गये आई.टी.आई. के संचालन के संबंध में व्यवस्था की समीक्षा की जायेगी।
अभी प्रदेश में 36 आई.टी.आई. को सेंटर ऑफ एक्सीलेंसी के रूप में संचालित किया जा रहा है। इन आई.टी.आई. के लिये अलग से पाठ्यक्रम तैयार किये गये हैं। इस पाठ्यक्रम में प्रशिक्षणार्थियों के लिये कम से कम 6 माह इंप्लांट ट्रेनिंग का प्रावधान शामिल किया गया है। औद्योगिक संगठनों को ऐसी प्रशिक्षण संस्थाओं की सूची उपलब्ध करायी जायेगी ताकि उनके माध्यम से विभिन्न उद्योग इन प्रशिक्षण संस्थाओं की सेवाओं का लाभ प्राप्त कर सकें।
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