प्रदेश में करीब 1 करोड़ 12 लाख जॉबकार्ड धारक
महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के अंतर्गत जॉबकार्ड निश्चित नीति और प्रक्रिया के तहत बनाए गए हैं। अधिनियम के अंतर्गत ग्रामीण अंचल में निवासरत पंजीकृत परिवारों को जॉबकार्ड प्रदान किए जाने की व्यवस्था है।
आय और सम्पत्ति के आधार निर्धारित नहीं किए गए हंै। राज्य में अनुसूचित जाति एवं जनजाति परिवारों की बड़ी संख्या होने और प्रदेश के भौगोलिक विस्तार एवं ग्रामीण अंचल की सामाजिक विषमताओं के परिप्रेक्ष्य में जानकारी के अभाव में जरूरतमंद परिवार रोजगार के अधिकार से वंचित नहीं हो, इस लिए आगे बढ़कर जॉबकार्ड बनाए गए हैं।
योजना के प्रभावशील होने के पूर्व ग्रामीण क्षेत्रों में वर्ष 2002-03 में ग्रामीण परिवार सर्वेक्षण की जानकारी के आधार पर जॉबकार्ड बनाने की प्रक्रिया निर्धारित की गई। इस प्रक्रिया के तहत प्रदेश में योजना के तहत सभी ग्रामीण परिवारों के लिए जॉबकार्ड बनाए गए हैं। प्रदेश में करीब 1 करोड़ 12 लाख जॉबकार्ड धारक है। इस तरह की प्रक्रिया के अनुसरण से सभी ग्रामीण परिवारों के नाम सूची में शामिल हैं, उनके भी जो संभवतः कभी भी रोजगार की मांग नहीं करेगें। इससे ऐसे लोगों के कार्ड बनाना सुनिश्चित किया गया जो रोजगार की मांग करते, भले ही वे समाज के ऐसे वर्गो से हो जिन्हें कतिपय कारणों से कार्ड बनवाने में कठिनाई हो सकती थी। इस तरह की शिकायतों की संभावना को कम करने में सहायता मिली। राज्य में जॉबकार्ड वितरण की नीति के फलस्वरूप योजना की जानकारी का व्यापक प्रचार-प्रसार हुआ है। ग्रामीण अंचल के परिवारों को रोजगार की गारंटी उपलब्ध कराई है।
योजनांतर्गत लगभग 52 लाख परिवारों ने रोजगार प्राप्त किया है। तब भी सभी ग्रामीण परिवारों के जॉबकार्ड बनने से इस तरह के समाचार प्रसारित होने की आशंका रहती है कि समृद्ध अथवा संपन्न व्यक्तियों के कार्ड बन गए हैं। इस स्थिति पर अंकुश लगाने के लिये एवं सासंदों, विधायकों, जिला पंचायत अध्यक्षों एवं जनपद पंचायत के अध्यक्षों के नाम सेे जॉबकार्ड होने के प्रकरणों के दुरूपयोग की घटनाओं के परिप्रेक्ष्य में जिलों को ऐसे वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों के जॉबकार्ड निरस्त करने के निर्देश प्रसारित किए गए हैं। पंचायत चुनाव की आदर्श आचार संहिता प्रभावशील होने के कारण उक्त कार्यवाही में विलंब हुआ है। आचार संहिता समाप्त होने के उपरांत इस पर पुनः निर्देश जारी किये जा रहे हैं।
योजना के प्रभावशील होने के पूर्व ग्रामीण क्षेत्रों में वर्ष 2002-03 में ग्रामीण परिवार सर्वेक्षण की जानकारी के आधार पर जॉबकार्ड बनाने की प्रक्रिया निर्धारित की गई। इस प्रक्रिया के तहत प्रदेश में योजना के तहत सभी ग्रामीण परिवारों के लिए जॉबकार्ड बनाए गए हैं। प्रदेश में करीब 1 करोड़ 12 लाख जॉबकार्ड धारक है। इस तरह की प्रक्रिया के अनुसरण से सभी ग्रामीण परिवारों के नाम सूची में शामिल हैं, उनके भी जो संभवतः कभी भी रोजगार की मांग नहीं करेगें। इससे ऐसे लोगों के कार्ड बनाना सुनिश्चित किया गया जो रोजगार की मांग करते, भले ही वे समाज के ऐसे वर्गो से हो जिन्हें कतिपय कारणों से कार्ड बनवाने में कठिनाई हो सकती थी। इस तरह की शिकायतों की संभावना को कम करने में सहायता मिली। राज्य में जॉबकार्ड वितरण की नीति के फलस्वरूप योजना की जानकारी का व्यापक प्रचार-प्रसार हुआ है। ग्रामीण अंचल के परिवारों को रोजगार की गारंटी उपलब्ध कराई है।
योजनांतर्गत लगभग 52 लाख परिवारों ने रोजगार प्राप्त किया है। तब भी सभी ग्रामीण परिवारों के जॉबकार्ड बनने से इस तरह के समाचार प्रसारित होने की आशंका रहती है कि समृद्ध अथवा संपन्न व्यक्तियों के कार्ड बन गए हैं। इस स्थिति पर अंकुश लगाने के लिये एवं सासंदों, विधायकों, जिला पंचायत अध्यक्षों एवं जनपद पंचायत के अध्यक्षों के नाम सेे जॉबकार्ड होने के प्रकरणों के दुरूपयोग की घटनाओं के परिप्रेक्ष्य में जिलों को ऐसे वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों के जॉबकार्ड निरस्त करने के निर्देश प्रसारित किए गए हैं। पंचायत चुनाव की आदर्श आचार संहिता प्रभावशील होने के कारण उक्त कार्यवाही में विलंब हुआ है। आचार संहिता समाप्त होने के उपरांत इस पर पुनः निर्देश जारी किये जा रहे हैं।
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